अजब समित की गज़ब कहानियां

(कुछ महीनो पहले, अकरम का बैंगलोर आना हुआ था, ये पोस्ट उसी समय लिखा था मैंने, आज अकरम से बात करने के बाद ये पोस्ट की याद आई, तो सोचा पब्लिश कर ही दूँ..जानता हूँ, की समित अगर ये पढ़ लेगा तो मुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा , फिर भी रिस्क लेकर पोस्ट कर दे रहा हूँ)

इस पोस्ट से ये न समझ लीजियेगा की हमारे परमप्रिय मित्र श्रीमान समित सिन्हा जी को नींद में चलने की बीमारी है, वो तो बस कभी कभी कुछ हरकतें कर देते हैं नींद में..और फिर बाद में उन्हें याद भी कुछ नहीं रहता..हाँ, इन्हें नींद में बक बक करने की बीमारी जरुर है..फर्स्ट इअर इंजीनियरिंग में मैं और अकरम, रूममेट थे..समित और राकेश रूममेट थे.हम दोनों का कमरा अगल बगल था और दोनों के कमरे के बीच एक कॉमन दरवाज़ा जो अधिकतर बंद रहता था.अपनी आदत से मजबूर मैं और अकरम रात के दो तीन बजे तक हॉस्टल के बाऊंड्री पे बैठ के गप्पे करते थे..समित और राकेश हम दोनों की तुलना में बहुत सवेरे सो जाते थे..एक रात मैं और अकरम अपने कमरे में सोने जा ही रहे थे की अकरम ने कहा “रे अभिषेक…देखो तो अभी तक राकेश और समित जाग रहा है रे…दुनू गपिया रहा है. मैंने कहा “अरे छोड़ न यार, ऊ दुनू तो हमेशा देर रात तक गपियाता है..कितना बार हम सुने हैं. अकरम बाबु लेकिन अलग मुड में थे..रुको दोनों को बताते हैं, अकरम ने कहा..
जैसे ही अकरम ने दरवाज़ा खोला तो हमने देखा की समित और राकेश दोनों सो रहे हैं, और दोनों नींद में कुछ न कुछ बोल रहे हैं..फिर ये बात क्लिअर हुई की समित और राकेश दोनों को नींद में बोलने की बीमारी है, और हमें जो लगता था की समित-राकेश देर रात तक बातें करते हैं, वो असल में नींद में बोल रहे होते थे..कहते हैं न राम मिलाए जोड़ी” बस, वही बात थी..

इस तरह के काफी मसालेदार मोमेंट्स रहे हैं हमारे प्रिय मित्र समित बाबु के, कुछ चुने हुए मोमेंट्स आपके साथ भी शेयर कर रहा हूँ :


सीन १:
ट्रेन का सफर, समय- रात का कोई वक्त.

सब सो रहे हैं..समित भी खर्राटे लेकर आराम से सो रहा है..हमारे दोस्त आशीष बाबु जो निशाचर के नाम से भी जाने जाते हैं, जग रहे हैं..असल में वो कुछ देर सो रहे हैं और कुछ देर जग भी रहे हैं(वो ऐसे ही हैं).
ट्रेन कहीं किसी स्टेशन पे बहुत देर से खड़ी है.समित बाबु नींद से उठते हैं, आशीष बाबु को हिला के कहते हैं, जाओ रे..बैठे बैठे क्या ऊंघ रहा है…कुछ काम धाम करता नहीं..जाकर देखो गाड़ी काहे रुका हुआ…ड्राईवर से कहो गाड़ी आगे बढाने के लिए..

आशीष बाबु भी आज्ञाकारी मित्र की तरह आँख मलते हुए उठते हैं, ट्रेन से नीचे उतरने ही वाले होते हैं की उन्हें ख्याल आता है की “ये क्या कर रहा हूँ मैं?”
वो वापस आते हैं हमारे प्रिय मित्र समित बाबु को दो गाली देते हुए वापस सो जाते हैं.


सीन २:
समित-अकरम का कमरा, सेकण्ड इअर इंजीनियरिंग..,समय: रात के तीन बज रहे हैं.


समित बाबु को ये बीमारी रहती थी कॉलेज के दिनों में की कहीं कोई उनका कंप्यूटर(लैपटॉप नहीं, पूरा भारी भड़कम कम्पूटर)रात में उठा के न भाग जाए..इसलिए वो रात में अचानक से उठ के अपने कम्पूटर को दो सेकण्ड निहार कर वापस सो जाते थे..समित बाबु का रूममेट अकरम इस बात को जानता था, लेकिन मुझे इस बात की हलकी जानकारी भी नहीं थी.कुछ कारण से एक दिन अकरम को मेरे कमरे में सोना था, और मुझे समित के कमरे में सोना था.समित बाबु पहले ही सो चुके थे, मैं समित के कंप्यूटर पे एक फिल्म खत्म कर सोने गया ही था की कुछ देर बाद ये एहसास हुआ की मैंने दरवाज़ा बंद नहीं किया है(समित के रूम का दरवाज़ा छत पे खुलता और बाहर घुप्प अँधेरा).मैं धीरे से दरवाज़ा बंद करने के लिए जैसे ही उठा की समित के बेड से टकरा गया..हलकी आवाज़ हुई और समित बाबु अचानक से उठ के खड़ा हो गए(समित बाबु के उठ के खड़ा होने में फ्रैक्शन ऑफ सेकण्ड से भी कम का अंतर था).

मैं एकदम चौंक जाता हूँ, इसे क्या हुआ?..गुस्से में समित से कहता हूँ “अबे साले तुने तो डरा दिया..पागल है क्या?”

समित बाबु चुप हैं, एकदम खामोश.वो बस मुझे एकटक से देखे जा रहे हैं…

अबे क्या हुआ?

समित बाबु कुछ नहीं बोल रहे, बस एकटक से मुझे देख रहे हैं, फिर दरवाज़े की तरफ देखने लगे एकटक से..बाहर घुप्प अँधेरा और समित बाबु उधर ही देखे जा रहे हैं, फिर उनकी नज़र अपने कम्पूटर पे आकार टिक गयी..वो अपने कम्पूटर को एकटक से देख रहे हैं..फिर अचानक वो मुड़ते हैं और अपने बेड पे जाकर बैठ जाते हैं..फिर से अपने कम्पूटर की तरफ देखते हैं..फिर पंखे को देखते हैं..फिर बाहर छत की ओर देखते हैं, और फिर मुझे…मुझे वो कुछ सेकण्ड के लिए एकटक से देखते रहते हैं और फिर एक चवन्निया इस्माईल देकर चादर तान के सो जाते हैं.(उनके इस्माइल करने में और सोने में भी फ्रैक्सन ऑफ सेकण्ड से भी कम का अंतर था)
समित बाबु की इस हरकत से मैं ऐसा हैरान परेसान हो गया था, ऐसा डर गया था की मुझे नींद ही नहीं आई…समित से कमरे से अपने कमरे तक जाने की हिम्मत ही नहीं हुई..सुबह छः बजे तक मैं जागा रहा, फिल्म देखते रहा..अगले दिन समित बाबु को अच्छे से लताड़ा भी.

(ये बात अभी मुझे अकरम से बात करते वक्त याद आई)

सीन ३ :
रात के एक बज रहे हैं…फाईनल इअर, इंजीनियरिंग..समित-अकरम का फ़्लैट.

अकरम पढाई कर रहा है, समित सो रहा है.अकरम समित को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता, इसलिए बड़े एहतियात से दरवाज़ा थोड़ा खोल देता है, ताकी हवा आये कुछ, ग्लास उठता है, फ़िल्टर से पानी लेने के लिए…सब काम बड़े एहतियात से वो कर रहा है, ताकी समित बाबु के नींद में खलल न पड़े..लेकिन ग्लास रखते हुए थोड़ी आवाज़ हो जाती है…समित भाई की नींद अचानक टूटती है और वो एकदम से उठ के बैठ जाते है..

समित बाबु एकटक..बिना पलक झपकाए अकरम को देखे जा रहे हैं..

अकरम – क्या हुआ रे?ऐसे क्यों देख रहा है??

समित एकदम खामोश है…कुछ नहीं बोल रहा, बस अकरम को घूरे जा रहा है.

अकरम – अबे डरा काहे रहा है रे?क्या हुआ बोलेगा?

समित चुपचाप है.अकरम को डर लग रहा है…एकाएक समित खड़ा हो जाता है..


अकरम – रे…मारेगा क्या रे……अबे..अबे.. रात के एक बज रहे हैं और तू मुझे ज्यादा टेंसन मत दे…क्या हुआ??ऐसे काहे बिहेव कर रहा है?


समित अब भी चुप चाप है…अकरम के पास धीरे धीरे आता है, अकरम अब थोड़ा और घबरा रहा है, की इसे हुआ क्या…कहीं मारे वारे गा तो नहीं….कुछ सेकण्ड वहीँ अकरम के पास खड़ा रहता है.अकरम भी दुविधा में है की करे तो करे क्या?? अचानक समित दरवाज़ा खोल बाहर की तरफ भागने लगता है 


अकरम भी उसके पीछे पीछे भागता है ये देखने की वो कहाँ जा रहा है…समित अकरम को धक्का देकर छत की ओर जाने लगता है..अकरम भी हैरान परेसान छत प् आ जाता है..

अकरम – क्या हुआ रे?चुपचाप नीचे चल.?

समित थोड़ा स्थिर हुआ, कुछ ही सेकण्ड के बाद उसे लगा उसने कुछ गलत कर दिया..फिर शरमाया हुआ चेहरा लेकर हँसने लगता है..

अकरम – क्या हुआ बे?अब हंस क्यों रहा?
समित – (शर्माते हुए और धीरे से अकरम के पास जाकर कहता है) रे… सुन न भाई…ई बात किसी को बताएगा तो नहीं न…प्लीज मत बताना नहीं तो बेईज्जती हो जाएगा..
अकरम – ठीक है, बताओ तो..किसी को नहीं बताएँगे हम..
समित – अरे पता है क्या हुआ..हम ना सोये हुए थे और फिर नींद में अचानक हम सपना देखें की आज रात में इस्पेसल बाला चाँद निकला है..और जो उसको पाहिले देखेगा न वो करोड़पति बन जाएगा..बस इसीलिए हम उठ के भागे थे…तुम पाहिले देख लेता चाँद तब तुम न करोड़पति बन जाता…:P

कृपया ध्यान दें :- फोटो देख के हंसना मन है!! ->

अरे…ये क्या हुआ?कैसे हुआ?कब हुआ?क्यों हुआ??  —
हमारे प्रिय मित्र समित बाबु(कॉलेज के समय की फोटो)

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  1. हा हा ….समित बाबू को ये पोस्ट पढवाई या नहीं..?
    और उनका क्या रिएक्शन रहा…इस पर अगली पोस्ट लिख देना…:)

    क्या दिन रहे होंगे, वो भी ना…हमेशा जेहन में सुरक्षित रहेंगे…हमेशा की तरह बहुत ही आत्मीयता से लिखा है.

  2. तुम्हारा दोस्त लोग तुम्हारा बाजा नहीं बजाते हैं क्या, जो तुम रह-रहकर सबकी पोल खोलते रहते हो 🙂

  3. @आराधना जी..अरे मैं बस उन्ही दोस्तों की पोल खोलता हूँ जिनपे भरोसा है की वो बुरा नहीं मानेंगे…:)

    और वैसे समित को पिछले बार भी सरप्राईज़ किया था…उसके बारे में खूब सी तारीफें लिख कर :)…वो बहुत खुश हो गया था..और इस बार तो कसम से वो पढ़ेगा तो फिर से सरप्राईज़ हो जाएगा(कुछ ज्यादा ही) असल में वो शाकड होगा 😛 अब देखते हैं की कितना गरियाता है वो मुझे 🙂 तैयार हूँ मैं 🙂

  4. हँसते हँसते मुंह, पेट दोनों दुखा गया…गज़ब्बे का कहानी है जी…ऐसन ऐसन आदमी भी होता है 🙂

  5. Shaandar Abhisek… bahut kasi hui shaandaar yaad likhi hai… bahut achcha likha aur yaad kiya hai ye puja ne buzz mara tha wahan se aaya. haste haste bura haal hai dost… thank you. kuch aur bhi laate raho. man achcha ho gaya.

  6. बहुत अच्छा लिखा है…सच्ची, मज़ा आ गया…।
    अपनी नई पोस्ट की सूचना तो दे दिया करो…मुझे हमेशा अच्छा लगता है तुम्हारी इन यादों को पढ़ना…।

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