एक यादगार मुलाक़ात प्रवीण जी से

जब से कुछ लोगों को खबर मिली है की मैं प्रवीण जी से मिलने वाला हूँ या मिल चूका हूँ, तब से वो पीछे पड़ गए की एक पोस्ट तो आनी ही चाहिए इस मुलाकात की.रही सही कसर कल मेरे फेसबुक अपडेट और बज्ज अपडेट ने पूरी कर दी.मैंने सबको समझाना चाहा की मेरे लिखने से बेहतर है की प्रवीण जी लिखें..खैर, सबको बातों का मान रखते हुए सोचा पोस्ट लिख ही दूँ.

वैसे तो प्रवीण जी के ब्लॉग से काफी समय से परिचित हूँ.जबसे उन्होंने अपना नया ब्लॉग “न दैन्यं न पलायनम्” बनाया है तब से ही उनसे जुड़ा हुआ हूँ..जब से उनसे पहली बार फोन पे बात हुई तब से ही उनसे मिलने का दिल बना लिया था..लेकिन काम में कुछ व्यस्तता के कारण समय निकाल नहीं पा रहा था.सोमवार को युहीं फिर से उनसे बात हुई, और इस बार उन्होंने अपने घर लंच पे आने का निमंत्रण दे दिया.दिन शनिवार का तय हुआ..वैसे तो मैं भी इंतज़ार कर रहा था शनिवार के लंच का, लेकिन अफ़सोस ये की शनिवार को ही अचानक से कुछ बेहद जरुरी काम निकल आया..फोन पे पहले ही मैंने इत्तला कर दिया था प्रवीण जी को, की मैं लंच पे तो नहीं आ पाऊंगा लेकिन मिलना तय है.. एक तो एक ही शहर में रहते हुए अभी तक नहीं मिला था उनसे और उसपर काम के वजह से अगर शानिवार को मिलना टालना पड़ता तो मुझे बहुत दुःख होता.

प्रवीण जी के घर पहुँचने में जरा भी कष्ट नहीं हुआ..होता भी कैसे, इस तीन चार साल में पूरा बैंगलोर तो घूम ही लिया है अच्छे से..हाँ, बस ये पता नहीं था की उनका घर कौन सा है इसलिए उन्होंने अच्छे से समझा दिया की “रोड के दायें तरफ जो एक बड़ा सा गेट दिखाई दे, उसी में चले आइये, वही घर है मेरा”. जैसे ही गेट के अंदर कदम रखा दूर से ही प्रवीण जी हाथ हिलाते दिखाई दे दिए..लाल कुर्ते में. उन्हें देख एक बात जो कौंधी दिमाग में वो ये की “Person can appear more smart and dashing in real”. वैसे तो प्रवीण जी की तस्वीर देख चूका था, और यकीन था भी की वो खतरनाक स्मार्ट तो होंगे ही..लेकिन देखने के बाद तो ये लगा की तस्वीर से ज्यादा स्मार्ट वो असल में लगते हैं..स्मार्टनेस और सादगी का एक उदाहरण. घर के अंदर प्रवेश करते ही भाभी जी ने मुस्कुराते हुए स्वागत किया..ये यकीन नहीं था की भाभी जी मेरे नाम से परिचित होंगी, लेकिन शायद प्रवीण जी ने पहले से बता के रखा था तो ये एक सुखद अहसास था मेरे लिए. बैंगलोर में अब तक मैं कुछ लोगों के घर जा चूका हूँ लंच पे या मिलने, लेकिन एक अपनापन जैसा अहसास पहली बार प्रवीण जी के घर में हुआ.

सबसे क्यूट और स्वीट जो बात लगी वो प्रवीण जी के दोनों बच्चे.बड़ा ही मीठा और स्वीट स्वभाव है दोनों बच्चों का.बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ मेरा और प्रवीण जी का तो बहुत तरह की बातें हुई. मेज सजी हुई थी चाय, मिठाई और स्नैक्स से..और बातों का दौर चल रहा था.ये उनके घर में मिले अपनापन का अहसास ही समझिए की बहुत सी वो बातें मैंने उनसे शेयर की जो मैं आमतौर पे बहुत कम लोगों के साथ बांटता हूँ..शायद ब्लॉग पे भी उनमे से किसी बातों का जिक्र मैंने नहीं किया. प्रवीण जी ने भी कई सारी बातें बताई. मैं ये समझ बैठा था की वो भी बिहार के रहने वाले हैं.उनसे बाद में पता चला की वो कानपुर के रहने वाले हैं और कुछ समय तक पटना में कार्यरत थे.

ब्लॉग से जुड़ी हुई भी बहुत बातें हुई.उन्होंने बताया कैसे वो ब्लॉग जगत में आये और कैसे उन्होंने अपना नया ब्लॉग बनाया. एक सवाल जो उनसे बहोत दिन से पूछने का दिल था, वो भी मैंने पूछ लिया..की आपके ब्लॉग का नाम का मतलब क्या है.बड़े अच्छे से उन्होंने समझाया भी, पर मेरी मोटी बुद्धि को दोष दीजिए, की मैं वो भूल भी गया(बाद में कभी फिर से समझूंगा उनसे)..🙂  ब्लोगर्स के बारे में भी बहुत बातें हुई..उन ब्लोगर्स  के बारे में खासकर के बातें हुईं जिन्हें मैं भी जानता हूँ और वो भी..ब्लोगर्स बातों का केंद्र कुछ मेरे दुश्मन ही रहे, जैसे प्रशान्त, पंकज और स्तुति…प्रशान्त तो मेरा बहुत बड़ा दुश्मन है, फिर भी बड़ी बडाई मैंने कर दी प्रशान्त के बारे में..ये भी साफ़ करना था की प्रशान्त मेरा ब्लॉगर दोस्त नहीं है, जैसा की बहुत से लोग समझ जाते हैं..ब्लॉग में आने से पहले से मैं उसे जानता हूँ. बातों में रश्मि दी, शिखा दी,चचा जी, सागर,पूजा जी, समीर चचा और विवेक भैया का भी जिक्र कई बार आया. प्रवीण जी और मुझे, दोनों को इंतज़ार है अब विवेक भईया के बैंगलोर आने का.ब्लॉग के बात चित क्रम में मैंने भी उन्हें बताया की कैसे मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया.

मेरे काम के बारे में भी प्रवीण जी ने बड़ी उत्सुकता से जानना चाहा..जाहिर सी बात है, फोरेक्स मार्केट में मैं काम करता हूँ, और इसके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं..तो प्रवीण जी ने भी जानना चाहा की फोरेक्स आखिर है क्या..मैंने तो एक पल सोचा की कह दूँ उन्हें, अरे आप एक बार मेरे कंपनी में इन्वेस्ट तो कीजिये, फिर देखिये कैसे आपको प्रोफिट दिलवाता हूँ..हाँ लेकिन, घाटा होगा तो मुझे दोष मत दीजियेगा.), सोचा मैंने इसी बहाने कम से कम मुझे एक क्लाइंट मिल ही जाता. 🙂 खैर, इस कुराफाती आईडिया को मैंने अपने दिमाग में ही रहने दिया.

हमारे बातों में शुरू से अंत तक भाभी जी भी साथ जुड़ी रहीं, जो की मुझे काफी अच्छा लगा.मुझे ये जानकर खुशी भी हुई की भाभी जी भी ब्लोग्स पढ़ती हैं.(थोड़ी शर्म भी आ रही थी की मेरा लिखा बकवास भी पढ़ा होगा उन्होंने 😛). भाभी जी तो शायद मुझे लंच पे ना आने की सजा दिए जा रहीं थी..इतना कुछ लेते आयीं वो स्नैक्स के नाम पे, की उसे स्नैक्स कम और लंच का नाम दे दिया जाना चाहिए.प्रवीण जी ने इस बात पे चुटकी लेते हुए कहा की “अगर लंच पे आ जाते तो सस्ते में ही निपट जाते, इतना न खाना पड़ता..” 🙂. असल बात तो मुझे बाद में प्रवीण जी ने बताई की मेरे बहाने उनका भी मुहँ चल रहा था, खाने में भी और बातों में भी..शायद भाभी जी ने कुछ कारणों से प्रवीण जी के खाने पे रोक लगाया हुआ है 😛…ऐसा मुझे लगा(माफ कीजियेगा प्रवीण जी, थोड़ा मजाक का तो हक बनता ही है न मेरा).

जिस सहजता के साथ प्रवीण जी लिखते हैं, वो खुद उससे भी ज्यादा सहज और सरल इंसान हैं..भाभी जी भी मुझे बहुत स्वीट सी और सरल लगीं.दोनों से बातें करते मुझे कभी ये अहसास भी नहीं हुआ की इन लोगों से मैं पहली बार मिल रहा हूँ..किसी किस्म का कोई हिचक नहीं रहा..हाँ, ये अलग बात है की उनके घर जाने से पहले मैं थोड़ा संकोच में जरुर था..एक बार दिल में ये भी की प्रवीण जी कह दूँ, हम कहीं बाहर मिल लेंगे, यूँ घर पे मिलने पे थोड़ा संकोच हो रहा था. उस समय मुझे ये खबर ही नहीं थी की इनके घर में मुझे इतना अपनापन और स्नेह मिलेगा.

प्रवीण जी से मिलने से पहले एक मित्र ने मुझसे पुछा था की कितने देर में वापस आ जाओगे?..मैंने कहा की एक घंटे में वापस तो आ ही जाऊँगा..इसमें कोई शक नहीं..लेकिन देखिये, बातों में कब तीन घंटे निकल गए जरा भी मालुम न चला.प्रवीण जी के घर से वापस आते वक्त रास्ते भर दिल उनके घर में बिताए तीन घंटो पे ही अटका रहा..एक खूस्बुसुरत मुलाकात का हैंगओवर ही कहिये की पूरी शाम मैं इस मुलाक़ात के नशे में रहा. 🙂


चलते चलते इतना ही कहना चाहूँगा की बैंगलोर में बिताए मेरे बहुत कम यादगार दिनों में से ये दिन भी एक है.. प्रवीण जी के साथ मुलाक़ात में और भी बहुत सी बातें हुई, पूरी बातों का ब्यौरा दे पाना थोड़ा मुश्किल काम है..जो बातें मैं अगर भूल गया कहना तो वो प्रवीण जी अपने ब्लॉग पे कह दें..


(विवेक भईया को वादा किया था की शाम की चाय वो इस पोस्ट के साथ पियेंगे..थोड़ा लेट हो गया मैं, कोई बात नहीं..खाने के समय से पहले मैंने ये पोस्ट कर दी…अब ये विवेक भईया का काम है की प्रवीण जी को भी एक ऐसी ही पोस्ट लिखने को कहें..)

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24 COMMENTS

  1. वाह अभि ! मजा आ गया सारा विवरण पढकर.
    वैसे प्रवीण जी लिखते तो खतरनाक ( तुम्हारी ही भाषा में 🙂 ) ही लिखते उनकी लेखनी के तो हम कायल है पर तुमने भी बुरा नहीं लिखा है ही ही ही और हम भी वहां मौजूद रहे ..क्या बात है :)शुक्रिया.

  2. बस, इसी स्मार्ट और डैशिंग बंदे से मिलने का इन्तजार है..:)

    बढ़िया लगा मुलाकाती ब्यौरा.

  3. @राम त्यागी जी…
    अरे भैया आपका जिक्र भी आया होगा…बहुत से लोगों का जिक्र किया था हमने…
    और वैसे आपका जिक्र बातों में हो या न हो…आप तो हैं ही अपने 🙂

  4. हमरे अन्नदाता (हमरा संस्थान)के अलावा बहुत सा प्रेमीजन बेंगलुरू में निवास करते हैं…प्यारा भतीजा अभिषेक, बेहद ही प्रभावशाली प्रवीण जी, आदरणीय बड़े भाई राजेश उत्साही, बड़ी बहन सरिता दी!!
    हमरा तो कभी बेंगलुरू आगमन हुआ त बुझाता है कि पूरा दिन निकल जाएगा भेंट मुलाकात करते करते!!

  5. वाह भई मजा आ गया, प्रवीण जी से भी निवेदन है कि अब मुलाकात का ब्यौरा लिख ही दॆं। 🙂

    अब तो खाना भी खा चुके हैं, उसके बाद अब तुम्हारी पोस्ट पढ़ रहे हैं।

  6. @चचा जी,
    हमारे बातचीत के क्रम में ही राजेश उत्साही जी का फोन आया था प्रवीण जी को 🙂

  7. पढ़कर अच्छा लगा.
    प्रवीण जी को मैं उनके लेखन से ही जानता हूँ. वे कुशल, संयमित, स्पष्ट, और मधुर भाषा के स्वामी हैं. मैं भी उनसे अवश्य मिलना चाहूँगा. उनके विचार और व्यक्तित्व प्रेरक… उत्प्रेरक हैं.

  8. बहुत जीवंत विवरण लिखा है मुलाकात का…. वैसे ब्लॉगजगत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति जो उनसे मुलाकात ना करना चाहे…. लेखन और व्यक्तित्व दोनों प्रभावी…. आप खुशकिस्मत निकले उनसे मिल लिए… और हमें पोस्ट के ज़रिये मिलवाया धन्यवाद …अभी…..

  9. पढते तो हम भी हैं न दैन्यं न पलायनम पर आज प्रवीण जी के बारे में विस्तार से जान कर अच्छा लगा । वैसे उनके सरल स्वभाव का अनुभव मुझे भी है ।

  10. प्रवीन जी की टिप्पणी लगभग हर ब्लॉग पर मिल जायेगी ! मेरे ब्लॉग पर तो कभी कभी प्रवीन जी की टिप्पणी पोस्ट लगने के साथ ही आ जाती है, वो ये सब कैसे कर लेते हैं मैं समझ नहीं पाता ! प्रवीन जी से मिलने का सौभाग्य आपको मिला,बधाई ! बंगलोर में रहने वाले उनके बाकी प्रशंशकों को भी ये सौभाग्य शीघ्र प्राप्त हो, इसी कामना के साथ ,
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ ,बंगलोर !

  11. arre waah, apne toh bahut maaze kiye honge aur kafi baattein bhi. feels nice to hear that you have actually made such great friends via your blog. great going!

    and bacche wakeyee bahut cute hai…!

  12. सर्वप्रथम तो मैंने भी पोस्ट लिखनी प्रारम्भ कर दी है पर समस्या यह है कि अभिषेकजी को एक पोस्ट में कैसे समेटा जाये। डॉलर, पाउण्ड, येन, यूरो आदि में ही उलझा रहा, जबकि अभिषेकजी इन सबका सम्मिलित ज्ञान अपने ग्राहकों को देते हैं।
    ऊर्जा और उत्साह, दोनों ही देखने को मिला। ईश्वर करे यह जीवनपर्यन्त बना रहे।
    बहुत से ब्लॉगर चर्चा के विषय रहे और उसका लाभ हमें मिला अपना ज्ञान बढ़ा कर।
    ब्लॉगरजन घर आते रहें, आपके साथ हमारी भी ट्रीट पक्की हो जाती है।

  13. अच्छा लगा प्रवीण जी के साथ मुलाक़ात का ब्यौरा. 🙂
    उनके बारे में जानकर अच्छा लगा!!

  14. आप का लेख पढ़ कर बहुत अच्छा लगा– धन्यवाद. आपने लिखा भी बहुत रोचक अंदाज़ में है।

  15. प्रवीणजी से पहली बार मेरी भी मुलाकात हुई थी करीब दो महीने पहले।
    हाल ही में निशांतजी भी प्रवीणजी से मिले थे (दिल्ली में)
    पूरे विवरण आज निशांत मिश्रजी के ब्लोग पढ सकते है।
    मेरे अनुभवों के बारे में भी आप निशांतजी के ब्लॉग पर मेरी टिप्पणी पढकर जान सकते हैं।
    यदि प्रवीणजी के व्यक्तित्व के बारे में पढने में रुची हो, तो कृपया इस कडी पर जाइए

    http://mishnish.wordpress.com/2010/11/27/praveenjee/

    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

  16. बहुत ही बढ़िया ब्यौरा….और अभी तुम हो ही इतने सहज कि अजनबीपन मिनटों में मिट जाता है…प्रवीण जी के सरल स्वभाव का जिक्र भी सब करते हैं…फिर आत्मीयता उगते कितनी देर लगती….और समय का लम्बा खींच जाना तो तय ही था.
    ये सुखद अनुभव हमेशा याद रहेंगे

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