कुछ झलकियाँ पुस्तक मेले की

हर साल के तरह इस साल भी दिल्ली में पुस्तक मेला लगा हुआ है. हजारों की संख्या में पाठक देश के हर कोने से...

मेरी कहानी मेरे साथ खत्म हो जाएगी – कलाम साहब की...

हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावार पैदा... सच ही तो है न...जब तक कोई दीदावार न...

अनुरागी मन

साउथ एक्सटेंसन के एक कैफे में बैठा हुआ हूँ. समय बिताना है कुछ देर यहाँ. एक किताब बैग में रखे हुए हूँ जाने कब...

ज़िन्दगी और गुलाब

मुझे भले अच्छी कवितायें लिखनी नहीं आती और नाही मुझे खुद की कवितायें ज्यादा पसंद कभी आई हैं...लेकिन कविताओं को पढ़ता खूब हूँ मैं,...

गली क़ासिम में आकर

गली क़ासिम में आकर ,तुम्हारी ड्योढ़ी पे रुक गया हूँ मिर्ज़ा नौशा तुम्हे आवाज़ दूँ , पहले ,चली जाएँ ज़रा , परदे में उमराव...

रीडिंग लिस्ट

कभी कभी फेसबुक पर कुछ अच्छी चीज़ें ट्रेंड करने लगती हैं...जैसे कुछ दिन पहले एक ट्रेंड सा चल गया था फेसबुक पर, लोग अपने...

वे दिन

प्राग - द गोल्डन सिटी...द सिटी ऑफ़ हंड्रेड टावर्स... द सिटी ऑफ़ टियर्स एंड नाईटमेयर्स शायद हर शहर का अपना अलग इतवार होता है..अपनी अलग आवाजें,...

अपनी खिड़की से और ध्रुव गाथा : दो खूबसूरत किताब

दृढ संकल्प हटा सकता है गिरिवर को भी, धारा रेत बना देती है पत्थर को भी.पिछले महीने ही गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी की दो किताबें डाक...

सतह से उठता आदमी

मुझे लगता है की मन एक रहस्मय लोक है, उसमे अँधेरा है, अँधेरे में सीढियां हैं..सीढियां गीली हैं.सबसे नीचली सीढ़ी पानी में डूबी हुई...

मीना कुमारी – एक एहसास

मीना कुमारीमीना जी चली गईं..कहती थीं - राह देखा करेगा सदियों तक, छोड़ जाएंगे यह जहां तन्हा...और जाते हुए सचमुच सारे जहान को तन्हा...