50 यादगार तस्वीरें भारतीय क्रिकेट की



कल इन्टरनेट पर किसी साईट में एक पोस्ट दिखी, भारतीय क्रिकेट के तीस ऐतिहासिक पल. मेरे पास भी बहुत सी तस्वीरें जमा थी जो कहीं कहीं से इन्टरनेट के माध्यम से जमा हुई थी, आज उन्हीं तस्वीरों को यहाँ लगा रहा हूँ…देखिये और नोस्टाल्जिया में डूब जाईये, कितने यादगार लम्हें दिए हैं क्रिकेट ने हमें…

पहली इंडियन क्रिकेट टीम जो इंग्लैंड गयी थी.  गयी थी, 1886 में

1936 में लाला अमरनाथ लॉर्ड्स में..

1952 में लाला अमरनाथ और अब्दुल कादर..दोनों कुछ साल पहले तक एक ही टीम से क्रिकेट खेलते थे.

बिशन सिंह बेदी का छक्का इंग्लैंड के खिलाफ

गुंडप्पा विश्वनाथ ने सेंचुरी बनाया था और टोनी ग्रेग ने उन्हें गोद में उठा लिया था.

भारत के सबसे बेहतरीन फील्डर में से एक एकनाथ सोलकर ने ये गज़ब का कैच लेकर एलन नॉट को आउट किया था.

अजित वाडेकर के नेतृत्व में इंग्लैंड के खिलाफ मिली पहली सीरिज जीत.

और उसी सीरिज के एक मैच के दौरान मैदान में

1971-72  में वेस्ट-इंडीज का दौरा, जब सब ने मान लिया था कि भारत वेस्ट-इंडीज के सामने टिक भी नहीं सकता, लेकिन गावस्कर उस सीरिज के हीरो रहे और सीरिज जीत दिलाई भारत को.

अंपायर के आउट देने के बावजूद गुंडप्पा विश्वनाथ ने इंग्लैंड के बॉब टेलर को फिर से बुला कर खेलवाया था

जिम्बावे के खिलाफ 17 पर पांच विकट गिर गए थे, और फिर कपिल देव बैटिंग के लिए आये. 175 रन बनाये उन्होंने और जिम्बावे को हराया था.

ये बॉल ऑफ़ द सेंचुरी भले न हो, बॉल ऑफ़ द टूर्नामेंट जरूर था…बलविंदर सिंह संधू ने गोर्डन ग्रीनिज को बारहवें बॉल में आउट किया था, सब आश्चर्यचकित रह गए थे..1983 के वर्ल्ड कप फाइनल में.

1983  का वर्ल्ड कप जब मोहिंदर अमरनाथ ने माइकल होल्डिंग का विकट लिया था और फाइनल में जीत दिलाई..

और इस एक पल ने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी थी..
और वर्ल्ड कप फाइनल जीतने के बाद लॉर्ड्स 
सबने समझा था वर्ल्ड कप में भारत की जीत फ्लूक थी, हमनें जवाब दिया बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड चैम्पिंशिप के फाइनल में पाकिस्तान को हरा के 
1985 के बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड चैम्पिंशिप में रवि शास्त्री को मिली ये ऑडी 100 गाड़ी.
1989 में सोलह साल की उम्र में सचिन का टीम में चुनाव हुआ. कपिल और अजहर के साथ सचिन 

1990 का मैनचेस्टर टेस्ट, सचिन के पहले शतक(117 नॉट आउट) के वजह से मैच बच पाया था. शतक लगाने वाले वो सबसे कम उम्र के भारतीय क्रिकेटर बने थे.

कपिल देव अपने टीममेट्स के साथ

आमिर सोहेल ने वेंकटेश प्रसाद से झगड़ा मोल लिया,  अगले ही गेंद में वेंकटेश प्रसाद ने उन्हें आउट कर दिया

1998 में शारजाह में सचिन की “डेजर्ट स्टॉर्म” पारी. अकेले ऑस्ट्रेलिया टीम को सचिन ने ध्वस्त कर दिया था.

दो क्रिकेटरों ने एक साथ मैच में डेब्यू किया था, और दोनों ने भारतीय क्रिकेट को बदल के रख दिया..द्रविड़ और गांगुली.

अपने पिता के देहांत के बाद सचिन की ये इमोशनल इनिंग, 140 नॉट आउट, केन्या के खिलाफ १९९९ वर्ल्ड कप में

पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में एक इनिंग में सभी दस विकार लेने वाले अनिल कुंबले

नैटवेस्ट सीरिज जीतने के बाद फ़्लिंटॉफ़ को जब जवाब दिया दादा ने

376 रनों की ऐतिहासिक  पारी के बाद दो महान बल्लेबाज द्रविड़ और लक्ष्मण

और हरभजन सिंह की ये हैट्रिक

2003 में जब द्रविड़ की पारी के बदौलत जीत दर्ज की थी हमने, बॉर्डर-गावस्कर ट्रोफी में.पहली बारी में शानदार डबल सेंचुरी के बाद दूसरी पारी में 80 रन बनाये थे द्रविड़ ने..शायद यही वो पारी थी जिसके बाद से द्रविड़ को द वाल बोला जाने लगा था

2004 का पाकिस्तान दौरा काफी अहम् था, पंद्रह साल बाद पाकिस्तान गयी थी इंडियन टीम. टेस्ट और वन डे दोनो में ही हमनें जीत हासिल की थी.

इस पल को कौन भूल सकता है, अनिल कुंबले लारा का विकेट लेने के बाद. टूटे जबड़े के बावजूद अनिल कुंबले ने चौदह ओवर किये थे वेस्ट इंडीज में

सहवाग की ट्रिपल सेंचुरी मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ

मैच के पहले ही ओवर में इरफ़ान पठान की हैट्रिक पाकिस्तान के खिलाफ

जब मधुमाक्कियों ने हमला कर दिया था मैच के दौरान

अनिल कुंबले की पहली सेंचुरी 2007 में इंग्लैंड के दौरे पर..सबसे मजेदार बात ये थी कि पूरे दौरे में वन-डे और टेस्ट मिला कर सिर्फ अनिल कुंबले ही शतक जमा पाए थे..

2007 ट्वेंटी ट्वेंटी वर्ल्ड कप में युवराज सिंह के छक्के

धोनी ने जब ट्वेंटी ट्वेंटी वर्ल्ड कप में जीत दिलाई

जब धोनी ने दादा से एक आखिरी बार टीम का नेतृत्व करने की गुजारिश की.

२००८ में जब कुंबले ने क्रिकेट को अलविदा कहा

और जब गांगुली ने क्रिकेट को अलविदा कहा 

सचिन वन डे में डबल सेंचुरी बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने..

अपने आइडल के पैर को छूते हुए युवराज सिंह

क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हारने के बाद

धोनी का ये ऐतिह्स्रिक छक्का

और जिस पल का इंतजार था, हमने जब वर्ल्ड कप लिया…

जब तेंदुलकर अपने आखिरी मैच में बैटिंग करने आने वाले थे..

गार्ड ऑफ़ ऑनर

और सचिन ने जब क्रिकेट को अलविदा कहा

ट्वेंटी ट्वेंटी वर्ल्ड कप और वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान धोनी 2013 का चैम्पिंसट्रोफी कैसे न जीतते. जीत के बाद का जश्न

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