चेहरे

इतने चेहरे नज़र आते हैं सड़कों पे,

किसी के चेहरे पे है खुशी 
तो किसी के चेहरे पे निराशा
हँसते हुए चेहरे को देख,
अक्सर हम समझते हैं ,
की वह  खुश है..
जिंदगी से संतुष्ट है..सुखी है..
पर हर चेहरे के पीछे छिपे होते हैं,
कई चेहरे
उस छिपे चेहरे का सच किसने जाना?
किसने पहचाना?
हँसते हुए चेहरे के पीछे छिपा होता है
वह  इंसान,
जो डरा हुआ है
घबराया हुआ है,
असफल है
टुटा हुआ है
निराश है..
जिंदगी की क्रूरता से 
बेहद परेशान है..
वह अपने चेहरे के ऊपर एक
मुखौटा लगाये घूमता है..
अपना दर्द छिपाने के लिए 
तो कभी ज़माने को धोखा देने के लिए,
वह  नहीं चाहता,
दुनिया उसके दर्द का मजाक बनाये,
वह नहीं चाहता,
दुनिया उसके असफलता पे हँसे,
वह नहीं चाहता,
दुनिया उसे हारा हुआ इंसान समझ,
अपने सफल समाज से अलग कर दे..
इसलिए वह अपने चेहरे पे हंसी लिए फिरता है
दर्द में भी मुस्कुराने का ढोंग करता है.
उसे अपनों की फ़िक्र है,
वह जानता है,
उसके अपने उसके दर्द से विचलित हो जाते हैं,
परेशान हो जाते हैं, दुखी होते  हैं..
और अपनों को दुखी देख 
वह और दुखी हो जाता है..

इसलिए वह अपनों से भी मुस्कुरा कर बातें करता है,
छुपा लेता है सारे दर्द और गम हंसी के पीछे 
और जीता है यूँ ही हर रोज़,
घुट घुट कर, डरते डरते. 
(बहुत पहले लिखी इस कविता को एक दफे श्रेया ने पढ़ा था और तभी से वो कह रही थी इसे ब्लॉग पे पोस्ट करने को..और अब शिखा दी के कारण इसे यहाँ पोस्ट कर पाया)

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  1. सभी अपने चेहरे के पीछे की दुनिया किसी को नहीं बताना चाहते हैं.. और चेहरे के पीछे बहुत कुछ छिपाना मजबूरी है.. बहुत पहले मैंने भी इसी विषय पर एक कविता लिखी थी..

    जो भाव उस कविता लिखते समय मेरे मन में थे वही भाव फ़िर आज तुमने हरे कर दिये 🙁

    क्योंकि इन भावों से लड़ना बहुत मुश्किल होता है।

  2. हँसते हुए चेहरे को देख,
    अक्सर हम समझते हैं ,
    की वह खुश है..
    जिंदगी से संतुष्ट है..सुखी है..
    पर हर चेहरे के पीछे छिपे होते हैं,
    कई चेहरे
    उस छिपे चेहरे का सच किसने जाना?
    किसने पहचाना?… pahchaante sab hain , per apne chehre mein dubak gaye hain

  3. सच हर इंसान के चेहरे को उघाड दिया है …………चेहरे भी बोलते है बशर्ते पढने वाली आंख हो……………बेहद पसन्द आई आपकी ये रचना……………दिल को छू गयी।

  4. आज हर चहरे पर मुखौटा चढा हुआ है..असली चहरा तो दिखाई ही नहीं देता..बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  5. आपका प्रयास शत-प्रतिशत सफल है .कलम यूँ ही चलाते रहिये कविता निकलेंगी ही .अच्छा लगा .

  6. बहुत ही बढ़िया कविता…
    तुमने पोस्ट कर दी…और हमें पता भी नहीं चला…ऐसे कैसे 🙁

  7. वह अपने चेहरे के ऊपर एक
    मुखौटा लगाये घूमता है…
    अब पढ़वा रहे हो ये कविता…???
    बहुत पसंद आई…और भी लिख डालो…खूब सारी…|
    🙂 🙂 🙂

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