आखिर कब तक?

कल का दिन अच्छा था मेरा, शाम को मुड भी अच्छा लग रहा था,पूरी शाम मैं बाहर था, एक दूकान में चाय पी ही रहा था की सोचा घर बात कर लूँ, यूँ तो शाम में ही माँ से बात हो गयी थी, फिर भी सोचा की एक बार और फोन कर लूँ…माँ ने फोन पे जो बताया उसे सुन कर मैं स्तब्ध रह गया – मुंबई में सिरिअल ब्लास्ट हुए हैं! दिमाग में कई बात घूमने लगीं -जान पहचान वाले कौन कौन हैं मुंबई में, और ब्लास्ट आखिर कहाँ पे हुआ? जान पहचान का कोई उस इलाके में तो नहीं था उस वक्त जब ब्लास्ट हुआ हो?..कई बातें दिमाग में एक साथ दौड़ने लगी.जो भी जान पहचान वाले थे, सब की खैरियत मालुम हो गयी तो कुछ राहत मिली..लेकिन जैसे जैसे ब्लास्ट की ख़बरें इन्टरनेट पे देखते गया, वैसे वैसे गुस्सा और तकलीफ और बढते गयी..ब्लास्ट में मारे गए या बुरी तरह घायल हुए लोगों के परिवारों के बारे में सोच कर सिहरन सी होने लगी.

सरकार के सबसे प्रिय मेहमान, कसाब के बारे में सोच कर और भी गुस्सा आया…एक धमाके की याद ज़ेहन से गयी नहीं थी की एक दूसरा धमाका हो गया, लोग फिर से मरे, घायल हुए लेकिन कसाब अब भी ऐश की जिंदगी बिता रहा है..सही बात है, इतनी ज्यादा सुरक्षा कसाब को और कौन से देश में मिल सकती हैं.लोग यहाँ सुरक्षित हों न हो, सरकार को उससे क्या लेना देना..कसाब की सुरक्षा व्यव्यस्था में किसी प्रकार की कमी नहीं आनी चाहिए..देर रात ये बात भी पता चली की शायद कल कसाब का जन्मदिन था.
फेसबुक, न्यूज़ पोर्टल, ट्विट्टर, सब पे यही ब्लास्ट की ख़बरें थी..और सब सुन पढ़ देख के मन खराब हो गया था..मैं सोने चला गया..सुबह जैसे ही नींद खुली तो देखा प्रिया(मेरे दोस्त शेखर की मंगेतर)का मेसेज था –“शेखर से मेरी बात नहीं हो पा रही…रात के बाद वो फोन नहीं उठा रहा, दूसरे नंबर पे कॉल नहीं लग रहा..आपकी बात हुई क्या?” इस मेसेज के साथ प्रिया के चार मिस्डकॉल भी थे.अचानक मुझे याद आया की शेखर भी इस वक्त मुंबई में अपने भैया-भाभी के पास है, यह बात मुझे याद नहीं थी..मुझे लग रहा था की शेखर दिल्ली में है.प्रिया का मेसेज देख वैसे ही मेरे होश उड़ गए थे, शेखर को कॉल नहीं लग रहा था, प्रिया को कॉल किया तो मालुम चला की शेखर के बड़े भाई कल के ब्लास्ट में बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए थे, और कल देर रात तक उनकी हालत बहुत क्रिटिकल थी(उनकी हालत गंभीर अब भी है).
सुबह से न जाने कितनी बार ट्राई करने के बाद आख़िरकार दस बजे के लगभग मेरी बात शेखर से हुई.शेखर इतना घबराया हुआ और सहमा हुआ था की वो ठीक से बोल नहीं पा रहा था.मुझे शेखर की आवाज़ में ऐसा डर और सह्मापन पहली बार महसूस हो रहा था..उस वक्त तो शेखर ना बात करने के हालत में था और नाही कुछ भी बता पाने के हालत में, और पीछे से आती हुई लोगों की तेज आवाजें भी पता नहीं मेरे दिमाग के किस कोने में दस्तक दे रही थी.दोपहर में फिर से मैंने शेखर से बात की, उसके भैया की हालत उस वक्त तक नाज़ुक थी, और वो बार बार यही दुहरा रहा था की शाम तक उसे लगता है की भैया ठीक हो जायेंगे.
शेखर की ज़बान फोन पे बहुत ज्यादा लड़खड़ा रही थी..शेखर ने मुझसे कहा की “मुझे आजतक इतना डर पहले कभी नहीं लगा..बहुत डर लग रहा है मुझे, माँ-पापा भी अभी यहाँ नहीं हैं, और अस्पताल की हालत,लोग और अफरा तरफी से मैं एकदम घबरा सा गया हूँ”.शेखर की इस बात से मैं अंदर तक सिहर गया.अभी शाम में प्रिया के द्वारा मालुम हुआ की शेखर के भैया पहले से कुछ ठीक हैं, और शेखर के माँ-पापा भी वहां पहुँच गए हैं.शेखर के भैया जल्दी से स्वस्थ हो कर वापस घर आ जाएँ, मैं प्रार्थना कर रहा हूँ.
जहाँ तक मुंबई का सवाल है, पिछले बीस सालों में शायद यह बारहवां या तेरहवां हमला था शहर पर, जिसमे लोग कई सौ मरे भी, हजारों घायल भी हुए..फिर भी सरकार इस मामले में कुछ भी एक्सन लेने के इरादे में बिलकुल नहीं हैं..वहीँ अमेरिका में एक  9/11 हमला हुआ और अमरीकी सेनाओं ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुस के मारा..लेकिन हमारे देश में तो बात ही एकदम उलट है, यहाँ तो पिछले मुंबई हमले के आरोपी कसाब को हाई प्रोफाइल मेहमानों की तरह रखा जा रहा है, उसकी खातिरदारी की जा रही है, करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं केवल एक अकेले कसाब की सुरक्षा पर.अमरीका वालों की तरह घुस के दुश्मन को मारने की बात तो दूर, यहाँ तो आतंकवादियों को सरकार पाल पोस रही है, उसका ख्याल रख रही है.आतंकवादी भी कल को कहीं यह समझ के इस देश में आये की यहाँ के जेलों में उन्हें किसी किस्म की दिक्कत नहीं होगी, उनकी खातिरदारी की जायेगी, तो सुन के हमें आश्चर्य नहीं करना चाहिए.
दूसरी बात जो मुझे बहुत तकलीफदेह लगती है और हद इरिटेटिंग वो हमारे देश के नेताओं के द्वारा दिए गए शोक सन्देश, जिसमे वो मुंबई हमलों की निंदा करते हुए तरह तरह के वादे करते हैं की आतंकवाद को खत्म कर दिया जाएगा, पुरे देश को हाई-एलर्ट पर रखा दिया गया है..मजे की बात तो ये है की हाई-एलर्ट भी हमेशा ऐसे हमलों के बाद ही सुनने में आता है, और मुश्किल से एक दो हफ़्तों में हाई-एलर्ट पता नहीं कहाँ गुम हो जाता है..हमरे देश के लोगों की यादाश्त भी तो कमज़ोर रहती है, भारत एक दो क्रिकेट सीरीज जीत जाए, सचिन फिर सेंचुरी पे सेंचुरी बना लें, लोग खुशियाँ मनाने में फिर से जुट जाते हैं..
हमलों के बाद कोई भी शहर फिर वापस अपनी रफ़्तार पकड़ लेता है, रोजमर्रा के काम कब रुकते हैं, लेकिन जिन परिवारों में किसी की मृत्यु हो जाती है ऐसे किसी हमलों में, उनके लिए समय सही मायने में वहीँ रुक जाता है.इस दुःख से उबरने में उन्हें कभी कभी सालों लग जाते हैं, वहीँ ऐसे भी परिवारों की कमी नहीं जिनके ज़ख्म कभी भरते ही नहीं.लेकिन हमारी सरकार को क्या मतलब इन बातों से, एक राहुल गांधी साहब हैं जो मुंबई हमलों के बाद यह टिपण्णी करते हैं “99% terror strikes have been prevented”..ऐसे हालातों में ये टिपण्णी कहाँ सही बैठती है यह तो राहुल गांधी जी ही बता सकते हैं.वहीँ दूसरी तरफ हमारे माननीय प्रधानमंत्री की टिपण्णी आती है “Govt will do everything to prevent attacks in future”.अब कौन समझाए प्रधानमंत्री को, की अपने पिछले भाषणों से कॉपी-पेस्ट कर के कृपया न बोलें.कुछ शब्द जैसे “we strongly condemn the blast”,”govt will do everything to deal with terror”,”we announce payment of ___lakh to each kin of those killed and ___ lakhs to those injured”,”this is an attack on our democracy”,”those behind the attack will pe punished” जब हमारे देश के बड़े लीडर्स बोलते हैं तो लगता हैं की वही अपने पुराने भाषणों की कुछ लाईने इधर उधर कर के बोल रहे हैं.इन्हें ये बात कब समझ में आएगी की लोगों में आक्रोश बहुत है, इन बातों का अब लोगों पे कोई असर नहीं होने वाला, और सरकार की सहानुभूति,हमदर्दी भी लोगों को नहीं चाहिए.लोग तो बस एक ही ख्वाहिश रखते हैं की अपने शहर में वो अमन, चैन और सुकून से रह सकें, लेकिन आजकल के हालात को देखते हुए तो अब ये लगता है की हमें ऐसी ख़बरें सुनने की आदत डाल लेनी चाहिए..

मुंबई ब्लास्ट में मरे लोगों को श्रद्धांजलि 

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर लोगों का आक्रोश – 

Dear Government of India,
I don’t ask you to hang Ajmal Kasab.
I just request you to Protect us in same way as you have protected him.

Regards


kal ko agar pm ya kisi minister ka koi relative mare blasts and attacks mein tab inhe pata chalega ki dard kya hota hai blast mein apno ko khone ka!!!!!


Do hell with enquiry. Treatment must be on top priority rather than enquiry. People are crying and dying and government is busy using the repeated word enquiry prior to treatment. Disgusting !!!!!!


THE BLAME GAME IS ON AFTER THE MUMBAI BLASTS….IF THEY DNT GET ANYONE THEY WIL BLAME THE INDIAN CITIZENS WHO GAV THEM D POWER TO RUN D COUNTRY…..


govt feeding Kasab…10 crores spent…seems our Motto to the world is Commit any crime and we guarantee your protection at our jail


Citizens are not resilient by choice….they know that nothing can be expected from the administration….enquiry commission will be set…someone will be arrested…case will go on for few years or decades…finally he will be set free due to LACK OF EVIDENCE…..


कल के मुंबई बम धमाकों के बाद सिर्फ़ दो बातें दिमाग में घूम रही हैं , पहली ये कि , तो क्या अब दिल्ली मुंबई जैसे महानगरों में रहने वाले हमारे जैसों को ऐसे ही किसी आतंकी हमले में मरने या किसी अपने के मर जाने की खबर सुनने की आदत डाल लेनी चाहिए ..और दूसरा ये कि ….सरकार की सारी बकवास , आतंकवादी घटनाओं से परे जाकर बस इतना कहने का मन है …या तो निपटाइए ….या अब खुद ही निपट जाइए ..बस अब बहुत हुआ


‎”Why we innocent indians”…we are not innocent…we are guilty of bringing this once so powerful country…country of Chandragupt and Ashok…Country of Maharana Pratap and Prthviraj Chauhan to such a meek condition wherein it can be tormented and humiliated by any rouge organization/individuals…we are not innocent…we are guilty of not punishing “The Guilty”…


Y dese politicians are not attacked by Terrorist i wonder.! Its so easy for dem to say compensation will be paid to d Families of d people who died..We will pay compensations too.!


What happened to d Tight security arrangements after 26/11… People siffered again.! 😡


मैंने अभी अपने पिछले आलेख में ही इस बात की संभावना जताई थी कि , पडोस की अस्थिरता और वहां आतंकियों का बढता जमावडा , और सबसे बडी भारत की वर्तमान राजनीतिक हालात ,कुल मिला कर ..इससे ज्यादा संवेदनशील समय कोई नहीं है देश के लिए ..


इन हरामजादो … माफ़ कीजियेगा … पर इन हरामजादो को अब सबक सिखाने का वक़्त आ गया है … अगर अमरीका पाकिस्तान में घुस कर ओसामा को मार सकता है तो हम क्यों नहीं … अन्दर घुस के मारो सालो को … इन के बिल में ही भुन डालो इनको …


कब नज़र में आएगी, बेदाग़ सब्जे की बहार,
खून के धब्बे धुलेंगे, कितनी बरसातों के बाद!!


आखिर कब तक इंसानो का लहू यूँ ही बहता रहेगा ?

इंसान में हैवान कब आ बैठ गया
रूह पर कब्ज़ा वो कर कब ऐंठ गया
इंसानियत को वह निगलता ही गया
कब हुआ ? कैसे हुआ ? क्यों हुआ ?
सवाल है उलझा हुआ !!

(अपने देश में हो रहे हैवानी हमले कभी इस सवाल को सुलझने न देंगे क्या…)


जिस तरह बसों में लिखा रहता है-सवारी अपने सामान की खुद ज़िम्मेदार है…उसी तरह देश के हर गली-कूचे की दीवार पर लिखा है-आदमी अपनी जान का खुद ज़िम्मेदार है!


uff … गोली मारो देश के इन हुक्‍मरानों को …


एक विडियो देखिये – 


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  1. क्या कहें अभि ! सिहरन होती है सोच कर भी क्या बीतती होगी उनके घरवालों पर जो इन हमलों के शिकार बनते हैं.
    उसपर सबसे इरिटेटिंग, जब ये वी आई पी लोग उस क्षेत्र का दौरा करते हैं.जाने क्या करते हैं वहाँ जाकर?बचा खुचा जीवन भी तहस नहस कर देते हैं.

  2. कुछ मुंबई स्प्रिट कहेंगे इसे कुछ मज़बूरी..है तो मज़बूरी ही..लोग फिर से दफ्तरों में दस्तक दे रहे हैं…. डर कर चाहें जैसे भी…
    उम्मीद है आपके दोस्त के भैया जल्द ही ठीक हो जायेंगे…

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