द बेस्ट ऑफ़ सचिन

सचिन, शारजाह में. 
आज चौबीस अप्रैल है, सचिन तेंदुलकर का जन्मदिन. आज सोचा मैंने कि अपनी  पसंद की उनके कुछ चुनिन्दा इनिंग्स का जिक्र यहाँ पर करूँ. मेरे पास लगभग उनके सारे सेंचुरी, एकदिवसीय और टेस्ट मैच सेंचुरी के वीडियोज हैं. उनमें से कुछ खास इनिंग को चुनना तो असंभव सा काम है. फिर भी कोशिश करता हूँ. इस पोस्ट को आगे तभी पढ़े जब आपको क्रिकेट में दिलचस्पी हो... और उन लोगों से तो खास तौर पर निवेदन है कि पोस्ट को न पढ़ें, जो ये सोचते हैं कि सचिन जब भी शतक बनाते हैं भारत मैच हार जाती है. टेस्ट मैच की तो बात ही नहीं करते, वन-डे की बात करें तो सचिन के 49 शतक में से 33 शतक ऐसे थे जिनमें जीत हासिल हुई थी और 14 में हार. दो में कोई परिणाम नहीं निकल पाया था. खैर वो दूसरी बात है, उसके लिए आप मेरी एक पहले की पोस्ट पढ़ सकते हैं. आज देखते हैं सचिन के कुछ ख़ास इनिंग्स को.


36, न्यूजीलैंड के विरुद्ध, वेलिंगटन, 1990

ये सचिन का पहला एकदिवसीय रन था. पहले मैच में शून्य पर आउट होने के बाद सचिन ने इस मैच में 39 गेंद में पांच चौकों की मदद से 36 रन बनाये थे. उस समय भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ियों ने क्या ये उम्मीद किया होगा कि ये क्रिकेटर आगे चल के दुनिया का सबसे महान बल्लेबाज बनेगा. वो मैच जिसमें सचिन ने 36 रन बनाये थे, वो भारत ने एक रन से जीता था. वो उस सीरिज की भारत की एकमात्र जीत थी. देखिये ये विडियो.


110, ऑस्ट्रेलिया  के विरुद्ध, कोलोम्बो, 1994

सचिन की  पहली  सेंचुरी ख़ास है. सचिन का सबसे पहला शतक एकदिवसीय मैच में नहीं था, बल्कि इंग्लैंड के विरुद्ध टेस्ट मैच में उन्होंने पहला शतक लगाया था, वो भी मात्र सत्रह साल की उम्र में. ग्राहम गूच उस समय इंग्लैंड के कप्तान थें और उन्होंने भारत को जीत के लिए 408 रनों का नामुमकिन सा लक्ष्य रखा था. भारत के चार विकेट महज 109 रनों पर गिर गए थे, और फिर सचिन बैटिंग करने आयें. सातवें विकेट के लिए सचिन ने प्रभाकर के साथ करीब 160 रनों की साझेदारी की. सचिन ने अपना पहला शतक बनाया और उस समय वे सिर्फ सत्रह साल के थे. सचिन ने उस मैच में 119 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी.
लेकिन एक दिवसीय मैच का पहला शतक तेंदुलकर के लिए और ख़ास था. वजह थी कि उन्हें एक लम्बा इंतजार करना पड़ा था पहले एक दिवसीय शतक के लिए. ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सचिन ने सिडनी में 1994 में पहला शतक जड़ा था. अपने वन-डे कैरिअर के 79वां मैच में उन्हें अपने कैरिअर का पहला शतक मिला था. सिंगर कप का वो मैच था. ऑस्ट्रेलिया के मैकग्रथ, शेन वार्ने और क्रेग मैकडर्मोट जैसे खतरनाक गेंदबाज थे और सचिन मैदान के चारों तरफ हर तरह के शॉट खेल रहे थे. इनिंग के शुरुआत में मैकडर्मोट के गेंद पर सचिन का वो शानदार छक्का कौन भूल सकता है भला? 110 रनों की वो सचिन की खूबसूरत पारी थी. भारत ने वो मैच जीत लिया था.


52, पाकिस्तान के विरुद्ध, 1991, शारजाह

1994 के और पहले अगर देखें तो भी सचिन के कई सारे अच्छे इनिंग्स हैं, जैसे कि 1991 का पाकिस्तान के विरुद्ध का मैच जो शारजाह में खेला जा रहा था. सचिन ने 52 रन बनाए थे और नाबाद रहे थे. हालांकि इस मैच में `मैन ऑफ़ द मैच' मांजरेकर को मिला था, लेकिन सचिन की ये इनिंग काफी महत्वपूर्ण थी. सचिन के इस इनिंग का कहीं ख़ास जिक्र नहीं दिखा मुझे. एक अलग ही क्लास देखने को मिलता है सचिन के कैरिअर के शुरुआत की इस इनिंग में. सचिन के 52 रन को मैं अपने कलेक्शन में शामिल कर रहा हूँ, देखिये उस इनिंग के कुछ हाईलाईट. .


54, पाकिस्तान के विरुद्ध, सिडनी 1992 वर्ल्ड कप,

भारत के लिए 1992 का वर्ल्ड कप ज्यादा यादगार नहीं रहा. हमनें मात्र दो मैच जीते थे इस वर्ल्ड कप में. पहला पाकिस्तान के विरुद्ध और दूसरा जिम्बावे के विरुद्ध. पाकिस्तान के विरुद्ध 54 रनों की पारी खेली थी, भारत के तरफ से सचिन का सर्वाधिक स्कोर था. बोलिंग  में भी सचिन ने कमाल का प्रदर्शन किया था, दस ओवर में 34 रन देकर एक विकेट लिया था सचिन ने. पाकिस्तान की पूरी टीम 173 रनों पर आउट हो गयी थी. इस मैच में उन्हें `मैन ऑफ़ द मैच' का अवार्ड दिया गया था.


81, जिम्बावे के विरुद्ध, 1992 वर्ल्ड कप,

जिम्बावे के विरुद्ध मैच में भी भारत के तरफ से सचिन ने सर्वाधिक 81 रन बनाये थे. भारत ने इस मैच में 203 रन बनाये थे जिसमें सचिन के 81 रन शामिल थे, जो उन्होंने आठ चौकों और एक शानदार छक्के के बदौलत बनाया था. बारिश के वजह से मैच पूरा नहीं हो सका था और जिम्बावे को जीत के लिए 19 ओवर में 193 रनों का लक्ष्य मिला था, लेकिन जिम्बावे मात्र  103 रन बना पायी थी. एकमात्र विकेट को जिम्बावे का गिरा था वो भी सचिन के हिस्से में ही आया. सचिन को ` प्लेअर ऑफ़ द मैच' घोषित किया गया था.


77, वेस्टइंडीज के खिलाफ, 1992 वर्ल्ड कप,

1992 के ही वर्ल्ड  कप का दूसरा मैच जिसमें वेस्टइंडीज की बेहद मजबूत टीम से भिड़ रही थी भारत की टीम. मैलकोम मार्शल, अम्ब्रोज, कमिंस जैसे घातक गेंदबाज थे टीम में, और भारत की टीम लगभग बह चुकी थी उनके अटैक में. लेकिन एक छोर पर तेंदुलकर डंटे रहे. बेहद साहस और एक अद्भुत दृढ संकल्प से उतरे थे वो मैदान  पर. धैर्य से खेले वो और कमाल की तकनीक से खेलते हुए सचिन ने 77 रन बनाये. हाँ, ये 77 रन उनके 127 गेंदों पर आए थे  लेकिन ये एक अच्छी इनिंग थी. तेंदुलकर के आउट होने के बाद पूरी टीम 191 पर सिमट गयी थी. वेस्टइंडीज की टीम ने आराम से लक्ष्य हासिल कर लिया था, लेकिन सचिन की ये पारी बेहद साहसी पारी थी. सचिन ने जितने हौसले से ये पारी खेली थी वो बेहद सराहनीय थी.


हीरो कप सेमीफाइनल, कोलकत्ता,1993

वैसे तो इसे इस लिस्ट में नहीं होना चाहिए, लेकिन फिर भी मैं सचिन के इस परफोर्मेंस को इस लिस्ट में डाल रहा हूँ, कारण बस ये कि सचिन की ये एक ख़ास परफोर्मेंस थी. सचिन समय समय पर बॉलिंग करते रहते हैं और बेहद अच्छी  बॉलिंग करते हैं, अक्सर जब विकेट चाहिए होता था, या साझेदारी तोडनी होती थी बॉल सचिन को दिया जाता था. दरअसल सचिन को शुरुआत में बॉलर बनने की ख्वाहिश थी, जब वो क्रिकेट अकादेमी में जुड़े थे. खैर, हीरो कप का वो सेमीफाइनल याद होगा न आपको? जिसमें भारत ने मात्र 195 रन बनाये थे, और साऊथ अफ्रीका लगभग जीत के कगार पर पहुँच गया था. अंतिम ओवर में जीतने के लिए अफ्रीका को  6 रन चाहिए थे. अजहरुद्दीन किसे बॉलिंग देते? श्रीनाथ की बहुत पिटाई हो चुकी थी, और कपिल देव भी कॉन्फिडेंट नहीं थें आखिरी ओवर करने के लिए. कप्तान ने बॉल सचिन को थमाई. ईडन गार्डन में वो मैच था, किस तरह का प्रेशर होगा बॉलर पर, ये कहने की जरूरत नहीं, सचिन ने लेकिन उस ओवर में मात्र तीन रन दिए थे और भारत मैच जीत गया था. ये एक यादगार पल था. ये विडियो देखिये, विडियो क्वालिटी  थोड़ी ख़राब है, लेकिन इसे आप मिस नहीं कर सकते.


82, न्यूज़ीलैण्ड के विरुद्ध, ऑकलैंड, 1992

एक और मैच है, 1994 में ऑकलैंड में हुआ भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच का मैच. जिसमें सचिन ने धुआंधार 82 रन बनाए थे और वो भी मात्र 49 गेंदों में. ये एक शानदार इनिंग थी तेंदुलकर की. क्लासिकल इनिंग. न्यूज़ीलैंड ने भारत के सामने 142 रनों का लक्ष्य रखा था, लेकिन सचिन के इस शानदार इनिंग के बदौलत भारत ने मात्र चौबीसवें ओवर में जीत हासिल कर ली थी. पंद्रह शानदार चौके और एक छक्के शामिल थे सचिन के इस इनिंग में. सचिन की ये इनिंग बहुत महत्वपूर्ण थी. कह सकते हैं इसके बाद लगभग सचिन के खेल की और भारत के क्रिकेट की दिशा बदल गयी थी. सचिन पहली बार ओपनिंग करने इसी मैच में आये थे, और जिस रफ़्तार के साथ उन्होंने रन बनाये थे, सब हैरान थे. जिस तरह वो पिच पर आगे बढ़ कर खेल रहे थे, बॉलर बिलकुल नहीं समझ पा रहे थे कि कहाँ बॉल किया जाए. निश्चित तौर पर ये सचिन की सबसे महत्वपूर्ण इनिंग में से एक थी.


90, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध, मुंबई, 1996

सचिन की एक और शानदार इनिंग थी ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 90 रनों की पारी. भारत को जीत के लिए 258 रनों का लक्ष्य का पीछा करना था. शुरुआत खराब रही थी लेकिन सचिन और मांजरेकर ने लगभग इनिंग को संभाल लिया था. लेकिन सचिन और मांजरेकर के आउट होने के बाद विकेट गिरते रहे और भारत 242 रनों पर आल आउट हो गयी थी. हालांकि भारत ये मैच हार गयी थी लेकिन सचिन की  इस पारी को लोग नहीं भूल सकते. ऑस्ट्रेलिया के पसीने निकाल दिए थे सचिन की  इस इनिंग ने. कौन भूल सकता है मैगग्राथ के गेंदों पर लगभग हर शॉट उनके सर के ऊपर से क्रीज के बाहर निकल कर मारा था सचिन ने. मैदान के चारों तरफ कमाल के शॉट लगाए थे सचिन ने. देखिये ये विडियो. मुंबई में  हुआ था ये मैच...


65, श्रीलंका ले विरुद्ध, 1996 वर्ल्ड कप, ईडन गार्डन

1996 के वर्ल्डकप सेमीफाइनल का वो मैच कौन भूल सकता है जिसमें श्रीलंका ने हमें हराया था. कोलकता के ईडन गार्डन में वो मैच हुआ था और श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रन बनाये थे, शुरुआत के तीन विकेट चटकाने के बाद लगा कि मैच भारत के गिरफ्त में है लेकिन अरविन्द डी सिल्वा और महानामा ने मैच को अपने मुट्ठी में कर लिया. लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत ख़राब रही थी, लेकिन सचिन ने मांजरेकर के साथ मिलकर पारी को संभाला. सचिन ने 65 रनों की बेहद साहसी और अद्भुत पारी खेली थी. मेरे हिसाब से इसे सचिन की सबसे साहसी पारी में से एक मानूंगा मैं. लेकिन सचिन के आउट होने के बाद मात्र 22 रन पर छः और विकेट गिर गए थे टीम के. उसके बाद क्या हुआ ये सब जानते हैं. बहुत बहसें हुई बाद में, आरोप लगें लेकिन फिर भी मैं ये मानता हूँ कि ये सचिन की सबसे अच्छी पारी में से एक पारी है.


118, पाकिस्तान के खिलाफ, शारजाह, 1996

1996 में ही पकिस्तान के विरुद्ध सचिन ने 118 रन बनाये थे. पेप्सी शारजाह कप का वो मैच था. फाइनल में पहुँचने के लिए भारत को वो मैच जीतना जरूरी था. तेंदुलकर ने बेहद आक्रामक तरीके से खेलते हुए 118 रन बनाये थे, जिसमें आठ चौके और दो छक्के शामिल थे. ये भी तेंदुलकर की कमाल की पारी थी. ना भूलने वाली एक साहसी पारी. कमाल की दृढ़ता दिखाई  थी सचिन ने. सचिन के 118 रनों के बदौलत भारत ने 305 रनों का लक्ष्य पाकिस्तान को दिया था, लेकिन पाकिस्तान की पूरी टीम 277 रनों पर सिमट गयी थी. सचिन ने दो विकेट भी लिए थे इस मैच में और उन्हें `मैन ऑफ़ द मैच' का अवार्ड मिला था.


44, वेस्टइंडीज के खिलाफ, 1997, पोर्टऑफ़ स्पेन

सचिन की एक और पारी का जिक्र करना चाहूँगा, सचिन के हिसाब से ये उनकी सबसे यादगार पारी में से एक थी. वेस्टइंडीज के पोर्ट ऑफ़ स्पेन में वो मैच हुआ था 1997 में. हालांकि ये कोई बड़ी पारी नहीं थी लेकिन सचिन इसे एक महत्वपूर्ण  पारी मानते हैं. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की पूरी टीम 179 रनों पर आउट हो गयी थी. अम्ब्रोज, वाल्श, बिशप और रोज पिच पर कहर ढा रहे थे, और सचिन की 43 गेंदों में 44 रनों की ये पारी एक मास्टरक्लास पारी थी. राहुल द्रविड़ भी सचिन की इस पारी को उनकी बेहतरीन पारी में से एक मानते हैं. द्रविड़ कहते हैं, कि वो एक बेहद मुश्किल पिच था और उसपर से अम्ब्रोज बिशप और वाल्श जैसे गेंदबाज गेंदबाजी कर रहे थे. किसी भी बल्लेबाज को समझ नहीं आ रहा था कि इन्हें खेले कैसे और वैसे में सचिन ने हर तरफ हर शॉट लगाए, कट, पुल, ओवर द टॉप, सब तरह के शॉट वो खेल रहे थे.  दुर्भाग्यवश  उन्हें गलत डिसीजन से आउट दे दिया गया....लेकिन ये कमाल की पारी थी.

(इस इनिंग का विडियो कुछ समय पहले तक यूट्यूब पर था लेकिन अभी नहीं मिल रहा)


143, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध, शारजाह, 1998

ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध वो दो मैच को कौन भूल सकता है? लोग उसे `डेजर्ट स्टॉर्म' का नाम देते हैं. भारत को जीत के लिए 276 रन बनाने थे 46 ओवर में. सचिन ने गज़ब का खेल दिखाया. ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज बेबस हो गए थे सचिन के बैटिंग के सामने. सचिन ने 131 गेंदों में 9 चौके और पांच छक्के की मदद से 143 रन बनाये थे.  अपने दम पर लगभग सचिन ने लगभग मैच जिता ही दिया था. लेकिन फ्लेमिंग द्वारा  सचिन को आउट करने के बाद लगभग जीता हुआ मैच टीम हार गयी, लेकिन सचिन अपने मिशन में कामयाब हो गए थे. नेट रन रेट के हिसाब से भारत शारजाह के फाइनल में पहुँच गया था. माइकल कास्प्रोविच के गेंद पर जो शानदार और अविश्वसनीय छक्का जड़ा था सचिन ने, उसे देखकर कमेन्टेटर टोनी ग्रेग का वो स्टेटमेंट याद आता है - Oh, He's hit this one miles. What a six, What a six!  Sachin Tendulkar, What a Player, What a Wonderful Little Player"


134, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध, शहरजाह फाइनल, 1998

सचिन के डेजर्ट स्टॉर्म के बदौलत कोका कोला कप के फाइनल में भारत आ चुका था, और अब बारी थी फाइनल जीतने की. सचिन एकदम तैयार थे. आज का ही दिन था वो. चौबीस अप्रैल. सचिन का जन्मदिन, और जीतने के लिए  भारत को 273 रनों की जरूरत थी. तेंदुलकर ने शेन वार्ने, माइकल कास्प्रोविच और बाकी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धज्जियाँ उड़ा दी थी. ये एक कमाल की पारी थी. शायद तेंदुलकर की सबसे यादगार  पारियों में से एक....दो लगातार मैचों में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन ने शतक जड़ा था. शेन वार्ने, टॉम मूडी, कास्प्रोविच और फ्लेमिंग जैसे गेंदबाज असहाय महसूस कर रहे थे खुद को. याद आता है कमेंटेटर टोनी ग्रेग का फिर वो कमेन्ट जब तेंदुलकर ने टॉम मूडी के गेंद पर अद्भुत छक्का जड़ा था "This little man has hit the big fella for a six. He's half his size.". दरअसल टोनी ग्रेग ने इस तरह के कितने ही कमेन्ट किये थे पूरे मैच के दौरान, एक और सचिन के चमत्कारिक स्ट्रेट ड्राइव पर उन्होंने कहा था. This little man is the nearest thing to Bradman there's ever been". और मैच के बाद मार्क टेलर ने एक स्टेटमेंट में कहा था - "We did not lose to a team called India...we lost to a man called Sachin.".


124, ज़िम्बाब्वे  के विरुद्ध, कोका कोला चैम्पन्शिप, शारजाह, 1998

कोका कोला चैम्पियन ट्रॉफी  का वो मैच याद है न ? शारजाह में खेला गया वो फाइनल? भूल भी सकता है कोई उस मैच को? फाइनल के पहले वाले मैच में जिम्बावे ने भारत को हराया था. हेनरी ओलंगा ज़िम्बाब्वे  के गेंदबाज ने चार विकेट लिए थे, सचिन को भी 11 रन पर उन्होंने आउट किया था. मैच के बाद एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में सचिन के ऊपर कुछ बयानबाजी भी हुई उनकी  तरफ से. फाइनल मैच दो दिन बाद होने वाला था, और सचिन ने शायद ये निश्चय कर लिया था कि कुछ तो अपना कमाल दिखाना ही है, और हुआ भी ऐसा ही. सचिन के शॉट ने ओलंगा के बॉलिंग को एकदम उखाड़ फेंक दिया. `डेजर्ट स्टॉर्म' झेलने की बारी अबकी ज़िम्बाब्वे  की थी. गज़ब की आक्रामक  पारी खेली थी सचिन ने. इतना कि दूसरे छोर पर गांगुली थे, वो पहले दो तीन ओवर देखने के बाद सचिन के पास जाकर उन्हें थम के खेलने को कह गए, लेकिन सचिन कुछ दूसरे इरादे से उतरे थे. 92 गेंदों में बारह चौके और छः छक्कों के बदौलत सचिन ने 124 रन बनाये थे.  ज़िम्बाब्वे  से जीत के लिए भारत को 196 रन बनाने थे और सचिन गांगुली की जोड़ी ने तीस ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया और दस विकट से ज़िम्बाब्वे  को हराया. इस मैच से जुड़ा मेरा पर्सनल एक और वाकया है, मेरे घर में केबल कनेक्सन सही से नहीं आ रहा था, मैंने बगल के घर में टीवी देखने जाने का सोचा. माँ ने कहा, क्यों जा रहे हो...देखना फिर हार जाएगा इंडिया. मैंने कहा था, तुम देख लेना आज सचिन क्या कमाल दिखाएगा. और उसने सच में क्या कमाल दिखाया था.


140, केन्या के विरुद्ध, ब्रिस्टल, 2003

भारत और केन्या के बीच इस इमोशनल मैच को शायद ही कोई भूल सकता है. 1999 के वर्ल्ड कप का ये मैच था. शुरूआती मैच इस वर्ल्ड कप के भारत के लिए अच्छे नहीं रहे थे. पहला मैच जो कि अफ्रीका  के विरुद्ध था भारत हार चुका था. दूसरा मैच ज़िम्बाब्वे के विरूद्ध था लेकिन मैच के पहले ही खबर आई कि सचिन के पिता का निधन हो गया है. सचिन इंग्लैंड से वापस देश आ गए. भारत वो मैच भी ज़िम्बाब्वे से हार गया था. जीतने की अब सख्त जरूरत थी भारत को. सचिन, जो देश लौट चुके थे, किसी ने उम्मीद नहीं कि थी वो अगला मैच जो पांच दिन के बाद था उसके लिए वापस इंग्लैड जायेंगे. इन्सान होने के नाते ये काफी स्वाभाविक है कि दुःख की  इस घड़ी में सचिन अपने परिवार के साथ रहते लेकिन सचिन वापस आये मैच के लिए और केन्या के खिलाफ खेलते हुए सचिन ने 101 गेंद पर 140 रन बनाये. सेंचुरी बनाने के बाद सचिन ने जब आसमान की तरफ देखकर अपना ये शतक पिता को समर्पित किया तो पूरे देशवासियों के साथ साथ मेरी भी आँखें नम हो गयी थी.


186, न्यूजीलैंड के विरुद्ध, हैदराबाद, 1999

सचिन की एक और यादगार पारी थी 186 रनों की वो पारी जो उन्होंने न्यूजीलैंड के विरुद्ध खेली थी. ये निश्चित तौर पर उनकी  सबसे आक्रामक और शानदार पारियों में से एक थी. 150 गेंदों में सचिन ने 186 रन बनाये थे. कमाल का विश्वास था उनकी इस पारी में. एक बेहद मैजिकल, आकर्षक और शानदार पारी थी सचिन की ये. सचिन के 186 रनों के बदौलत भारत ने 376 रन बनाये थे, और न्यूजीलैंड से हम 174 रनों से ये मैच जीत गए थे.


141, पाकिस्तान के विरुद्ध, रावलपिंडी, 2004

सचिन की एक और यादगार पारी है, 141 रनों की पारी, पाकिस्तान के विरुद्ध रावलपिंडी में. हालांकि हम ये मैच हार गए थे, लेकिन फिर भी सचिन की 141 रनों की ये कमाल की पारी बहुत  शानदार और बेहद आकर्षक पारी थी.135 गेंदों में सत्रह चौके और एक छक्के के बदौलत सचिन ने  141 रन बनाए थे . हाँ, लोग ये आरोप बड़े आराम से लगा देंगे कि सचिन ने शतक बनाया और इंडिया मैच हार गयी. लेकिन ये आरोप लगाने से पहले ये जान लीजिये कि मैच में हुआ क्या था. पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने पचास ओवर में 329 रन बनाये थे. लक्ष्य का पीछा करते हुए सचिन ने 141 रन बनाये और दूसरे सर्वाधिक स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज द्रविड़ थे जिन्होंने 36 रन बनाये थे. तीसरा सर्वाधिक स्कोर पाकिस्तान की मेहरबानी से था, यानी 37 रन जो कि एक्स्ट्रा में मिले थे भारत को. एक अकेले  योद्धा के तरह सचिन खेले इस मैच में और वो भी क्या कमाल खेले. लेकिन फिर भी हम इस हार के लिए सचिन को ही जिम्मेदार ठहराएंगे. ठीक भी है, क्यूंकि भारत के तरफ से बल्लेबाजी सिर्फ सचिन को ही करना था न, बाकी खिलाड़ी तो घूमने गए थे.


98, पकिस्तान के विरुद्ध, वर्ल्ड कप, सेंचुरियन, 2003

ये मैच तो मैं चाह कर भी नहीं भूल सकता हूँ. बेगुसराय में था मैं और लाइट रहती नहीं थी गावं में. पास के एक घर में जहाँ बैट्ररी पर टीवी चल रहा था वहाँ सब जुटे थे मैच देखने. मेरे भैया भागते हुए आये थे, जब ये सुना कि अख्तर के गेंदों को सचिन धुन रहे हैं. शायद वर्ल्ड कप में सचिन के कैरिअर की ये सबसे शानदार पारी थी. 150 किलोमीटर प्रति घंटा की  रफ़्तार से आने वाली गेंद को बैकवार्ड पॉइंट पर सिक्स के लिए उड़ा देना ये कमाल भी सचिन ही कर सकते हैं बस. उस ओवर में ही पाकिस्तान लगभग मैच हार चुका था. शोएब अख्तर के उस अकेले ओवर में सचिन ने 18 रन बनाये थे. हालांकि अपने शतक से वो दो रनों के लिए चूक गए लेकिन ये एक कमाल की पारी थी. गज़ब की विस्फोटक पारी. कभी न भूलने वाली...


50, इंग्लैंड के खिलाफ, वर्ल्ड कप, डर्बन, 2003

2003 के वर्ल्ड कप मैच में इंग्लैंड के खिलाफ सचिन के इस पचास रन को मैं इस लिस्ट में रख रहा हूँ सिर्फ उस एक छक्के की वजह से. उस एक अविश्वसनीय छक्के की वजह से जो सचिन ने कैडिक के गेंद पर लगाईं थी. उससे बेहतर छक्का देखा है आपने? कई लोग ये मानते हैं कि वो सचिन के बेहतरीन छक्कों में से एक था. मैच के पहले कैडिक ने प्रेस कोंफ्रेंस में सचिन के ऊपर बयानबाजी की थी, उन्हें मैच में जवाब मिल गया था.


117, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध, सिडनी, 2008

मार्च 2008 का ऑस्ट्रेलिया का वो दौरा भी याद आता है जब सचिन के इनिंग के बदौलत भारत ने सीबी सीरिज जीता था. सचिन का फॉर्म कुछ ख़ास अच्छा नहीं चल रहा था उस वक़्त लेकिन दोनों फाइनल में सचिन ने शानदार बैटिंग की. पहले फाइनल में सचिन ने शानदार और धुआंधार नाबाद 117 रन बनाये और दूसरे फाइनल में सचिन ने 91 रन बनाए. वे क्रिटिक्स जो सचिन के खिलाफ बोल रहे थे, उनके मुँह इसके बाद  सिल गए थे. 120 गेंदों में 117 रनों की पारी सचिन की कमाल की पारी थी. भारत को जीत के लिए 240 रन बनाने थे और सचिन के 117 रनों ने मैच को एक तरफ़ा कर दिया था. ब्रेट ली के गेंद पर वो गोली सी जाती हुई स्ट्रेट ड्राईव तो याद होगी न आपको? बस वैसे ही कई असाधारण शॉट से भरपूर थी सचिन की वो पारी. दूसरे फाइनल में पहले बल्लेबाजी करते हुए सचिन की 91 रनों की बदौलत भारत ने 258रनों का लक्ष्य रखा था , लेकिन ऑस्ट्रेलिया  की टीम 249 रनों पर सिमट गयी. ये सचिन की सबसे यादगार पारी में से एक मानी जाती है. 


138, श्रीलंका के विरुद्ध, कोलोम्बो, 2009

कॉम्पैक कप का फाइनल था, और सब  की नज़रें सचिन पर थी. सचिन ने भी निराश नहीं किया. एक मास्टरक्लास  इनिंग खेली सचिन ने. वो शॉट खेल रहे थे, पुल, कट, ड्राईव कर रहे थे बॉल को और विकेट के बीच दौड़  भी रहे थे. मेंडिस के गेंदों पर वो खूबसूरत रिवर्स स्वीप याद है न आपको?


163, न्यूजीलैंड के विरुद्ध, क्राइस्टचर्च, 2009

ये सचिन की सबसे शानदार इनिंग, सबसे शानदार शतक में से एक है. 163 रनों की मैजिकल इनिंग जो न्यूजीलैंड के विरुद्ध सचिन ने बनाये थे. जिस अंदाज़ में और जितने आक्रामकता से सचिन खेल रहे थे, अगर वो रिटायर्ड हर्ट न होते तो शायद उसी मैच में डबल सेंचुरी लग जाती. लेकिन सचिन की ये 163 रनों की पारी चमत्कारिक पारी थी. भारत ने सचिन और युवराज की पारी के बदौलत 392 रनों का विशाल लक्ष्य खड़ा किया था और न्यूजीलैंड से हमने ये मैच 58 रनों से जीता था.


175, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध, हैदराबाद, 2009

ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध एक और पारी थी सचिन की, 175 रनों की पारी. ये भी एक कमाल की पारी थी. एक लगभग नामुमकिन लक्ष्य 350 रनों का पीछा करते हुए सचिन ने अकेले ही लगभग मैच जिता दिया था, लेकिन सचिन के आउट होते ही बाकी के चार विकेट 15 रनों पर गिर गए थे. कई लोग और मैं खुद सचिन की  इस इनिंग को शारजाह की  इनिंग के बराबर मानता हूँ. उतनी ही कमाल की ये इनिंग थी सचिन की. 19 शानदार चौके और चार लाजवाब छक्कों की मदद से सचिन ने 175 रन बनाये थे. चमत्कारिक पारी थी सचिन की ये. हालांकि हम ये मैच हार गए थे लेकिन फिर भी `मैन ऑफ़ द मैच' का अवार्ड सचिन को दिया गया.


200, साउथ अफ्रीका के विरुद्ध, ग्वालिअर, 2010

इस मैच को भूल सकता है कोई भला? ग्वालिअर के पिच पर कमाल हुआ था उस दिन. दुनिया का पहला डबल सेंचुरी  बनाने वाले बल्लेबाज सचिन थे. ये एक अद्भुत पारी थी. इस मैच के बारे में कहने की क्या जरूरत है? सचिन के बल्ले का जवाब अफ्रीका के किसी भी गेंदबाज के पास नहीं था. वो गज़ब के फॉर्म में थे. एकदम क्लासिकल पारी थी सचिन की, विंटेज सचिन के वही पुराने शॉट, हुक, कट, स्ट्रेट ड्राईव और लाजवाब कवर ड्राइव्स. लगभग हर तरह के शॉट थे सचिन की  इस इनिंग में.


111,  अफ्रीका  के विरुद्ध, नागपुर, 2011

सचिन अपने पुराने फॉर्म में थे. सहवाग के साथ सचिन ने भारत को गज़ब की शुरुआत दी थी. वो खुद बेहद आक्रामक और आकर्षक खेल खेले. 101 गेंदों में आठ चौके और छः छक्कों की मदद से उन्होंने 111 रन बनाए. याद है न मोर्केल और स्टेन कितना बेबस महसूस कर रहे थे खुद को. और मोर्केल के गेंद पर सचिन के स्ट्रेट ड्राईव और कवर ड्राईव. मैदान के चारों तरफ वो बल्ले को घुमा रहे थे.  बेहद खूबसूरती से सचिन खेले थे. जब सचिन आउट हुए तो चालीसवें ओवर में तो स्कोर था 267,  दो विकेट पर. लेकिन पूरी टीम अगले दस ओवर में मात्र 29 रन जुटा पायी. अफ्रीका ने ये मैच अंतिम ओवर में जीत लिया था. लेकिन सचिन का ये शतक बेहद खूबसूरत शतक था.




120 इंग्लैंड के विरुद्ध, बंगलोर, 2011

सचिन का आखिरी विश्वकप था ये. इंग्लैंड के विरुद्ध इस मैच में वही विंटेज सचिन की झलक देखने को मिली थी, 120 रनों की शानदार पारी सचिन ने खेली थी. सचिन के 120 रनों के बदौलत भारत ने 338 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था. ये मैच टाई रहा था. मुझे आज तक अफसोस रहेगा, इस मैच को देखने गया था मैं लेकिन टिकट नहीं मिल पाया  था  मुझे. सचिन की कमाल की इनिंग थी इस मैच में.


85, पाकिस्तान के खिलाफ, मोहाली, 2011

2011 वर्ल्ड कप का ही सेमीफाइनल मैच भी एक यादगार मैच रहा. दो वजह से, एक तो ये भारत ने ये मैच जीतकर फाइनल में प्रवेश किया था... दूसरा ये कि सचिन ने इस मैच में भी सर्वाधिक 85 रन बनाए थे. अब इस मैच को लेकर कुछ लोगों की अलग राय है. उस समय भी मैं उनके उस राय से इत्तेफाक नहीं रखता था, आज भी नहीं रखता. लोग कहते हैं कि सचिन की ये पारी सिर्फ "लक" पर थी. एक एलबीडब्लू का निर्णय  जिसे रिव्यु में सचिन ने चैलेन्ज लिया और उन्हें नॉट आउट दिया गया, फिर दो बार और सचिन के कैच छूटे लेकिन वो उतने भी आसान कैच नहीं थे. ये सब बातों पर  लोग बहस करते रहेंगे, लेकिन ज़रा सोचिये अगर सचिन की वो 85 रनों की पारी नहीं होती तो भारत को सेमीफाइनल में प्रवेश मिलता? सचिन के बाद दूसरे सर्वाधिक स्कोर के बल्लेबाज सहवाग थे जिन्होंने 38 रन बने था. ये एक महत्वपूर्ण  पारी थी सचिन की. बहुत धैर्य और क्लास से खेली गयी एक पारी. मैं इस पारी को भी सचिन के बेहतरीन पारियों में से एक मानता हूँ.


114, बांग्लादेश के विरुद्ध, मीरपुर, 2012

सचिन का सौवां शतक जो बांग्लादेश के विरुद्ध सचिन ने बनाया था. इस मैच में बांग्लादेश ने भारत को सचिन के इस शतक की आलोचना भी कुछ लोगों ने किया ये कहते हुए कि वो बहुत धीमा खेला और सचिन के वजह से भारत मैच हार गया. लेकिन क्या ये सही है? भारत की पहले बल्लेबाजी थी. भारत ने 289 रनों का एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया था. बंगलादेश की टीम उस समय अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, और हमारे गेंदबाजों की जम कर धुनाई हुई थी. क्या सिर्फ इसलिए कि सचिन ने 147 गेंदों पर 111 रन बनाये थे उनको दोष देना उचित है? अगर ऐसा है तो विराट कोहली को भी दोष देना चाहिए 82 गेंदों पर 66 रन बनाने के लिए. खैर ये दूसरी वजह है, लेकिन सचिन का ये सौवां शतक बेहद ख़ास था. धैर्य और क्लास के साथ खेला गया एक इनिंग. सचिन ने इस मैच के बाद कहा था


इन सब के अलवा कुछ और शतक हैं सचिन के, कमाल का 141 , वेस्टइंडीज के विरुद्ध... जब द्रविड़ की  कप्तानी में टीम वेस्टइंडीज गयी थी, 1996 में ही वेस्टइंडीज के ही विरुद्ध 70 रन की पारी एक शानदार पारी थी, पाकिस्तान के विरुद्ध 100 रनों की पारी, जिम्बावे के खिलाफ 104 रनों की पारी, 93 श्रीलंका के खिलाफ खेली गयी पारी, ब्रिसबेन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन के 91 रन, ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ इंदौर में 139 रनों की पारी... सच कहूँ तो सचिन की लगभग हर इनिंग वैसी ही कमाल की होती है, जैसे ये सब लिखने के बाद याद आई ढाका में सचिन की 44 रनों की तेज़ पारी पाकिस्तान के विरुद्ध. आज सचिन के जन्मदिन के मौके पर सोचा उनकी कुछ अच्छी परियों का जिक्र यहाँ करूँ, आप अगर क्रिकेट देखते हैं सचिन के चाहने वाले हैं तो ये पोस्ट आपको जरूर पसंद आई होगी. अपनी भी राय दीजियेगा आपको कौन सी पारी सचिन की बेहतरीन लगी इनमें से.


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