ऑटो एक्सपो 2014

कार प्रेमियों की दिल्ली में कोई कमी नहीं है. तभी तो इस बार के ऑटो-एक्सपो में लोग इतने तादाद में आ रहे हैं. शनिवार और रविवार को करीब सवा लाख लोग ऑटो एक्सपो का हिस्सा बने थे, और बाकी के दिन भी करीब अस्सी हजार लोग ऑटो एक्सपो में आ रहे हैं. आज ऑटो एक्सपो का आखिरी दिन है. ग्रेटर इंडिया के इंडिया मार्ट में चल रहा ऑटो एक्सपो एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑटो शो है. ऑटो एक्सपो का आयोजन हर दो साल बाद किया जाता है. आमतौर पर ऑटो एक्सपो का आयोजन दिल्ली के प्रगति मैदान में होता है, लेकिन इस साल ऑटो एक्सपो का वेन्यू बदल कर ग्रेटर नॉएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में कर दिया गया. ऑटो एक्सपो कारों की प्रदर्शनी होती है जहाँ विभिन्न कार कम्पनियाँ अपनी नयी और आकर्षक गाड़ियाँ बाज़ार में लॉन्च करती हैं और उन कारों को लोगों के सामने पेश करती हैं. ये एक बड़ा प्लेटफोर्म होता है जहाँ कार कम्पनियां अपने उपभोक्ताओं से जुड़ती हैं. साथ ही छोटे ऑटोमोटिव कम्पनियों और कार डिज़ाइनरों को एक अच्छा मंच मिल जाता है, एक अच्छा एक्सपोजर मिलता है.

इस बार का ऑटो एक्सपो दो भागों में विभाजित था. ऑटो कंपोनेंट्स की प्रदर्शनी प्रगति मैदान में लगाईं गयी थी, जबकि गाड़ियों की प्रदर्शनी ग्रेटर नॉएडा के इंडिया मार्ट में. दिल्ली से करीब चालीस किलोमटर स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में भी लोग उतने ही तादाद में आये, जितने तादाद में प्रगति मैदान में लोगों की भीड़ लगती थी. लेकिन इस बार  आयोजन में प्रगति मैदान जितनी अच्छी व्यवस्था नहीं थी. बहुत सारी कमियां थीं इस बार के ऑटो एक्सपो में. लोगों को निःशुल्क मिलने वाली शटल बस सर्विस के बारे में कोई जानकारी पहले से नहीं थी. बोटेनिकल गार्डन मेट्रो जहाँ से मैंने इंडिया एक्सपो मार्ट के लिए बस लिया था, वहाँ कोई इन्फोर्मेशन काउंटर नहीं था जिससे ये पता चल सके की शटल बसें कहाँ से मिलेंगी. इसी दुविधा में अधिकतर लोग यू .पी रोडवेज की बसों में तीस तीस रुपये देकर ठूंसे हुए से गए थे जबकि शटल बसें खाली जा रही थी. बोटेनिकल गार्डन मेट्रो से बस दो सौ मीटर दूरी पर शटल बसें लगीं थीं फिर भी उनकी जानकारी देने वाला वहाँ कोई वालंटियर मौजूद नहीं था.
इंडिया एक्स्प्पो मार्ट के गेट नंबर वन से टिकट काउंटर भी काफी दूर बनाये गए थे. टिकट कहाँ से लेना है, लोगों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी. जिन्होंने ऑनलाइन टिकट बुक करवाया था(बुकमाईशो से) उन्हें भी काफी परेशानी हुई. ऑनलाइन टिकट कलेक्शन  काउंटर मेन गेट से बहुत दूर था. धूल ऐसे उड़ रही  थी  कि कपड़ों और जूतों पर कुछ ही मिनटों में धूल की परतें जम जा रही थीं. 
हॉल में जहाँ गाड़ियाँ थी, वहाँ लाईटिंग की भी थोड़ी समस्या थी..खास कर हॉल नंबर दो से छः में, जहाँ स्माल और मिड साईज कारें प्रदर्शित की जा रही थीं. एक्सपो में आम तौर पर सबसे ज्यादा भीड़ हॉल नंबर नौ से बारह में थी. ये जाहिर सी बात थी. विश्व की सब बड़ी बड़ी कंपनियों की प्रदर्शनी वहाँ लगी थी. बी.एम.डब्लू, ऑडी, मर्सिडीज, निसान जैसे कारों को देखने के लिए लोग भीड़ में एक एक घंटे तक खड़े रहे थे. वहीं बाकी छोटे और मिड साईज (मारुती, हुंडई, टाटा जैसी कम्पनियां) कार कम्पनियों के हॉल में भी अच्छी खासी भीड़ थी. हार्ले डेविडसन, यामाहा और ट्राइअम्फ बाईक्स देखने भी खूब सारे लोग आये हुए थे. भीड़ को नियंत्रित भी ठीक से नहीं किया जा रहा था जिससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही थी. 
वैसे तो इस ऑटो एक्सपो में अब तक बहुत से नए कार, नए कांसेप्ट मॉडल और डिजाइन लांच किये जा चुके हैं(लगभग साठ गाड़ियाँ) लेकिन छोटे और मिड साईज कारों के सेगमेंट में दो महत्वपूर्ण कारें लॉन्च हुई. एक तो मारुती की सेलेरिओ, जो कि भारत की पहली ऑटो गिअर शिफ्ट वाली कार है और दूसरी निसान की कंपनी डैटसन की नयी कार “गो”. डैटसन निसान का एक ब्रांड था जिसका प्रोडक्शन  1986 में बंद कर दिया गया था. 32 साल बाद इसे फिर से भारत में लॉन्च किया जा रहा है. दोनों गाड़ियों की कीमत लगभग चार लाख के आसपास है. इन दोनों गाड़ियों के आने से छोटे कार के मार्केट में अच्छी प्रतिस्पर्धा होने की उम्मीद है.
इन दो गाड़ियों के अलावा हौंडा  की मोबिलिओ भी लॉन्च की गयी है. हौंडा मोबिलिओ की कीमत करीब सात से आठ लाख के बीच होने की उम्मीद है, और इस गाड़ी से हौंडा भारत के MPV कार मार्केट में प्रवेश कर रहा है. मिड साईज सेगमेंट में टाटा ने जेस्ट को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत पाँच से छः लाख रुपये बताई जा रही है. मिड साईज कार में मारुती ने एक और बहुत महत्वपूर्ण गाड़ी लॉन्च की है…मारुती सिआज़. मारुती वालों की माने तो ये कार उन्होंने मिड-साईज सेगमेंट में लॉन्च की है, लेकिन इस गाड़ी का डिजाईन और लुक लक्जरी जैसा है. मारुती ने अभी तक सिआज़ की कोई और जानकारी नहीं सामने दी है, लेकिन ये माना जा रहा है कि इसकी कीमत करीब सात से आठ लाख के बीच होने की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो मिडसाईज कारों के मार्केट में ये बहुत महत्वपूर्ण गाड़ी साबित हो सकती है. इसके अलावा और भी कई सारे हाई-इंड लक्जरी गाड़ियाँ लॉन्च की गयी हैं, जिसकी विस्तृत जानकारी मैं आपको अपने कार वाले ब्लॉग पर देता रहूँगा. अभी के लिए तो जो गाड़ियाँ इस ऑटो एक्सपो में मुख्य रूप से पेश की गयीं, उन गाड़ियों के नाम देखिये…..Abarth 500, Ashok Leyland Dost Tipper , MiTR, Audi A3 sedan , BMW 3 Series Gran Turismo , BMW i8 , BMW M6, BMW X5, Chevrolet Corvette Stingray, Datsun Go+ , DC Eleron SUV, DC Tia 2-seater car , Fiat Linea facelift, Ford Fiesta , Honda mobilo, Hyundai Xcent, Jaguar F-Type, 2014 Jaguar XJ , 2014 Land Rover Discovery, Mahindra Torro, Mahindra Tourister, Maruti Celerio, Toyota Etios Cross, Evalia, Hyundai Veloster coupe, Jaguar XKR, Ssangyong Rexton, Ssangyong Korando , Mercedes Benz M-Class 3rd Generation, Mercedes S600 Pullman Guard , Nissan GT-R, Peugeot 508, Peugeot 3008 Crossover, Peugeot RCZ Sports Coupe. 
गाड़ियों के अलावा कई सारे बाइक्स भी लॉन्च किये गए इस ऑटो एक्सपो में…लेकिन जो सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ था वो थी ट्राइअम्फ डेटोना और हार्ले डेविडसन बाईक. इनके अलावा और जो बाइक्स इस एक्सपो में प्रदर्शित किये गए उनमें मुख्य हैं..Bajaj Pulsar SS400 and CS400 , DSK Hyosung Aquila, Harley-Davidson Street 750, Hero Dare 125cc scooter, Hero Hastur, Hero Splendor Pro, Honda CBR, Honda CX01 concept, Mahindra Mojo, Suzuki V Strom, Triumph Daytona, TVS Draken concept, TVS Graphite concept, Yamaha Alpha 110 cc scooter, Yamaha R25, Ducati Monster 795, Piaggio Vespa, Royal Enfield Thunderbird 500.
भविष्य के कार डिज़ाइनर से बात करते कुछ लड़के
कारों के अलावा एक और प्रदर्शनी लगी हुई थी इस ऑटो एक्सपो में. वो थे भविष्य के कार डिज़ाइनर्स और उनके डिजाइन की प्रदर्शनी. IIT Mumbai, IIT Delhi, NSD जैसे संस्थान के स्टूडेंट्स ने अपने द्वारा डिजाईन की गयी गाड़ियों के डमी मॉडल्स का प्रदर्शन किया था. इन स्टाल्स पर लोगों की भीड़ बहुत कम थी. लेकिन ये देख अच्छा लगा कि छोटे बच्चे और वैसे लड़के जिन्हें कारों में दिलचस्पी है, वो सीधे तौर पर इन कार डिज़ाइनर स्टूडेंट से कार के डिजाइन के बारे में बातचीत कर रहे हैं और कुछ सीख रहे हैं. ऑटोमोबाइल स्टूडेंट के लिए किताबों के भी कुछ स्टाल्स लगे. हॉल नंबर चार जहाँ ये स्टाल्स लगे थे, वहाँ काफी कम भीड़ थी…ये स्वाभाविक भी है, यहाँ बस वही लोग आ रहे थे जिन्हें सही मायने में गाड़ियों और उनसे जुड़ी बातों में दिलचस्पी थी.
MIT Inst. Of Design के स्टूडेंट्स के कुछ डमी मॉडल्स 
मेरे लिए दो ही सबसे मुख्य आकर्षण थे इस ऑटो एक्सपो के. पहला तो ये स्टाल्स जिसकी अभी मैंने बात की है…और दूसरा ये कि इस बार ऑटो एक्सपो में विंटेज कार फिर से नज़र आये. पिछले ऑटो एक्सपो में विंटेज गाड़ियाँ गायब ही थीं. लेकिन विंटेज कार शो में दो बातों से बहुत निराशा हुई. पहली तो ये कि विंटेज कारें जिस हॉल में रखी गयीं थीं, उन्हें पूरी तरह से नजरंदाज कर दिया गया था. रौशनी की भी ठीक से व्यवस्था नहीं थी उस हॉल में. जो कारें लाई  गयीं थी, वो लगभग वही विंटेज कारें थीं जिन्हें २०१० के ऑटो एक्सपो में प्रदर्शित किया गया था. दुनिया के दूसरे ऑटो एक्सपो में, नयी गाड़ियों के साथ साथ विंटेज और क्लासिक गाड़ियों की भी मुख्य रूप से प्रदर्शनी लगाई जाती है. लेकिन यहाँ इन गाड़ियों की प्रदर्शनी पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता.
कुल मिलकर इस ऑटो एक्सपो का आयोजन तो अच्छा ही रहा, लेकिन दिल्ली के प्रगति मैदान में होने वाले आयोजन की और वहाँ की व्यवस्था की कमी बहुत खली. आशा है की अगली बार आयोजक इस बार की कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगे और हम जैसे विंटेज कार पसंद करने वाले लोगों की बात सुनते हुए कुछ और अच्छी विंटेज और क्लासिक कारें प्रदर्शित की जायेंगी.

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  1. अभिषेक, कारों की जानकारी तो मुझे नही ( न ही ऐसी रुचि ),हालांकि तीनों बेटों के पास कार हैं , लेकिन आपका प्रस्तुतिकरण बडा अच्छा लगता है । और हाँ , ब्लाग देखने में इतना समय तो नही लगना चाहिये । आप देख रहे हैं न कि मेरे ब्लाग को बहुत ही गिने-चुने पाठक ही पढते हैं । हालांकि मेरे लिये वे असंख्य हैं । उनका आना "तुम मेरे घर मैं तुम्हारे घर" वाली नीति में नही आता ।

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