दो दोस्त –(माइक्रो पोस्ट)

मेरे दोस्त अकरम ने मुझे दो दिन पहले एक कहानी सुनाई थी फोन पर –

अकरम – 


दो दोस्त थे, दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे तरह समझते थे, दोनों एक दूसरे की हर बात मानते थे.सभी लोगों को जलन होती थी किआखिर दोनों में इतनी मित्रता क्यों है?बहुत लोगों ने कोशिश भी की दोनों को अलग करने की..लेकिन वो हर बार असफल हुए.अंत में थक हार के लोगों ने मान भी लिया की दोनों को अलग नहीं किया जा सकता.
उन दोनों के एक दोस्त को लेकिन ये बात कभी नहीं पचती, वो हमेशा उनसे जलता..उसे दो बातें कभी समझ में नहीं आई.पहली तो ये किआखिर ये दोनों एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह कैसे समझते हैं, और दूसरी ये कि ये दोनों एक दूसरे की हर बात क्यों मानते हैं.
उसने ये ठान लिया कि कुछ भी हो जाए, इन दोनों की दोस्ती को तोड़ने के बाद ही उसे सुकून मिलेगा.उसने तो पहले कई तरीके अपनाए, फिर जब कहीं से भी उसे कामयाबी हासिल नहीं हुई तो उसने उन दोनों से दोस्ती कर ली..फिर एक दिन मौका देखकर एक से पूछा की यार आखिर तुम अपने दोस्त का हर बात मानते क्यू हो? वो तुमसे अपने मतलब का बात निकलवा लेता है, तुम उसके हर बात को मत माना करो.
इस पर उस दोस्त ने उसे  जवाब में कहा – तुम्हे क्या ऐसा लगता है की मैं उसका हर बात मानता हूँ?? ऐसा नहीं है..असल में वो हमेशा वही बात करता है, जो मुझे अच्छा लगता है.वो हमेशा वही काम करने को कहता है, जो मैं करने की ख्वाहिश रखता हूँ या फिर जो मैं सोचता हूँ.वो ये जान लेता है की मैं क्या सोच रहा हूँ और फिर वो वही बात करता है.
ऐक्चूअली वी अन्डर्स्टैन्ड इच अदर सो वेल…हम एक दूसरे के दिल की बात समझ लेते हैं, वो समझ जाता है की मैं क्या सोच रहा हूँ, और मुझे पता चल जाता है की उसके दिमाग में कौन सी बात है…….एज सिम्पल एज दैट.



   यु नो अभि, हम दोनों भी उन दो दोस्त के ही तरह हैं!!



2007 की एक फोटो – अ मेमोरबल मोमेंट


          ..मिस यु अकरम!!







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