कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे

जगजीत सिंह जी के कुछ ऐसे गज़ल हैं जो मेरे दिल के काफी करीब हैं, जिनसे बहुत सी बातें, यादें जुड़ी हुई हैं.उन्ही कुछ चुनिंदा गज़लों को यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ.
आदमी बुलबुला है पानी का , और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है..
फिर उभरता है, फिर से बहता है…ना समंदर निगल सका इसको न तवारीख तोड़ पायी है..
वक्त की मौज पर सदा बहता, आदमी बुलबुला है पानी का  (गुलज़ार साहब की आवाज़)
जिंदगी क्या है जानने के लिए 
ज़िंदा रहना बहुत ज़रूरी है..
आज तक कोई रहा तो नहीं..
सारी वादी उदास बैठी है, 
मौसम-ए-गुल ने ख़ुदकुशी कर ली 
किसने बारूद बोया बागों में 
आयो हम सब पहन ले आईनें 
सारे देखेंगे अपना ही चेहरा 
सबको सारे हसीन लगेगें यहाँ 
है नहीं जो दिखाई देता है 
आईने पर छपा हुआ चेहरा 
तर्जुमा आईने का ठीक नहीं 
हमको ग़ालिब ने ये दुआ दी थी 
तुम सलामत रहो हज़ारों बरस
ये बरस तो फकत दिनों में गया
लब तेरे मीर ने भी देखें हैं 
पंखुड़ी एक गुलाब सी है 
बातें सुनते तो ग़ालिब हो जाते 

१)सुनते हैं की मिल जाती है हर चीज़ दुआ से
एक रोज तुम्हे भी मांग कर देखेंगे खुदा से

दुनिया भी मिली है ग़म ए दुनिया भी मिला है
वो क्यों नहीं मिलता जिसे माँगा था ख़ुदा से

आईने में वो अपनी अदा देख रहे हैं
मर जाए कि जी जाए कोई उनकी बला से .

२)आज फिर उनका सामना होगा
क्या पता उसके बाद क्या होगा

आसमान रो रहा है दो दिन से
आपने कुछ कहा-सुना होगा

दो क़दम पर सही तेरा कूचा
ये भी सदियों का फ़सला होगा

घर जलाता है रोशनी के लिए
कोई मुझ सा भी दिलजला होगा

३)चाक जिगर के सी लेते हैं
जैसे भी हो जी लेते हैं

दर्द मिले तो सह लेते हैं
अश्क मिले तो पी लेते हैं

आप कहें तो मर जाएं हम
आप कहें तो जी लेते हैं

बेजारी के अंधीयारे में
जीने वाले जी लेते हैं

हम तो हैं उन फूलों जैसे
जो कांटो में जी लेते हैं

४)कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मै उतना याद आऊंगा मुझे जितना भूलाओगे

कोई जब पूछ बैठेगा खामोशी का सबब तुमसे
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा ना पाओगे

कभी दुनिया मुकम्मल बन आएगी निगाहो मे
कभी मेरी कमी दुनिया की हर एक शह् बेमानी है

कही पर भी रहे हम तो मुहब्बत फिर मुहब्बत है
तूम्हे हम याद आएगे हमे तुम याद आओगे

५)अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना

मैंने पलकों पे तमन्‍नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्‍मीद की सौ शम्‍मे जला रखी हैं
ये हँसीं शम्‍मे बुझाने के लिए मत आना

प्‍यार की आग में जंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़बीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना

अब तुम आना जो तुम्‍हें मुझसे मुहब्‍बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कांई रस्‍म निभाने के लिए मत आना

६)उसके होटों पे कुछ काँपता रह गया
आते आते मेरा नाम सा रह गया

वो मेरे सामने ही गया और मैं
रास्ते की तरह देखता रह गया

झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गये
और मैं था की सच बोलता रह गया

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे
ये दीया कैसे जलता हुआ रह गया

७)तुम ये कैसे जुदा हो गये
हर तरफ हर जगह हो गये

अपना चेहरा न बदला गया
आईने से खफा हो गये

जाने वाले गये भी कहाँ
चाँद-सूरज घटा हो गये

बेवफा तो न वो थे न हम
यूँ हुआ बस जुदा हो गये

८)सुना था की वो आयेंगे अंजुमन में
सुना था की उनसे मुलाक़ात होगी..

हमें क्या पता था हमें क्या खबर थी
न ये बात होगी, ना वो बात होगी

मैं कहता इस दिल को दिल में बसा लो
वो कहते हैं हमसे निगाहें मिला लो

निगाहों को मालुम क्या दिल की हालात
निगाहों निगाहों में क्या बात होगी

मोहब्बत का जब हमने छेड़ा फ़साना
तो गोरे से मुखड़े पे आया पसीना
जो निकले थे घर से तो क्या जानते थे
की यूँ धुप में आज बरसात होगी

९)दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है 
मिल जाए तो मिटटी है,खो जाए तो सोना है 
अच्छा सा कोई मौसम तनहा सा कोई आलम 
हर वक्त का रोना तो बेकार का रोना है 
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है, किस छत को भिगोना है
१०)अगर हम कहे और वो मुस्कुरा दें 
हम उनके लिए जिंदगानी लुटा दें 
हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सजा दें 
चलो जिंदगी को मुहब्बत बना दें 
अगर खुद को भूले तो कुछ भी न भूले 
की चाहत में उनकी खुदा को भुला दें
क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे 
चलो उनके चेहरे से पर्दा हटा दें 
सजा दे, सिला दे..मिटा दे, बना दे 
मगर वो कोई फैसला तो सुना दे 
(इस पोस्ट पे कमेन्ट का ऑप्सन बंद रखा गया है)

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