कुछ रिश्ते बन जाते हैं..


कुछ दिन पहले चचा जी ने मेरे एक ब्लॉग पोस्ट पे कहा था की “माँ बाप चुनने का मौका किसी को नहीं मिलता है..लेकिन दोस्त चुनने का अधिकार त हमारा है.. .और ऐसे में अगर चुनकर, अपने मन से एक छोटी बहन या दोस्त जैसी बहन मिल जाए, त परमात्मा का सुक्रिया अदा करना” . ये बात कितनी सही है..मेरे अब तक के जीवन में कुछ ऐसे दोस्तों का एक अहम स्थान रहा है, जिनके साथ रिश्ता अब दोस्ती से आगे बढ़ चूका है और अब वो मेरे जीवन का एक हिस्सा बन चुके है….ठीक वैसा ही हिस्सा जैसे की मेरे पापा, माँ या बहन हैं.. 


दोस्ती का क्या है..दोस्ती तो कहीं भी हो जाती है, मोहल्ले में, स्कूल में, कॉलेज में या फिर ऑफिस में..दोस्ती तो इन्टरनेट पे भी होती है, जिसे कुछ लोग इन्टरनेट फ्रेंडशिप के नाम से जानते भी हैं.लेकिन क्या ये इन्टरनेट दोस्ती किसी निजी जीवन की दोस्ती से अलग है??बिलकुल नहीं….जब शुरू शुरू में इन्टरनेट का प्रयोग करना शुरू किया था और एक दो दोस्त बने याहू मेसेंजेर पे, तो मेरे कुछ दोस्तों ने और कुछ लोगों ने ये बोल के सतर्क कर दिया की इन्टरनेट पे दोस्ती अच्छी नहीं…फ्रॉड लोग रहते हैं, गलत लोग रहते हैं..उनकी ये सब बातों से थोड़ा सोच में पड़ गया और याहू मेसेंजेर पे बने कुछ दोस्तों से दोस्ती बस याहू मेसेंजेर तक ही सिमित रखा.कुछ लोगों के नाम तो आज भी याद हैं, जैसे एक थे फिकल जोर्ज, जो की कलिफोर्निया के रहने वाले थें(विदेशी लोगों से मेरा पहला इन्टरैक्शन ) …उनसे याहू चैट रूम पे मुलाकात हुई थी और जल्द ही हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे..मैं थोड़ा कम ही बात शेयर करता था उससे, लेकिन वो अपनी बहुत सी बातें बताते रहता था…एक दिन एकाएक उसने मेरे घर का फोन नंबर मांग लिया..मैंने एक पल सोचा की फोन नंबर देने में क्या हर्ज है..लेकिन फिर दूसरे ही पल सब लोगों की नेगटिव बातें दिमाग में आने लगी और कुछ बहाना बना के बात को टाल दिया मैंने..उसके बाद तो उससे बात करने में भी थोड़ी हिचक होने लगी…और धीरे धीरे उससे बात करना ही बंद कर दिया मैंने.ये बात है साल २००० की. जब इंजीनियरिंग में गया तो वहां भी बहुत से लड़कों की मानसिकता इन्टरनेट दोस्ती को लेकर वैसी ही थी..फ्रॉड और गलत मानते थे सब..धीरे धीरे मैंने भी इन्टरनेट पे अनजान लोगों से बात करना बंद ही कर दिया.

जब मैं इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में था, तब तक बहुत से लोग इन्टरनेट से जुड़ गए थे. ऑरकुट और फेसबुक का भी आगमन उसी समय हुआ था.जब मैंने पहला अकाउंट बनाया था ऑरकुट पे तो मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं था की क्या करना होता है इस वेबसाइट पे..मेरे किसी दोस्त का अकाउंट था भी नहीं ऑरकुट या फेसबुक पे..मेरे प्रोफाइल में बस तीन लोग ही एडेड थे, एक तो मेरी बहन, एक मेरी दोस्त दिव्या और एक दोस्त सुदीप. एक दिन युहीं दूसरों के प्रोफाइल में तांक झाँक करते एक लड़की के प्रोइफिले पे आ के अटक गया..नाम तो जाना पहचाना लग रहा था लेकिन शकल से पहचान नहीं पा रहा था..खैर, मैंने भी बस ये देखते हुए की लड़की खूबसूरत दिख रही है, उसे एड कर लिया..कुछ दिनों बाद जब फिर से चेक किया तो देखा की उसने मेरा फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर लिया है. मैं तो खुशी से फूला नहीं समां रहा था. एक और दोस्त ऑरकुट पे बढ़ने की खुशी तो थी ही, लेकिन साथ ही साथ बात ये भी थी की “किसी खूबसूरत लड़की ने मुझे एड किया था”…धीरे धीरे बातें शुरू हुई, लेकिन कहीं न कहीं पिछली बातें दिमाग में रहती ही थी की ये इन्टरनेट है, दोस्ती सोच समझ के ही करनी चाहिए…इसलिए शुरुआत में उससे बातचीत बस स्क्रैप के थ्रू ही जारी रखा..फिर पता चला की वो भी पटना की ही है, और मेरी दोस्त दिव्या के जान पहचान की है..जल्द ही उससे बहुत सी बातें होने लगी..एक अच्छी दोस्त बन गयी वो मेरी…उसे एड करने के समय जो दिल में कहीं थोड़ी बहुत “फ्लर्र्टिंग” करने की फीलिंग थी, वो फीलिंग भी बाद में दफ़न हो गयी थी और वो मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त बन गयी थी..जिससे मैं बातें भी शेयर करने लगा था..एक दिन जी-टॉक पे बातें करते युहीं उसने मेरा फोन नंबर माँगा..मैंने फिर से सोचा की दोस्ती तो ठीक है, लेकिन फोन नंबर?..ये बोल के टाल दिया की शाम तक फोन नंबर दूँगा…मेरे ये कहते ही उसने झट से कहा की ठीक है, एक काम करो मुझे शाम में अपना नंबर एस.एम्.एस कर देना…और ये कहते ही उसने अपना फोन नंबर दे दिया…बड़ा खराब लगा मुझे, की वो लड़की हो के मुझपे इतना विश्वास कर रही है की मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दिया..और मैं इस छोटी सी बात के लिए संकोच कर रहा था..छुट्टियों में जब घर गया तो उससे मिलना भी हुआ…और तब तक मेरी ये सोच भी पूरी तरह से बह चुकी थी की इन्टरनेट पे अच्छे दोस्त नहीं मिलते..इस लड़की का नाम है – निधि माथुर, जिसे फेसबुक पे मेरे अधिकतर मित्र जानते हैं, लेकिन ये बहुत ही कम लोग जानते हैं की इससे मेरी मुलाकात इन्टरनेट पे हुई थी.

रिश्ते कभी युही बन जाते हैं, चाहे वो रिश्ते इन्टरनेट पे ही क्यों न बने….एक दिन युहीं ऑरकुट पे इधर उधर ताकते मुलाकात हुई “अंकिता” से..पहले तो वो मेरी दोस्त बनी, लेकिन ज्यादा दिनों तक अपनी दोस्ती रह नहीं पायी…जल्द ही उसने मुझे भईया कहना शुरू कर दिया..इन्टरनेट पे पहली बार किसी ने मुझे भईया कहा था, तो बहुत अच्छा लगा उस वक्त..धीरे धीरे ये लड़की मुझसे बहुत बातें शेयर करने लगी, हमेशा मुझसे सलाह लेते रहती थी…मैंने भी इसे अपनी बहन से कभी कम नहीं समझा…ये अलग बात है की ये कुछ ज्यादा ही एहमियत दे देती है मुझे, बेचारी ये समझती भी नहीं की मैं उतना भाव देने लायक नहीं हूँ :)..एक बार एक दोस्त ने मुझसे पूछ दिया की यार ये अंकिता कौन है….उस समय मेरे अधिकतर दोस्तों की राय इन्टरनेट फ्रेंडशिप के बारे में अच्छी नहीं थी और मैं कोई विवाद में फंसना नहीं चाहता था, इसलिए सबको ये बोल दिया की वो मेरी कज़न है…अंकिता से मैं पटना में जब पहली मिला था, करीब चार साल पहले, तो यकीन जानिये ऐसा बिलकुल नहीं लगा मुझे की मैं अंकिता से पहली बार मिल रहा हूँ.

इन्टरनेट पे सच्चे दिल के रिश्तों का एक और सबसे बड़ा प्रमाण है मेरे कुछ भाई बहन, जो मुझे इन्टरनेट के द्वारा मिले लेकिन मैंने कभी गलती से भी इन रिश्तों को “इन्टरनेट दोस्ती” का नाम नहीं दिया…मैंने हमेशा उन्हें अपना भाई-बहन ही माना. प्रभा के बारे में तो आप यहाँ पढ़ ही चुके हैं…वरुण, अनिल, अमन, रुचिका,मोना, तान्या, अतिप्रिया, रिम्मी, अनु...ये सब कुछ ऐसे लोग हैं जो पिछले चार पांच सालों से मेरी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं, ये मेरे लिए मेरे परिवार के ही सदस्य हैं….ये सब भी मुझे अपने सगे भाई से ज्यादा स्नेह और मान देते हैं…शायद ही मेरी कोई बात हो जो इन्होने काटी हो या ना मानी हो.मेरे पे बेहिचक हक भी जताते हैं और बहुत सी बातों के लिए मेरे से ही सलाह लेते हैं.कभी मेरी तबियत हलकी सी भी खराब हो जाए तो ये लोग बिलकुल वैसे ही परेसान हो जाते हैं जैसे की मेरे पापा-मम्मी या फिर मेरी बहन ऋचा…तुरंत इन सब के कुछ एस.एम्.एस भी आ जाते हैं – क्या भईया ध्यान से रहते नहीं..फिर बीमार पड़ गए ” 🙂….ज्यादातर सब बच्चे दिल्ली के रहने वाले हैं…चार पांच बार जब भी मैं दिल्ली गया हूँ पिछले कुछ सालों में, ये लोग हमेशा मुझसे मिलने मेरे सुविधानुसार  पहुँच जाते हैं, चाहे मैं कहीं भी रहूँ…रुचिका तो कुछ महीने पहले जब बैंगलोर आई थी एक दो दिन के लिए, तो बेचारी बारिश में भींग के भी मुझसे मिलने चली आई…पिछले बार जब मैं दिल्ली से पटना आ रहा था, तो मेरे पास लगेज बहुत थे…मेरी बहन का सारा सामान था…ये अनिलं पहुँच गया मुझे हेल्प करने…और अधिकतर लगेज इसने अपने कन्धों पे उठा लिया,ये बोल के की भईया आप मेरे रहते लगेज कैसे उठा सकते हैं,…:)  इन लोगों का प्यार ही है जो ये मुझे इतना मान देते हैं, आसमान बना दिया है मुझे….कभी कभी ये डर भी लगता है, की मैं इस इज्जत के लायक हूँ भी या नहीं? मैं चाहे जितना भी बुरा लिखूं, इन लोगों के लिए मेरे से बेहतर कोई राइटर नहीं, मेरे से बेहतर कोई कविता लिखने वाला नहीं, ये अलग बात है की मेरे फ़ालतू से फ़ालतू लिखे हुए पर भी ये लोग तारीफ़ करते नहीं थकते..ये तो कहलायेगा इनका अंधा प्रेम..:) 
रिश्ते कभी एक तरफ से नहीं निभते…दोनों तरफ से प्यार एक जैसा ही होना चाहिए रिश्तों को निभाने में…लेकिन यहाँ मैं कहूँगा की रिश्तों को ये लोग मुझसे ज्यादा अच्छे से निभाते हैं…हमेशा जुड़े रहे ये सब मुझसे…चाहे अच्छे वक्त में, चाहे बुरे वक्त में. इन लोगों के प्रति मैं जो फील करता हूँ उसे शब्दों से नहीं बता पाऊंगा. इन्टरनेट पे बने रिश्ते इतने सच्चे और गहरे भी होते हैं, इन बच्चों के कारण ही जाना मैंने.

ये बात सही है की इन्टरनेट के जरिये ही मुझे कुछ दोस्त और भाई बहन मिले, लेकिन कभी भी मैंने इन रिश्तों को “इन्टरनेट फ्रेंडशिप” का नाम नहीं दिया…एक बार निधि के मुहँ से गलती से “इन्टरनेट बडीज” शब्द निकल गया…मुझे बड़ा गुस्सा आया और उसे डांट भी लगा दिया…उसे भी एहसास हुआ की हमारे दोस्ती को इन्टरनेट दोस्ती का नाम नहीं देना चाहिए…लोग अक्सर ये सोच लेते हैं की इन्टरनेट से बने रिश्तों में वो सच्चाई नहीं होती है, उन लोगों के लिए मेरे पास प्रमाण की कमी नहीं… इस ब्लॉग के ही क्षेत्र में देख लीजिए, जितने लोगों से मुलाकात हुई है, सब एक परिवार से हैं मेरे लिए….चाहे चचा जी हों, अजय भईया, उमा जी, रश्मि दी, या शिखा दी हों…सबसे बेहद स्नेह वाला एक रिश्ता बन गया है..कुछ दिन पहले जब मुझे थोड़ी सर्दी खांसी थी, तो तुरंत चचा जी ने मेल कर के तबियत का हाल समाचार लिया..पिछले कुछ दिनों से रश्मि दी और शिखा दी से बातें कभी कभी होती रहती हैं चैट पे, जितनी बार भी बात हुई है, एक बेहद अपनापन लगा मुझे..ऐसा कभी भी महसूस नहीं हुआ की इनसे पहले कभी मिला नहीं. 

काफी दिनों से ये पोस्ट लिख कर रखा हुआ था मैंने…कुछ कारण से एक हिचक थी इसे पोस्ट करने में…लेकिन उन सब संकोच को तोड़ते हुए आज इसे पोस्ट कर रहा हूँ…मकसद एक बस वही बात कहने की है की -हम कभी  कुछ रिश्ते ऐसे चुन लेते हैं, जिनसे हमारी जिंदगी जुड़ जाती है..जो हर पल हमारे दिलो में रहते हैं और ये एहसास भी नहीं होता की कभी वो पराये भी थे..


इस पोस्ट को तुमसे बना मेरा जीवन का एक भाग समझा जा सकता है 🙂 

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  1. bhaiya
    today i'll b honest to say few things which i hv hardly said…
    bhai u hv alwys been a prsn whom i hv look upon to… nvr say u not worthwhile sharing stuff…u knw wid d help of ur suggestions i hv unfold so many of my problem…
    (sorry my hindi is not so good so all in english, i hope the blog reader wont mind)
    apne sahi kaha bhai dosti hi ek esi chiz hai jo hum apne se choose karte h…
    to b honest god hv alwys loved me … n to shower his love n to show hw much he loves me …has send few of ppl like u in my life…
    THNKS FOR BEING MY BROTHER N LOVNG ME SO MUCH…THNKS
    LUV U BRO!!!

  2. death ends life.. not a relation..! 🙂

    very true..! plus.. i do blv evrything is pre planned coincidence.. v met.. bcuz it was written in our destiny…

    n nthing is permanent..not evn our troubles.. 🙂

    bhaiyaa.. ur post is very very very very pure.. 🙂

    thanx 4 making me a part of ur lyf! 🙂

  3. एकदम सही कहा आपने दोस्ती ही एक ऐसी चीज है जो हम अपने से चुन कर करते है…आपके दोस्तों और आप को देखकर लगता है बहुत लकी है आप और आपके दोस्त…

  4. इस पोस्ट पे कुछ भी केहना बहुत कम होगा..
    बहुत अच्छे तरह से समझाया है तुमने सबके साथ अपना relation.
    और उन दिनों जब हम बातें करते थे chatting पे….बड़े अच्छे दिन थे…फिर तो मैंने अपना account ही delete कर दिया था….

    सब तुमसे इसलिए मानते हैं क्यूंकि तुम्हारे में कोई बनावट नहीं है…pure n crystal clear heart… 🙂

    thanks a lot for mentioning my name here….it means a lot me…

    thank u abhishek !!

    lots of love

    Nidhi

  5. अभी ! बहुत अच्छा लगा जानकार कि नेट पर तुम्हें इतने प्यारे रिश्ते मिले,खुशकिस्मत हो 🙂 वैसे जो जैसा हो उसे वैसे ही लोग मिलते हैं:).
    भगवान करे तुम्हारा ये विश्वास कभी न टूटे और सभी रिश्ते प्यार के साथ सलामत रहे.
    और हाँ इतना मान देने का शुक्रिया:) हम तो इस काबिल न थे 🙂

  6. Hmmm……frst of ol…..i think us din station aane se pehle raste mei maine kaha tha ki ye baat ap kisi ko ni bataoge :X :X :X
    vryy bad bhaiyaa…..seedha blog pe likh di ! 🙁 🙁

    wo part chod k i lov ol ! 🙂 🙂

    ap ni…..m lucky 2 hv u in my life….u r really d true gem…

    Thnxx alott for making me a part of ur life……

    n thnxx for giving me a small corner in ur blog ! 🙂 🙂

    Thnxx alott bro 4 evrythng…. 🙂 🙂

  7. ह्म्म्म …..तो एके पोस्ट में सबको लपेट दिया रे बच्चा लाल ..ओईसे जेतना हम तुमको जाने हैं उस हिसाब से तुम हईये हो एक हीरा ..बच्चा ..इसलिए सब तुमको एतना प्यार करता है ..सच कहा है और जैसा तुमने महसूस किया वो सब उडेल दिया है ..ईश्वर करे ये दोस्ती परवान चढती रहे …ऑर्कुट अंकल और फ़ेसबुक मामा तो थैंक्स कहना हमारी तरफ़ से भी …हमको भी तो एक ठो गोलू मोलू ..अनुज मिल गया है न ..

  8. बहुत अच्छा किया जो हिचक तोड़ कर ये पोस्ट लिख डाली..अब हमें कैसे पता चलता कि तुम इतना साsssss रा मान देने वाले हो…अभी तो हमें थोड़ी डायटिंग की जरूरत पड़ गयी है….इतना फूल जो गयी हूँ, अपने बारे में सुन कर…हा हा हा

    यही कहूँगी…Be the way U are और सही लोग तुमसे जुड़ते चले जाएंगे..

  9. अरे अभिसेक बेटा! ई जो चचा हैं न तुमरे जेतना पईसा नहीं कमाए हैं जिन्नगी में ओतना रिस्ता कमाए हैं. हमरा तो मानना है कि कंधा कम नहीं पड़ना चाहिए!! जोक्स अपार्ट! हमरी तीन माँ के बारे में त जानबे करते हो, अब सुनो परिबार के बारे में… एगो बंगाली माँ, एगो बंगाली भाई अऊर बहिन, एगो मद्रासी बहिन, एक जोड़ा पाकिस्तानी भाई भौजाई, दो मुसलमान भाई अऊर बहुत सा तुमलोग जईसा बाल बच्चा… भगवान के साथ तो अपना कभी रिस्ता बनबे नहीं किया.. अब एतना सारा लोग मिलकर दुआ करेगा तो कम से कम हमरा जिन्नगी में भी सांति रहेगा… एगो अऊर बात नोट करो. तुम त फॉरेक्स का आदमी हो, त ई सबक नोट कर लो.. हमेसा दिल का सुनो. दिल तो पागल है, मगर हर सच बोलने वाला को दुनिया पागल कहता है!! जियो बेटा! जुग जुग जियो!

  10. कुछ ऐसा ही अहसास रहा मेरा भी रहा है वर्चुअल दुनिया के फ्रेंड के साथ..कई मेरे अच्छे दोस्त बने और उनसे मिलना भी हूवा….आगे भी बनते रहेंगे…अपने इस सुब्जेक्ट पर अच्छी पोस्ट लिखी है..शुक्रिया…

  11. तुम बहुत अच्छे हो अभिषेक इसलिए तुम्हे इत्ते प्यारे प्यारे भाई बहन मिले.
    संभाल के रखना इन रिश्तों को.

  12. प्रमोद तिवारी जी की एक कविता है:

    राहों में भी रिश्ते बन जाते हैं,
    ये रिश्ते भी मंजिल तक जाते हैं….

    -मेरे खुद भी न जाने कितने रिश्ते इसी माध्यम से बने और वाकई, बहुत दूर तक साथ चल रहे हैं…

    अच्छा लगा पढ़कर तुम्हारा अनुभव!

  13. very nice post. bahut dino baad aapka koi post padha maine. sachii bada achha laga. aapki post padke yeh andaza lagaya ja sakta hai ki aaap kitne acche insaan hai. :))

    waise aapke blog a new look mujhe bahut pasand aaya hai. it reminded me of my holiday days :))

  14. बिलकुल सही…शत-प्रतिशत सहमत हैं हम तुम्हारी बातों से…:)
    वैसे normally इन्टरनेट पर सावधानी बरतनी तो चाहिए, पर ये भी सच है कि अच्छे-बुरे लोग हर जगह होते हैं, इसका मतलब ये नहीं कि हम अपने मन से विश्वास ही ख़त्म कर दे…|
    वैसे हमने भी कब सोचा था कि ये इन्टरनेट ही हमको तुम्हारे जैसा प्यारा भाई दे देगा…|
    ये पोस्ट उनको ज़रूर पढनी चाहिए जो खून से इतर कायम रिश्तों को गलत नज़र से देखने का मौक़ा नहीं चूकते…|
    🙂 <3

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