इवनिंग डायरी – ४ – मेरा पहला ब्लॉग

लगता है पुरानी बातें याद दिलाने में फेसबुक अब माहिर होते जा रहा है. हाँ सच में. अब आज का ही देख लीजिये, जैसे ही फेसबुक लॉग इन किया, फेसबुक के On this day वाले फीचर ने याद दिलाया कि आज से पांच साल पहले मैंने फेसबुक पर अपने ब्लॉग का लिंक शेयर किया था. अब आप सोच रहे होंगे इसमें कौन सी बड़ी बात है? ब्लॉग का लिंक शेयर करना फेसबुक पर तो बड़ी आम सी बात है. है न आप यही सोच रहे हैं न?  लेकिन दरअसल बात ये नहीं है. पांच साल पहले मैंने अपने ‘सबसे पहले ब्लॉग’ का लिंक शेयर किया था फेसबुक पर. हाँ..सबसे पहले ब्लॉग का लिंक.

ये जो ब्लॉग आप अभी पढ़ रहे हैं “मेरी बातें”, ये मेरा पहला ब्लॉग नहीं है. इसके पहले मैंने तीन और ब्लॉग बनाये थे, लेकिन उनमे से कोई भी एक्टिव नहीं है. मैंने डिलीट नहीं किये लेकिन जाने क्यों उन ब्लॉग का अब एक्सेस नहीं है मेरे पास. शायद कोई तकनिकी वजह हो. वैसे अपने पहले ब्लॉग की बात मैंने बहुत पहले इस ब्लॉग में की थी, वही बातें आज की शाम फिर से कर लेता हूँ. बड़े अच्छी यादें हैं अपने पहले ब्लॉग को लेकर…और अच्छी यादों को तो जितनी बार भी दोहराओ अच्छा ही लगता है…है न? 🙂

बात शुरू होती है साल २००३ से. उन दिनों इन्टरनेट का बहुत गज़ब का शौक था, और नयी चीज़ें जानने और सीखने की उत्सुकता रहती थी. लगभग हर दिन आधा से एक घंटा मेरा साइबर कैफे में गुज़रता ही था. काफी नयी नयी चीज़ें इन्टरनेट पर सीखने को मिल रहे थे. उसी बीच एक सुबह किसी अख़बार में या मैगजीन के एक आर्टिकल पर नज़र गयी. वो आर्टिकल ब्लॉग के सम्बन्ध में था. ब्लॉग होता क्या है और कैसे बनाते हैं इन सब बातों की जानकारी दी हुई थी उसमें. वो आर्टिकल पढ़ कर मैं बड़ा उत्सुक हो गया ब्लॉग को लेकर. तय कर लिया कि शाम में ही जाऊँगा साइबर कैफे और ब्लॉग बनाऊंगा. उस आर्टिकल में उन सभी वेबसाइट के नाम भी दिए हुए थे जिसके जरिये आप ब्लॉग बना सकते हैं. रेडिफ डॉट कॉम का भी नाम उस आर्टिकल में था. मेरा पहले से रेडिफ डॉट कॉम पर ईमेल बना हुआ था, तो मैंने तय किया इसी वेबसाइट पर मुझे अपना पहला ब्लॉग भी बनाना है. ज्यादा वक़्त मुझे लगा भी नहीं ब्लॉग बनाने में, हाँ समझने में थोडा वक़्त लग गया कि इसपर काम कैसे करते हैं और यहाँ पोस्ट कैसे करते हैं.

मेरे पहले ब्लॉग का वेब एड्रेस ये था – abhiindian.rediffblogs.com. लेकिन इस एड्रेस का अब कोई फायदा नहीं. अब अगर इसे देखने की कोशिश करता हूँ तो मेरा ये ब्लॉग डिस्प्ले नहीं होता. जाने क्या बात है. शायद रेडिफ डॉट कॉम ने नॉन-एक्टिविटी के कारन इसे डिलीट कर दिया हो या जो भी तकनीकी वजह हो. हाँ WayBack Machine के जरिये जरूर मैं अपने ब्लॉग के पुराने पोस्ट देख सकता हूँ. मुझे याद है जिस दिन मैंने ब्लॉग बनाया था उसके अगले दिन अपने दोस्तों को पकड़ पकड़ के ये बात बता रहा था. कुछ लोगों को तो बात समझ में नहीं आई कि मैं बोल क्या रहा हूँ…और बाकी दोस्त ये समझ कर की इन्टरनेट पर फिर किसी साईट पर इसने आईडी बनाई है, ये कह कर निकल लिए कि तुम्हारे पास फ़ालतू काम करने के लिए कितना वक़्त है. 🙂

लेकिन मैं खुश था, बहुत खुश था ये ब्लॉग बना कर.  उस समय ज़रा भी अनुमान नहीं था कि ब्लॉग आगे चल कर इस कदर रेवलूशनाइज़ हो जाएगा वरना मैं ब्लॉग्गिंग उन दिनों नियमित तौर पर जारी रखता. मैंने ध्यान ही नहीं दिया था ब्लॉग्गिंग के तरफ कुछ भी. शायद मैं भी उन दिनों यही समझता था कि ये भी बस यूहीं टाइम पास का कोई साधन है. आखिर उन दिनों इन्टरनेट को इतना सिरिअसली लेते भी नहीं थे हम. अपने इस ब्लॉग पर मैं बहुत समय तक पोस्ट करते रहा..

इसके अलावा मैंने एक और ब्लॉग बनाया था जिसका वेब एड्रेस था – abhithoughts.rediffblogs.com. इसपर मैंने बहुत सी चीज़ें पोस्ट की थी, लेकिन सबसे बड़ा अफ़सोस ये है कि इस ब्लॉग का मुझे पुराना आर्काइव Way Back Machine के साईट पर भी नहीं मिल रहा है. इस ब्लॉग को मैंने डायरीनुमा बनाया हुआ था. कॉलेज में था तो महीने में एक बार कुछ अपनी बातें इसपर लिखा करता था. रेडिफ डॉट कॉम के सपोर्ट सर्विस को लिखा है मैंने अपने इस ब्लॉग के कंटेंट को वापस पाने के लिए. देखिये अगर मिल जाता है तो वो बहुत ही अच्छी बात होगी.

मेरे ब्लॉग का फायदा दरअसल जितना मुझे हुआ उससे कहीं ज्यादा मेरी दो दोस्त दिव्या और शिखा को हुआ था. वो दोनों अपने दोस्तों और परिवार में शो-ऑफ़ करने के लिए मेरे ब्लॉग के एड्रेस को ये कह कर दिखाते थे कि ये उनका ब्लॉग है. दोनों मेरे रेडिफ के ब्लॉग के पासवर्ड को जानते थे, और दोनों लगातार ब्लॉग पर पोस्ट भी करते थे, एक मजेदार बात भी याद आती है. उन दिनों दिव्या के परिवार में किसी ने कम्पूटर खरीदा था, और इन्टरनेट का नया कनेक्सन लगवाया था. दिव्या ने वहां भी चाहा कि कुछ शो ऑफ करे, उसने मेरे ब्लॉग का लिंक खोला और कहा, देखो ये मिनी वेबसाइट है, इसे मैंने बनाया है. दिव्या की बहन नीतू, जो कि हमेशा दिव्या की टांग खीचने से पीछे नहीं हटती थी, उसने झट से कहा, हाँ, इसमें Posted by abishek kumar लिखा है? तुम्हारा नाम क्यों नहीं लिखा है? अब दिव्या ने उसे जाने क्या जवाब दिया ये तो नहीं पता लेकिन अगले दिन मुझे उसने जो डांट लगाईं है, कि अपना नाम लिखना जरूरी था ब्लॉग पर? मेरा नाम नहीं लिख सकते थे?   🙂

इस ब्लॉग के पहले मेरे तीन ब्लॉग बने हुए थे. पहले दो ब्लॉग का जिक्र तो किया है मैंने ऊपर ही, तीसरा ब्लॉग था thoughtsbyabhi.aol.com. असल में इन्ही दिनों वर्डप्रेस भी नया नया लांच हुआ था, शायद 2003 की ही बात है या 2004 की बात होगी. मुझे अपने उस ब्लॉग का एड्रेस तक याद नहीं. लेकिन जो भी बातें याद है उस ब्लॉग का, उन कीवर्ड के जरिये मुझे कुछ भी इन्टरनेट पर हाथ नहीं लग रहा. उन दिनों तो ये सोचा होता अगर कि ब्लॉग का आगे चल कर इतना बड़ा रूप होने वाला है, तो नियमित ब्लॉग्गिंग करता मैं भी. शायद उससे कुछ फायदा भी होता.

अब कुछ स्क्रीनशॉट मेरे पहले ब्लॉग से, जो मुझे मिल सका उन पोस्ट्स का स्क्रीनशॉट है ये. दिल से चाहता हूँ कि मेरे पुराने सभी पोस्ट्स मुझे मिल जाए वापस.

ये मेरी पहली पोस्ट थी. यकीन मानिए इस ब्लॉग का बैकग्राउंड और टेम्पलेट काफी खूबसूरत था. फ़िलहाल तो ये बस इसी रूप में उपलब्ध है –

इस ब्लॉग पर मैंने वन लाईनर या कोई शेर या कुछ कोटेसन पोस्ट किया करता था, लेकिन इस ब्लॉग के भी मुझे सभी पोस्ट नहीं मिल पाए हैं, गिन कर मात्र आठ से नौ पोस्ट मिल पाए हैं, जबकि इस ब्लॉग और रेडिफ के ही दूसरे ब्लॉग पर मैंने कई पोस्ट लगाए थे. खैर, इतना भी काफी है मेरे लिए.

ये दोनों ब्लॉग को वापस पाने की ख्वाहिश इस लिए है कि इसपर बड़े मजेदार मजेदार कमेंट्स भी आये थे. फेसबुक ने ही बताया कि आज से पांच साल पहले तक मेरे ये दोनों ब्लॉग जिंदा थे. अब क्या हुआ पता नहीं…वैसे मुझे एक कमेन्ट याद है आज भी. किस व्यक्ति ने लिखा था वो तो याद नहीं, लेकिन मैंने अपने कॉलेज की यादें शेयर की थी मेरे पोस्ट में. ये भी एक लिंक देखिये

सुन रहे हो रेडिफ वालों? मेरा ब्लॉग वापस करो… 🙂

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