वो दिन जब हम क्रिकेट खेलते थे : [कुछ पुरानी यादों के नशे में -पार्ट १०]

एक छोटी सी पोस्ट, कुछ पुरानी यादों में नशे के जैसा..

नाम – अभिषेक कुमार,
जन्मस्थल – पटना
मेजर  टीम – छोटे छोटे बहुत से हैं 😛
भूमिका – विकेटकीपर/बैट्स्मैन/बौलर
बैटिंग – राईट हैंड बैट्स्मैन
बोलिंग  – राईट हैंड मीडियम फास्ट/स्पिन 
 

राजवंशी  नगर और पटेल नगर की सबसे अच्छी यादों में से एक क्रिकेट भी है.मुझे इस क्रिकेट का शौक कब से लगा ये नहीं पता,शायद बचपन से ही..जब से याद है, मेरी क्रिकेट के प्रति दीवानगी रही है.जब छोटा था तब अपने मामा के टीम में खेलता था.हर शाम छोटे मामा के कुछ दोस्त आते थे खेलने. नानी के घर के सामने खुला मैदान था, हम लोग क्रिकेट वहीँ खेलते थे.मैं उस वक्त छोटा था लेकिन बड़े काम का खिलाड़ी था 😛 अक्सर मुझे विकेटकीपर की ही भूमिका मिलती थी, वैसे मैं बोलिंग और बैटिंग भी अच्छा करता था , लेकिन विकेटकीपर की भूमिका मुझे ज्यादा अच्छी लगने लगी थी और धीरे धीरे अच्छा अभ्यास भी होते जाता था.मामा के टीम में सभी लोग मुझसे काफी बड़े थे,और उनके साथ मैं खेलता था और अच्छा खेलता था ,तो ये कोन्फिडन्स रहता था की मुझे अच्छे से क्रिकेट आता है..:) उस समय मैं संत कैरेंस हाई स्कूल में पढ़ता था.शायद पांचवीं कक्षा में रहा हूँगा, पहली बार जब स्कूल के टीम में खेलने का मौका मिला..वहां मेरी यही विकेटकीपिंग काम में आई.शायद उस दिन ३-४ कैच पकड़े थे मैंने और कुछ अच्छे रन भी बनाये थे(शायद 45), ये अलग बात है की हमारी टीम हार गयी और मैन ऑफ द मैच भी किसी और को मिल गया था 😛 .दो चार बार बड़े मैदान में भी खेलने का मौका मिला था(स्कूल के तरफ से ही) और हर बार अच्छा पेर्मोर्मेंस रहा था मेरा..जहाँ तक याद है एक बार मैंने हाफ सेंचुरी भी बनाई थी. घर के बगल में गुड्डू भैया और बंटी भैया रहते हैं, बंटी भैया मेरे मामा के दोस्त हैं, और गुड्डू भैया, बंटी भैया के छोटे भाई.ये दोनों भी खेलते थे हम लोगों के साथ.मेरी ज्यादा दोस्ती रहती थी गुड्डू भैया के साथ, हालांकि वो मेरे से उम्र में बड़े थे , लेकिन फिर भी दोस्ती थी :).

फिर जब हमलोगों का राजवंशी नगर आना हुआ तो वहां भी क्वार्टर के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया.हालांकि उनलोगों से कभी ना तो अच्छी दोस्ती हो पायी और ना कभी उनलोगों के साथ अच्छा क्रिकेट ही खेल पाया.मेरा एक मित्र प्रभात(जिसका जिक्र आजकल मैं कुछ ज्यादा ही कर रहा हूँ), वो मेरे घर के पास में ही रहता था इसलिए मेरा क्रिकेट खेलना प्रभात के साथ शुरू हो गया.हालांकि जितना हम लोग क्रिकेट खेलते थे उससे ज्यादा बैडमिंटन खेलते थे हम लोग 😉 प्रभात और मैं एक साथ पढते थे पटना सेंट्रल स्कूल में, यहाँ अजीब बात देखने को मिली, किसी को क्रिकेट का कुछ खास शौक नहीं था..शायद इसलिए भी मैंने कभी किसीको बताया नहीं की मुझे क्रिकेट आती है और वो भी अच्छे से आती है. जहाँ तक याद है मुझे, बस एक बार ही क्रिकेट खेला था इस स्कूल में, लेकिन बहुत खराब प्रदर्शन रहा था :P.

प्रभात के साथ तो खेलता ही था, अपनी बहन के साथ भी क्रिकेट खेलता था 😛 हालांकि वो नौसिखुआ प्लेयर थी उस समय, फिर भी कभी कभी एक दो शोट अच्छा जमा देती थी 🙂 क्वार्टर में आने के बाद पापा ने मेरे लिए पॉवर का एक बैट ख़रीदा, उस समय पॉवर के बैट का बड़ा क्रेज जैसा था.मैं तो बहुत खुश हुआ था की अब मेरे पास भी पॉवर का बैट है और एस.जी का बॉल. मैं तो कभी कभी अपने क्वार्टर के बारामदे में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर देते था 😉 मुझे तो लगता है की जन्म से ही मेरे अंदर ये क्रिकेट का कीड़ा रहा है.आपको यकीन नहीं आता तो मेरी बचपन की तस्वीर देख लें, उसमे भी मैं बैट लिए खड़ा हूँ 🙂 

बचपन से ही बैट हाथ में 😉

 पिछले करीब आठ सालों से मैं इस क्रिकेट से बहुत दूर रहा हूँ.इंजीनियरिंग में एक दो बार खेला भी लेकिन फिर दिल ही नहीं किया..पता नहीं क्यों..शायद इसलिए भी की जितने लोग खेलते थे क्रिकेट उमने से कुछ लोग मुझे पसंद नहीं थे.बैंगलोर आने के बाद भी कभी वैसा मौका लगा नहीं की क्रिकेट खेल पाऊं.अभी कुछ दिनों पहले एक दोस्त के घर गया. उसके घर में बैट देख के मन मचल गया..सेल्फ-प्रैक्टिस करने लगा..हाथ तो घूम ही नहीं रहा था..ऐसा लग रहा था की कलाई जाम हो गयी है.मेरे दोस्त को मालूम नहीं है मेरे इस क्रिकेट के शौक के बारे में तो उसने चुटकी लेते हुए कहा – भाई, कभी खेला है जो फ़ालतू का स्टाइल मार रहा है..छोर दे भाई, रख दे बैट..मैं कभी सिखाऊंगा तुझे कैसे खेलना है. मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा – बिलकुल यार…मैं मरा जा रहा हूँ तुझसे ट्रेनिंग लेने के लिए 😛 😛 

कभी  कभी बहुत दिल करता है क्रिकेट फिर से खेलने को, कभी वैसा मौका मिला तो जरूर खेलना शुरू करूँगा.फ़िलहाल क्रिकेट का शौक क्रिकेट देखने तक ही सिमित है 🙂 


चलते चलते एक और बात, आज गुलज़ार साहब का जन्मदिन है , उन्हें जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं 🙂 उनका एक गीत भी सुनिए, मेरे फेवरिट में से आता है ये गीत 🙂 

आज शाम मैं दिल्ली के लिए निकल रहा हूँ.कुछ ऑफिस का ही काम है और फिर दिल्ली से पटना जा रहा हूँ..वहां कुछ दुश्मनों से मिलना है 😉 और राखी भी है..तो फ़िलहाल खुश हूँ की घर जा रहा हूँ 🙂

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    राखी पर घर ..वाह ..एश है .

  2. क्रिकेट से लगाव तो आपका बचपन से ही है…फोटो गवाह है… बीच में ब्रेक आ गया…पर कोई नहीं….आजकल तो ऑफिस की भी क्रिकेट टीम बनती हैं…बाकायदा टूर्नामेंट होते हैं…आप ही initiative लो…और सबसे ज्यादा रन बनाओ…अभी से मेरी All The Best

    दिल्ली की यात्रा शुभ हो…खूब अच्छे से राखी मनाओ…और जेब हल्की कर के आओ…:)..शुभकामनाएं.

  3. वाह बेटा.. नानी के घर के सामने बड़ा सा मैदान था!!! मेरे घर के सामने खेल कर बड़का हीरो बन रहा है यहाँ ब्लॉग पर.. वैसे 1997,1998,1999,2000.. ये चार साल हम किसी और को वहाँ खेलने ही नहीं देते थे.. पूरी तरह से कब्जा किये रहते थे.. एक बार तो इसी बात पर जम कर मारपीट भी किये थे.. बेसबैट से.. 😉

    मिलो पटना में.. वहीं उसी मैदान में गोर-हाथ नहीं तोड़े तो फिर बोलना.. 😛

    वैसे अब तो वो मैदान भी नहीं रहा.. वो भी कंक्रीट के जंगल में बदल गया है.. 🙁

  4. FYI, मेरे घर के ठीक पीछे अभी भी वो मैदान है.. अबकी बार जब घर पर आओगे तो दिखाएँगे.. 🙂 जिस साल का जिक्र किया हूँ, उस समय किराए के घर में था.. बाद में वहीं पास में हम परमानेंटली शिफ्ट हो गए..

    BTW, वो मैदान मेरे पुराने मकान मालिक के साले साहब का था..

  5. पहिले त हमको लगा कि फोटो में बेस बॉल का बैट है…अच्छा लगा कि तुमको भी बिकेट कीपिंग पसंद था… हमरा ऑल टाइम क्रिकेट हीरो रहे हैं (पता नहीं तुम देखे हो कि नहीं या सुने हो कि नहीं) फारुक इंजीनियर… उनके जेतना इश्टाइलिस्ट बिकेट कीपर कोनो नहीं देखे हम… अच्छा लगा संसमरन..

  6. अच्छा है अच्छा है…….तुम मोहले के धोनी और हम नौसिखिया…..मैं आपको याद दिला दूँ के मेरे सिवा तुम्हारे साथ कोई खेलता भी नेही था….समझे…….

    और वैसे हम भी खेले हैं छोटा मामा के दोस्त लोग क साथ क्रिकेट समझे…….

    वैसे बहुत हीं अच्छा लिखे हो ………

  7. अरे !! ये पोस्ट तो मैंने देखा ही नहीं था..बड़े क्यूट लग रहे हो बैट पकड़े हुए !!!!

  8. हमको पता तो है ये सब…पर पढने में फिर मज़ा आया…:)
    अबकी एक मैच का इंतज़ाम करते हैं…जीते तो `मैन ऑफ़ दी मैच' तुम…हारे तो भी क्या…हम ट्राफी ही लेकर भाग जाएंगे…:P

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