दोस्त, जब तुम्हारी याद आई.

(सीधा डायरी के पन्नों से निकाल के ब्लॉग पे)

दोस्त, बात कहाँ से शुरू करूँ समझ नहीं आ रहा..परसों शाम मौसम बड़ा सुहाना था, हलकी ठंडी हवा बह रही थी.एक मॉल के बाहर मैं युहीं हवा का आनंद ले रहा था और कुछ दोस्तों के साथ बातें कर रहा था. बातों का केन्द्र वही था जिसपे एक ज़माने में हम बात किया करते थे..बात चल रही थी..थोड़ा बहुत मजा मुझे भी आने लगा और ठीक उसी वक्त तुम्हारा फोन आ गया. फोन पे देखते ही “Prabhat Calling”,  चेहरे पे एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी..जब भी तुम्हारा फोन आता है तो चेहरा खिल ही जाता है. तुम्हारे अलावा दो तीन ही तो और दोस्त ऐसे हैं जिनके कॉल आने पे ये भागदौड़ वाली जिंदगी कुछ पल के लिए थम सी जाती है..दिल-दिमाग पुराने दिनों के गलियारे में टहलने निकल जाता है..और फिर बड़ी मुश्किल से वापस आ पाता हूँ.

तुमने फोन के बातचित के बीच जब कहा “दोस्त तुमसे मिलने का बहोत मन कर रहा है”, तो मेरा मन भी बेचैन हो के रह गया.अपने बात करने की गति को और अपने आवाज़ को जान बूझकर मैंने बढ़ा लिया था…मैं नहीं चाह रहा था की मेरे आवाज़ में तुम किसी किस्म की परेशानी महसूस करो.दीदी के शादी में ना आ पानी के कारण भी मन बहुत भारी भारी सा है कुछ दिनों से.एक पल के लिए लगा की ना मिल पाने की मज़बूरी पे रोयुं, बेइंतहा रोयुं.तुम ही तो एक वैसे शख्स को जिसने शायद कुछ मायनों में मुझे मुझसे बेहतर समझा है..सोमवार की ही तो बात है, एक जरुरी काम निपटा के वापस घर आ रहा था. ऑटो पे वही सारे गाने बज रहे थे जिनके धुनों पे हम अपने दिनों में झुमा करते थे.मैं पुरे रास्ते आँखें बंद किये वो सब गाने सुन रहा था.सारे बीते हुए दिन किसी फिल्म की तरह आँखों के सामने से गुजर रहे थे.

मुझे उस समय हैरानी भी बहोत हुई जब तुमने उस सिरप का नाम बोल दिया जिसे मैं आज से दस साल पहले पिया करता था, और सबसे बड़ी हैरानी ये सुन के हुई की उस सिरप के बोतल का रंग भी तुम्हे अब भी याद है.सच कहूँ तो उस सिरप का नाम मैं खुद भूल चूका था..बैंगलोर के डॉक्टर के महंगे दावा के सामने वही सिरप काम आया.पुरानी चीज़ें कभी साथ नहीं छोड़ती.ये बात फिर से एक बार साबित हो गयी. मैंने ऐसा दोस्त कहीं नहीं देखा जिसे अपने दोस्त की हर चीज़ यूँ याद हो..दिल उस समय लगभग भर सा आया जब मैंने पुछा तुमसे “दोस्त तुमको याद है उस सिरप का नाम.” और तुमने जवाब में कहा था “क्या बात करते हो दोस्त, तुमसे जुड़ी हुई चीज़ मैं कैसे भूल सकता हूँ”.

तुम्हारे जैसा दोस्त पाकर अपने आप पे गर्व करता हूँ. लोग कहते हैं की पिछले जन्म में कोई अच्छा काम किसी ने किया हो तो उसका फल इस जन्म में जरुर मिलता है. तुम्हारे जैसा दोस्त पाकर अब मैं उस बात को सही समझता हूँ.जरुर मैंने पिछले जन्म में कुछ अच्छा किया होगा.

(दोस्त का नाम प्रभात वर्मा है)

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तुम मेरे लिए कभी कभी वो बात कह देती हो जो मैं खुद के बारे में भी नहीं जानता..या फिर जानता हूँ और ना जानने का ठोंग करते रहता हूँ.वो दिन मैं कैसे भूल सकता हूँ जब किसी बात पे बहुत इतरा के तुमने कहा था “अभिषेक, तुम अपने बारे में कुछ नहीं जानते..मैं जानती हूँ और इसलिए जो मैं कह रही हूँ उसे मानो”.तुम्हारा फोन जब आया कल सुबह तो हर बार की तरह पहले तीन चार मिनट हम खूब झगड़े..तुमसे झगड़ने में जो आनंद मुझे मिलता है उसे मैं क्या शब्दों में लिख पाऊंगा?कल के दिन की शुरुआत तुम्हारे फोन से हुई और देखो सारा दिन कितना अच्छे से बीत गया. शायद दिन भी तुमसे डरता है. 🙂

मुझे तुमसे डांट सुनना अच्छा लगता है. दिल को बहुत सुकून मिलता है जब ये सोचता हूँ की आज के ज़माने में भी कोई ऐसा है जो मुझपे यूँ हक जता के मुझे डांट सकता है.कल भी फोन पे तुमने कई बार मुझे डांटा..हर बार तो तुम्हारी हर डांट के बाद मैं तुमसे लड़ने लगता हूँ.लेकिन कल मैं चुप था.मुझे अच्छा लग रहा था डांट सुनना.शायद तुम और प्रभात ही दो ऐसे शख्स हैं जो मुझे सबसे ज्यादा अच्छे से जानते हैं.

प्रभात और तुम्हारी आदत बहुत मिलती जुलती है.जब कभी पटना में मैं,  प्रभात या तुमसे मिलता और बोलता चलो कुछ खाते हैं, आइसक्रीम, समोसे वैगरह तो तुम दोनों का एक ही जवाब होता – “क्यों फ़ालतू में पैसे बर्बाद करोगे”.तुम ये बात बड़े अलग तरह से बोला करती थी..और जब भी तुम्हारी वो बोलने वाली स्टाइल याद करता हूँ तो हंसी आ जाती है. 🙂

तुम्हारे बारे में बहुत सी बातें और करूँगा..जब अपना वो भुला हुआ सीरीज फिर से शुरू करूँगा ब्लॉग पे.


(दोस्त का नाम दिव्या वर्मा है)

तुम लोग से बात करते वक्त मैं बहुत कुछ नहीं कह पाता.पता नहीं, क्यों नहीं कह पाता.बहुत सी बातें दिल में रह जाती हैं.शायद इसलिए भी नहीं कह पाता की मैं नहीं चाहता तुम लोग किसी किस्म का फ़िक्र या चिंता करो. वैसे भी जितना तुम लोग मेरे बारे में सोचते हो, मेरी फ़िक्र करते हो, उतना शायद मैं नहीं कर पाता. 
ये एक गीत खास तुम दोनों के लिए.

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(इस पोस्ट पे मैंने कमेन्ट का ओपसन बंद कर रखा है)

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