दो दोस्त और एक फिल्म

मौसम में फिर से वैसी ही हलकी ठंडक है.. ऐसा लगता है की जैसे समय वापस नौ दस साल पीछे चला गया हो..प्रभात और मैं वही पटना के सड़कों पे इधर उधर फिर रहे हों….जब मुड हुआ साइकिल लिया और चल दिया प्रभात के घर.. प्रभात के साथ कभी पढ़ते पढ़ते.. फिजिक्स, मैथेमैटिक्स के सवालों में उलझते हुए जब मैं पूछता प्रभात से.. यार ये बता की क्या हमसे कभी आई.आई.टी निकलेगा??..प्रभात बाबू ऐसे देखते मेरी तरफ की मैं समझ जाता की अब वो गरिया देगा..और मैं अपनी बात को पलटते हुए कहता चल बैडमिन्टन खेलते हैं(याद है न प्रभात कैसे तुम्हारे घर के आगे हम बैडमिन्टन खेलते थे) ….शाम होते ही साइकिल ले के निकल जाना कोचिंग के लिए…  कोचिंग में अगर क्लास सस्पेंड हो जाये या फिर पहले खत्म हो जाये तो प्रभात के घर के पास वाले डी.ए.वी. स्कूल के बगल में जो बड़ा सा मैदान था, वहाँ बैठ हम बातें करते(याद है न प्रभात) ..बहुत सारी बातें.. स्कूल की, परिवार की, जिंदगी की, प्यार की..हर तरह की बातें करते हम ..उन दिनों मुझे ऐसा लगता था की जैसे प्रभात से बातें करते करते मैं खुद को और बेहतर समझने लगता..बाकी सारी दुनिया को भूल जाता..हमारे उम्र के बाकी लड़कों से अलग, हमारी बातों का केन्द्र हमेशा से गंभीर मुद्दे ही रहे.

उन्ही दिनों की बात है, एक फिल्म आई थी – मोहब्बतें..इस फिल्म का संगीत दिया था “जतिन-ललित” ने. मैं वैसे ही जतिन-ललित का जबरदस्त फैन था..पहले से ही मन बना लिया था की इस बार पॉकेट मनी बचा के रखना है और जिस दिन फिल्म का कैसेट मार्केट में आएगा, खरीद लेना है…फिल्म के गानों और प्रोमो से मैं और प्रभात कुछ ज्यादा ही प्रभावित थे. किसी भी फिल्म के लिए हम इतने उत्सुक पहली बार हुए थे. हमने ये तय किया की फिल्म जिस दिन आएगी उसी दिन हम देखेंगे. और फिर जिस दिन फिल्म रिलीज हुई, हम एक दोस्त के घर पहुँच गए उसके वी.सी.पी पे फिल्म देखने ..विडियो कैसेट का इन्तेजाम पहले से हो रखा था.फिल्म ने पहले सीन से ही हमें ऐसे बाँध लिया की आज तक वो बंधन हम तोड़ नहीं पाए.फिल्म देखते देखते हम किसी अलग ही दुनिया में पहुँच गए थे..फिल्म में ही कहीं खो से गए थे. हमने कभी सोचा भी नहीं था की कोई फिल्म का हमपे इस कदर असर होगा.फिल्म देखने के क्रम में हम हंस रहे थे, रो रहे थे, और कभी कभी गा भी रहे थे 🙂 हम शाहरुख खान के ब्लाइंड फैन हो गए थे.राज आर्यन का किरदार भी शाहरुख के क्या खूब निभाया था.फिल्म का संगीत हो या फिर अभिनय या फिर खूबसूरत लोकेसन..सबने हमारा दिल खूब जीता.आज भी जब इस फिल्म के गाने सुनता हूँ तो कुछ देर के लिए ही सही, हम पुराने दिनों में चले जाते हैं. उस दिन जब फिल्म खत्म हुई तो  प्रभात के मुहँ से बस यही निकला – “अबे फिर से देखने का मन कर रहा है यार…ddlj को बहुत पीछे छोड़ दिया है आदित्य चोपड़ा ने इस बार”(बिलकुल यही कहा था प्रभात ने, याद है मुझे अच्छे से). मुझे उस वक्त बहुत गुस्सा आया जब फिल्मफेअर अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर शाहरुख के बजाये ह्रितिक रोशन को मिल गया. हमारे बस में होता तो हम इस फिल्म को हर अवार्ड, हर सम्मान दे देते. 🙂

इस फिल्म से अपना जुड़ाव ऐसा है की फिल्म रिलीज डेट अब तक याद है – 11 नवंबर 2000.  फिल्म के रिलीज होने के दो दिन बाद छठ का नहाय-खाय पर्व था और उसी दिन फिर से मैंने ये फिल्म देखने का मन बनाया और हो गयी फिर से मेरी फिल्म-रिविजन 😉. .इस फिल्म ने हम दोनों पे उस वक्त इतना गहरा असर किया था की हमने ये मान लिया की ये फिल्म हमारी जिंदगी का ही एक हिस्सा है. ये उस समय की बेवकूफियां कहिये या फिर बचपना. मोहब्बतें के सारे डायलोग हम रटे हुए से थे. एक मेरी मिनी निजी डायरी थी, उसमे मैंने इस फिल्म के सारे डायलोग नोट कर रखे थे. फिर चाहे वो “मोहब्बत में शर्ते नहीं होतीं”…  वाला डायलोग हो या फिर “पाप और पुण्य का फैसला करने वाले हम और आप कौन होते हैं..ये तो उनका काम है, उनपे ही छोड़ देना चाहिए” वाला डायलोग..हर एक डायलोग हमने ऐसे रट लिया था , जैसे लोग फिजिक्स के फोर्मुले रटते थे..🙂 फिल्म का ये डायलोग हम हर जगह इस्तेमाल कर देते थे..चाहे दोस्तों को कहना हो,लड़कियों को कहना हो, चाहे ग्रीटिंग्स कार्ड पे लिखना हो या फिर किसी लेटर में..😉मोहब्बत भी जिंदगी की तरह होती है, हर मोड आसान नहीं होता..हर मोड़ पे खुशी नहीं मिलती..फिर जब हम जिंदगी का साथ नहीं छोड़ते तो मोहब्बत का साथ कैसे छोड़ दें.”    

हम इस फिल्म में दिखाए हर एक चीज़ के पीछे डूब से गए थे. चाहे वो शाहरुख खान के स्पेक्स हों या स्वेटर या फिर ड्रेस सेन्स.हमने भी एक स्पेक्स खरीद लिया था..मैं और प्रभात दोनों वही स्पेक्स आँखों पे चढ़ा चलते थे.प्रभात ने तो अपनी ड्रेस भी वैसी ही सिलवाई थी..एकदम मोहब्बतें टाईप. 🙂 न्यू इयर के कुछ दिन पहले की बात है..ईद के मौके पे मैं और प्रभात अपने दोस्त मती के घर गए थे. उस दिन तो प्रभात मियाँ एकदम क़यामत ढा रहे थे. अफ़सोस उस वक्त हमारे पास कैमरा नहीं था नहीं तो प्रभात मियाँ की वो फोटो तो जरुर ले लेते हम.. ..बिलकुल मोहब्बतें स्टाइल शर्ट, पैंट और स्पेक्स. मोहब्बतें का बुखार कुछ ऐसा चढा था हम दोनों पे की ग्रीटिंग्स कार्ड भी मोहब्बतें फिल्म से ही इंस्पायर्ड ख़रीदा था..कोशिश तो हमने वैसा ही पत्ता ढूंढने की भी की थी जैसा मोहब्बतें फिल्म में यूज हुई थी, लेकिन अफ़सोस हमें वैसे पत्ते कहीं मिले नहीं. 🙂 कुल मिलाकर हम मोहब्बतें के जबरदस्त हैंगओवर में थे.ऐसा नशा जो उतरने का नाम नहीं ले रहा था और शायद अब भी बरक़रार है.

मोहब्बतें जैसी रोमांटिक फिल्म इतना ज्यादा पसंद आने के पीछे कभी कभी “प्यार” जैसे शब्दों का भी हाथ होता है..अब दिल तो वैसे भी बच्चा है, उस समय हम भी कौन से बड़े थे…इंजीनियरिंग की तैयारी ही तो कर रहे थे…..हम भी तो बच्चे ही थे..अब बच्चों का किसी पे क्रश आ जाना कोई बुरी बात थोड़े ही है. 🙂 हमें भी क्रश था. प्रभात को “रतन प्रिया” पे और मुझे भी किसी पर, शायद क्रश से ज्यादा कुछ..प्रभात का क्रश प्रिया पे बहुत था.इतने साल गुजर गए हैं लेकिन अब भी मैं प्रभात को प्रिया के नाम से चिढ़ाता हूँ. मैं ये अभी भी मानता हूँ की प्रभात प्रिया को दिल ही दिल में बहुत चाहता था, उसकी बहुत इज्जत करता था और मैं प्रभात के इस चाहत का बहुत इज्जत करता था….लेकिन बेचारा कभी इस बात का खुल के इजहार न कर सका..मोहब्बतें फिल्म भी शायद हमें इसी लिए पसंद आई थी की हमारे साथ कुछ अलग केस था. साइकिल पे या कभी युहीं चलते चलते प्रभात अचानक से मोहब्बतें के एक दो डायलोग बोल देता और फिर मुझे देखता..उस समय प्रभात का चेहरा देखने लायक होता था.. :

बिलकुल वैसी ही शर्ट-पैंट और
स्पेक्स.. 😉

प्रभात को ही देख एक दिन मैंने भी अपना वो स्पेक्स पहन लिया..मोहब्बतें स्टाइल वाला..और कपड़े भी अच्छे ही पहन रखे थे मैंने..कोई खास दिन था शायद..सही से याद नहीं..शिवपुरी के रास्ते हम कोचिंग से वापस आ रहे थे. साइकिल थी साथ में, लेकिन हम गप्पे लड़ाते पैदल ही आ रहे थे..अचानक से प्रभात ने मुझे बोल दिया -“यार आज तू कमाल का हैंडसम लग रहा है..”अभी वो तुझे देख ले न तो वो क्या,  दुनिया की कोई भी लड़की तुझे बस सीधा प्रोपोज ही कर दे”. मुझे जिंदगी में पहली बार उस लड़के ने ऐसा कोम्प्लिमेंट दिया था. मुझे बहुत अच्छा लगा..भले ही प्रभात मेरा दिल रखने के लिए कह दिया होगा उस समय, लेकिन मुझे वाकई बहुत अच्छा लगा था (प्रभात, शायद तुम्हे याद हो ये बात).

इतने साल हो गए हैं इस फिल्म को आये..पटना छोड़े भी हमें कई साल हो गए, लेकिन आज भी ये सब बातें दिलो-दिमाग में काठ की तरह हैं.एकदम ठोस और बिलकुल ताजा. इस फिल्म के साथ हमारे कुछ ऐसे यादगार पल और भी हैं जो मैं चाह कर भी नहीं बता सकता[पब्लिक प्लेटफोर्म यु नो 😉 ]..प्रभात और मेरे कुछ पर्सनल बातें.ऐसी बातें जो बस हम एक दूसरे के बीच ही रखना पसंद करेंगे. इन बातों को कभी ना तो प्रभात भूलेगा और नाही मैं. प्रभात तो समझ ही जाएगा मैं क्या कहना चाह रहा हूँ.
दो दिनों से तबियत कुछ नाज़ुक चल रही है तो घर पे ही हूँ..कल रात तय किया कोई फिल्म देखा जाये.यकायक दिमाग में “मोहब्बतें” नाम याद आ गया. अब तुरंत मैंने प्रभात को फोन मिलाया और कहा – भाई एक फिल्म देख रहे हैं..बताओ कौन सी फिल्म देख सकते हैं हम?.. उसने बिना रुके ही कह दिया – मोहब्बतें देख रहे हो न? 🙂


वैसे ये अब मानते हैं की इस फिल्म में बहुत सी कमियां थी, और जब से “डेड पोएट सोसईटी” देखी है, तब से इस फिल्म के प्रति नजरिया थोडा बदला है, लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं की ये फिल्म आज भी दिल के बेहद बेहद करीब है 
एक गाना सुन लीजिए इस फिल्म का …


और अब बारी है कुछ तस्वीरों की..मेरी एक एल्बम तो घर पे रखी हुई है, जो थोड़ी बहुत तस्वीरें मेरे पास हैं, उनमे से कुछ पोस्ट कर रहा हूँ…ये उन दिनों की ही तस्वीरें हैं…

इस तस्वीर में गौर से देखिये, प्रभात अपने टेप रिकॉर्डर के पास खड़ा है और मोहब्बतें वाली गग्रीटिंग्स कार्ड टेप रिकॉर्डर के ऊपर राखी हुई है. प्रभात ने भी वैसा ही स्पेक्स पहन रखा है. और जनाब के पोज तो देखिये ज़रा…कौन फ़िदा न हो जाये ऐसे कातिलाना पोज पे..हा हा  🙂 🙂
प्रभात – प्रभात के घर में लिया गया ये फोटो.
इस तस्वीर में भी हम दोनों दिख जाएंगे आपको..इसी दिन हमने ग्रीटिंग्स ख़रीदा था और कैमरे में रील भरवाया था..बस हमने भी फोटोग्राफी शुरू कर दी अपनी…ये अलग बात है की ना तो हमें पोज करने आता था उस वक्त और ना ही सही से फोटो लेने…फिर भी देख लीजिए…दो डैशिंग जवान(हँसने का मन करे तो हंस लीजियेगा…:) )
प्रभात और मैं. 
ये फोटो देख प्रभात को बहोत कुछ याद आ जाएगा…है न प्रभात..:) ये दिन ही कुछ ऐसा था…ज्यादा मैं नहीं बोलूँगा इस दिन के बारे में..बस आप फोटो देखिये…प्रभात बाबू लग रहे हैं न बिलकुल एलिजबल बैचलर.. 🙂 क्या लुक है..अगर एक बार कह देते प्रिया से तो वो भागे भागे प्रभात के पास आ जाती 🙂 दूसरी फोटो मेरी है…उसपे ज्यादा धयान मत दीजियेगा… 🙂
प्रभात 

मैं 

चलते चलते एक आखरी लाईन – 

Some Love Stories Live Forever ( ज़िंदा रहती हैं उनकी मोहब्बतें) 
एक गुजारिश है – मेरे विडियो ब्लॉग पे अब से अपडेट्स आते रहेंगे..वहां भी जाया कीजियेगा…

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  1. यार इतना बड़ा लिखा पर धारा प्रवाह में कुछ पता ही नहीं चला ..सर्राटे से पढ़ गया कुछ साँसों में …कोई भी दोस्त तुम्हें पाकर गौरवान्वित होगा दोस्त !

  2. मजा आ गया!
    मुझे तो पता था की तुम्हे 'हम साथ साथ हैं' फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है.
    आज ये भी पता चल गया.
    पोस्ट तो सुपर है!
    🙂

  3. जानिए रहे थे कि , अबकि छुट्टी नहीं मिला है ई छौंडा को तो ई सब कातिलाना पोस्ट तो आना ही था , एलिजिबल बैचलर तो तुम भी लग रहे हो बच्चे । अब प्रभात का पता दो कि उसे भी कह दें कि तुम्हारी पोल भी अईसे ही खोले । का …………का कहते हो ..ओईसे हमारा प्रेम कहानी में ..कुछ कुछ होता है का हाथ रहा ..ई शाहरुखवा जाने केतना को डुबाया है रे …और अभियो चालू है ..हाहाहा

  4. 🙂 अब इतना बता दिया तो बाकी भी बता देते शाहरुखखान! हा हा हा .
    वैसे गज़ब की पोस्ट लिखी है एकदम दिल से निकली और ब्लॉग स्क्रीन पर :)बिना सांस लिए पढ़ती चली गई.

  5. वाह जी बहुत अच्छा लगा आप का मुहबतें रिपोर्टिंग. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति. हम भी थोड़ा आप का देख अपने बचपन के दिन याद ताज़ा कर लिए.

  6. हर उम्र का अपना आसमान होता है और उसमे सतरंगी छटा बिखेरने में इन फिल्मो का बड़ा हाथ होता है….सब अपने मनचाहे रंग चुन लेते हैं.

    चलो तुम्हारी पसंद की फिल्मो का एक-एक कर पता चल रहा है…मुझे भी, उस फिल्म में शाहरूख और छोटे से रोल में ऐश्वर्या बड़े अच्छे लगे थे….बाकी कथा,निर्देशन, अभिनय के बारे में हम चुप रहेंगे 🙂

  7. यादें ……हाँ यादें …..कहाँ से कहाँ ले जाती है आपको ….पता ही नहीं चलता …है ना !!
    तुम भी बह रहे हो इन यादो में और तुम्हारी पोस्ट ने हमारी भी बहुत सी यादें ताज़ा कर दी तो अब हम भी चले इन यादो में बहने !

  8. खूबसूरत पोस्ट ! आपके मित्रों को आप पर निश्चित ही गर्व होगा।

  9. सब कुछ कहके भी बहुत कुछ छुपा गए….. वैसे ऐसी लव स्टोरीज़ हमेशा जिंदा रहनी ही चाहियें….
    दोस्ती और दोस्त सच में अनमोल होते हैं……

  10. zindagi ke kuch panne palat kar wapas aa gaye
    par ye sach hai ki film film hoti hai aur zindagi zindagi
    kyunki hum dono me se kisi ko kuch nahi mila
    par ………
    kuch baatein unkahi hi achchi hoti hai

    thanks
    Abhi

  11. मज़ा आया पढ़ के… मोहब्बतें, दोस्ती और दोस्त की यादें…
    बहुत अच्छा लिखा आपने एकदम यादों में डूब के 🙂
    हमें भी बड़ी सारी बचकानी हरकतें याद आ गयीं अपनी 🙂

  12. अभि , आपके साथ पटना घूमना सुहाना लग रहा है ,.आपका ब्लॉग काफी मजेदार है . बहुत अच्छा लगा आपको पढ़ना ……. आज भी आपकी यादों को अभी के पढ़ने वाले बच्चे दुहरा रहें है . वैसा कुछ भी नहीं बदला है . शायद ………कुछ बातें कभी नहीं बदलती . आपको शुभकामना .

  13. दो दीवाने …सिनेमा हाल में……….तो जाहिर है कुछ ना कुछ गड़बड़ करेंगे ही..उसपे ये कि कई साल तक उसे याद कर रोयेंगे भी……….

  14. अन्जुले भाई,
    दो दीवाने शहर में कह देते तो वो भी एकदम फिट बैठता अपने पे 🙂

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