Those Rains Were Special (बरसात के वो दिन)

आज एक कविता देखिये, जिसे मैंने अंग्रेजी में लिखा था और पोस्ट किया था अपने दूसरे ब्लॉग “एहसास प्यार का” पे..फिर उसे किस खूबसूरती से चचा जी(सलिल वर्मा) ने हिन्दी में अनुवाद किया..हिन्दी वाले कविता को पढ़िए, इंग्लिश में लिखे कविता को भूल जाएंगे.
हम अपने भावनाओं को कितना भी अंग्रेजी में बयां करें, लेकिन हिन्दी में वही भावनाओं को बयां करने में एक अलग ही सुख, अलग ही आनंद है.इस बात का ये कविता एक उदाहरण है.

Rains pour down,
Like the tears from my eyes, 
with every drop of rain, 
comes all your memories…
I’m alone in this rain,
with only sorrow and pain…
Those rain were special,
spectacular,
when you was with me,
Everything was so bright then ,
Rain was so beautiful, 
I remember how we talked,laughed,
walked in those rain,
The way the flower blossoms after rain,
The way the grass grows,
The way the skies clear and become brighter,
after rain, were so romantic..
Those days were bliss..

चचा जी ने जो अनुवाद किया वो इस तरह से है – 

मेघ बरसे
जैसे अश्रु धार मेरे नयन से
हर बूंद मेरे अश्रु की
आती है ले स्मृति तुम्हारी
मैं अकेला हूँ भरी बरसात में
दुःख और पीड़ा को लिए!

ख़ास कितनी थी वो वर्षा
कितनी मनमोहक.
कि मेरे साथ थीं तुम
कितनी चमकीली थी सारी वादियाँ
बरसात वो कितनी मदिर थी
क्योंकि उसमें थी घुली हर बात तेरी
हमसफर होकर जो तुमने मुझसे की थीं.

फूल खिलते थे वो जब बरसात में
घासें हरी दिखती थीं धुलकर
आसमाँ भी साफ चमकीला सा दिखता था
भरी बरसात के बाद, कितना रूमानी.
और कितने थे वो दिन अनमोल
क्योंकि साथ थीं तुम!!


चचा जी, इसे मैंने हाल में पढ़े सबसे अच्छी कविताओं की श्रेणी में रख लिया है. 🙂

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  1. वो अभि महाराज बात ई है कि जब जज्बात हिंदी ( हिन्दुस्तानी) हैं तो हिंदी में ही अच्छे लगेंगे न .
    बहुत बहुत सुन्दर कविता.

  2. बहुत सुंदर …… सलिलजी की लेखनी तो वैसे भी नमन करने योग्य है….
    हाँ अभी…. यह सही है की हिंदी में लिखे मन के भाव सच में मन तक पहुंचते है…. आप दोनों का आभार

  3. इ फैसला खुदे कर लेओ कि बचवा झूठ बोले रहा है या चचा प्रेमबस होकर…..

    पर कविता बढिया है….

    क्योंकि साथ थीं तुम!!

    अंतिम पंक्ति श्याद कविता को पूर्णता की और लेजाती है.

  4. यही तो फ़र्क है हिन्दी और अंग्रेजी मे लिखने का……………भावों का प्रवाह निर्बाध गति से होता है हिन्दी मे और भाव दूसरे के दिल तक भी सीधे पहुँचते हैं……………बेहद उम्दा प्रस्तुति।

  5. फूल खिलते थे वो जब बरसात में
    घासें हरी दिखती थीं धुलकर
    आसमाँ भी साफ चमकीला सा दिखता था
    भरी बरसात के बादए कितना रूमानी
    और कितने थे वो दिन अनमोल
    क्योंकि साथ थीं तुम!!

    वाह,वाह..अति सुंदर।
    कविता पढ़कर भावनाओं का बादल सा उमड़ने लगा है मन में ।

  6. दीपक बाबा कि बात पर तो लगता है कि हमको हाथ जोडकर सबका धन्यवाद करना पडेगा!
    इ बचवा भी ना.. अब का बोलें..!! हमको एम्बैरेस कर देता है.. अब इसका हिंदी हम नहीं जानते हैं!!!

  7. चचा का कविता हमरा कविता…है न चचा 🙂 🙂

    चचा आप बच के कहाँ जाएंगे….आपसे तो हम जबरदस्ती कविता लिखवायेंगे और यहाँ पोस्ट करेंगे…रुकिए…देखते रहिये 🙂 🙂
    और आपको लिखना पड़ेगा… 🙂

  8. एक प्रयोग यह भी-

    आंसुओं की धार
    बह चली बरसात
    एकाकी मैं

    वही वरसात
    ख्‍वाब सारे, हंसी नजारे
    तेरा साथ.

  9. dono hi bohot pyaari hain, ab koi urdu mein bhi likh de to dil khush ho jaaye 😉 aakhir barish mera bhi fav topic hai 🙂

  10. खूबसूरत कविता पढवाने के लिए धन्यवाद.
    बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
    बहुत देर से पहुँच पाया ….माफी चाहता हूँ..

  11. सलिल चाचा…अभि की कविता तो खूबसूरत है ही, अनुवाद भी कम लाजवाब नहीं…|

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