डबल सेंचुरी का बुखार – १-

बेखबर रहने से बड़ा सुख कुछ भी नहीं.कितनी सही बात है ये.इसका एक छोटा सा प्रमाण मुझे तब मिला जब कल शाम युहीं बेकार बैठे हुए अपने ब्लॉग के पुराने पोस्ट को पढ़ रहा था.पोस्ट के लिस्ट के तरफ जब गौर किया तो देखा की पब्लिश्ड पोस्ट की संख्या 204 है.यानी मैंने पोस्ट्स की डबल सेंचुरी ठोक दी और मुझे पता भी नहीं चला.ये तो वैसी ही बात हो गई ना की कोई बल्लेबाज बैटिंग कर रहा हो और 204 के स्कोर पर आकार उसे अचानक ये ख्याल आए की वो दोहरा शतक जमा चूका है.इस तरह की बेखबरी में सच में एक सुख है.वैसे २०० ब्लॉग पोस्ट का आँकड़ा पार करना कोई बहुत बड़ी बात शायद ना हो लेकिन फिर भी तसल्ली मिलती है की हमने इतनी पोस्ट लिख डाली है..तो कम से कम छोटा सा सेलिब्रेसन तो बनता ही है न.
वैसे भी प्रशांत ने मेरी सेंचुरी पोस्ट पर कहा था “बालक, आज तुम पूर्ण ब्लॉगर बन गए हो.. जब तक सैकडा और बरसी… अररर आई मीन, हैप्पी वाला बड्डे ब्लॉग का ना मनाये पोस्ट लिखकर, तब तक असली ब्लॉगर नहीं बनता है कोई.. :)” तो कम से कम अपने पूर्ण ब्लॉगर वाली छवि की तो इज्ज़त रखनी ही है मुझे तो एक खास पोस्ट लगा रहा हूँ जो की शिखा दी की इस पोस्ट से थोड़ी इंस्पायर्ड है.सबसे अच्छी बात उस पोस्ट में मुझे ये लगी थी की उन्होंने  कुछ वैसी टिप्पणियों का जिक्र किया था जो उनके दिल के बेहद करीब हैं.ब्लॉग में टिप्पणियों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है और अक्सर हमें कुछ ऐसी टिप्पणियाँ मिल जाती हैं जिन्हें हम चाह कर भी भूल नहीं सकते.ऐसी टिप्पणियाँ मुझे भी बहुत मिली हैं और कुछ टिप्पणियाँ तो ऐसी हैं जो दिल के बेहद करीब हैं..जिसे मैं कभी भुला नहीं सकता और उन टिप्पणियों को ईमेल में एक अलग फोल्डर बना कर सुरक्षित रख लेता हूँ..तो बस आज मैं भी वैसी ही कुछ टिप्पणियों का जिक्र करूँगा.

इस ब्लॉग की शुरुआत मैंने कैसे की ये न जाने कितनी ही बार मैं ब्लॉग में बता चूका हूँ और उन बातों को फिर से दोहराने में काफी वक्त निकल जाएगा, उसे आप अगर पढ़ना चाहे तो इस लिंक पर जा सकते हैं. टिप्पणियों की बात करूँ तो इस ब्लॉग पर सबसे पहला कमेन्ट था मेरी दोस्त शिखा का.हालांकि वो कमेन्ट मैंने डिलीट कर दिया था और उस पोस्ट को भी.वह पोस्ट जो मैंने 28 May 2007 को लिखी थी, उसमे कुछ व्यग्तिगत समस्याओं का जिक्र था और इसी वजह से मैंने उन बातों को डिलीट कर वहाँ अपना परिचय डाल दिया.अगर सही सही याद करूँ तो उस पोस्ट में कुल पांच कमेन्ट आए थे और सभी मेरे दोस्तों के ही कमेन्ट थे.ये मेरे वैसे दोस्त थे जिनका अपना कोई ब्लॉग नहीं था और मेरे ब्लॉग को देख कर सब उत्साहित थे..सब को लग रहा था की “भाई ने अपना वेबसाईट जैसा कुछ बना लिया है, बड़ा टैलेंटेड दोस्त है हमारा”.हिन्दी ब्लोग्गेर्स में मेरे ब्लॉग पर सबसे पहला कमेन्ट करने वाले थे “अशोक मधुप जी”, जिन्होंने 21 दिसंबर 2008 को “ग़ालिब के गज़ल” पोस्ट पर पहला कमेन्ट किया था.यकीन मानिए उस कमेन्ट ने तो मेरा दिन ही बना दिया था.पहले जब मैं रेडिफ ब्लॉग पर ब्लॉग्गिंग करता था तो मुझे कमेन्ट वहाँ भी आते थे लेकिन इस तरह के कमेन्ट की “हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। बढ़िया लिखें ..हजारों शुभकामनांए”, मुझे पहली बार मिले थे और मैं बेहद खुश था.उसके बाद मैंने लगातर दो पोस्ट लिख दिए लेकिन फिर लिखना एकाएक कम हो गया.प्रशांत का ब्लॉग ही मेरा एकमात्र सहारा था बाकी ब्लॉग पढ़ने के लिए, फिर 2009 के आखिर में एक दिन प्रशांत से मेरी लंबी बातचीत हुई तो उसने बताया की “चिट्ठाचर्चा” और “ब्लोग्वानी” दो हिन्दी ब्लोग्स संकलक हैं जहाँ से बेहतरीन ब्लॉग के लिंक मुझे मिलेंगे.मैं तब वहाँ से ब्लॉग पढ़ने लगा.प्रशांत के ब्लॉग में मैं कभी कभी कमेन्ट में कुछ लिख भी देता था लेकिन दूसरे लोगों के ब्लॉग पर मेरा पहला कमेन्ट जनवरी 2010 में इस पोस्ट पर आया था और जिस लेखिका का वह ब्लॉग है उन्होंने मेरे ब्लॉग के इस पोस्ट पर अपना पहला कमेन्ट किया था.बस यहीं से हिन्दी ब्लॉग्गिंग में मैं एक्टिव रूप से जुड़ गया.मेरे उस पोस्ट का लिंक जिसपर उस मशहूर लेखिका ने कमेन्ट किया था, प्रशांत ने 21 जनवरी 2008 को फेसबुक पर शेयर किया था और मुझे बहुत खुशी हुई थी की मेरे ब्लॉग का पोस्ट किसी ने शेयर किया है.


शुरुआत में मुझे सिर्फ मेरे दोस्तों के ही कमेन्ट आते थे, और याकीन मानिए उनके कमेन्ट इतने खूबसूरत होते थे की मैं उसे बार बार पढता.कभी कभी कुछ दोस्तों के कमेन्ट में बहुत गूढ़ रहस्य भी छिपा होता था जो अक्सर मुझे पता नहीं चल पाता था.एक बहुत ही खास पोस्ट है जिसपर आए लगभग सभी पन्द्रह कमेन्ट मेरे दिल के हमेशा करीब रहेंगे.उस पोस्ट का मैं जिक्र करना नहीं चाहता इसलिए माफ करें.रुचिका ,वरुण, दिव्या, मोना और शिखा के कमेन्ट खास तौर पर मजेदार रहते थे.मुझे याद है की एक मेरी पुरानी पोस्ट पर रुचिका ने ये बड़ा ही स्वीट सा कमेन्ट किया था
“i realy dont kno wot 2 write..! hadd se zyadaa achaa hai ye post.. n i realy mean it..! i wz cmpletly lost wen i wz reading it..! bhaiya.. may b it wz d bestest part of ur lyf.. but i feel.. ki u shud b happie.. coz u can create such moments again.. its not dat easy.. but its not impossible also.. i wz feeling.. my days wud b lost someday…n i dont want dat.. dats y i wz sad reading dis post.. i guess.. it wz d best tym of ur lyf.. but not d only best tym.. smthings will b back again..! 🙂 “

मैं पता नहीं क्या सोचा था की एक दिन मैंने एक पोस्ट और सड़ी हुई एक कविता लिख डाली और शीर्षक दे दिया “कुछ पुरानी यादों के नशे में”, जिसकी कड़ी आज भी मैं चलाते आ रहा हूँ…उस पोस्ट पर रुचिका का आया ये कमेन्ट मेरे दिल के काफी करीब है.

ब्लॉगर में उन दिनों बस मैं प्रशांत को ही जानता था और उसके कमेन्ट की बात करूँ तो उसने सबसे पहला कमेन्ट मेरे 2009 दिसंबर की पोस्ट “एक और वर्ष समाप्त होने को आया…” पर किया था.उसने लिखा था “naya maal bhai!! jaldi se kuchh likho.. :)”
अब उसका ये कमेन्ट पढ़ने के बाद मुझे लगा की मैं तो युहीं कुछ भी उल्टा सीधा लिखते रहता था ब्लॉग में, कहीं से कोई गज़ल, कोई न्यूज़पेपर का आर्टिकल शेयर करते रहता था, जिसे ये लड़का पढता है..तो इसकी भी संभावनाएं हैं की बहुत से और भी पढ़ते होंगे.सच कहूँ तो इसके इस कमेन्ट के बाद से ही मैंने ब्लॉग्गिंग को गंभीरता से लेना शुरू किया.आप भी अगर गौर करें तो देखेंगे की इस पोस्ट के बाद मैं नियमित रूप से लिख रहा हूँ.अशोक मधुप,प्रशांत,शिखा दी के बाद चौथे हिन्दी ब्लॉगर का कमेन्ट मुझें नीरज जाट जी का मिला.उनके ब्लॉग से तो मुझे एक नज़र में ही प्यार हो गया था..लेकिन अपने इस पोस्ट पर उनका कमेन्ट देख कर मुझे बहुत खुशी हुई थी.उन दिनों मैं इंग्लिश ब्लॉग भी नियमित पढता था, और ऐसे में ही एक दिन अचानक मुझे स्नेहा का ये प्यारा सा ब्लॉग दिखा.स्नेहा मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट करने वाली पांचवीं ब्लॉगर थी.

मुझे कभी कभी ऐसा लगता है की अच्छे और “सीरिअस” ब्लॉगर से पहचान करवाने में मेरी मदद जाने अनजाने रूप से प्रशांत ने खूब की है.शुरूआती दिन में कुछ बहुत ही अच्छे और सीरिअस ब्लॉग लेखक जैसे पंकज,कुश और सागर मेरे ब्लॉग से जुड़े.सागर भाई का पहला कमेन्ट पढ़ के तो मैं पुरे दिन हैरान रहा.पाश के ऊपर लिखी एक पोस्ट पर सागर का पहला कमेन्ट कुछ इस तरह का था – “कहाँ थे यार ?”, इतने मित्रतावत तरीके से इन्होने कमेन्ट किया था की मैं बहुत देर तक सोचता रह गया की कहीं ये पटना का मेरा कोई पुराना साथी तो नहीं है.हमारे एक और स्टार ब्लॉगर पंकज बाबू ने शहीद भगत सिंह के पत्र वाले पोस्ट पर अपना पहला कमेन्ट दागा था..“शहीदो कि चिताओ पर लगेगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालो का बस यही बाकी निशा होगा… आजकल तो मेले भी नही लगते 🙁 बहुत अच्छे दोस्त.”.कुश साहब ने भी उसी पोस्ट पर पहला कमेन्ट किया था.(पता नहीं किस वजह से इन पोस्ट्स में इन लोगों के कमेन्ट दिख नहीं रहे हैं लेकिन मेरे मेल में अब भी सुरक्षित हैं.)

पंकज बाबू से दोस्ती होते देर नहीं हुई.एक दफे पंकज का ब्लॉग पढ़ा तो इस लड़के से इस कदर जलन होने लगी मुझे की क्या बताऊँ.सोचने लगा की ये लड़का इतना अच्छा कैसे लिख सकता है.फिर बाद में जब मैंने अपनी एक कविता में पंकज को भी जगह दी तो उसने कमेन्ट में लिखा
“वाह जी तुम तो बडे प्रायोगिक कवि हो.. अच्छे अच्छे प्रयोग करते रहते हो.. शानदार कविता और हमरा मोस्ट वान्टेड नाम अपनी हिट लिस्ट मे रखने के लिये एक बहुत बडा वाला धन्यवाद ;)”. 

अब पंकज बाबू ने तारीफ़ की थी, तो हमारे मन में तो खुशी के लड्डू फूटने लगे थे.लगा सच में हम कोई बड़े प्रायोगिक कवि जैसे लिखने लगे हैं, लेकिन यह भ्रम भी जल्द ही टूट गया जब दूसरे लोगों की बेहतरीन कवितायेँ पढ़ने लगा और मुझे लगा की कविताओं की तो मुझमे समझ ही नहीं, बड़ी बेकार सी लगने लगी मुझे खुद की ही कविता.उसी कविता वाले पोस्ट में एक और ब्लॉगर से अच्छी मित्रता हो गयी थी, अथाह ब्लॉग वाले राजेन्द्र मीना जी, जो अब शायद ब्लॉग में एक्टिव नहीं हैं..उनकी टिप्पणी मुझे हमेशा काफी आत्मीय सी लगती थी, लगता था जैसे जो मैंने लिखा है उसे वो महसूस कर के टिप्पणी कर रहे हों.उनकी सबसे पहली टिप्पणी उसी कविता पर आई थी
दोस्ती का पूरा वर्णन कर दिया ..और वो भी सुन्दर शब्दों से सजी सुन्दर कविता के रूप में ….अधिक नहीं कहूँगा ..बस यही कहूँगा की आज से आपके दोस्तों में एक नाम और बढ़ गया , हमारा”..
और इसके बाद तो उन्होंने मेरे हर पोस्ट को झेला.भगवान ही जानते हैं कैसे झेला होगा उन्होंने..ब्लॉग लिखना शुरू करने से अब तक मेरे हर पोस्ट को झेलने में एक बड़ा नाम और भी है “क्षमा जी” का.वैसे सेंचुरी वाली पोस्ट पर क्षमा जी कह चुकी हैं, की वो हमारे ब्लॉग के पोस्ट को झेलती नहीं बल्कि शौक से पढ़ती हैं.


अप्रैल 2010 में लिखी मेरी एक पोस्ट “कुछ बातें ऐसे ही” पर एक बहुत ही प्यारा सा कमेन्ट आया था “गरिमा भाटिया जी” का.मैं शुरू में इनके ब्लॉग का नियमित पाठक था, और अब भी इनका ब्लॉग मेरे गूगल रीडर में सब्सक्राईबड है.लेकिन एक अरसा हुआ इनके ब्लॉग के तरफ रुख किये, वजह शायद ये रही होगी की स्नेहा के ब्लॉग के अलावा मैं कोई इंग्लिश ब्लॉग पढ़ नहीं पाता.समय नहीं मिलता मुझे और इन्होने भी लिखना कम कर दिया था.गरिमा जी का वो प्यारा सा कमेन्ट था
“I am commenting you in English on an assumption that you will not consider me as someone who is ashamed or ignorant to the importance of Hindi. I am strong supporter of Hindi in my office, that is because I have mostly Telugu-speaking folks around who make me die for listening to my own mother tongue. You might not believe me but after around 3 years I am reading in Hindi and honestly loved this! Hamari Matribhasha aur aapko mera saadar pranam 🙂 “

प्रेम ही सत्य है ब्लॉग वाली मिनाक्षी जी का शायद सबसे पहला कमेन्ट मेरे इस पोस्ट पर आया था.इस कमेन्ट का मेरे ईमेल में रह जाने की सबसे बड़ी वजह ये थी की मुझे लगा इन्होने स्लाईडशो देखने के लिए सच में मेहनत की थी और मुझे काफी खुशी हुई थी जब इनका कमेन्ट मैंने देखा था.मिनाक्षी जी की ही तरह हमारे ब्लॉगजगत की शान उड़नतस्तरी यानी की समीर चचा का पहला कमेन्ट इस पोस्ट पर आया था.यह पोस्ट मेरे लिए खास इसलिए भी है की उन दिनों इसी पोस्ट पर सर्वाधिक कमेन्ट आए थे.21 कमेन्ट, और मैं बहुत खुश था की मेरे किसी पोस्ट पर इतने कमेन्ट आए हैं.खुश होने की दूसरी वजह यह भी की उस पोस्ट पर समीर चचा ने टिप्पणी की थी.मुझे वो बड़े हाईफाई टाईप राईटर लगते थे और उनके ब्लॉग पर अक्सर सवा सौ से ज्यादा कमेन्ट आते थे..उनका कमेन्ट अपने ब्लॉग पर देख कर वाकई खुशी हुई थी.

कमेन्ट वाले ईमेल चेक कर रहा था तो पाया की कभी किसी ज़माने में स्मृतियों में रूस वाली हमारी इंटरनेशनल लेखिका मुझसे बड़ी इज्ज़त से बात करती थी..जैसे की इस पोस्ट पर आए इस कमेन्ट को देखिये. sach kaha aapne ye machine hamare liye honi chahiye ham inke liye nahi… ati har cheez ki buri hoti hai.”.
वैसे ये लेखिका अकेली नहीं जो शुरू में मुझसे इतनी इज्ज़त से बात करती थी, एक और महिला लेखिका और कहानीकार हैं जिन्होंने मेरी बहनों वाली इस पोस्ट पर लिखा था 
बहुत बहुत सुन्दर लगी ये पोस्ट…भाई-बहन के प्यार भरी शरारतों और मीठी-मीठी यादों से…सचमुच आप लकी हैं कि तीन बहनों का प्यार मिला है और वे भी लकी हैं कि अपने इस प्यार को समझा और अहमियत दी. निमिषा एवं ऋचा को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं “…
लेकिन ये किसी दूसरे ही ज़माने की बातें थी,अब तो वैसी इज्ज़त पाने के लिए तरस जाता हूँ..अब तो ये दोनों मुझे चिढ़ाते और डांटते नहीं थकती ;).


यह जो हमारी महिला कहानीकार हैं, और जो बड़ी बड़ी पत्रिकाओं के लिए जाने क्या क्या लिख चुकी हैं, मुंबई आकाशवाणी में भी न जाने कौन की बातें, कौन सी कहानियों की रिकॉर्डिंग करती हैं..उन्हें तो मैंने न जाने कितने पोस्ट से कितना कुछ याद दिलाया है, पर उनसे ये भी नहीं होता की मुझे उन सब उपकारों के बदले एक छोटा सा गिफ्ट ही दे दें…आप खुद ही उनकी इस पोस्ट पर आई टिप्पणी को देख लीजिए –
बहुत कुछ याद दिला दिया…अब तो सबकुछ रेडीमेड है…..पहले पूरी रात जागकर घर के बच्चे ही मंडप सजाया करते थे..कितनी सारी अनमोल यादें हैं…जिन्हें नई पीढ़ी कभी अनुभव नहीं कर पायेगी..
ऐसे न जाने कितनी ही बार मैंने उनको कई अनमोल यादें दुबारा से याद दिलाई हैं, लेकिन क्या करें…एक भी तोहफा हमें नहीं मिला अब तक..वैसे एक छोटा सा वाकया मुझे याद आता है..जब रश्मि दी से मेरी नई नई दोस्ती हुई थी और पता चला इनके काम के बारे में.एक दफे युहीं मैं घर में था, मेरी बहन भी मेरे साथ बैठी थी और मैं ब्लॉग पढ़ रहा था.इनका प्रोफाइल जब मेरी बहन ने देखा तो बोली…अरे ये तो मनोरमा और धर्मयुग के लिए लिखती हैं..मेरी पहचान करवाओ इनसे…हम भी अपना कुछ लिखा हुआ देंगे इनको और कहेंगे की छापवाईये धर्मयुग और मनोरमा पत्रिका में :).

१० जुलाई को मेरे माँ-पापा की मैरेज एनिवर्सरी है.और इसी दिन सलिल चचा का पहला कमेन्ट मेरे ब्लॉग में आया था.वैसे तो उनको बहुत पहले से जान रहा था, लेकिन वो सिर्फ मेरे दूसरे ब्लॉग ‘एहसास प्यार का’ से परिचित थे.इस ब्लॉग पर पहला कमेन्ट उनका यह था.माँ-पापा की मैरेज एनिवर्सरी वाली उस पोस्ट पर बहुत से कमेन्ट आए थे और हमारे देव भैया ने भी अपना पहला कमेन्ट उसी पोस्ट पर दागा था.राजेश उत्साही जी का भी पहला कमेन्ट उसी पोस्ट पर आया था और शायद शुभम जी की भी पहली टिप्पणी उसी पोस्ट में थी.

एक दफे मैंने छत की कुछ यादें लिखी थी, जिसपर पंकज ने और शुभम जी ने अपनी अपनी छोटी सी, प्यारी सी कहानी सुनाई..पंकज ने कहा 
छत का किस्सा तुमने खूब सुनाया दोस्त! मुझे भी अपनी छत से बहुत लगाव था.. उसपर टहलते हुए किताबे पढना… कहानिया गुथना.. और नज़्मो को कहना.. एक एकान्त सा होता था और खुद से ढेर सारी बाते होती थी..
बाद मे शायद उतने मन से मै कभी इसलिये भी नही पढ पाया क्यूकि कही छत नही मिली 🙂 और अन्धेरे मे छत पर कैन्डिल लिट डिनर.. वो स्ट्रगल के दिन थे.. मुझे याद है हम तीन दोस्त थे.. खाने के नाम पर खिचडी बनायी थी लेकिन बगल वाली लडकियो के सामने स्टैन्डर्ड न डाउन हो इसलिये हम कहते रहते थे कि अबे मशरूम बडे अच्छे बनाये आज.. 🙂 जब सब कुछ खा पीकर सोये थे तो हम तीनो एक ही गाना गा रहे थे..

ना उम्र की सीमा हो, न जन्म का हो बन्धन
जब प्यार करे कोई तो देखे केवल …

तीनो के मुह से तीन अलग शब्द निकले थे.. तन.. मन.. धन.. मैने ’मन’ ही बोला था 😉


शुभम जी ने भी अपनी पुरानी यादों को ताज़ा किया और हमसे बहुत ही प्यारी बातें उन्होंने शेयर की..उनकी टिप्पणी देखिये..

aapne to ara ki yaad dila di…jab garmi ki raat me chat per sote aur taare dekhte dekhte kab need aa jati pata bhi nahi chalta…aksar raat me hum sare bhai bahan( kai baar to maa papa tai tau) sab mil kar ghanto antakshri khelte…us raat ke andhere me ek dusre ko darate bhi khub the…sab kuch yaad dila diya aapne…neem ke niche kitkit khelna,jade ki sunahri dopahr, exam ke dino me ghanto chat per tahl kar padhna, charo or faili ons ki bunde, barish me bhigna,chhat me patang udana aur katne per use pakadne ke daud lagana, kabbdi badmintan pakdam-pakdai sab khub khele chat per…ufff kitna likhu ab to aur jyada miss kar rhi hu i wish mai jaldi ja pau ara kafi din ho gye gye huye ab….



ek baat to batana hi bhool mera chat tisri manjil per hai so ek baar chcht aane se pahle humne uper chat per hi ek choti si jhopadi banane ki sochi taki wahan apne sare patang latai waigarah store kar sare…inte niche aangan me pade the so humne ek choti se tokari me lambi si rassi bandi aur niche se inte chat per laane shuru kar diye…jab kafi sare inte ikkathe ho gye fir humne ek sundar si jhopadi banayi wo bhi mitti se into ko jod kar…ye sari kuch aisi khubsurat yaade hai jo tazindgi hume muskan deti rahegi…ab to aaj aapne mujhe pura ara ke rang me rang diya saare din miss karugi apna ghar…


जुलाई में ही जब मैंने अपनी जन्मदिन वाली पोस्ट जब लगाई थी तो उस पोस्ट से कुछ हो न हो, मुझे एक पते की बात मालुम हुई थी..की अपने प्रवीण भैया बैंगलोर में ही बसे हुए हैं और दूसरी मजेदार बात ये मालुम चली की शुभम जी का जन्मदिन और मेरा जन्मदिन एक ही दिन है.अपने जन्मदिन के अगले दिन मैंने एक पोस्ट लगाई थी, सिर्फ तस्वीरों वाली..और यह पोस्ट प्रशांत के इस पोस्ट से बहुत ज्यादा इंस्पायर्ड थी.प्रशांत के पोस्ट से इंस्पायर्ड सिर्फ एक यही पोस्ट नहीं थी..बल्कि ब्लॉग पर मैं जो “कुछ पुरानी यादों के नशे में” पोस्ट की कड़ी चला रहा हूँ, उसका आईडिया भी प्रशांत के ब्लॉग के एक पोस्ट “दो बाजिया बैराग्य” से मुझे आया था.मैंने उस कड़ी की पहली पोस्ट में इस बात का जिक्र भी किया था, तो जवाब में प्रशांत ने कहा –


बहुत दिल से लिखे हो दोस्त.. हर पोस्ट में पहले से अधिक निखार आता जा रहा है.. बस एक अफ़सोस रह गया कि तुम्हारे घर गया था तो आंटी जी से नहीं मिला, सिर्फ अंकल जी से ही मुलाक़ात हुई थी.. 🙁
एक दफ़े पापाजी को मैंने कहा कि हर रात दो बजे के आस-पास मुझे कुछ अधिक ही दार्शनिक से ख्याल या फिर आप लोगों कि बहुत याद आती है.. उन्होंने हँसते हुए कहा कि दो बजिया बैराग्य होता है तुमको?
बस वहीं से मैंने ये शीर्षक निकाल लिया.. लिखने का आइडिया मेरा था, पापाजी को क्रेडिट मैं नहीं देने वाला.. 😛


और इसी पोस्ट को लिखने के एक साल बाद इसी पोस्ट पर शिखा दी का एक बहुत ही गूढ़ रहस्य वाला कमेन्ट आया था, जिसके पीछे के राज़ को मैं बेनकाब नहीं करना चाहता…उन्होंने लिखा था 

बहुत अच्छा लिखा है. और तुम्हारी मम्मी बहुत इंटेलिजेंट हैं इसमें कोई शक नहीं. तभी तो वह बहुत इंटेलिजेंट लोगों की पोस्ट्स पढ़ती हैं 🙂 🙂


ये शिखा दी ऐसी ही हैं, एक ऐसी ही शरारत भरी इनकी टिप्पणी मेरे इस पोस्ट पर देखिये –


अरे मैंने कब तुम्हें कॉल किया? ऐसे ही बदनाम कर रहे हो ..हा हा हा ..Just Kidding..वैसे बहुत मजा आया ये पोस्ट पढ़ कर ..और आखिरी लाइन ….:) लव यू वाली… मैंने भी ले ली 🙂


यह टिप्पणी हमारे प्रशांत बाबू को भी मजेदार लगी..कहने लगे – हा हा हा.. शिखा जी ने भी क्या चुटकी ली है.:)


इस पोस्ट में स्तुति और प्रशांत का भी जिक्र था तो आराधना जी शिकायत करने लगीं..कहने लगीं..-


ई पटना वाले सब मिलकर गैंग बना रहे हैं क्या ? हैंएं ? देखो ज्यादा गुंडागर्दी नहीं करना… हम भी आजमगढ़ के हैं… नाम तो सुना होगा? आजकल तो बहुत चर्चा में रहता है 🙂 
बड़े मजेदार दोस्त हैं आपके… सब एक से बढ़कर एक.


इस तरह की हंसी मजाक मेरे ब्लॉग में बहुत हुई हैं, और ज्यादातर बार स्तुति,प्रशांत और अजय भैया ऐसे हंसी मजाक का हिस्सा रहे हैं.लेकिन इस पोस्ट में बस इतना ही.काफी लंबी पोस्ट हो गयी है ये, और बाकी की बातें, और मजेदार टिप्पणियाँ, उनके पीछे की कहानियां अगले पोस्ट में.इस विषय पर दो तीन कड़ी लिखने का इरादा है, और अगली कड़ी के लिए आपको ज्यादा इंतज़ार करना नहीं पड़ेगा, इस पोस्ट की अगली कड़ी कल शाम तक ब्लॉग में प्रकाशित हो जायेगी.तब तक इसे ही पढ़िए और गलतियाँ माफ कर दीजियेगा, रेंडमली लिखा गया है पोस्ट..बिना किसी तैयारी के.

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  1. वाह बधाई हो, डबल शतकवीर, अच्छा लिखा है, अच्छा लगता है तुमको पढ़ना, लिखते रहो ।

  2. ओह्ह.. मतलब बिना कमेन्ट किये लौट जाने वाले हम जैसे कुछ नालायक ब्लॉगर अपना नाम यहाँ नहीं देख पाएंगे… लेकिन मैंने आपकी लगभग साड़ी पोस्ट्स पढ़ी हैं… कुछ तो २-३ बार… और आपने जिन कमेंट्स का जिक्र किया है उन्हें भी पढता रहा हूँ… कमेंट्स अगर पोस्ट से जुड़े हों तो उन्हें पढने का मज़ा भी आता है… आप ऐसे ही गर्दा गर्दा लिखते रहिये, और हम जैसे लोग पढ़ते रहेंगे… हाँ, हो सकता है मेरा कमेन्ट न दिखे कहीं… कीप राईटिंग…. 🙂 और हाँ दोहरे शतक के लिए बधाई….

  3. शेखर बाबू..आप भी हद करते हैं…आप नालायक ब्लॉगर कैसे हो गए?नालायक ब्लॉगर इतनी अच्छी कविता कहाँ लिखता है जी??
    और मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ की आपने मेरी सभी पोस्ट पढ़ी हैं…:) 🙂

  4. बढिया है रोचक अन्दाज़ है हमेशा की तरह :))))))))))) बधाइयाँ अब तो दसवें शतक का इंतज़ार है 🙂

    • शुक्रिया वन्दना जी!!!आप लोगों की दुआ रही तो कभी न कभी दसवां शतक भी लग ही जाएगा! 🙂

  5. एक जमाना याद दिलाने के लिए शुक्रिया दोस्त.. आप ऐसे ही लिखते रहें, आप इतना अच्छा लिखने लगे हैं जो कि ब्लोगिंग का बंटाधार करने के लिए अकेले ही काफी है.. 😛

    • आप ऐसे ही लिखते रहें, आप इतना अच्छा लिखने लगे हैं जो कि ब्लोगिंग का बंटाधार करने के लिए अकेले ही काफी है.. 😛

      टिपिकल परसांत टाईप कमेन्ट 😉

  6. इस डबल सेंचुरी का तो जबरदस्त बुखार चढ़ा आपको…सारी पुरानी यादे ताज़ा कर ली…अच्छी लगी ये पोस्ट, यूँही लिखते रहिये…और हमारी शुभकामनाये तो है ही 🙂

  7. mera koi comment is post mein hai hi nai…
    to mera naam dene ki wat was d zaroorat???jb mera ek v cmnt tumhe yaha dena hi nai tha.. :/
    ol my cmnt wer so wonderful….ek b mention krte to post thodi theek hoti 😛

  8. अहा…. मीठी मीठी पोस्ट…बोले तो मिठाई का पूरा टोकरा ही उड़ेल दिया है :)कहीं किसी को डायबिटीज हो गई तो.?.
    वैसे तुम वाकई अच्छा लिखने लगे हो 🙂 भगवान करे कि तुम ऐसे ही सेंचुरी बनाए जाओ.
    we people are really lucky to have a friend like you.keep your golden nature for ever.

    • थैंक्स दीदी! वैसे आपके इस कमेन्ट पर सिर्फ थैंक्स कहना अच्छा नहीं होगा, तो आपके दिल्ली आने पर एक चोकलेट मेरी तरफ से फिक्स्ड रहा! 🙂

  9. पता नहीं किस वजह से इन पोस्ट्स में इन लोगों के कमेन्ट दिख नहीं रहे हैं लेकिन मेरे मेल में अब भी सुरक्षित हैं.)

    आप ब्लॉग में टिप्पणी पर जाकर उन कमेंट्स को स्पैम से मुक्त कर दीजिये…
    आप की इस पोस्ट को पढ़ कर पता चला कि ब्लॉगर भी बनते-२ बन ही जाते हैं, वरना हम तो सोचते थे कि ब्लॉगर बनते नहीं पैदा होते हैं… 🙂

    • गायत्री जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया सलाह के लिए..स्पैम की वजह से वो दिक्कत आती है, लेकिन उनके वे कमेन्ट स्पैम में भी नहीं हैं..अब मुझे ये शक हो रहा है की कहीं जाने अनजाने में मेरे से ही तो वे कमेन्ट डिलीट नहीं हो गए या फिर गूगल ने कुछ कारस्तानी कर दिया हो!

      वैसे हाँ ये सच है की ब्लॉगर भी बनते बनते बन ही जाते हैं! 🙂

  10. डबल सेंचुरी के लिए बधाई:)
    डबल सेंचुरी के बुखार में बड़ी रोचक पोस्ट लिखी है आपने!
    शतकों का सिलसिला साल दर साल चलता ही रहे…!
    आपकी बातों का दौर विराम न ले कभी…

  11. bhaiya 🙂

    ye bht bht bht bht bht bht bht bht bht sundarrrr post hai.. 🙂

    aur mera naam bhi hai 😛 ab toh SUPEr sundarrr hogaya 😀

    ittttti saaari memories.. kya kahun apki writings k baare me? 🙂

    bht acha likhtey ho bvhaiya.. likhte rahaa karro 🙂

    • 🙂 🙂 तुम्हारा नाम इसलिए तो दिए थे की पोस्ट सुपर सुन्दर हो जाए! 🙂

  12. वाह ! डबल सेंचुरी मुबारक हो अभिषेक जी.. ये बुखार अगली बहुत सारी सेंचुरीज़ तक यूँ ही चढ़ा रहे 🙂

    पुरानी पोस्ट्स और कमेंट्स पढ़ना हमेशा बड़ा अच्छा सा फील कराता है… ये ब्लॉग आर्काइव का नाम बदल कर टाइम मशीन कर देना चाहिये 🙂

    अगर हमें ठीक से याद है तो आपके ब्लॉग से मुलाक़ात गुलज़ार साब के मार्फ़त हुई थी शायद… तो लीजिये उन्हीं की नज़्म की दो पंक्तियाँ आपकी इस पोस्ट के लिये –

    किताबों से कभी गुज़रो तो यूँ किरदार मिलते हैं
    गये वक्तों की ड्योढ़ी पर खड़े कुछ यार मिलते हैं

    • हाँ सच में पुरानी पोस्ट्स और कमेंट्स को पढ़ने में बड़ा अच्छा सा फील आता है…
      वैसे हां, आपकी और मेरी मुलाकात गुलज़ार साब के मार्फ़त ही हुई थी, लेकिन आपकी पहली टिप्पणी शायद दूसरे किसी पोस्ट पर थी, अगली कड़ी में पता चल ही जाएगा! 🙂

  13. क्या बात है….कमेंट्स की एक फ़ाइल ही बना रखी है..
    हैरी पॉटर फिल्म के डम्बल्डोर की वो आलमारी याद आ गयी जिसमे छोटी-छोटी शीशियों में वो अपनी महत्वपूर्ण स्मृतियाँ संभाल कर रखते हैं…कुछ ऐसी ही होगी तुम्हारी फ़ाइल 🙂
    लिखते रहो ऐसे ही….अच्छा लगता है तुम्हे पढना…शुभकामनाएं
    और हाँ बहन से कहना….वो पत्रिकाएं तो कब की बंद हो गयी…तभी तो मुझे इतने बरस हिंदी से बनवास मिला हुआ था…इस ब्लॉगजगत ने ही फिर से हिन्दी से जोड़ा है.

    • हाँ चैतन्य, अभी देखा मैंने…अब जल्दी से तुम दो सौ पोस्ट पुरे कर लो…और मैं तीन सौ 😛

  14. प्यारी-प्यारी ढेर सारी बातों के बीच चमकते लिंक्स और और पढ़ने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। बड़ी आत्मीयता से लिखी गई है यह पोस्ट। ढेरों शुभकामनाएँ…बधाई।

  15. डबल सेंचुरी क्या ट्रिपल कहते तो भी कोई अचरज नही होता । इतना सारा और इतना प्यारा लिखते हो यह है अचरज की बात । इसके लिये निस्सन्देह बधाई…बहुत सारी बधाइयाँ ।

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