ऑटो एक्सपो का एक दिन

दिल्ली में रहने के जो थोड़े सुख हैं उन सब में ऑटो एक्सपो में भाग लेने का सुख सबसे बढ़कर है. जो नहीं जानते उनके लिए बता दूँ कि ऑटो एक्सपो हर दो साल पर लगने वाला एक मेला है जिसमें कारों की प्रदर्शनी लगाईं जाती है. दो बार से ये ऑटो एक्सपो ग्रेटर नॉएडा के एक्सपो मार्ट में लगाया जा रहा है. उसके पहले ये हर साल प्रगति मैदान में लगता आया था. जब तक प्रगति मैदान में प्रदर्शनी लगती थी, कोई दिक्कत नहीं होती थी. हर कुछ एकदम व्यवस्थित. लेकिन पिछले दो बार से जाने किस वजह से ऑटो एक्सपो को ग्रेटर नॉएडा स्थित एक्सपो मार्ट ले जाया गया. सब कुछ उधर एकदम अव्यवस्थित सा लगा मुझे. इस साल हालांकि पिछले साल की बहुत कमियों को दूर किया गया था लेकिन फिर भी व्यवस्थाओं में काफी कमियां दिखीं. लेकिन कमी चाहे जितनी भी हो व्यवस्थाओं में, अगर आपको गाड़ियों के प्रति लगाव है तो इन बातों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.

मेरे लिए इस ऑटो एक्सपो के कुछ ख़ास आकर्षण थे. सबसे पहला तो फोर्ड की मस्तंग का भारत में लांच होना. जब से गाड़ियों से लगाव हुआ है तब से ही मस्तंग के प्रति दीवानगी रही है. संयोग भी ऐसा कि हॉल में घुसते ही सबसे पहले फोर्ड के हॉल पर ही नज़र गयी. फोर्ड के पेवेलियन में मस्तंग को देखना किसी सुख से कम नहीं था. दिल तो काफी किया कि पास जाकर देखूं, गाड़ी के इंटीरियर को करीब से देख सकूँ. लेकिन इसकी इजाज़त नहीं थी. फोर्ड मस्तंग की लॉन्चिंग भी एकदम ग्रैंड तरीके से की गई थी . मस्तंग को भारत में लॉन्च  करना फोर्ड के लिए एक बड़ा कदम था. मस्तंग के साथ ही अमेरिकन मसल की पहली एंट्री हुई है भारत के मार्केट में. मस्तंग के ही बगल में डिस्प्ले पर लगी थी फोर्ड फिगो एस्पायर. अभी कुछ महीने पहले ही हमनें ये गाड़ी खरीदी है. ऐसे में एस्पायर को सेंटरस्टेज पर देखना भी किसी सुख से कम नहीं था. फोर्ड मस्तंग के अलावा ठीक उसके आगे के हॉल में शेवरले की गाड़ियाँ प्रदर्शित की जा रही थीं. शेवरले की गाड़ियों में मेरी ज़रा भी दिलचस्पी नहीं रही है कभी.हाँ उनकी पुरानी गाड़ियों की बात ही कुछ और थी, लेकिन भारत में बिक रही  उनकी सभी नयी गाड़ियों के लुक ने मुझे कभी आकर्षित नहीं किया. ऑटो एक्सपो में शेवरले के पेवेलियन में मैं बस दो गाड़ियाँ देखने गया था. एक जो बचपन से मेरी पसंदीदा कारों की श्रेणी में रही है, कोर्वेट. और दूसरी शेवेरले कैमरो. शेवरले के पेवेलियन से ज्यादा आकर्षित मुझे हुंडई ने किया. खासकर 2025 ने. कमाल का इनोवेशन किया है हुंडई ने. हुंडई की एक और पेशकश जेनेसिस जी90 ने भी दिल जीत लिया. लगा कि हाँ हुंडई भी अब मर्सिडीज और जैगुआर को टक्कर दे सकती है.

हुंडई लेकिन भले उन गाड़ियों को टक्कर दे या तो मात भी दे दे, लेकिन भारत में कोई भी कार कंपनी मारुती सुजुकी को मात नहीं दे  सकता. कम से कम अभी तो नहीं. चाहे वो छोटी कारें हो या 4-मीटर सब कॉम्पैक्ट सिडान.. मारुती बहुत आगे है. वो भी ऐसे वैसे मार्जिन से नहीं बल्कि इतने ज्यादा मार्जिन से कि आने वाले कुछ सालों में ये गैप भर पाना दूसरी  कंपनियों के लिए नामुमकिन है. लेकिन मारुती सिर्फ नंबर एक पर ही खुश नहीं है, वो इस नंबर एक की पोजीशन को बरक़रार रखने के लिए काफी मेहनत कर रही है. मारुती ब्रेजा जो इस ऑटो एक्सपो में लांच हुई वो तो यही कहानी कहती है. मारुती ब्रेजा कॉम्पैक्ट एसयूवी की  श्रेणी में लांच हो रही है, एक ऐसी श्रेणी जिसमें अब तक मारुती की कोई गाड़ी नहीं थी. लेकिन ब्रेजा ने जैसे इस ऑटो एक्सपो में सबका ध्यान आकर्षित किया उससे साफ़ जाहिर है कि शायद जल्द ही मारुती इस श्रेणी में भी सबसे आगे बढ़ जाए.

अपने ही देश की कार कंपनी टाटा मोटर्स ने इस साल बहुत बड़े पैमाने पर अपना पेवेलियन बना रखा था. ऐसा लग रहा था जैसे पूरे एक हॉल पर वो कब्ज़ा जमाए बैठा है और साइड में मर्सिडीज, रेनो और फोल्क्स्वगें चुपचाप दुबके बैठे हैं. मैं टाटा मोटर्स के किसी भी गाड़ियों का कभी फैन नहीं रहा. परफोर्मेंस की बात नहीं करूँगा, लेकिन डिजाइन के मामले में अगर आप मेरी राय लें तो मुझे उनकी सभी गाड़ियाँ बेहद ख़राब लगती हैं. एकदम मोनोटोनस. हर गाड़ियाँ एक ही डिजाइन का एक्सटेंशन. लेकिन इस साल ऑटो एक्सपो में टाटा मोटर्स ने मुझे चौंका दिया. मेरे एक्सपेक्टेशन से कहीं बेहतर गाड़ियाँ लांच की टाटा मोटर्स ने. फिर वो स्टाइलिश हेक्सा हो या फिर काईट 5 या टाटा इंडिका को रिप्लेस करने के इरादे से उतारी गयी गाड़ी जीका. टाटा मोटर्स के अलावा जिस एक ब्रांड ने और मुझे चौंकाया और दिल भी जीता वो थी दुनिया की सबसे बड़ी कार कंपनी टोयोटा. टोयोटा की बेहद सफल कार इनोवा, मुझे कभी पसंद नहीं आई. असल में मुझे नफरत है इसकी लुक से. लेकिन इस साल के ऑटो एक्सपो में टोयोटा ने इनोवा को गज़ब का मेकओवर दिया है और एक नए नाम के साथ उसे बाजार में उतारा है. टोयोटा क्रेस्ता. फोर्ड मस्तंग के अलावा एक और गाड़ी जिसकी भारत में लांच होने की कब से ख़बरें आ रही थी, आख़िरकार टोयोटा ने उसे लांच कर ही दिया. टोयोटा प्रिउस, जो कि एक हाइब्रिड कार है और विश्व भर में काफी बिकने वाली गाड़ियों में से एक है.

इस ऑटो एक्सपो का एक और आकर्षण मेरे लिए था “जीप” ब्रांड का भारतीय बाजारों में प्रवेश. जीप से आप हमारे सड़कों पर चल रहे पुराने जीप से कन्फ्यूज मत हो जाइयेगा, ये वो जीप बिलकुल नहीं बल्कि प्रीमियम एसयुवी के क्षेत्र में ये एक आइकोनिक ब्रांड है. जीप की ऑफ़ रोड गाड़ियाँ मुझे पसंद आती थीं. जीप रैंगलर को देखना ऑटो एक्सपो में काफी सुखद रहा.

इस ऑटो एक्सपो में वैसे टाटा मोटर्स हो या मारुती या फोर्ड के पेवेलियन हो या फिर जीप और टोयोटा के भी पेवेलियन हो.. इनमें गाड़ियों को देखने की ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. बस आपको भीड़ से निपटना था. लेकिन खासकर तीन ब्रांड ऐसे थे जहाँ गाड़ियाँ देखने के लिए आपको आधे से लेकर एक घंटे तक लाइन में खड़े होकर इंतजार करना पड़ा था. इनमें बीएमडब्लू, ऑडी और मर्सिडीज की गाड़ियाँ थी. ऑडी और बीएमडब्लू अपने पवेलियन में सभी को प्रवेश नहीं दे रहे थे. उन्होंने एक कतार बनाई थी  और एक बार में अपने पेवेलियन में दस से पंद्रह लोगों को ही जाने की  इजाज़त दे रहे थे फिर जब वे वहां से हट रहे थे तब ही अगले दस को अन्दर जाने दिया जा रहा था. इस वजह से भी इन दोनों गाड़ियों के पेवेलियन में बस घुसने के लिए मुझे लाइन में काफी इंतजार करना पड़ा. बीएमडब्लू में करीब 20 मिनट और ऑडी में करीब 40 मिनट. लोग इरिटेट भी हो जा रहे थे कतारों में खड़े खड़े लेकिन मुझे ये सिस्टम बहुत ज्यादा पसंद आता है हर बार. ठीक है, आपको आधे पौन घंटे इंतजार करना पड़ा कतार में लेकिन जब आप गाड़ी को इत्मिनान से देख पाते हैं, अन्दर के इंटीरियर को नज़दीक से देखते हैं, स्पेसिफिकेशन और फीचर्स इत्मिनान से पढ़ते हैं तो बड़ा संतोष सा आता है मन में. तब लाइन में उतनी देर लगना अखरता भी नहीं. इस बार भी सबसे अच्छी तरह जिन ब्रांड्स की  गाड़ी देख पाया था वो बी.एम.डब्लू और ऑडी ही की गाड़ियाँ थीं. हालाँकि ऑडी से बड़ी निराशा हाथ लगी. मैं ये सोच कर गया था ऑडी की बहुचर्चित गाड़ी ऑडी सिक्यूरिटी a8 को नज़दीक से देखने का मौका मिलेगा. लेकिन ये ऑडी के पेवेलियन में दिखी ही नहीं. बाद में पता चला कि इसे पेवेलियन के पीछे बस कुछ ख़ास दर्शकों के लिए लगाया गया था. मर्सिडीज में भी लोग कतार में लगे थे लेकिन वहां भीड़ इतनी अनियंत्रित हो गयी थीं कि गाड़ियों को देख पाना लगभग असंभव सा हो गया था. मर्सिडीज के अधिकारी भी भीड़ पर वैसा नियंत्रण नहीं कर पाए थे जितनी ऑडी और बीएमडब्लू के अधिकारियों ने कर रखा था.

कुछ गाड़ियों ने तो सच में होश उड़ा दिए थे चाहे वो अपनी फोर्ड मस्तंग हो, मर्सिडीज की S500 हो या Maybach.ऑडी की Prologue हो या All Road Quattro. बीएमडब्लू की i8 हो या जैगुआर की XE. रेंज रोवर हो या Izsu Dmax. टोयोटा की Mirai हो या हौंडा की नयी Accord. हुंडई की N2025 हो Genesis…सभी गाड़ियों ने दिल जीता. वैसे तो इन प्रीमियम गाड़ियों के श्रेणी में हुंडई ने भी अपनी नयी Genesis लांच की है लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि वे टिक पाते हैं या नहीं इस श्रेणी में. प्रीमियम लक्जरी में आज भी मर्सिडीज का एकछत्र राज चलता है, और दूसरे नंबर पर हमेशा जैगुआर, बीएमडब्लू और ऑडी में भिंडत होती रहती है. इस ऑटो एक्सपो में रेसिंग गाड़ियाँ, कांसेप्ट और हाइब्रिड गाड़ियों को देखना भी मुझे खूब पसंद आया.

इस ऑटो एक्सपो में लेकिन जिस एक बात से दिल काफी दुखा, वो थी विंटेज गाड़ियों की प्रदर्शनी. विंटेज गाड़ियाँ हॉल नंबर सोलह में थी जो एक्सपो मार्ट में सबसे आखिरी कोने में था. एकदम एक कोने में वो हॉल उपेक्षित  सा पड़ा था. लोगों की भीड़ भी ना के बराबर थी वहां. गाड़ियों के रख रखाव में भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा था. जहाँ आज की नयी गाड़ियों को एकदम चकाचक लाइट में रखा गया था, हर पल वहां कोई न कोई था जो धूल का एक कण ना होने के बावजूद गाड़ियों को पोछे ही  जा रहा था. लेकिन इन गाड़ियों पर लगी धूल को साफ़ करने वाला भी कोई नहीं था. वहां वे गाड़ियाँ तमाम लाइमलाइट में थी , मीडिया से लेकर हर बड़े लोग मौजूद लेकिन इन गाड़ियों को किसी ने भी कवरेज नहीं दिया. हर साल ऐसा ही सलूक किया जाता है इन गाड़ियों के साथ. मैं ख़ास तौर पर विंटेज कारों को ही देखने आता हूँ. इस बार वैसे विंटेज गाड़ियों में भी कुछ रेगुलर गाड़ियाँ जो लगती हैं वो नहीं थी. कैडिलैक या रौल्स रॉयस के विंटेज कलेक्शन  देखने को नहीं मिलें इस बार. विंटेज गाड़ियाँ HMCI के सौजन्य से लगाईं जाती हैं. उन्हें हर बार दिल से धन्यवाद देता हूँ ऐसी गाड़ियों को यहाँ प्रदर्शित करने के लिए. विंटेज गाड़ियों के सेक्शन  के पास ही एक बॉलीवुड मोटर्स नाम से दिलचस्प स्टाल था जहाँ बॉलीवुड फिल्मों में इस्तेमाल की जाने वाली कुछ गाड़ियाँ और बाइक डिस्प्ले पर लगाई गयी थीं.

ऑटो एक्सपो में एक बात बड़ी चुभती है. नफरत भी होती है उससे. कारों के साथ खड़ी मुस्कराती खूबसूरत मॉडलों को लोग ऐसे घूरते हैं जैसे वो किसी दूसरे ग्रह की प्राणी हों. उनपर अक्सर लोग कमेन्ट भी कर देते हैं. ये बात बहुत बुरी लगती है. कुछ लोग तो मॉडल्स के साथ अपनी सेल्फी भी लेते दिख जाते हैं. वे गाड़ियों की कम और मॉडलों की तस्वीरें ज्यादा लेते हैं. गुस्सा आता है ऐसे लोगों पर. कुछ ऐसे लोग भी होते हैं एक्सपो में जिन्हें कारों से कोई मतलब नहीं होता, वो बस अपनी फोटो हर कार के साथ खिंचवाना चाहते हैं. ऐसा करने में वो ये नहीं सोचते कि बाकी के जो लोग कारों को सही मायने में देखने और सराहने आये हैं उन्हें दिक्कत होती है.

इस ऑटो एक्सपो में फिर से एक बार दुनिया के दूसरे बड़े ब्रांड ने खुद को इस शो से दूर रखा. जिनमें से फेरारी, एश्टन मॉर्टिन, लैंबोर्घिनी, पॉर्श, मसेरती जैसी कम्पनियाँ हैं. कुछ लोगों का ये भी तर्क होता है कि इस ऑटो एक्सपो में वही गाड़ियाँ प्रदर्शित की जाती हैं जिनकी देश में बिक्री है या भारतीय मार्केट में मौजूदगी है. लेकिन इन सारे ब्रांड्स के शोरूम भारत में पहले से मौजूद हैं और इनकी कारें दिखती भी हैं सड़कों पर लेकिन फिर भी इस ऑटो एक्सपो में इनमें से किसी कार ने हिस्सा नहीं लिया. दिलीप छाबरिया की गाड़ियाँ DC मोटर्स भी इस ऑटो एक्सपो में नहीं दिखी, डीसी की कारें हर ऑटो एक्सपो में मौजूद रहती हैं. भारत की पहली सुपरकार अवन्ती को डीसी ने पिछले ऑटो एक्स्पो  में लांच किया था. उम्मीद है कि अगले साल डीसी समेत बाकी सभी टॉप कंपनियों की गाड़ियाँ दिखेंगी ऑटो एक्सपो में.

ये कुछ छोटी बड़ी कमियों के बावजूद इस साल का ऑटो एक्सपो खूब पसंद आया मुझे. आखिर कितनी गाड़ियाँ देखने को मिल जाती हैं इस एक्सपो में. अब अगले बार के ऑटो एक्सपो से खूब सारी उम्मीदें हैं. देखते हैं अगले साल कौन कौन सी गाड़ियाँ आती हैं मेले में..


ऑटो एक्सपो की एक रिपोर्ट जो दो तीन भाग में है उसे आप मेरे ब्लॉग कार की बात पर पढ़ सकते हैं. अभी कुछ दिन तक ऑटो एक्सपो की रिपोर्ट वहाँ आते रहेंगे.  – ऑटो एक्सपो रिपोर्ट – १ 

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  1. मज़ा आ गया रे ये पोस्ट पढ़ कर…मेरे जैसे अज्ञानी लोग भी ऑटो एक्सपो का आनंद ले लिए…| वैसे तुम्हारे `कार की बात' ब्लॉग पर हम पहले ही चक्कर लगा आए…| इत्ती समझ लाते कहाँ से हो, ज़रा बताना तो…:P

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