उम्र चढ़ती रहेगी साल घटते रहेंगे और होती रहेगी गुफ्तगू…

मेरी ज़िन्दगी में मेरी बहनों का हमेशा से एक अलग स्थान रहा है और ख़ास कर के दो बहनों का, मोना और प्रियंका दीदी का जिन्होंने ना सिर्फ मुझे सबसे अच्छे तरीके से समझा है बल्कि मेरे अच्छे बुरे हर तरह की स्थितियों में बिना जजमेंटल हुए मेरा साथ दिया है. मोना जहाँ छोटी है वहीँ प्रियंका दीदी मुझसे बड़ी. दो दिन ख़ास तौर पर मेरे लिए सबसे खूबसूरत दिन होते हैं, एक तीन जून का दिन और दूसरा इकतीस अक्टूबर का दिन. तीन जून मोना का जन्मदिन है तो इकतीस अक्टूबर यानी आज प्रियंका दीदी का जन्मदिन. वैसे तो प्रियंका दीदी को इस बात का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं है कि आज के दिन मैं क्या करने जा रहा हूँ. एक काम जो बहुत दिनों से सोच रहा था उसे आज अनजान देने का मन बनाया है. इस एक काम के लिए दीदी ने भी कहा था कितनी बार. काम आसान तो बिलकुल नहीं है, पॉडकास्टिंग का काम है. ये काम उन लोगों के लिए भले आसान होता होगा जिनकी आवाज़ बेहतरीन है. हम जैसे ऐरे गैर आवाजों वाले लोगों के लिए ये काम बहुत मुश्किल है.

करीब दो साल पहले प्रियंका दीदी के जन्मदिन पर एक छोटी सी कोशिश की थी, फेसबुक पर डाला था एक छोटा सा पॉडकास्ट. मुझे तो बड़ी शर्म आ रही थी कि जाने लोग क्या कहेंगे. कितनी गालियाँ मिलती हैं. लेकिन आश्चर्य की बात रही कि गालियाँ बिलकुल भी नहीं मिली, अच्छी बातें ही सुनने को मिली. जाने कैसे? खैर, जो भी हो उस दिन के बाद से मन ने मेरे को एक ग्रीन सिग्नल दे दिया था कि तू अब थोड़ी और लम्बी पॉडकास्ट के लिए कोशिश कर सकता है. तो आज की मेरी यही कोशिश है. दीदी के जन्मदिन पर उसकी हलकी फुलकी बातें, और उसकी कवितायें अपनी आवाज़ में अपने ब्लॉग पर लगाना. दो साल पहले जो पॉडकास्ट दीदी के जन्मदिन पर लगाया था वो उसे बेहद पसंद आया था, तो बस यही कोशिश है कि इस साल भी उसे पसंद आये. अगर पसंद ना भी आये तो कम से कम इतना जरूर हो कि रिकॉर्डिंग इतनी बुरी भी न बने जिससे मेरे पिटे जाने का खतरा हो. दीदी के साथ ही साथ इस ब्लॉग के पाठक, दोस्त, परिवार सभी को ये झेलने लायक लगे. खतरा तो ये भी है कि कहीं मेरी आवाज़ सुनने के बाद सारे पाठक उलटे पैर वापस न भाग जाए, लेकिन चलिए ये रिस्क लेता हूँ. मुझे आप सब पर भरोसा है. ख़राब भी हुई रिकॉर्डिंग तो कोई भागेगा नहीं.

तो बिना आगे कुछ कहे सीधा आपको सूना रहा हूँ पॉडकास्ट,

डिस्क्लेमर : सारे पॉडकास्ट आपके सात मिनट एक सेकण्ड का बेशकीमती वक़्त ले लेगा. पॉडकास्ट सुनने के बाद की दिमागी हालत का जिम्मेदार ये ब्लॉगर किसी भी तरह से नहीं होगा.

अब कवितायें सुनिए –

और एक और –

और अंत में एक और –

उम्मीद करता हूँ ये ज्यादा तो नहीं हो गया होगा.  और जहाँ तक बात है दीदी की, तो उसे तो भाई की हर चीज़ पसंद आती है. अच्छी हो या बुरी हो. बहनों की ये डिफाल्ट आदत होती है न. वैसे आज दीदी के जन्मदिन पर उसके साथ रहूँगा. ये एक ऐसी चीज़ है जिसे मैं मिस करता हूँ, बहनों के जन्मदिन पर उसके साथ न रह पाना. लेकिन दिदु के जन्मदिन पर उसके साथ रहूँगा मैं तो खुश हूँ. देखता हूँ मेरे इस पॉडकास्ट के बदले वो मुझे क्या क्या पकवान बना के खिलाती है. तोहफा उसके लिए नहीं ले जा रहा हूँ, अब इससे बढ़िया तोहफा क्या होगा उसके लिए. है न? दीदी, तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हे बहुत बहुत बधाई. अभी जल्दबाजी में ये पोस्ट लिख रहा हूँ. वजह सिर्फ तुम जानती हो. तो जो भी कमी रह गयी हो यहाँ वो अगले साल पूरी कर दूंगा. फ़िलहाल के लिए….खूब चोकलेट खाती रहो, खूब मेरा सर खाती रहो और खूब सर पर चढ़कर खुद नाचती तो रहो ही साथ ही साथ अपनी छोटकी बहिनिया सब को भी ट्रेनिंग देती रहो ये सब बदमाशियां करने की.

एक कविता आज यहाँ जो दीदी की तो नहीं बल्कि हरिवंश राय बच्चन साहब की है, मेरी एक ख़राब आदत है इस कविता को हर जगह चिपकाता चलता हूँ. आज फिर से

आओ सब हिल-मिलकर गाएं,
एक खुशी का गीत
आज किसी का जन्मदिवस है,
आज किसी मन में मधुरस है,
आज किसी के घर आँगन में,
गूँजा है संगीत. आओ..
आज किसी का रूप सजाओ,
आज किसी को खूब हँसाओ,
आज किसी को घेरे बैठे,
उसके सब हित-मीत. आओ..
आज उसे सौ बार बधाई,
आज उसे सौ भेंट सुहाई,
जिसने की जीवन के ऊपर
दस बरसों की जीत. आओ..

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  1. दिदु के जन्मदिन की बहुत हार्दिक शुभकामनायें
    बहुत सुन्दर नायब तोफा है यह प्रस्तुति ..कविता भी बहुत सटीक ..

  2. इतनी तो साफ़ और बढिया आवाज है……..खामख्वाह घबरा रहे थे और इतना सुन्दर गिफ्ट पाकर तो हर बहन गदगद होगी। शुक्रिया तो हम पाठकों को करना चाहिये आपका………..उम्मीद है आपकी आवाज में आगे भी सुनने को मिलेगी आपकी बातें
    प्रणाम

  3. देखो रे भैय्यू…पिटो-विटोगे तो तुम हमसे ज़रूर खुद को इतना कमतर आंकने के लिए…बाकी तो तुमको भी ये बहुत अच्छे से पता है न कि तुम्हारे ऐसे surprising तोहफ़े मेरे लिए क्या क़ीमत रखते हैं ?
    और आज का दिन तो वैसे भी पूरा का पूरा तुमने मेरे लिए बेहद यादगार बना ही दिया है रे…।
    लव यू भैय्यू…<3

  4. देखो रे भैय्यू…पिटो-विटोगे तो तुम हमसे ज़रूर खुद को इतना कमतर आंकने के लिए…बाकी तो तुमको भी ये बहुत अच्छे से पता है न कि तुम्हारे ऐसे surprising तोहफ़े मेरे लिए क्या क़ीमत रखते हैं ?
    और आज का दिन तो वैसे भी पूरा का पूरा तुमने मेरे लिए बेहद यादगार बना ही दिया है रे…।
    लव यू भैय्यू…<3

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