ड्राइविंग थ्रू द हिमलायस

अब ये एक पुरानी खबर हो गयी है.कम से कम एक महीने पुरानी खबर.जब से ये पोस्ट लिखा था मैंने तब से ही पता नहीं क्यों मैं इस पोस्ट को अपने ‘कार की बात ‘ ब्लॉग पे पब्लिश नहीं कर पा रहा था(शायद फोटो पब्लिश नहीं हो रहा था)..तब से ये पोस्ट वहाँ ड्राफ्ट में पड़ा हुआ था, सोचा की आज इसे अपने इसी ब्लॉग पे पोस्ट कर दूँ..आखिर ये ऑटो-रेसिंग की दुनिया में एक अलग तरह के कीर्तिमान से सम्बंधित जो पोस्ट है.शायद कुछ लोगों को इस खबर के बारे में अभी भी कोई जानकारी नहीं हो..

आज से लगभग एक महीने पहले, जब रेड बुल एफ वन में नए नए कीर्तिमान बना रही थी और सेबस्टियन वेटेल कोरियन ग्रैंड प्री जीत कर अपने एफ वन विश्व चैम्पियन होने की खुशी मना रहे थे, ठीक उसी समय रेड बुल के डेमो स्क्वाड टीम, कुछ वरिष्ठ सदस्य और ड्राइवर नील जानी(भारतीय मूल के स्विस ड्राइवर) कुछ अलग करने के मूड में थे..ऐसा जो पहले कभी किया नहीं गया ऑटो-रेसिंग के इतिहास में.फोर्मुला वन इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने के लिए अपनी एफ वन कार(2005 RB1) को हिमालय स्थित दुनिया के सबसे ऊँचाई पर स्थित मोटरेबल पास लद्दाख में ‘खारदुंग ला’ ले गयी.यहाँ ड्राइविंग करना लगभग नामुमकिन है. और इस बात पर बहस होते रहती है की यहाँ ड्राइविंग करना सुरक्षित नहीं इसलिए यहाँ ड्राईविंग की अनुमति नहीं देनी चाहिए.यह समुद्र तल से 18,300 फीट की ऊँचाई पर है.
यह मुकाम हासिल कर के रेड बुल ने एक अलग तरह का कीर्तिमान बनाया है जिसके तहत किसी भी एफ वन कार को दुनिया की सबसे कठिन परिस्थितिओं के बीच ड्राइव करके यहाँ तक पहुंचाया गया.पहले तय किया गया था की रेड बुल के कार को कंटेनर में रख के वहाँ पहुंचाया जाएगा और फिर डड्राइवर नील जानी कार के साथ कुछ तस्वीरें खिंचवाएंगे.लेकिन नील और उनके साथी कुछ अलग सोच कर आये थे और कार को खारदुंग ला तक बेहद कठिन परिस्थितियों में ड्राइव कर के ले गए.
यहाँ पर अक्सर एलटीटूड शिकेंस(M या S आकार जैसा शार्प टार्न)की समस्या होती है.ऑक्सीजन की भी कमी रहती है जो बेहद तकलीफदेह है.ऑक्सीजन की कमी से ड्राइवर को तो परेशानी होती ही है लेकिन वहीँ एफ वन कार के परफोर्मेंस पर भी काफी असर पड़ता है, क्यूंकि एक एफ वन कार का बेहतर प्रदर्शन बहुत हद तक उसके ‘एयर इनफ्लो’ पे निर्भर करता है.एफ वन कार का ग्राउंड क्लिअरेंस भी अधिक नहीं होता..इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की इस कीर्तिमान को स्थापित करने के लिए और इसे एक एतिहासिक ड्राइव बनाने के लिए रेड बुल ने कितनी मेहनत की होगी. 

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  1. मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ
    यहाँ बर्फ़बारी के अलावा कोई समस्या नहीं आती है, मैं तो बाइक लेकर गया था जुलाई २०१० में
    जिसके बारे में मैंने विस्तार से अपने ब्लॉग पर लिखा व दिखाया भी है।

  2. संदीप जी,
    मैं वहाँ कभी गया नहीं…लेकिन जो जैसा खबरों में देखा और सुना वो लिखा है मैंने!!
    आप वहाँ गए है तो निश्चित ही आपको ज्यादा जानकारी होगी.

  3. वैसे एक बात क्लिअर कर दूँ…'यह रिकॉर्ड हाइअस्ट एवर एफ वन ड्राईव के नाम है'.

  4. अभी भाई एक बात आपकी जानकारी में हो तो भी बता दूँ कि भारत में दुनिया की सबसे ऊँची सडक अब खारदूंगला नहीं रही है। अत: यह रिकार्ड भी अब फ़िर से बनाना होगा।

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