बस इंतज़ार !

इंतज़ार..इन्तेज़ार करना ही तो हमेशा से उसका सबसे प्रिय काम रहा है..जब से होश संभाला है उसने तबसे वो किसी न किसी इंतज़ार में ही तो है. बचपन में एक शैतानी खत्म होने पे दूसरी शुरू करने का इंतज़ार, तो कभी स्कूल की छुट्टियाँ होने का इंतज़ार..घरवालों के साथ बाहर घूमने जाने का इंतज़ार तो कभी जल्दी से बड़े हो जाने का इंतज़ार.

जवानी में कदम रखने के बाद भी उसका इंतज़ार कम नहीं हुआ, और बढ़ता ही गया..कभी पॉकेट मनी मिलने का इंतज़ार तो कभी दोस्तों के साथ घूमने जाने का इंतज़ार..कभी मनपसंद चीज़ खरीदने का इंतज़ार तो कभी किसी के हाँ कहने का इंतज़ार..उससे जब पुछा भी जाता की भाई, जिसे तुम इतना निहारते हो..कुछ कहते क्यों नहीं..उसका जवाब होता – ठीक समय का इंतज़ार कर रहा हूँ!

पढ़ाई के दिनों में भी उसने बेशुमार इंतज़ार किया..कभी अच्छे नंबर आने का इंतज़ार तो कभी परीक्षाओं के बाद घर जाने का इंतज़ार..डीग्री खत्म कर नोट कमाने का इंतज़ार तो कभी बड़ा आदमी बनने का इंतज़ार..सारी दुनिया पे छा जाने का इंतज़ार तो कभी किसी से बात करने का, किसी की आवाज़ सुनने का इंतज़ार. पढ़ाई तो उसने पूरी की हीं, साथ में ही किया बेइन्तहा इन्तेज़ार भी !

कभी कभी तो उसने ये इंतज़ार मजबूरी में किया तो कभी युहीं जान बूझकर..कहीं किसी से मिलने जाने पे भी उसे हमेशा इंतज़ार ही करना पड़ता..वो तो हमेशा समय से पहुँच ही जाता पर आनेवाला व्यक्ति उससे करवाता बहुत इंतज़ार.वो इस इंतज़ार के खेल में इतना माहिर हो चूका है की अगर किसी से मिलने अब जाता भी है तो समय पे पहले पहुँच जाता है और करता है खूब सारा इंतज़ार!

इंतज़ार करना अब उसके जिंदगी का एक हिस्सा बन चूका है..हर रोज रात को सोते समय वो यही सोचता है की एक अच्छी सी जिंदगी का इंतज़ार करना है उसे..एक अच्छी जिंदगी की परिभाषा क्या होती है, उसे पता भी है या नहीं..ये मैं नहीं जानता..मैं बस ये जानता हूँ की उसे बस इंतज़ार करना आता है और इसमें वो पारांगत भी है, ठीक वैसे ही जैसे क्रिकेट में सचिन.

उसके इंतज़ार के लिस्ट में बहुत सारे नाम जुड़े हुए हैं…एक अच्छी जिंदगी का इंतज़ार तो है ही उसे, साथ में है इन्तेज़ार अपने आप को साबित करने का..अपनी खुशियाँ ढूंढने का, अपने परिवार के उम्मीदों पे खरा उतरने का..और इंतज़ार है उसे किसी के वापस आने का..वो ये नहीं जानता की ये इंतज़ार कब खत्म होगा..होगा भी या नहीं, या सारी जिंदगी वो बस इंतज़ार ही करते रह जाएगा,..वो इन सब चीज़ों के बारे में अब नहीं सोचता, अब वो केवल इंतज़ार करता है…बस इंतज़ार!

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  1. जब वर्तमान में रिक्तता दिखती है तो भविष्य से कुछ ढूढ़ लाने का प्रयास प्रारम्भ हो जाता है। इन्तज़ार उसी प्रक्रिया का प्रतिफल है। कुछ पक्ष हमें भी सुहाते हैं इन्तज़ार के।

  2. इसी निरंतर प्रक्रिया का नाम जीवन है….. आपने इसे इंतजार नाम से सुंदर पोस्ट में ढाल दिया :)अच्छी लगी प्रस्तुति …अब अगली पोस्ट का इंतजार …..

  3. वाह अभि! बहुत सुन्दर लिखा है इन्तेज़ार पे.
    सच है लेकिन, हम इन्तेज़ार ही करते रहते हैं हमेशा. 🙁

  4. वाकई, लगता है जिंदगी कुछ और नहीं सिर्फ़ इसी इंतजार का दूसरा नाम है…. कभी प्रतिदान मिलता है, तो कभी जिदगी कोई बेतुका इतजार बनकर रह जाती है…. खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

  5. @रुचिका
    बच्चा लोग भी अब समझदार बात करने लगा है 🙂
    अच्छा लगा 🙂

  6. 'इंतज़ार' की बेहतरीन प्रस्तुति । वैसे इंतज़ार में जो मज़ा है वो और किसी बात में नहीं.

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