पेंटिंग…फिर से.

एक छोटी सी बात, कुछ पुरानी यादों के नशे में जैसा __

आज एक मित्र के साथ रिलाइअन्स टाइमआउट जाना हुआ.कुछ पेपर फाइल और २-३ नोटपैड खरीदने थे..रिलाइअन्स टाइमआउट में अलग अलग सेक्सन है जैसे बुक्स, स्टेशनरी,फिल्म्स , गिफ्ट्स, टॉयज,पेंटिंग, इत्यादी..अक्सर मैं बुक्स और फिल्म्ज के सेक्सन में उलझ के रह जाता हूँ..इस बार सोच के गया था की बुक्स और फिल्म सेक्सन के तरफ देखना भी नहीं है..सीधे जा पंहुचा स्टेशनरी के तरफ..फाइल्स और नोटपैड्स लेने के बाद युहीं कुछ इधर उधर किया, यकायक नज़र गयी पेंटिंग सेक्सन के तरफ.तरह तरह के ब्रश और रंग का कलेक्शन दिख रहा था.दिल अजीब बेचैन हो गया कलर्स देखने के बाद.रंगों से मेरा एक पुराना नाता सा रहा है.जब स्कूल में था तो मैं बहुत अच्छी पेंटिंग्स किया करता था.बचपन में एक पेंटिंग क्लास में नाम भी लिखाया था मैंने,शायद वहीँ से पेंटिंग सीखा भी..मेरी छोटी मौसी भी पेंटिंग करती थीं, और उन्ही के साथ हम(मैं और मेरी छोटी बहन) जाते थे पेंटिंग सीखने.मैं और मेरी बहन तो छोटे वाले ड्रॉइंग कॉपी पे प्रैक्टिस करते थे, मौसी बड़े वाले कैन्वस पे..उस समय बच्चे ही थे हम लेकिन पेंटिंग के बहुत सारे बेसिक और जरूरी चीज़ अच्छे से समझ गए थे.मौसी आयल पेंटिंग करती थी, तो हमें समझ भी आ गया था की आयल पेंटिंग किसे कहते हैं और करते कैसे हैं, ये अलग बात है की अब तक सब कुछ भूल भी चूका हूँ 😛 


उस समय जब घरवाले पेंटिंग की तारीफ़ करते थे तो कभी कभी ये भी ख्याल आ जाता था की मैं तो एक बहुत बड़ा पेंटर बन सकता हूँ..फिर धीरे धीरे जैसे पढाई का बोझ बढ़ता गया वैसे वैसे ये पेंटिंग का नशा भी कम होता गया..हम मध्यमवर्गीय परिवारों में ये पेंटिंग्स और ऐसे कलाकारी को प्रोफेसन बनाने से पहले सैकड़ों बार सोचना पड़ता है..मैंने तो खैर एक बार भी नहीं सोचा, पेंटिंग एज ए प्रोफेसन तो सोच ही नहीं सकता था उस वक्त..बस यही दिमाग में था की पढाई करनी है, पेंटिंग नहीं..पढाई नहीं करूँगा तो घर पे डांट सुनूंगा. दसवीं क्लास तक ये पेंटिंग का शौक बरक़रार रहा, फिर उतरते गया ये शौक भी..इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के बाद तो जैसे पेंटिंग से मेरा नाता ही टूट गया. बारहवीं के बाद पटना जब छोड़ा था, साथ ही पेंटिंग का साथ भी छुट गया था..आखरी बार कब ब्रश पकड़ा था हाथ में याद भी नहीं…अब तो शायद सही से एक छोटी सी नदी-पहाड़ों वाली पेंटिंग भी नहीं बना पाऊंगा..कलर कंट्रास्ट/मिक्सिंग और ब्रश स्ट्रोक्स तो बहुत दूर की चीज़ है.

पहले  मेरे दोस्तों में मेरी खुद की बनाई हुई ग्रीटिंग्सकार्ड की बड़ी धूम थी..सभी तारीफ़ करते थे .मैं और मेरी बहन, दोनों मिलकर बनाते थे ग्रीटिंग्स कार्ड और तरह तरह के कलाकारी उस ग्रीटिंग्स कार्ड में दिखाते थे.स्कूल में भी किसी विषय में तेज हो न हो, ड्रॉइंग क्लास की टीचर अच्छे से पहचानती थी मुझे.फ़िलहाल तो मेरे पास मेरी कोई भी पुरानी पेंटिंग नहीं है, लेकिन बहुत पहले मैंने अपना नाम का पहला लेटर A, कुछ इस तरह लिखा था..ये मेरी डायरी पे लिखा हुआ है, तो आज भी मेरे पास है.अब तो ऐसा सिम्पल ड्रॉइंग भी बनाना कठिन दीखता है 🙂


आज शाम जब दुकान में देखा कलर्स और ब्रशेज तो पता नहीं क्या क्या याद आ गया, दिल फिर से मचलने लगा पेंटिंग शुरू करने को, ..पर इतने सालों बाद फिर से पेंटिंग शुरू करना, पता नहीं कर भी पाऊंगा या नहीं..खैर, कुछ स्केच पेन,पेंसिल और कुछ और रंग ले आया हूँ आज खरीद के..देखता हूँ कितना और कैसा पेंट कर पाता हूँ, अगर कुछ अच्छा बना पाया तो और भी कलर्स और पेंटिंग के सामान खरीदूंगा..लेकिन सबसे बड़ी बात ये है की अब इतने व्यस्तता के बाद पेंटिंग की फुर्सत किसे मिलेगी, और ये भी तो पता नहीं की शुरुआत कहाँ से करूँ…हाथों में तो जंक लग गया है..कुछ लोगों से आपने सुना होगा की पेंटिंग करने से दिमाग शांत रहता है, सुकून मिलता है..बिलकुल सही बात है, मैंने ये महसूस किया भी है जब 12th में था.फ़िलहाल खुश हूँ की फिर से पेंटिंग शुरू करने की कोशिश करने वाला हूँ 🙂 

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  1. हाँ !! पता है अभिषेक मुझे तुम्हारे इस Painting के शौक के बारे में..अच्छा है फिर से शुरू कर दो .और Painting के अलावा वो सब और Hobbies भी जो तुमने बहुत पहले छोर दिया था !!!!!!!!! 🙂

    वैसे क्या बनाओगे पहले? Mountains n rivers 😛

  2. जी, मैं पहले ही ये बात बता दूँ की पहली वाली तस्वीर जिसमे नाव है बनी हुई वो मैंने नहीं बनाई है, वैसी अच्छी पेंटिंग मैं नहीं करता 🙂 वो किसी वेबसाइट से मिली थी…
    हाँ, दूसरी A अक्षर वाली मेरी है…

    मेरे पास मेरी और कोई भी पेंटिंग नहीं है फ़िलहाल 🙁

    अभी प्रशान्त को भी यही ग़ल

  3. जब A इतना अच्छा बना सकते हो तो पेंटिंग के बारे में कोई शंका नहीं हमें ..अब ले ही आये हो सामान तो शुरू हो जाओ बहुत सुकून देता है रंग बिखेरना 🙂

  4. का हमरा दुखता रग पर हाथ रख दिए हो बचवा…हमरा कार्टून का खिस्सा त लिखिए दिए हैं..चारकोल से भी बहुत कुछ किए..लेकिन अब सब खतम…हाँ एक्के चीज बाकी है..अभी भी बोरियत के बीच हाथ में पेन हो अऊर सामने कागज त कोनो न कोनो शकल बनिए जाता है..हाँ हमरा बेटा बहुत बढिया पेंटिंग करता है!!

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