वरुण के लिए..

            वरुण, ये पोस्ट ख़ास तुम्हारे लिए …

वरुण : एक परिचय 

वरुण मेरा बहुत ही करीबी मित्र, मेरे लिए छोटे भाई जैसा है.साफ़ दिल का..खुशमिजाज़…मीठा बोलने वाला एक सीधा और सच्चा इंसान है ये.वरुण उन चंद अच्छे लोगों में से है जिनसे मिलने के बाद आपको यकीन होता है की दुनिया में अब भी अच्छाई बाकी है, और जिनसे मिलने के बाद आप उन जैसा बनना चाहते हैं.थोड़ा शर्मीला भी है(मुझे लगता है, हालांकि ये इंकार करता है) और एक भावुक इन्सान भी..मुझे ये लड़का बहुत रोमांटिक भी लगता है, मस्ती करना भी इसे पसंद है और बेहद खुश रहना वाला और आसपास के लोगों को खुश रखने वाला इन्सान है.

वरुण और मैं..शुरूआती दिन

वरुण और मैं…पहली मुलाकात

वरुण से मेरा परिचय कैसे हुआ ये एक अजीबोगारीब और लम्बी कहानी है, बस इतना समझ लीजिये की उस समय की हॉट और नयी आई सोशल नेटवर्किंग साईट “ऑरकुट” की मेहरबानी थी.ऑरकुट नया नया आया था और वरुण से दोस्ती वहीँ से हुई और ऑरकुट पर ही हमारी दोस्ती परवान चढ़ी.ऑरकुट के अलवा हम लगातार फोन पर भी बातें करते रहते थे.मैं इसके मृदुभाषी स्वाभाव का कायल था.इसकी कुछ बातें मुझसे मिलती थी..तो ये मुझे और अपना सा लगने लगा था.बहुत जल्दी ही हमन एक दुसरे के अच्छे मित्र हो गए थे.

वरुण से मेरी पहली मुलाकात साल २००७ में हुई थी.वो मुलाकात हालाँकि मात्र पंद्रह मिनट की थी लेकिन वरुण इतने आत्मीयता से मुझसे मिला था की लगा जैसे हम ज़माने ज़माने के दोस्त हैं.उसके बाद तो हमारी दोस्ती बढती चली गयी.हम दोनों में से किसी ने भी उस वक़्त ये नहीं सोचा था की एक समय ऐसा आएगा जब हम दोनों एक दुसरे के इतने करीबी मित्र हो जायेंगे, एक अभिन्न मित्र बन जायेंगे.

सच कहूँ तो वरुण ने मेरा हमेशा बहुत साथ दिया है.ऐसे कई दिन होते थे जब मैं उदास सा रहता था और सिर्फ वरुण से बातें हो पाती थी..उससे बातें करने के बाद, उसके फनी जोक्स और उसका मस्ती भरा लहजा मुझे बिलकुल तरोताजा कर देता था..कभी कभी वो ऐसे मजाकिया शायरी मुझे भेजता की मेरे चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ जाती थी..जैसे इस शायरी को देखिये, आप भी एक बार तो मुस्कुरा ही दीजियेगा..
“अलग अलग सी दुनिया यारो … अलग अलग से हम … दो घूँट तू भी पीले यार … सुबह तक खत्म हो जायेंगे सारे ग़म … !”

असल में वरुण का वैसी शायरी भेजने की वजह होती थी की मैं अपनी आदत से मजबूर हमेशा सबको शायरी  सुनाते रहता था..तो जवाब में वरुण ऐसे सस्ते शायरी मुझे भेजते रहता था.एक वाकया याद आ रहा है…बहुत पहले मैंने ग़ालिब की एक शायरी अपने फेसबुक प्रोफाइल पर चिपकाई थी, वरुण ने मुझसे उस शायरी का अर्थ पूछा..और मैंने जब उस शेर का पूरा अर्थ उसे समझाया तो उसे बड़ी हैरानी हुई..की मुझे कैसे सबके अर्थ पता चल जाते हैं..उसने जो कहा था मुझसे वो देखिये,
“paaji…thanx 🙂 sher samaj toh aagya … par ye batao ki galib aapko in sabke koi reference deke gya tha … 😮 :d .. aapko hi samaj aate hain kewal ye ..! :p”.अब मैं वरुण को इस सवाल का क्या जवाब देता? 🙂

वरुण लेकिन शायरी में शायद मेरी पसंद नापसंद का ख्याल रखता था..ये मुझे तब मालुम चला जब एक बार जन्मदिन के तोहफे में वरुण और प्रभा ने मिलकर मुझे अहमद फ़राज़ साहब की किताब “खानाबदोश” तोहफे में दिया.मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ..मैंने पूछा वरुण से की तुम्हे कैसे मालुम ये मेरे प्रिय शायर हैं.
वरुण ने कहा मुझसे “आप जो भी शायरी मुझे सुनाते हो, उसमे इनका ही नाम होता है, तो मैंने सोचा शायद आपके पसंदीदा शायर हैं ये…तो मैंने खरीद ली”.
सच कहूँ तो मुझे उस दिन काफी हैरानी हुई थी, मैंने कभी नहीं सोचा था की वरुण मुझे कोई किताब तोहफे में देगा, और उसपे ये तो कतई नहीं सोचा था की वो किताब मेरे प्रिय शायर फ़राज़ साहब की होगी.वरुण और प्रभा का वो तोहफा सच में मेरे लिए एक बेशकीमती तोहफा है.

मैंने जब ये ब्लॉग लिखना शुरू किया तो शुरू में बस चंद दोस्तों को ही इस ब्लॉग के बारे में पता था.उनमे से एक वरुण भी था.वरुण ने शुरुआत में मेरा इतना प्रोत्साहन बढाया, एक तरह से कहूँ तो इसके कमेंट्स इतने इन्स्पाइरिंग होते थे की मुझे लगता था की मुझे और ज्यादा और बेहतर लिखना चाहिए.मेरी हर बेकार से बेकार पोस्ट की इसने जी भर तारीफ़ की है..और मैं भी बेशर्मों की तरह अपनी हर पोस्ट के लिंक इसे भेजते रहा हूँ, बस उसकी राय जानने के लिए(जैसे इस पोस्ट का भी लिंक उसे मैं थामने वाला हूँ).उसकी क्या प्रतिक्रिया होगी हालांकि ये मुझे पहले से पता होता था.
वैसे मैं एक बात के लिए तो वरुण का हमेशा शुक्रगुज़ार रहूँगा, की एक मेरे दुसरे ब्लॉग पर कहानियों की एक कटेगरी का शीर्षक एक तरह से वरुण का ही दिया हुआ है..अगर वो शीर्षक उस दिन जाने अनजाने में वरुण से मुझे नहीं मिलता तो शायद मैं कभी उस ब्लॉग पर कोई कहानी लिख भी नहीं पाता.
मैं ये भी बता दूँ की वरुण खुद हिंदी और अंग्रेजी की अच्छी समझ रखता है, कभी कभी इसके कुछ नोट्स देखता हूँ तो सोच में पड़ जाता हूँ की इतना सीधा और भोला सा लड़का कैसे इतनी गंभीर बातें भी सोच लेता है.मैं इसे कहता रहता हूँ की तुम भी कुछ लिखना शुरू कर दो, लेकिन अभी तक इसने मेरी बात पर अमल नहीं किया है, मैं जानता हूँ जिस दिन भी वरुण ने लिखना शुरू किया वो अच्छा ही लिखेगा.

मैं, वरुण और दिल्ली  

जब से मैं दिल्ली आया हूँ, तब से वरुण का बड़ा साथ रहा है.वरुण और अकरम दो लोग ऐसे हैं जिनका दिल्ली में बड़ा सहारा रहा है मेरे लिए.लगभग हर सप्ताहांत पर हम मिल ही लेते हैं और कुछ अच्छा समय साथ बिताते हैं.दिल्ली खूब घुमा हूँ वरुण के साथ..दिल्ली में इसके साथ बिताये कुछ पल तो हमेशा हमेशा के लिए याद रह जाने वाले हैं.

यादों का कोलाज 

वरुण का और मेरे दोस्तों का जो ग्रुप है उसमे मुख्यत पांच लोग हैं(अनिल, मोना, अती, प्रभा और रुचिका). लेकिन ज़्यादातर हम तीन(वरुण, प्रभा और रुचिका) ही मिल पाते हैं.जितनी बार भी हम मिले हैं, सारा दिन बहुत अच्छा बिता है, एक यादगार दिन जैसा.हर दिन की अपनी अलग विशेषताएं रही हैं, और हर दिन जब भी हम मिले हैं कुछ न कुछ ऐसा हुआ है जिसके वजह से हम वो दिन कभी न भूल पायेंगे…चाहे वो वरुण के जन्मदिन वाला दिन हो…जब हम बहुत देर तक वैसा कोई रेस्त्युरेंट खोजते रह गए थे जहाँ वरुण केक काट सके, या चाहे वो कनौट प्लेस पर बिता एक पूरा दिन हो जहाँ हमने इस सदी की सबसे बकवास फिल्म(अइय्या) देखी थी…और फिर भी हम उस फिल्म के दौरान एक दुसरे का साथ होने की वजह से मजे कर रहे थे और जी भर हँस रहे थे…साकेत की वो सभी मुलाकात भी कभी न भूलने वाली है जहाँ हम सब दोस्त मिला करते थे.साकेत का वो मॉल(सेलेक्ट सिटी वाक) एक तरह से हम लोगों का एक मीटिंग पॉइंट बन गया था.साउथ एक्स के एक रेस्त्युरेंट की वो मुलाकात भी अपने में एक यूनिक मुलाकात थी, जिसमे बहुत सी घटनाएं हुई थी..रुचिका मैकडी से अख़बार चुरा लाई थी, वरुण और अनिल मैट्रमोनीअल कॉलम में अपने लिए पता नहीं क्या ढूँढ रहे थे..और सबने मुझे एक सेलिब्रिटी या कहें की एक पपेट जैसा बना दिया था, जिसके आगे पीछे खड़े होकर सब फोटो खिंचवा रहे थे.ये सारे और बहुत से पल दिल्ली के हमेशा हमेशा के लिए ज़हन में कैद होकर रह जायेंगे.

एक बड़ा ही अच्छा दिन

लेकिन अधिकतर वरुण से मेरी मुलाकात अकेले ही हुई है और ऐसे में खूब बोर भी किया है मैंने वरुण को अपनी बातों से.जब भी मौका मिलता मैं वरुण को किसी फिल्म, किसी किताब किसी कहानी के बारे में बताने लगता और मेरा ये दोस्त मेरी हर बात को उतने ही ध्यान से सुनता..मुझे बाद में जब ख्याल आता की शायद मैं कुछ ज्यादा बोल रहा हूँ और बेचारा वरुण चुपचाप सुन रहा है, तो मैं चुप हो जाता…लेकिन फिर किसी न किसी बात पर मैं किसी न किसी विषय को पकड़ लेता और वरुण को फिर से मेरी बातों से बोर होना पड़ता.
लेकिन जो भी हो, वरुण के साथ दिल्ली में वीकेंड बहुत अच्छी बीतती है, इसमें कोई शक नहीं.

ऐसे ही एक किसी वीकेंड में , सर्दियों वाली एक शाम वरुण ने मुझे प्रियंका के बारे में पहली बार बताया था…
प्रियंका कौन? वरुण की मँगेतर.

वरुण और प्रियंका 

सच कहूँ तो ये मुझे किसी परिकथा की कहानी ही लगती है…किसी स्वप्न जैसा ही तो सब कुछ लगता है…एक सुन्दर सा राजकुमार वरुण, एक परी सी राजकुमारी प्रियंका…दोनों मिले..एक दुसरे के करीब आये, दोस्त बने…एक दुसरे को पसंद किया..दोनों ने बीच प्यार हुआ…परिवार वालों की रजामंदी हुई और फिर दोनों की सगाई…और अब दोनों की शादी जो की नवम्बर महीने में होना तय है..जिसके बाद दोनों हमेशा हमेशा के लिए एक दुसरे के हो जायेंगे.

वरुण और प्रियंका 
वरुण और प्रियंका की सगाई इसी रविवार को चंडीगढ़ में हुई.मैं भी दोनों की सगाई में मौजूद था.दोनों बड़े खुश नज़र आ रहे थे.और हों भी क्यों न, आखिर दोनों ने एक दुसरे से प्रेम किया था और अब सगाई के बंधन में वो बंध गए, वो भी परिवार की रजामंदी से.मुझे यूँ भी प्रेम विवाह जो परिवार के रजामंदी से होते है वो बहुत अछे लगते है.वरुण और प्रियंका दोनों के परिवार वाले भी इस रिश्ते से काफी खुश दिख रहे थे, जो की एक सुखद बात लगी मुझे.मुझे दोनों को यूँ सगाई के बंधन में बांध जाना देखना बड़ा सुखद लग रहा था.पता नहीं क्यों जब से वरुण ने मुझे प्रियंका के बारे में पहली बार बताया था तब से मुझे लगता था की दोनों को एक होना ही है.वरुण ने उन दोनों की कहानी में आ सकने वाली एक समस्या के प्रति अपनी चिंता जताई थी, तब मैंने कहा था उससे – “देखना तुम दोनों के बीच कोई भी दिक्कत, कोई समस्या नहीं आने वाली है”..और ठीक वैसा ही हुआ भी.मुझे जाने क्यों इन दोनों का एक होना अनिवार्य सा लग रहा था.मैं दिल से चाहता था की वरुण और प्रियंका एक हो जाएँ.मेरी इस भावना के पीछे क्या बात थी, ये मैं बता नहीं पाऊंगा लेकिन मुझे लगता है वरुण समझ रहा होगा की मैं यहाँ क्या कहना चाह रहा हूँ.
वरुण और प्रियंका की जोड़ी बहुत ख़ास है, और कुछ लोगों के लिए एक तरह से एक मिसाल भी.दोनों का स्वाभाव, जहाँ तक मुझे लगता है एक सा ही है.प्रियंका भी वरुण की ही तरह मृदुभाषी स्वाभाव की है..बहुत ही प्यारी सी लड़की है.वरुण और प्रियंका की सबसे अच्छी बात ये है की दोनों एक दुसरे की भरपूर इज्ज़त करते हैं.सगाई वाले दिन दोनों को देखकर सच में ऐसा लग रहा था जैसे खुदा ने अपने हाथों से दोनों की तकदीर लिखी हो…जैसे वरुण और प्रियंका की ये खूबसूरत जोड़ी सच में ऊपरवाले ने ही बनाई है.

प्रियंका

जैसा की मैंने कहा, प्रियंका एक बेहद प्यारी और चंचल सी लड़की है.वरुण से काफी प्यार करती है, ये मैं जानता हूँ.पहली बार जब प्रियंका मुझसे मिली थी तब इसने मुझे एक अजीब से सिचूएशन में डाल दिया था.वरुण ने जाने क्या इसे मेरे बारे में बता दिया था.जब प्रियंका मुझसे मिली ये तो इसने सीधा मुझसे मेरा ऑटोग्राफ मांग लिया.मैं तो बिलकुल दंग रह गया…”ऑटोग्राफ? मेरा?किसलिए?” मैंने प्रियंका से पूछा.मेरी स्थिति तो बड़ी हास्यास्पद सी हो गयी थी…कुछ कहते ही नहीं बन रहा था मुझसे..प्रियंका ने मुझसे कहा की मैं लिखता भी हूँ इसलिए वो मेरा ऑटोग्राफ लेना चाहती है, मैंने उसे समझाने की बहुत कोशिश की की मैं सिर्फ ब्लॉग लिखता हूँ, लेकिन उसने मेरी एक न सुनी और मुझसे ऑटोग्राफ ले ही लिया.ये कहना गलत होगा की मुझे ख़ुशी नहीं हुई..आखिर वो मेरे ज़िन्दगी का पहला और शायद ऑटोग्राफ था.
प्रियंका से उस पहली मुलाकात के बाद भी मिलना होते रहा है, और जितना मिला हूँ उससे, जितनी बातें की हैं उससे उतनी ही वो भी मुझे अपनी सी लगने लगी है.एक बेहद प्यारी और मासूम सी लड़की.वरुण और प्रियंका की जोड़ी बिलकुल परफेक्ट है, शायद दोनों एक दुसरे के लिए ही बने हैं.शायद उनके लिए ही कहा गया है की रब ने बना दी जोड़ी.सच में वरुण और प्रियंका की ये खूबसूरत जोड़ी रब ने ही तो बनाई है.दोनों बस हमेशा युहीं हँसते मुस्कुराते रहे, हमारी यही दुआ और शुभकामनायें हैं दोनों के लिए.
वरुण और प्रियंका को सगाई की बहुत बहुत मुबारकबाद!  

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  1. अभि…बहुत प्यारी पोस्ट…मेरी तरफ से भी वरुण और प्रियंका के सुखद भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ…|
    सच कहा तुमने, ज़िंदगी में अचानक ही कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं जिन्हें देख कर इस दुनिया में बची अच्छाई पर यकीन कायम रह जाता है…|
    कुछ बातें याद आ गयी…पर फिर कभी…|
    🙂 🙂 🙂

  2. वरुण जी और प्रियंका जी को अशेष शुभकामनाएं!

    This post is an invaluable gift to them on such a beautiful occasion of their life…
    जिस आत्मीयता से आपने लिखा है, मेरा भी मन है… मांग ही लें: Autograph Please!!!

  3. bhaiya …. aapne toh mujhe amar kar diya …. pta nahi main toh ek normal banda hun … par aapne toh bhtt kuch likh diya … kuch zyada hi acha … jo shyd sahi bhi nahi hoga ! bt really thanks … aapke in shabdo ko kbi nahi bhool skta main !!!! 🙂 🙂

    • जितना मैंने लिखा है, मेरे हिसाब से सब सच ही है, मैंने तो यही महसूस किया है वरुण! 🙂

  4. ये तुम्हारा दोस्त है या हीरा ? अच्छा …ये हीरा हमेशा के लिए पन्ना का हो जाए यही शुभकामना है..

  5. प्यारी दोस्ती
    बहुत सुंदर अनुभूति
    बधाई

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    केक्ट्स में तभी तो खिलेंगे——–

  6. आप दोनों की मित्रता ऐसी ही बनी रहे … मुश्किल से मिलते हैं सच्चे दोस्त …
    वृक को भी बधाई आप जैसा दोस्त मिलने की … जीवन साथी मिलने की भी …

  7. तुम्हारी यादों को सहेजने की कला सचमुच मन मोह लेती है.. कितने खुशकिस्मत हैं वो दोस्त जिन्हें तुम मिले और ऑफ कोर्स मैं भी कि मेरा बच्चा इतना प्यारा है!! वरुण और प्रियंका को आशीष!!

  8. Many many congratulations to varun n priyanka…

    N bhaiya aap jb b likhte ho na to sbkuch picture ki tarah clear chalta hai, m also a big fan of urs, or aap pune aane k liye bus bolte rahiye aaiyega mat…

  9. Many many congratulations to varun n priyanka…

    N bhaiya aap jb b likhte ho na to sbkuch picture ki tarah clear chalta hai, m also a big fan of urs, or aap pune aane k liye bus bolte rahiye aaiyega mat…

    • क्या कहें शुभ्रा, सच में सोचते रह जा रहे हैं…लेकिन कोशिश है इस साल आने की पुणे…आऊंगा जब भी तो सबसे पहले तुमसे मिलूँगा.पक्का! 🙂

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