नया लैपटॉप

मेरा नया लैपटॉप

एक महीने से अपने लैपटॉप को लेकर परेसान था.लैपटॉप के मदरबोर्ड में मल्टीप्रोब्लम की वजह से लैपटॉप रिपेअर नहीं हो पा रहा था.इस बीच दो सर्विस सेंटर में लैपटॉप को बनने के लिए दिया.एक का नाम “आउटशाईनी” है और दूसरे का नाम “क्लब लैपटॉप”. दोनों ही बैंगलोर के अच्छे लैपटॉप सर्विस सेंटर्स में से आते हैं.कुछ जान पहचान वाले लोगों ने इन सर्विस सेंटर्स में लैपटॉप रिपेर करवाए थे और इनकी सर्विस से वो बहुत खुश भी थे.मैंने एक दफे अपने पुराने लैपटॉप के सी.डी ड्राईव को रिपेअर “आउटशाईनी” से ही करवाया था, तो इसलिए सबसे पहले मैंने यहीं अपना लैपटॉप बनने के लिए दिया.इससे पहल मैं पटना में लैपटॉप को चेक करवा चूका था और उन लोगों ने  मुझसे कहा था की ‘ग्राफिक्स आई.सी’ खराब है और शायद मदरबोर्ड के एक दो कोम्पोनेंट भी खराब हैं.बैंगलोर आने के बाद “आउटशाईनी सर्विस सेंटर” में देते समय मैंने उन लोगों को ये बात बता दी थी की लैपटॉप के ग्राफिक्स चिप में कुछ खराबी है.उन्होंने कहा की दो दिन लगेंगे चेक करने में.तीन दिन बाद उनका जवाब आया की ग्राफिक्स में प्रोब्लम नहीं है और पावरमैनेजमेंट के एक आई.सी में प्रोब्लम है और ये आई.सी आसानी से मिलता नहीं मार्केट में.ऐसे करते करते करीब बीस दिन बीत गए, लेकिन वो लैपटॉप बना नहीं पाए.तंग आ कर मैंने उनके शॉप से अपना लैपटॉप वापस ले लिया.

उसी दिन एक दूसरे सर्विस सेंटर “क्लब लैपटॉप” में अपना लैपटॉप बनने के लिए दिया.यहाँ मैंने ये बात पहले ही क्लिअर कर दी थी की मुझे ये लैपटॉप जल्दी चाहिए, और पटना के सर्विस सेंटर वालों ने मुझे जो प्रोब्लम बताई थी वो भी मैंने इन्हें बता दी.इन्होने भी पहले एक दिन इन्स्पेक्सन किया और फिर ये इस नतीजे पे पहुंचे की मदर बोर्ड में मल्टीप्रोब्लम है, और ये रिपेर नहीं हो सकता.इन्होने कहा की एक ही तरीका है की मदरबोर्ड बदल दिया जाए.लेकिन उसमे दिक्कत ये थी की जिस सीरीज का मदरबोर्ड मेरे लैपटॉप में था वो बाजार में उपलब्ध ही नही, बस एसर(Acer) के सर्विस सेंटर वालों के पास उपलब्ध थी.एसर के सर्विस सेंटर में भी दो तीन चक्कर लगाए मैंने(शुरुआत में भी मैं यहाँ गया था, तो कहने लगे काफी पेंडिंग लैपटॉप पड़े हुए हैं, कम से कम २५-३० दिन लगेंगे बनने में,अगर बन पाया) तो पता चला की मदर बोर्ड की कीमत कुछ 12000 है.अब इससे बेहतर तो यही था की नया लैपटॉप ले लिया जाए.क्लब लैपटॉप में भी मेरा लैपटॉप बना नहीं, लेकिन सबसे अच्छी बात जो मुझे यहाँ लगी वो ये की बहुत ही अच्छे तरह से ये कस्टमर को हैंडल करते हैं,सीधा पॉइंट पे बात करते हैं और ये कस्टमर को बरगलाने की कोशिश भी नहीं करते हैं.यहाँ भले ही मेरा लैपटॉप नहीं बन पाया, लेकिन इनके व्यवहार से मैं काफी खुश हुआ.आखिर में थक हार के एक नया लैपटॉप खरीदना ही पड़ा.
इस एक महीने में जो एक बात मुझे लगी, वो ये की पटना में कप्यूटर का मार्केट बैंगलोर के मार्केट से अच्छा है और कुछ सस्ता भी.क्लब लैपटॉप वालों के यहाँ से जब मैं लैपटॉप ला रहा था तो मैंने पूछा उनसे, की मुझे पटना में जो प्रोब्लम बताई गयी, क्या वो प्रोब्लम हो सकती है?उन्होंने कहा की हाँ, एकदम हो सकती है, लेकिन वो चेक करने के लिए भी मदर बोर्ड में पावर चाहिए..उन्होंने फिर कहा की ये भी एक पोसिबिलिटी है की आउटशाइनी वालों के हाथों मदरबोर्ड के दो तीन और कोम्पोनेंट में खराबी आई हो.पटना में लैपटॉप को चेक करने में उन्हें बस ढेर घंटे लगे थें, और बैंगलोर के सर्विस सेंटर में दो दिन लग गए.जबकि जितने कस्टमर पटना के उस सर्विस सेंटर(हरिनिवास कोम्प्लेक्स का एक शॉप) में आते हैं रोजाना, उतने बैंगलोर के सर्विस सेंटर में नहीं आते होंगे, ये मैं पक्के तौर पे कह सकता हूँ.तो क्या इससे ये साबित नहीं होता की लैपटॉप या कंप्यूटर का रिपेरिंग पटना में जल्दी और अच्छे तरीके से हो सकता है बैंगलोर के मुकाबले.
कुछ साल पहले की बात है जब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था.कंप्यूटर के मोनिटर में कुछ खराबी आ गयी थी.मेरा मोनिटर सैमसंग का था.हैदराबाद लेके गया, एक दो सर्विस सेंटर में दिया भी लेकिन एक तो पैसे ज्यादा बाताने लगे और दूसरा कहने लगे ज्यादा वक्त लगेगा बनने में.मैं छुट्टियों में वापस पटना आ रहा था, काफी लड़के साथ आ रहे थे, मोनिटर को उठाया और पटना साथ लेते आया.यहाँ भी पहले सैमसंग सर्विस सेंटर में दिया, उन्हें खराबी पता नहीं चली.कहने लगे की वक्त लगेगा.वहाँ से लाकर मैं मोनिटर को हरिनिवास कोम्प्लेक्स(पटना का मार्केट कोम्प्लेक्स जो कंप्यूटर पार्ट्स/सेल्स के लिए मशहूर है) ले गया.बस दो दिनों में उन्होंने मोनिटर को रिपेर कर दिया, और पैसे भी सैमसुंग सर्विस सेंटर और हैदराबाद के सर्विस सेंटर के मुकाबले कम लिया.यही बात मोबाइल पे भी लागू होती है.मोबाइल का सर्विस और पार्ट्स जितने सस्ते आपको पटना में मिल जायेंगे उतने यहाँ बैंगलोर में नहीं मिलेंगे.
मेरे कुछ दोस्त ऐसे हैं, जो इंतज़ार करते हैं की पटना जायेंगे तो अपने लैपटॉप या कंप्यूटर में कुछ अप्ग्रेडसन करवाएंगे.मेरा भी अपना अनुभव यही रहा है की पटना में कंप्यूटर या मोबाइल का काम ज्यादा आसानी से और सस्ते में निपट जाता है.ये हो सकता है की मेरी ये राय गलत भी हो, लेकिन अब तक जैसा मेरा अनुभब रहा है उसके हिसाब से तो यही लगता है.बैंगलोर में भी एक एस.पी मार्केट है, जहाँ कंप्यूटर के पार्ट्स/सर्विसिंग/सेकण्ड हैंड सलेस काफी सस्ते में होते हैं.ये बात जानकार आपको थोड़ी हैरानी भी होगी की इस मार्केट में बहुत से दूकान या तो पटना के लोगों के हैं या फिर दिल्ली के.क्लब लैपटॉप वालों का भी हेड ऑफिस दिल्ली ही है और जो लोग यहाँ रहते हैं सर्विस सेंटर में वो भी वहीँ के हैं.
जब मुझे क्लब लैपटॉप वालों ने ये बताया था की आपका लैपटॉप बन नहीं सकता तो सबसे बड़ी चिंता मेरी थी की लैपटॉप के हार्ड डिस्क में जो मेरे डेटा हैं उनका क्या होगा.फिर उन्होंने ही मुझे कहा की आप अपने पुराने हार्ड डिस्क का केसिंग करवा लीजिए, और उसे आप एक्सटर्नल हार्ड डिस्क के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं,उन्होंने हार्ड डिस्क केस का कुछ 400 रुपये बताया.मुझे भी लगा की चलो, 400 रुपये लगेंगे लेकिन काम तो हो जाएगा.फिर उसी दिन युहीं मैंने एक दोस्त से ये बात कही.उसने कहा की एक काम करो कहीं और से खरीद लो, सस्ता पड़ेगा.मैं बैंगलोर के उसी एस.पी मार्केट में गया, और इत्तेफाक देखिये, यहाँ जिस दूकान से मैंने वो हार्ड डिस्क केस ख़रीदा, उसका एक दूकान पटना के जगत ट्रेड सेंटर में भी है.यहाँ मुझे हार्ड डिस्क केस सिर्फ 150रुपये में मिल गया.
15 मई को मैंने लैपटॉप बनने के लिए दिया था और इस एक महीने के समय में बड़े चक्कर काटने पड़े बैंगलोर के.लैपटॉप को एक समय लक्जरी आइटम में लोग गिना करते थे, और अब हालत ये है की बिना लैपटॉप आदमी एकदम अपंग हो जाता है.लैपटॉप या कंप्यूटर अब हर आदमी के जीवन का एक अहम हिस्सा बन गए हैं.ये पोस्ट मैं अपने नए लैपटॉप से ही लिख रहा हूँ.

Recent Articles

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर : शिक्षक दिवस पर खास

सुदर्शन पटनायक द्वारा बनाया गया, चित्र उनके ट्विटर से लिया गया आज शिक्षक दिवस है, यह दिन भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ....

तीज की कुछ यादें, कुछ अभी की बातें और एक आधुनिक समस्या

इस साल के तीज पर बने पेड़कियेबचपन से ही तीज का पर्व मेरे लिए एक ख़ास पर्व रहा है. सच कहूँ तो उन दिनों इस...

एक वो भी था ज़माना, एक ये भी है ज़माना..

बारिश हो रही हो, मौसम सुहाना हो गया हो और ऐसे में अगर कुछ पुराना याद आ जाए तो जाने क्या हो जाता है...

बंद हो गयी भारत की सबसे आइकोनिक कार, जानिये क्यों थी खास और क्या था इतिहास

Photo: CarToqपिछले सप्ताह, अचानक एक खबर आँखों के सामने आई, कि मारुती अपनी गाड़ी जिप्सी का प्रोडक्शन बंद कर रही है. एक लम्बे समय...

आईये, बंद दरवाजों का शहर से एक मुलाकात कीजिये

यूँ तो साल का सबसे खूबसूरत महिना होता है फरवरी, लेकिन जाने क्यों अजीब व्यस्तताओं और उलझनों में ये महिना बीता. पुस्तक मेला जो...

Related Stories

  1. तुम्हारा अनुभव बिलकुल सही है….अभिषेक….बैंगलोर-मुंबई जैसे महानगरों में Use and Throw का प्रचलन है…यहाँ पुराने चीज़ें रिपेयर करने में कोई रूचि नहीं दिखता…और ना उन्हें ये विद्या आती ही है…मुंबई में मेरा handycam रिपेयर नहीं हो सका…मेरे भाई ने धनबाद में करवा दिया..

    हमने भी कम मिस नहीं किया तुम्हारा लैपटॉप…अब क्यूँ..ये तो पता ही है…:)

  2. कुछ नया-नया सा तो लग रहा था, अब समझ में आया, यह नये लैपटाप का कमाल है.

  3. laptop ki ye kahani mujhpe bhi beeti hai. kaisa lagta hai bina laptop ke ye hum sirf ajane… uspe sabhid ata aur kaam ka ruk jana. khair maine bhi naya le hi liya. par purane ka moh ab bhi baki hai. bas parts milna hi mushkil hai. pata nahi kabhi banega bhi ki nahi. beech beech me mai try kar leti hun… lekin ab tak kisi ne thik nahi kiya… mera purana wala laptop

  4. एसपी मार्केट का मेरा अनुभव भी अच्छा रहा है…५००GB का हार्ड डिस्क लेना था. साथ में एक कलीग था, एडी पटना का ही…बोला कि चलो हम दिलवा देंगे अच्छा से और सस्ता में भी. उसके साथ मार्केट गयी वहां मस्त एकदम बिहारी हिंदी में बोला कि एक ठो अच्छा हार्ड डिस्क दो मेरे दोस्त है. उस वक्त transcend की हार्ड डिस्क पांच हज़ार में मिल रही थी मार्केट में मुझे बस ३७०० में मिल गयी.
    मेरा लैपटॉप भी अब मरने के कगार पर आया है…सोच रही हूँ नया खरीद लूँ.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

नयी प्रकाशित पोस्ट और आलेखों को ईमेल के द्वारा प्राप्त करें