राष्ट्रगान – कितना सम्मान और कितना अपमान

पहली बात तो ये की आज के युवाओं में से अधिकतर ये तक नहीं बता पायेंगे की राष्ट्रगान कौन सा और राष्ट्रगीत क्या है..दोनों के मतलब भी नहीं मालुम बहुतों को..सम्मान देने की बात तो बाद में आती है.

कुछ महीने पहले की एक बात है, कुछ काम से अपने एक कॉलेज के सहपाठी के घर गया था, देखा की उसके लैपटॉप पे “जन गण मन” का एनिमेटेड वर्जन बज रहा था, और वो भाईसाहब आराम से बिस्तर पे लेट के चिप्स खा रहे थे.मैंने तुरत आपत्ति जताई इस बात पे..कहा – यार राष्ट्रगान चल रहा है, कम से कम खड़ा तो हो जाओ…तो बदले में मेरी बात समझने के, वो मुझसे बहस करने लगा…कहने लगा की “तुम इतना सेंटी क्यों हो रहे हो यार…गाना ही तो है…आराम से एन्जॉय मुड में सुनो और एन्जॉय करो”..एन्जॉय मुड में???? मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था, उससे बहस करने का कोई इरादा भी नहीं था, क्यूंकि इन सब मामलों में पहले भी कई बार हमारी बहस हो चुकी थी, और मैं इस निष्कर्ष पे पहुंचा था की उसे अपने भारतीय होने पे न तो कोई गर्व है और इन बातों से उसे न कोई मतलब..बहुत पहले मेरी लिखी एक देशभक्ति कविता का भी इसी बंदे ने जबरदस्त मजाक बनाया था और उस समय कई हफ़्तों तक मैंने इससे बात नहीं की थी.. और अब ये..इस बार भी मैं चुप चाप उसके रूम से उसी वक्त वापस आ गया और फिर कभी उससे मिलने की कोशिश भी नहीं की.

मेरी एक खराब आदत ही कह लीजिए(जो अब नहीं रही) की जब भी मैं किसी को देखता हूँ की उसने फेसबुक पे राष्ट्रगान का कोई भी विडियो शेयर किया है, तो कमेन्ट में हमेशा ये जरूर लिख देता था की “यार शेयर करने से पहले विडियो के लिंक में ये लिख देते की देखना हो तो इस विडियो को पुरे सम्मान के साथ ही देखें अन्यथा न देखें”.लोगों ने मेरी इस बात का कभी बुरा नहीं माना बल्कि कभी कभी कुछ लोगों ने ये तक कहा की “यार सही कहा तुमने, लिख देना चाहिए था”.लेकिन सभी लोग एक से तो होते नहीं, एक मेरे मित्र साहब हैं(नाम नहीं लेना चाहूँगा) वो कुछ दिन इसी बात पे कहने लगे(फेसबुक मेसेज के द्वारा) की “यार तुम फ़ालतू में अपना टाइम क्यों वेस्ट करते हो….सबके पोस्ट पे ये कमेन्ट लिख के की इस विडियो को सम्मान के साथ देखें…जिसे देखना है वो देखे सम्मान के साथ, अब हमसे ये नहीं होता की कोई विडियो के लिए हम खड़ा हों…कोई पन्द्रह अगस्त का समारोह है क्या जो खड़ा होना अनिवार्य ही है”…फिर उसने अंतिम में एक लाईन(हालांकि मजाक में ही) ऐसा लिख दिया जिसे पढ़ मुझे जबरदस्त गुस्सा आया..“हीरो बन रहा है न रे तुम…पब्लिसिटी चाहिए तुम्हे है न…” मैंने बड़े विनम्रता के साथ उसे ये जवाब दे के समझाया की भाई मेरा हर कमेन्ट के पीछे बस एक ही इरादा होता था की सब पूरा सम्मान दें इस विडियो का..मैं कोई हीरो बनना नहीं चाहता था.राष्ट्रगान को सम्मान न देना एक अपराध है, खैर, ये तो छोड़ो…इसका सम्मान तुम अगर नहीं कर रहे तो तुम सीधे सीधे अपने देश का अपमान कर रहे हो..मेरे इस बात पे उसने जो जवाब दिया, उसे पढ़ते ही मैंने उसे अपने फेसबुक से हटा दिया..उसने दुनिया भर की बुराई बता, हज़ार स्कैम का नाम ले..घोटाले करने वाले नेताओं का नाम ले ये बताना चाहा की “भारत से करप्ट देश दुनिया में कोई नहीं..इस देश में केवल करप्शन है..नेता,चोर,डकैत यहाँ केवल आराम से रह सकते हैं और तुम देशभक्ति और पता नहीं क्या क्या बात करते हो”.इसके अलावा भी उस मेसेज में हमारी काफी बहस हुई..वैसे तो उसे निकाल दिया ही हूँ अपने लिस्ट से, लेकिन अब मैं किसी के द्वारा अपलोड राष्ट्रगान के विडियो पे वैसा कोई कमेन्ट भी नहीं करता.

पिछले हफ्ते क्रिकेट मैच के दौरान मैं अपने एक दोस्त के रूम पे गया मैच देखने..काफी लड़के जमा थे वहाँ,मैं कुछ को ही जानता था.मैच के पहले दोनों देशों का राष्ट्रगान गाया जाता है.तीन चार लड़कों को छोड़ बाकी सभी खड़े हो गए थे राष्ट्रगान के समय..ये देख काफी अच्छा लग रहा था की लगभग सभी खड़े हैं.अचानक पीछे से किसी ने बहुत ही आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा “अरे बैठो न रे तुम सब…काहे के लिए नौटंकी कर रहे हो…साला उधर वो लोग ड्रामा कर रहा है और इधर खड़ा हो के तुम सब”(उन लोगों ने जिस शब्दों में ये बात कही थी, मैं वो न लिख के साधारण शब्दों में लिख रहा हूँ).उस दिन ना तो मेरा किसी से बहस करने का इरादा था, और ना ही किसी से कोई झंझट मोल लेने का मन था..चुप चाप मैच का एक ओवर देख के वहां से वापस अपने रूम आ गया.

ये सब बातें इसलिए एकाएक याद आई, क्यूंकि अभी दोपहर में उस लड़के का जी-टॉक पे पिंग आया जिसे मैंने फेसबुक से डिलीट कर दिया था.उसकी उन बातों का असर लगभग मेरे दिमाग से खत्म हो चूका था और कहीं न कहीं शायद मैं ये भी सोच रहा था की उसे फेसबुक से हटाना नहीं चाहिए था.खैर, मैंने बात शुरू की..अभी हाइ-हेल्लो हुआ ही था की उसका अगला मेसेज आता है – “क्या रे अभी तक वो सब नौटंकी करते रहता है…देशभक्ति गाना..राष्ट्रगान और पता नहीं क्या क्या…करता है है या अब वो सब का भुत सर से उतर गया”.ये मेसेज देखते ही मैंने उसे जी-टॉक से भी निकाल दिया.

बाकी मैं क्या कहना चाहता हूँ, वो आप शायद समझ ही गए होंगे.मैं ये पोस्ट कोई भाषण देने या कोई मुद्दा उठाने के मकसद से नहीं लिख रहा, बस दिल किया इसलिए लिखा..दुःख तो हल्का होता ही है ये देख की आजकल के कॉलेज गोइंग स्टूडेंट को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का मतलब तक नहीं पता..पास में ही एक हॉस्टल है, अधिकतर लड़के या तो स्टूडेंट हैं, या कहीं काम करते हैं.उनमे से कितनों ने पूछने पे ये कहा की राष्ट्रगान है “ वंदे मातरम्” और राष्ट्रगीत है “सारे जहाँ से अच्छा”.

जो भी हो, आप ये विडियो देखें.वैसे तो आप लोगों को कहने की कोई जरूरत नहीं, लेकिन फिर भी – “इस विडियो  को पुरे सम्मान के साथ देखें” वरना क्लिक न करें 🙂 🙂 

(इधर जो भी राष्ट्रगान के विडियो बने हैं, उनमे से मेरा सबसे पसंदीदा)

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  1. राष्ट्र गान के प्रति सम्मान एवं स्नेह की भावना युक्त इस विडियो को साझित करने हेतु कोटि कोटि अभिनन्दन….
    अभी कुछ दिनों पहले एक टी वी चैनल द्वारा राजनेताओं के राष्ट्र गान के ज्ञान का परिक्षण किया गया तो बहुत ही आश्चर्य हुआ …पहले जब हम छोटे थे तो सिनेमा हाल में फिल्म के अंत में राष्ट्र गान किया जाता था ..जिसे भी इसी कारण से हटाया गया था….

  2. बात बिल्कुल सही है, और राष्ट्रगान के लिये मैं भी बहुत गंभीर रहता हूँ, परंतु आजकल की पीढ़ी जिनको राष्ट्र प्रेम से कोई लगाव ही नहीं है (ऐसा लगता है).. मैं सभी को दोष नहीं दे रहा परंतु अधिकतर ऐसे ही हैं… इसमें परिवार और शिक्षा प्रणाली का बराबर का दोष है।

  3. बैंगलोर में एक मल्टीप्लेक्स है "फन सिनेमा"..यहाँ भी हर फिल्म के शुरुआत से पहले राष्ट्रगान बजाया जाता है(बहुत दिन से वहां फिल्म नहीं देखा इसलिए ये नहीं कह सकता की अब बजाया जाता है या नहीं)..
    बाकी किसी मल्टीप्लेक्स में मैंने नहीं देखा ये…

  4. बहुत जबरदस्त बात कही है आपने प्रवीण जी..इधर मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ है 🙂

  5. अभि …..आपकी ह्रदय से आभरी हूँ और धन्यवाद भी देना चाहती हूँ इस बेहतरीन पोस्ट के लिए…..
    ——————————–
    सच में राष्ट्रगान के प्रति सम्मान का भाव बहुत ज़रूरी है….. मैं जब भी सुनती हूँ पूरे सम्मान के साथ खड़ी होती हूँ….और सच में बहुत गर्व महसूस होता है इन शब्दों को सुनकर …गाकर …
    मुंबई में भी कुछ मल्टीप्लेक्स हैं जहाँ हर फिल्म के शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाता है…. बहुत अच्छा लगा था मुझे पहली बार यह देखकर की वहां बच्चे बड़े सब खड़े हो जाते है …….विडिओ आँखे नम कर गया …

  6. ाभि तुमाहारे जैसा जज़्वा अगर हर युवा मे आ जाये तो देश स्वर्ग बन जाये। दिक्कत तो यही है कि हम अपने तिरंगे का भी सम्मान नही कर सकते तो देश के और किसी कानून का क्या सम्मान करेंगे। सार्थक पोस्ट। आशीर्वाद।

  7. agreed!! kuch log hte hain vaise jo respect nahee detey tricolour ko ya fir national anthem ko.

    by the way, in my childhood daizz mai bhi confuse ho jaatee thee ki kaun sa national anthem hai n kaun national song hai 😛 but that was then jab main bht choti thee 😛 not now obviously

  8. हाँ अब तो देशभक्ति के पापुलर गानों पर कुछ इस तरह के नानवेज रिमिक्स्स कर दिया गया है की शर्म आती है खुद पे और उनपे भी जो इसे सुनते हैं चटखारे ले के… आज कल देशभक्ति आउट ऑफ फैशन हो गई है बहुत से लोगन के हिसाब से ..उनमें शायद आपके वे मित्र भी रहे हों….
    जहान तक सिनेमा हल में गीत चलने की बात है तो मुंबई में के लगभग हर सिनेमाहाल हो या फिर मल्तिपेक्स वहां हमने देखा है बिना कहे जब फिल्म शुरू होने से पहले रास्ट्र गान चलता है तो सभी सम्मान से खड़े हो जाते हैं और मों हो कर सुनते हैं…हाँ यही देल्ही में आइये तो बहुत लोग खड़े होते हैं और बहुत लोग बेहे ही रहते हैं……
    पोस्ट पढ़ कर सोच में हूँ…क्या हमारे लिए देश और उस देश का होने का कोई वजह नहीं है जो उसके लिए हम जरा सा भी सम्मान नहीं दे सकते..कुछ के लिए घोटाला, तस्करी , राजनीति सब पर बात करना फैशन की बात होती है. ऐसे लोग सोचते हैं बस हम जो सोचते हैं वो सबसे सही है बाकी सब बकवास …. फैशन की तरह बात करने वालों के लिए जब उसी टोपिक पर कोई सीरियसली बात करने वाला मिल जाता है तो बड़ी दिक्कत होती है और उसे ठीक इसी तरह हीरो घोषित कर हास्यपद बनाने की कोशिओश की जाती है …अभी भैया मेरी गुजारिश है…सम्मान से देखने की अपील plz आगे भी करना जारी रखें….
    शुक्रिया इस पोस्ट के लिए..इसमें हम सबकी बात शामिल है….

  9. अभि राष्ट्रगान के लिये सम्मान होना और उसके लिये सबसे आग्रह करना…………बहुत बढिया काम करते हो और ये हम सभी का फ़र्ज़ बनता है………तुम्हारी बात से सहमत हूँ।

  10. बेहतरीन और अनूठा लेख , जब तक अपने देश पर अभिमान करना नहीं आएगा वास्तव में नर कहने के अधिकारी हम नहीं हैं ! शुभकामनायें इस जागरूक लेख के लिए !

  11. राष्ट्र गान का सम्मान करने का ज़ज्बा बहुत कुछ बच्चों के पालन-पोषण पर निर्भर करता है. अगर बच्चों को शुरू से ही सिखाया जाए तो यह सम्मान भावना उनके मन में रच-बस जाती है …जैसे हमारे-तुम्हारे.
    पर आजकल स्कूल में जगह की कमी के कारण..गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल के सारे विद्यार्थियों को नहीं बुलाया जाता. उनके मन में राष्ट्र-गान से लगाव पनप ही नहीं पाता. फिर भी एक बार जब सब परिपक्व उम्र तक पहुँच जाते हैं…तो इतनी सम्मान-भावना तो होनी ही चाहिए. वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले…धोनी ने कहा कि मुझे उस पल का इंतज़ार है जब पूरा स्टेडियम एक साथ राष्ट्रगान गायेगा…सचमुच बहुत अच्छा लगा था,यह सुन.

    मुंबई में सिंगल थियेटर हो या मल्टीप्लेक्स…फिल्म शुरू होने से पहले,राष्ट्रगान बजता है..और सारे लोग (बच्चे -किशोर-युवा-वृद्ध) उसके सम्मान में मौन खड़े रहते हैं…अच्छा लगता है ये देख.

  12. आपने सही कहा की हमें अपने राष्ट्रगन का सम्मान करना चाहिए। लेकिन क्या वह सम्मान केवल खड़े हो कर ही व्यक्त किया जा सकता है? मेंने कहीं पढ़ा था की गांधीजी भी कभी वंदे मातरम या जन गण मन के वक़्त खड़े नहीं होते थे।

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