ऋचा वेड्स अंशुमान : (१)

पिछले एक महीने से अपनी बहन की शादी में व्यस्त रहने के कारण ब्लॉग से एकदम दूर रहा.इस बीच जिन्हें भी ई-मेल से बहन की शादी का निमंत्रण दिया, उनमे से आधे ने(जिनका ब्लॉग से ताल्लुक है) जवाब में ये कहा की वो आ तो नहीं पायेंगे शादी में लेकिन मेरे ब्लॉग-पोस्ट का इंतज़ार जरूर करेंगे.मेरे घर में भी जो मेरा ब्लॉग पढ़ते हैं, वो भी इंतज़ार में हैं की कुछ लिखूं मैं शादी के बारे में.वैसे तो हर कुछ नाकुछ बात पे एक ब्लॉग पोस्ट निकल ही आती है मेरी, और अगर बहन की शादी में कोई पोस्ट नहीं आती तो मेरी बहन को मुझसे लड़ने का एक और कारण मिल जाता :).तीन दिन हुए मुझे बैंगलोर आये हुए और जब से आया हूँ तब से हर रोज सोचता हूँ कुछ लिखने को, लेकिन क्या लिखूं, कैसे शुरुआत करूँ समझ नहीं आ रहा.एक बार सोचा की छोड़ो ये शादी की रिपोर्टिंग, कुछ और लिखता हूँ, लेकिन फिर दिल नहीं माना तो आज लिखने बैठ ही गया. 🙂

दरभंगा हाउस, पटना. बहुत दिनों बाद इस बार यहाँ गया था 
शादी के दौरान लंबी छुट्टी चाहिए होती है, वैसे छुट्टी का इन्तेजाम करना कोई बड़ी बात तो है नहीं…बस मैनेजर को तीन चार दिन चाय कॉफी पे लेते जाना होता है और एक महीने की छुट्टी तो बस ऐसे निकल आती है :).बैंगलोर से घर के लिए मैं चला था आठ तारीख को, और उस समय तक बैंगलोर में ठंड(जो भी हलकी फुलकी थी) खत्म हो चुकी थी, लेकिन पटना में ठंड चरम पे थी.जिस दिन पटना पहुंचा मैं, उस दिन भी अच्छी खासी ठंड पड़ रही थी.हम सबकी चिंता ये होने लगी की इतने ठंड में शादी कैसे सही ठंग से निपट सकेगा.इतने काम होते हैं शादी में..उसी ठंड में हर रोज सुबह से शाम तक हम शादी की मार्केटिंग करते.एक अरसे बाद पटना में इतनी ज्यादा शोपिंग कर रहा था मैं..बहुत बार तो ऐसा लगा की पटना की महंगाई किसी भी बड़े मेट्रो शहर से कम नहीं, बल्कि ज्यादा ही है…दूकान वालों की ऐटिटूड की तो बात जाने ही दीजिए, कोई कोई दूकान वालों के बातों से तो ऐसा लगता की दुनिया में सबसे ज्यादा होशियार और जानकार इंसान वही है..शादी की शौपिंग के दौरान मैंने माँ से कई बार कहा भी की यहाँ के दुकानदारों की तुलना में बैंगलोर के दुकानदार ज्यादा तमीजदार हैं.शादी की शौपिंग अधिकतर मैंने माँ के साथ ही की, और इस बीच पटना के उन जगहों पे भी गया जहाँ या तो बचपन में खरीदारी करने जाता था या कभी गया ही नहीं था.ऐसी ऐसी गलियों और रास्तों से माँ ले जाती थी मुझे, की कई बार मुझे डर लगने लगता की कहीं ये रास्ता भूल गयी तो…मैं हमेशा माँ से कहता की तुम बस वहीँ चलो जहाँ का रास्ता तुमको अच्छे से पता हो..और माँ कहती की “चलो चलो हर रास्ता हमको पता है..तुम मेरे साथ पटना में नहीं भुलाओगे..” सब्जीबाग,हथवा मार्केट,कंकरबाग,अगमकुआं..ऐसा कोई भी कोना नहीं था पटना का जिसे हमने टच न किया हो शादी के दौरान.हर जगह से कुछ न कुछ काम निकल ही आते थे.माँ-पापा ने शादी की मार्केटिंग की प्लानिंग ऐसे की थी की शादी के तीन-चार दिन पहले तक लगभग सभी बाजार के काम पुरे हो गए थे.
जैसे जैसे शादी की तारीख नज़दीक आते जा रही थी वैसे वैसे ठंड भी कम होने लगी थी और ठंड को लेकर हमलोगों की चिंता भी.शादी के लिए हमने अलग से एक घर हफ्ते भर के लिए किराए पे ले रखा था.२० तारीख से लोग आने शुरू हो गए थे.एक दिन पहले तक सब कुछ नोर्मल सा लग रहा था और एकाएक जब लोग आने शुरू हो गए तो वो नोर्मल माहौल शादी के माहौल में बदल गया.खाना बनाने वाले से लेकर ड्राइवर तक का इन्तेजाम हमने अपने गाँव से ही किया था.इसका फायदा हमें बहुत मिला.लोग विश्वसनीय और अच्छे मिले.किसी को किसी काम के लिए कभी डांटना या बिगडना नहीं पड़ा.खाना बनाने वालों पर भी हमें किसी तरह की लगाम कसने की कभी जरूरत नहीं पड़ी.वो सब खुद अपने जिम्मेवारी से समय पे खाना, चाय, नाश्ता बना देते.जो घर हमने किराए पे लिया था, उस घर में धुप की कोई कमी नहीं.सुबह सुबह से ही लान में धुप निकल आती, और सभी लोग कुर्सी लेकर धुप सेंकने बैठ जाते.शादी के दौरान सबसे हिट चीज़ अगर कुछ रही तो वो ताश के पत्तों का खेल.दिन भर सब ताश खेलने में व्यस्त रहते.जाड़े के दिन में वैसे भी अगर धुप में बैठकर ताश खेलने को मिल जाए और समय समय पे चाय मिलती रहे, तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है :)..ताश की मण्डली ऐसी जमती थी, की अगर किसी को कुछ काम के लिए उठाना पड़ता, तो उनके जगह बैठने वालों की कमी नहीं रहती.
दीप्ति,ऋचा और निमिषा..  तीनों मेरे ऊपर ही हँस रही हैं 🙁
जाड़े की शादी, धुप,ताश,चाय और बैठकी..मनोरंजन और एन्जॉय करने के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है.लेकिन हम ठहरे घरवाले, और कौन से घरवाले अपने घर की शादी में एन्जॉय कर पाते हैं जो हम करते.शादी में तो घरवालों को बस काम में ही व्यस्त रहना होता है..फिर भी समय काफी मिल ही जाता था धुप में बैठ के मजे करने की.शादी के काम झाम के व्यस्तता के बावजूद मेरी बहनों का पागलपन कम नहीं हुआ, और मुझे चिढ़ाने और तंग करने में भी उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी..शादी के चार पांच दिन पहले जब प्रशांत मेरे घर आया था, तो मेरी बहन और उसने मिलकर तीन घंटे मुझे जबरदस्त परेसान किया.मैं ठहरा शरीफ और कम बोलने वाला, दोनों(प्रशांत और मेरी बहन) ने इस बात का भरपूर फायदा उठा मुझे हर तरह से सताया…इस बात की खबर जब निमिषा और दीप्ति तक पहुंची, तो वो भी कहाँ पीछे रहने वाली थी.उस दिन से लेकर शादी के दिन तक, तीनो को जब भी मौका मिलता, मुझे नए नए तरीकों से परेसान करतीं.
घृतढारी 

घृतढारी के दिन मुख्यत लोग आने शुरू होते हैं.उस दिन शाम होते होते ये लगा की पूरा घर मेहमानों से भर गया है.मुझे चुकि कोई भी शादी अटेंड किये हुए चार पांच साल हो गए थे, तो मुझे वो माहौल बड़ा अच्छा लग रहा था.चारों तरफ चहल पहल और बच्चों का शोर.हालांकि उस दिन भी शाम को काम की व्यस्तता थी, लेकिन फिर भी उस माहौल में आनंद आ रहा था.मेरे तीन दोस्तों से सम्बंधित इस दिन का भी एक अजीब किस्सा रहा.प्रशांत,राहुल और शेखर..तीनो इस दिन आये थे.प्रशांत दिन भर लगभग मेरे साथ था, लेकिन ये नालायक घर से खाना खा के आया था..बाकी दो दोस्त राहुल और शेखर भी पेटपूजा कर के शाम में आये थे.अब इनके जाने के बाद माँ ने तो कहा ही की “कैसे दोस्त हो, अपने दोस्त को खाना के लिए पूछे भी नहीं, ऐसे ही जाने दे दिए”.माँ के अलावा और भी जितने लोग थे, जैसे मौसी,मामी, बड़े मामा,मंझले मामा,भैया  सबने यही बाद रिपीट की..”अरे तुम्हारा दोस्त आया था न रे…बिना खाना खाए चला गया”.ये तीनों नालायक दोस्तों के वजह से मुझे लोगों से सुनना पड़ा..ये बात तो मैं याद रखूँगा..और ये कमीना प्रशांत..दिन भर मुझे चिढाता रहा ये कह की “आज तुमको डांट सुनवा के रहेंगे हम”.वैसे प्रशांत को ये बता दूँ की मुझे किसी ने डांटा नहीं था 😛 


कुछ तस्वीरें रस्मों की 

mona wedding1
तिलक चुमाने के वक्त की तस्वीर 


mona wedding2
मटकोर 

जारी…


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  1. दरभंगा हाऊस के फोटो में ध्यान से देखो, पीछे गंगा जी में एक आईलैंड दिख रहा है न, जब मैं पढ़ता था तब ये नहीं था.. काफी भरी पूरी थी गंगा जी!
    शादी का बिध देख अर हम नॉस्टैल्जिक हुये जा रहे हैं!!

  2. टैंण टेनेन ..सुरू हो रहा है वेद परकास सरमा का विजय विकास सीरीज का अगिला उपन्यास , अभिषेकवा परसांतवा सीरीज़ । देखिए एक से …अरे माने एक से मतलब एक से एक ..कारनामा सब ..ई दुनो बहादुर जासूस का ..।

    एकदम से ऐसा कास्टिंग किए हो ..एकदम कमाल लिखे हो ..आ ऊ तीनों काहे हंस रही थी तुम पे …भांज रहा होगा ..कि देखो इटली का कंबल ..लाए हैं अबकि …इंडिया में ही अवेलेबल है …मगर सबको नहीं है …है कि नहीं यही बात था न

  3. first of all many many congratulations! secondly, mujhe aapne invitation nhi bheja 🙁

    shaadi ke tasveerien bahut khoobsurat hai. all the rasam's are very different!! accha laga jaan ke inn ke baare main!

    logon ko lagta hai ek small town main shopping is very cheap! its such a misconception. yahan shopkeepers apni he marz ke rate lgate hai!!! jo ki bahut mehge hote hai!

    kafi interesting tha yeh post! kuch aur likheye ga shaadi se related. shaadi shahi resort main thi toh zaroor shahi he rhe hoge

    blessings to the newly weds!

  4. एकदम नॉस्टैल्जिक हो गए हम भी….घर पे किसी भी शादी में रहे हुए बहुत दिन हो गया है 🙁

  5. बहुत अच्छा लिखा है…। कम से कम शादी में न आ पाने का किसी को भी अफ़सोस तो नहीं होगा…। सच में शादी का माहौल होता ही इतना अच्छा है…।यादों के गलियारों में यूँ ही अपने साथ हमें भी सैर कराते चलो…।
    एक बार फिर बहुत बधाई…।

  6. हमको भी इनविटेशन नहीं मिला….:(

    लेकिन हम तो भरपूर मज़ा उठाये फोटो सब का फसबूक पर.. परशान्त भाई तो एकदम अगिले दिन फोटो डाल दिए रहे…..
    आपका शादी में तो हम बिना बुलाये पहुँच जायेंगे .. खाली डेट पता चल जाए…..:)

  7. कहीं तुम्हारा मैनेजर तो यह नहीं पढ़ता, तीन चार दिन चा-कॉफ़ी… 🙂

    वैसे प्रशांत का नाम परेशान(त) रखे हैं हम, और तुम्हें तंग भी बहुत किया है, अच्छा है सीधे लोगों के साथ तो ऐसा ही होना चाहिये। 🙂

    दो बरस के बाद शादी की रसमें देख रहे हैं, अगर रसमों का मतलब और उसमें क्या होता है, तो बिल्कुल शादी का कैटलॉग हो जायेगा। क्योंकि रस्में हर जगह की अलग अलग होती हैं, तो हम नाम भी पहली बार ही सुन रहे हैं, और पटना की शादी का मजा लेना चाह रहे हैं।

  8. @शेखर
    भाई आपको और वंदना को तो मैंने बहुत पहले ही फेसबुक के जरिये मेसेज किया था…आपने कैसे नहीं पढ़ा…वंदना का तो रिप्लाई भी आया था 🙂
    @चैतन्य
    थैंक्स बाबु 🙂

  9. bahan ki shadi ki badhai…aapne hamen nahi bulaya 🙁
    ham to kareeb hi the, bulaya hota to thodi masti hamaari bhi ho jaati ;0
    chalo koi baat nahi 🙂
    post itna achcha tha ki shadi ke mahaul men pahuch gai thi…
    agle post ka intjaar rahrga…
    byeeeeeee

  10. अभी हाल ही में मेरी चचेरी बहन की शादी भी हुयी है … काफी हिम्मत कर के तुम्हारी पोस्ट पढ़ रहा हूँ … मुझ से यह लडकियों की विदा नहीं झिलती … पता नहीं कैसे अपनी शादी में रह गए … नहीं तो अब तक जिस किसी भी शादी में गए है … बहुत मजाक बना है विदा के समय हमारा ! क्या करें यार … खैर छोडो यह सब … बढ़िया विवरण दिए हो पूरे माहौल का ! आगे की पोस्टो का इंतज़ार रहेगा !

    और हाँ अपने बॉस से पोस्ट की शुरू की लाइन बचा लेना अगर पोस्ट दिखाओ तो … क्यों … अरे खुद ही तो लिखे हो … " वैसे छुट्टी का इन्तेजाम करना कोई बड़ी बात तो है नहीं…बस मैनेजर को तीन चार दिन चाय कॉफी पे लेते जाना होता है और एक महीने की छुट्टी तो बस ऐसे निकल आती है :)" … अब समझे !

  11. प्रिय बंधुवर अभि जी

    ऐसा लगा कि मै भी विवाह की गतिविधियों में शामिल हूं … बहुत अच्छी पोस्ट है बधाई !
    बहन को शुभाशीषें शुभकामनाएं !
    आपकी पारीवारिक ख़ुशियां परमात्मा सदैव द्विगुणित करे , तथास्तु !

    प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !
    प्रणय दिवस मंगलमय हो ! 🙂

    बसंत ॠतु की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    – राजेन्द्र स्वर्णकार

  12. बहुत रोचक अंदाज में सारा वृतांत लिख डाला है …कई सालों से कोई शादी में शामिल नहीं हो पाए ये पढकर थोडा मलाल कम हो गया.
    नेक्स्ट पार्ट लिखो जल्दी.

  13. तुम्हारी ऐसी पोस्ट का इंतज़ार कर ही रही थी…इतने रोचक अंदाज़ में लिखा है कि सब आँखों के सामने घूम गया…वो बहनों के चिढाने पर तुम्हारा खिसियाना भी…:)

    और ये सबसे डांट आपको अच्छी पड़ी,कि "दोस्तों को खाने के लिए पूछा भी नही"….आप लड़के लोग होते ही ऐसे हो…अरे खाना खाकर आया था तो स्वीट डिश के लिए पूछ लेते {ये सब इसलिए कह रही हूँ क्यूंकि ये मेरे डायलॉग हैं ,जो मैं अपने बेटों को बोलती हूँ…:)}

  14. वाह बधाई…..खूब सारी…
    परेशान बहिया ने परेशां किया आपको…बहुत बढियां….
    अब चाहलिये फटा फट…शुरू हो जाइये पोस्ट लिखने के लिए..
    पाना पढने और टिप तिपन एकी तैयारी में लगते हैं………

  15. तुम बड़का ब्लोगर है भाई.. मेरा नाम इतने जगह डाले हो, कहीं लिंक भी लगा देते तो लोग कभी मेरे यहाँ भी आ जाते.. 🙁

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