मैं और मेरा भाँजा – १

पिछले कुछ महीनों से मेरा भांजा और मेरी बहन दिल्ली में मेरे साथ रह रहे हैं. ये समय मेरे लिए बेहद सुखद है. स्कूल की पढ़ाई के...

दुर्गा पूजा – कुछ पुरानी यादें, कुछ नयी

दुर्गा पूजा के समय मौसम को कुछ तो जरूर हो जाता है. एक अलग तरह का नास्टैल्जीआ महसूस होने लगता है. सप्तमी पूजा के आते...

इवनिंग डायरी ५ – ब्लॉगर नास्टैल्जीआ

आज से नौ साल पहले जब मैंने हिन्दी में ब्लॉग लेखन की शुरुआत की थी तब ये सोचना भी नामुमकिन था कि इस ब्लॉगिंग...

वो गर्मियों के दिन..मेरा बचपन और गुलज़ार – २

पहले के गर्मी के दिनों की बात ही कुछ और होती थी. हमारे लिए खूबसूरत मौसम होता था गर्मियों का. गर्मी परेशान तो करती...

ऑटो एक्सपो का एक दिन

दिल्ली में रहने के जो थोड़े सुख हैं उन सब में ऑटो एक्सपो में भाग लेने का सुख सबसे बढ़कर है. जो नहीं जानते...

कुछ पुरानी यादें, कुछ दोस्तों से मुलाकात

दूसरे देशों की किताबें विश्व पुस्तक मेले में शनिवार का मेरा दिन कुछ अलग तरह से शुरू हुआ. आम तौर पर मेट्रो से आता था...

बीते साल की कुछ बातें और नए साल पर की गयी...

इस साल ब्लॉग के पहले पोस्ट की शुरुआत पापा की कुछ बातों से करना चाहूँगा जो उन्होंने नए साल के मौके पर अपने फेसबुक...

घड़ी तो नहीं रही, पर वो समय भी नहीं रहा लेकिन...

इतवार की सुबह है, पता नहीं कहाँ से अचानक पुरानी बातें याद आ रही हैं. सुबह की शुरुआत रफ़ी साहब के उसी गाने से...

इवनिंग डायरी : किस्से-कहानियाँ

आज एक फिल्म देखी..तमाशा. फिल्म तो बेहतरीन है...इस साल की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक. तमाशा एक ऐसे इंसान की कहानी है जो...

उम्र चढ़ती रहेगी साल घटते रहेंगे और होती रहेगी गुफ्तगू…

मेरी ज़िन्दगी में मेरी बहनों का हमेशा से एक अलग स्थान रहा है और ख़ास कर के दो बहनों का, मोना और प्रियंका दीदी...