राखी के दिन याद आयीं कुछ बातें

चयेरी..ये नाम कितना अजीब लगता है न..मेरी बहन ने ये मेरा नाम रखा है.कारण? मैं चाय बहुत पीता हूँ इसलिए..अब तक जितनों को बता चूका हूँ इस नाम के बारे में सब खूब हँसे और कुछ एक दोस्त तो मुझे अब इस नाम से ही कभी कभी बुलाते भी हैं.

मैं कभी अपने जन्मदिन पर केक नहीं काटता..पसंद नहीं है मुझे..अंतिम केक बहुत साल पहले कभी काटा होगा जब स्कूल में था..26 july 2009 को मेरे जन्मदिन पर मेरी बहन ने केक बनाया था और मुझे कहा केक काटने के लिए..मैंने जब मना किया तो उसकी दादागिरी  शुरू हो गयी -देखते हैं कैसे नहीं काटेगा तुम केक..चलो जल्दी से केक काटो..:P और मुझे अंत में केक काटना ही पड़ा.हमेशा ऐसा ही होता है, वो मुझपे ऐसे ही हुक्म चलाती है और धमका धमका के अपना काम निकाल लेती है.वैसे उस दिन केक वाकई में अच्छा बना था.

2009 के ही मार्च की बात है..शायद होली के एक दो दिन बाद की बात..मैं किसी काम से दिन भर घर से बाहर था.काफी थक गया था मैं..जब शाम के समय घर पहुंचा तो देखा मेरी सब बहन केक बनाने में व्यस्त हैं..और जैसे ही केक बना सब केक लेकर मेरे पास पहुँच गयीं और कहा की चलो केक काटो, आज हमलोग तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे. बर्थडे???पागल हो क्या??आज मेरा बर्थडे नहीं है और हम केक नहीं काटेंगे -मैंने कहा. मेरी बात वैसे भी मेरी बहनें कहाँ कब सुनती हैं, अंत में थक हार के मुझे केक काटना ही पड़ा और सबने मिलकर हैप्पी बर्थडे सॉंग भी गया, और जन्मदिन के जैसे ही मुझे सबको केक भी खिलाना पड़ा…बहन तो बहन, मम्मी भी उस दिन मेरी बहन सब के साईड पे थी. 🙂 

साल 2008 में राखी के समय मैं भी बैंगलोर में था और मेरी बहन भी.उस साल कुछ कारणवश राखी के दिन हम बैंगलोर के सिग्मा मॉल में मिले और वहीँ इसने मुझे राखी बाँधा था.आसपास के कुछ लोग बड़े आश्चर्य से मुझे और मेरी बहन को देख रहे थे 😛

आज सुबह मैंने कहा भी इससे की ऐसा करो तुम आ जाओ अभी…फिर से उसी सिग्मा मॉल में..अरे इतना फाइटर विमान है आसपास..कोई भी एक लेकर आ जाओ यहाँ..हद से हद एक दो घंटे में तो पहुँच ही जाओगी..हम उतना देर इंतज़ार कर लेंगे..लेकिन ये लड़की मानी ही नहीं…बेवकूफ है..जिद्दी है..अक्ल ही नहीं है 😛

वैसे तो ये मेरे से छोटी है लेकिन फिर भी बहुत हुक्म चलाती है..जब छोटी थी तो बहुत अच्छी थी लेकिन जैसे जैसे बड़ी होती गयी…वैसे वैसे और बिगड़ते चली गयी(अरे मजाक नहीं..सच में :P)..बचपन में तो ये बहुत अच्छी,आज्ञाकारी और भाई की सेवा करने वाली बहन थी…देखिये, मेरे पास प्रूफ भी है..:P

लेकिन जैसे जैसे बड़ी होती गयी….वैसे वैसे ये अपने भाई का सेवा करना भूलते गयी..लेकिन मैं अपनी बचपन की आदत नहीं भुला..देखिये इस बात का भी प्रूफ है मेरे पास : बचपन में भी इसे घुमाता था बाईक पे और आज भी…आज तो बाईक और कार…दोनों में इसका परमानेंट ड्राइवर मैं ही हूँ 😛

वैसे आज राखी में कई सालों के बाद ऐसा हुआ है की मैं अकेला हूँ..हमारा चार भई- बहन का ग्रुप है..निमिषा को तो आप जानते ही हैं, उससे जब बात की तो बड़ी उदास थी वो..कहने लगी देखो न रे इस बार कैसा तो हुआ की हम चारों अलग अलग सिटी में हैं.निमिषा की बात भी कितनी सही है..इस बार हम चारों भाई बहन अलग अलग ही शहरों में तो हैं.मोना(ऋचा) कश्मीर में,सोना(दीप्ति) पटना में, निमिषा जयपुर में और मैं बैंगलोर में..आज सही में बहुत मिस कर रहा हूँ सबको!!

कल रात ये सारे पोस्ट्स पढते पढते मैं सो गया..

Recent Articles

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर : शिक्षक दिवस पर खास

सुदर्शन पटनायक द्वारा बनाया गया, चित्र उनके ट्विटर से लिया गया आज शिक्षक दिवस है, यह दिन भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ....

तीज की कुछ यादें, कुछ अभी की बातें और एक आधुनिक समस्या

इस साल के तीज पर बने पेड़कियेबचपन से ही तीज का पर्व मेरे लिए एक ख़ास पर्व रहा है. सच कहूँ तो उन दिनों इस...

एक वो भी था ज़माना, एक ये भी है ज़माना..

बारिश हो रही हो, मौसम सुहाना हो गया हो और ऐसे में अगर कुछ पुराना याद आ जाए तो जाने क्या हो जाता है...

बंद हो गयी भारत की सबसे आइकोनिक कार, जानिये क्यों थी खास और क्या था इतिहास

Photo: CarToqपिछले सप्ताह, अचानक एक खबर आँखों के सामने आई, कि मारुती अपनी गाड़ी जिप्सी का प्रोडक्शन बंद कर रही है. एक लम्बे समय...

आईये, बंद दरवाजों का शहर से एक मुलाकात कीजिये

यूँ तो साल का सबसे खूबसूरत महिना होता है फरवरी, लेकिन जाने क्यों अजीब व्यस्तताओं और उलझनों में ये महिना बीता. पुस्तक मेला जो...

Related Stories

  1. रैन्डम्ली लिखा!!…बिना कुछ भी ज्यादा सोचे…बस लिखने का दिल कर रहा था तो जो भी एक दो बातें अभी दिमाग में थी, सब लिख डाला!!

  2. वत्स! तुम्हारा यह रैंडमली लिखना ही तुम्हारे पोस्ट की सुंदरता है.. कोइ बनावट नहीं, कोइ शब्दजाल नहीं.. बस डायरेक्ट दिल से.. उतना ही निश्छल जितने वे रिश्ते जिनका तुम वर्णन करते हो.. बस यर भावनाएं समेटकर रखो.. आगे जाकर यही सबसे बड़ी दौलत साबित होंगी!!

  3. बहुत बहुत सुन्दर. इतना अच्चा लगा पढ़ के और फोटो देख के तो सबसे जादा. जरा नवाब का नौटंकी तो देखो….गोड दबवा रहे हैं…उनह्हह…

  4. चयेरी…वो तो तुम पक्के हो…:P और हाँ, नाम तो कुछ और भी हैं तुम्हारे…:) और दादागिरी सिर्फ मोना के आगे नहीं चलती न तुम्हारी…बाकी तो…नो कमेंट्स…:) 😛

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

नयी प्रकाशित पोस्ट और आलेखों को ईमेल के द्वारा प्राप्त करें