तुमसे बना मेरा जीवन(पार्ट ३) : मुराद अली

(कुछ महीने पहले मैंने इस सीरीज की शुरुआत की थी, मकसद बस यही था की अपने कुछ दोस्तों के बारे में लिख सकूँ, पहले के जो दो पोस्ट रहे हैं वो हैं ये-पार्ट १ और ये.-पार्ट २.कुछ कारणवश इसे बीच में ही मुझे रोकना पड़ा था.लेकिन अब एक छोटा सा मौका आया है, तो सोचा की इसी मौके के बहाने ये सीरीज फिर से शुरू किया जाए.प्रस्तुत है मेरे दो और दोस्तों की बात)
साल २००९ की तस्वीर..मुराद और मैं. 
ये भाईसाहब हमारे सबसे पुराने मित्र हैं.हमारे दोस्ती का ये इक्कीसवां साल चल रहा है.मेरे से भी ज्यादा इंट्रोवर्ट..शर्मीले किस्म के लेकिन एक नंबर के मजाकिया इंसान.मजाकिया मुड भी इनका तब बनता है जब कुछ ऐसे दोस्तों के साथ रहते हैं जिनके कम्पनी में ये कम्फर्टेबल महसूस कर सके.मेरे घर में इनका जबरदस्त रुतबा है एक पढाकू,जिम्मेदार और बेहद अच्छे स्वाभाव वाले लड़के का.थोड़ी आदतें अजीब है इनकी, लेकिन फिर भी ऐसा कुछ नहीं जो टोलेरेट ना किया जा सके.स्कूल के दिनों में हम दोस्त इनके शान में एक गाना हमेशा गाते थे “या अली या अली..मेरा नाम है अली”.पता नहीं इसे ये बात अभी याद है या नहीं.मैं इसे अक्सर मुर्दवा कह के बुलाता था.वैसे नाम है इनका “मुराद अली”.
वैसे तो ये स्वाभाव के बहुत ही अच्छे हैं, और आसपास के लोग, दोस्त रिश्तेदार इन्हें एक बेहद सुलझा हुआ, सभ्य व्यक्ति मानता है..नहीं, ऐसा कतई नहीं है की मैं इन्हें सभ्य और अच्छा इंसान नहीं मानता, लेकिन इनके अंदर विराजमान कमीने इंसान से भी मैं अच्छी तरह परिचित हूँ.:P. मुझे एक बात याद आती है, 1994-95 की है..उस समय हमारे घर में टेलीफोन कनेक्शन लगा था, और मुराद के घर में टेलीफोन पहले से ही था.जब पहली बार मैंने इससे फोन पे बात की, तो मेरी छोटी मौसी भी मेरे पास में ही बैठी थी, वो कहने लगीं, की लाओ फोन दो तो..तुम्हारे दोस्त से बात कर के देखते हैं ज़रा…मैंने भी फोन दे दिया..फिर पता नहीं क्या हुआ..इसने क्या ऐसा कह दिया फोन पे की मौसी इसकी बड़ाई करने लगीं.मैं उस समय सोच रहा था की ये कमीने ने क्या ऐसा कह दिया..ये तो किसी एंगल से मुझे कोई अच्छा इंसान नहीं दीखता ;).
मेरे घर में हर कोई मुराद को पहचानता है..भले ही कुछ लोग मुराद से मिले नहीं हैं, लेकिन फिर भी..और सबसे पहले मेरे किसी दोस्त के नाम से घर वाले परिचित हुए थे तो वो इसी लड़के का नाम था.आज भी अगर कभी  पटना में रहूँ और घर में कहूँ की अपने दोस्त से मिलने जा रहा हूँ, तो परिवार वाले बिना मुझसे पूछे ये निष्कर्ष निकाल लेते थे की मैं मुराद से ही मिलने जा रहा हूँ.मेरी मौसी तो अब भी कभी कभी पूछ देती है “अरे तुम्हारा दोस्त मुराद कहाँ है?कैसा है??”
मुराद मेरे साथ सातवीं क्लास तक पढ़ा..आठवीं में मैंने दूसरे स्कूल में एडमिसन लिया.उस समय शायद मैं उदास भी इसी बात को लेकर था की अब मुराद से मिलना नहीं हो पायेगा.पुरे तीन साल पटना में होने के बावजूद हम नहीं मिल पाए..लेकिन हमारी बात लगातार होती रही..टेलीफोन के माध्यम से.ये तय था की हफ्ते में एक दिन वो कॉल करेगा और एक दिन मैं.मेरे स्कूल और दोस्तों की बातें मैं उसे बताता और अपने स्कूल और दोस्तों की बातें वो मुझे बताता..और ये टेलीफोन पे बातों का सिलसिला लगातार बिना रुके तीन साल चलता रहा.हमारी मुलाक़ात आख़िरकार तीन साल बाद हुई…दसवीं के एक्जाम के समय.बोर्ड एक्जाम में दोनों के सेंटर एक जगह ही पड़े थे.मुझे याद है, जिस दिन ये बात पता चली की दोनों के सेंटर एक ही जगह है, मैं बहुत खुश हुआ था..की मुराद से आख़िरकार मुलाक़ात हो जायेगी.
इस तीन साल में मैंने मुराद में बहुत गहरा एक बदलाव देखा.ये हो सकता है की मेरा भ्रम भी हो, लेकिन अभी भी मुझे यही लगता है की मुराद एकाएक बहुत ज्यादा इंट्रोवर्ट हो गया दसवीं के बाद.पहले जब तक हम दोनों साथ पढ़े थे(सातवीं कक्षा तक)..तब तक वो बहुत चुलबुल टाईप लड़का था..एकदम नौटंकी जैसा..मस्त.दसवीं के बाद भी मस्ती तो थी ही इसमें, लेकिन एक इंट्रोवर्ट का साया साफ़ दिखने लगा था.बारहवीं की पढाई हम दोनों ने एक ही जगह से की थी, इसलिए हर दम इसे कैम्पस में नोटिस भी करता था.हालाँकि ये सब बातें मैंने उसे उस वक्त बताई नहीं थी, लेकिन मुझे ऐसा हमेशा लगता था की वो थोड़ा(कुछ ज्यादा ही) रिजर्व रहने लगा है..मुझसे तो खैर कभी रिजर्व रहने की इसने कोशिश नहीं की(जान से नहीं मार डालता इसे,रिजर्व रहता मेरे साथ तो :P), लेकिन बाकी लोगों से ज्यादा बात नहीं करता था ये..और शायद इसी कारण इसकी दोस्ती ज्यादा लोगों से नहीं हो पायी.इसके जिंदगी में उस समय दोस्त के नाम पे बस तीन चार ही लोग थे. 
मुझे हमेशा ये सोच बड़ा आश्चर्य लगता था की मुराद की जिंदगी में वो मस्ती, वो आवारापन नहीं जो उस उम्र के बाकी लड़कों में रहती थी.वो अपने उम्र से बड़ा हो गया था.उसने अपने घर की सभी जिम्मेदारियों को समझना और निभाना शुरू कर दिया था.जबकि उसके ही हमउम्र हो कर हम लोग उस समय तक नहीं समझ पाए थे की घर की कौन कौन सी जिम्मेदारियां होती हैं.मेरे कुछ दोस्त, जो मुराद को अच्छी तरह से जानते थे, वो जब मुराद की खूबियों के बारे में बात करते तो उस वक्त मुझे बहुत अच्छा लगता.खुशी मिलती थी.ऐसा लगता था की वो सब मेरी बड़ाई कर रहे हैं.अब जब कोई मुराद के बारे में कुछ अच्छी बात कहता है तो खुशी तो अब भी होती है लेकिन साथ ही फक्र भी होता है की मुराद मेरा दोस्त है.
कुछ सालों पहले मुराद हैदराबाद आ गया एम्.बी.ए करने.मुराद ने अपनी बैचलर्स की पढाई पटना से ही की थी तो उस समय मुझे ये सोच बड़ी हैरानी होती थी की ये कैसे  हैदराबाद में अपने आप को एडजस्ट कर पायेगा.अनजान शहर, कॉलेज की बातों, होने वाली पोलटिक्स से तो वो एकदम अनजान है, लेकिन मुझे ये यकीन भी था की जिस लड़के ने समय से पहले ही अपने जिम्मेदारियों को समझ लिया था उसके लिए ये सब कोई बड़ी बात नहीं थी.मुराद के हैदराबाद आने के समय मेरी भी कुछ ऐसी परिस्थितियां थी की हम दोनों में ज्यादा बातें नहीं हो पाती.मैं कुछ अपने परेशानियों में उलझा हुआ था, और उसने पढाई में अपने आप को एकदम झोंक सा दिया था.काफी दिन दिन पे हमारी बात होती, लेकिन जब भी बात होती एक अलग ही आत्मीयता के साथ.शायद जितना मजाक मुराद मुझसे कर लेता है, जितनी गालियाँ(मजाक में ही सही,लेकिन वो चुकता नहीं इससे) वो मुझे देता है उतना कोई और दोस्त नहीं.
फ़िलहाल ये भाईसाहब एच.डी.एफ.सी बैंक, हैदराबाद में कार्यरत हैं.जहाँ से ये पढाई कर रहे थे(ओसमानिया यूनिवर्सिटी) वहां ये अपने बैच के टॉपर थे..वैसे पढाई लिखाई में तो खैर लड़का शुरू से होशियार और चतुर था, लेकिन टॉप करने लायक प्रतिभा तो इसमें पहले न थी…शायद ये भी हो सकता है की अपने कॉलेज के दिनों में इन्हें कोई ऐसी दिव्यशक्ति प्रदान हुई हो जिससे इमने टॉप करने वाली प्रतिभा अचानक से विकसित हो गयी.(वैसे ये लड़का कभी प्रतिभा नाम की एक लड़की को लाईन भी मारता था..श्श्श्श..टॉप सीक्रेट 😛).
अब तो लड़का थोड़ा जवान हो गया है(अरे दिल के मामले में) और लड़कियों में भी थोड़ी बहुत रूचि लेने लगा है..पहले तो ये लड़कियों के मामले में हद शर्मीला था, अब थोड़ी बहुत शर्म टूटी है और टूटी भी कैसी…गुप्त सूत्रों से पता चला है की इसने मेरे लिए एक सुन्दर सी भाभी जी का भी इन्तेजाम कर रखा है..खोज रखा है इसने..और बस देरी है अपने घर में इसकी खबर देने की…तो हम तो शादी का डेट फिक्स हो जाने का बाट जोह रहे हैं….वैसे ये बात बस मेरे शक के घेरे में है, इसलिए कन्फर्म नहीं कुछ कह रहा(मुझे पता है की मुराद ये बात पढ़ के मुझको जबरदस्त लतियाने वाला है :D).
अभी कुछ दिनों पहले यही नामुराद लड़का मुराद का बैंगलोर आना हुआ.और तब मैं बहुत खुश हुआ था, जब इसने मुझे बैंगलोर आने की बाट बताई थी.दिन भर मुराद मेरे साथ रहा, जिस दिन आया था, उसी दिन शाम में उसे जाना भी था वापस.पुरे दिन हम दोनों नॉनस्टॉप बोलते रहे, और जब वो चला गया तो बहुत देर तक मैं ये सोचता रहा की जब मैं मुराद के साथ होता हूँ तो कितनी बातें करता हूँ, बेइंतहा बोलता हूँ.मुझे लगा अगर कोई बैंगलोर के जान पहचान वाले दोस्त ने मुराद के साथ मुझे देख लिया तो वो सोच में पड़ जायेंगे की “मैं इतनी ज्यादा बातें भी कर सकता हूँ, इतना बोल भी सकता हूँ”.मुराद के साथ रहना, मुराद की कम्पनी हमेशा खास होती है.हर बार हमारी बातें बेहद ही मजाकिया मुड से शुरू होते होते बेहद गंभीर हो जाया करती हैं, और फिर वापस मजाकिया मुड में हम वापस चले आते हैं.बातों का ऐसा चक्र हमारे बीच अक्सर चलता रहता है. 
अब मुराद की भी अपनी एक दुनिया बस गयी है हैदराबाद में,उसके नए दोस्त बन गए हैं..नए रिश्ते..लेकिन अब भी मैं उसकी जिंदगी में वैसे ही शामिल हूँ जैसे इक्कीस साल पहले था.मैं हमेशा से अपने सभी दोस्तों को ये कहता आया हूँ की मेरे जिंदगी में काफी अच्छे दोस्त मिले हैं मुझे, लेकिन मुराद के जिंदगी में घूम फिर के सबसे अच्छा दोस्त कहलाने,सबसे निकट दोस्त लायक सिर्फ मैं ही हूँ(शायद अब भी).ये बात सोच मुझे हमेशा बहुत खुशी भी होती है और बहुत फक्र भी महसूस करता हूँ, की मुराद के जिंदगी के सबसे अहम व्यक्तियों में मेरा नाम कहीं ऊपर है, सबसे ऊपर नहीं, लेकिन फिर भी है.
हमारी ये दोस्ती बनी रहे….हमेशा, हरदम…!!
अभी पिछले हफ्ते जब मुराद का बैंगलोर आना हुआ..

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  1. क्या बात है,..अभिषेक…एक एक कर अपने दोस्तों से मिलवाए जा रहे हो…बहुत अमीर हो भाई..असली धन तो ये कमाए हुए रिश्ते ही हैं..जिन्हें जितना खर्च करो…बढ़ते जाते हैं.

    इस बेबाक अंदाज़ में लिखी पोस्ट पढ़ बहुत मजा आया…तारीफ तो की ही अपने दोस्त की…खिंचाई भी कर डाली…राज़ भी बता डाले…ये सब एक नजदीकी दोस्त ही कर सकता है.:)
    तुम्हारे दोस्त को असीम शुभकामनाएं

  2. अभिषेक जी, बहुत प्यारा लिखा है अपने!
    आपके दोस्त से मिलकर खुशी हुई!
    आपको और आपके दोस्त को असीम शुभकामनाएं!!
    काफी बेहतरीन पोस्ट लगी ये!

  3. निश्छल प्रेम, अटूट रिश्ते और प्रेमपगी लेखनी! इससे बेहतर मधुरता का कोई पर्याय नहीं हो सकता. भगवान तुम्हें लम्बी उम्र दे ताकी तुम प्यार बाँटते चलो!!

  4. मुराद और तुम्हारी दोस्ती कायम रहे…शुभकामनाएँ….अच्छा लगा मुराद के बारे में जानकर.

  5. व्यक्तित्व के साथ न्याय किया आपके लेख ने। जीवन कभी ऐसे मोड़ों से गुजरता है कि यह भूल जाता है कि प्रारम्भ कहाँ से किया था?

  6. हे हे हे..काम ऐसा करेंगे तो क्या होगा….पूरा पोल पट्टी खोल के रख दी आपने तो उन बेचारे की… अब तो आपके दोस्त बेचारे डर गए होंगे पाता नहीं कब उनकी खुपिया रिपोअर्ट उजागर कर दें….

  7. होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं। ईश्वर से यही कामना है कि यह पर्व आपके मन के अवगुणों को जला कर भस्म कर जाए और आपके जीवन में खुशियों के रंग बिखराए।
    आइए इस शुभ अवसर पर वृक्षों को असामयिक मौत से बचाएं तथा अनजाने में होने वाले पाप से लोगों को अवगत कराएं।

  8. abhi ji bhut acchha lga aapne jo apne dost ki bate bataai…bhut acchhi trh dhund dhund ke sabdo se saja ke likhte hai hr feelings ko…haan aap abhi bhi unke dosto me sabse upar hai ya nhi pata nhi ..lekin wo aapke zivn me sabse pahle or sabse mahutwpuru malum parte hai…holi ki dhero badhai….

  9. मुराद को किस मुँह से शर्मीला कह रहे हो भाई…??? तुम खुद कुछ कम शर्मीले टाइप हो का…:P
    btw…जो तुमको अच्छे से जानते हैं वो तुमको किसी के साथ जब बकबक करता देखेंगे न, तो बिना बताए समझ जाएँगे कि वो तुम्हारा बहुत, बहुत ख़ास है, बहुत प्यारा है…|
    मुराद के बारे में वैसे बहुत कुछ सुन चुके हैं तुमसे, लेकिन यहाँ पढ़ के बहुत मज़ा आया…God bless u both…long live your friendship…:) 😀

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