कार-प्रेम…..ऐसी दीवानगी जो बढ़ती ही जा रही है 🙂 🙂

पता नही क्यों बचपन से ही मुझे कारों का अजीब सा शौक रहा है..गाड़ियों की तस्वीरें जमा करना..उनके बारे में जितना हो सके उतनी जानकारियां इक्कठा करना.गाड़ियों की तस्वीरों और वॉल्पैपर को बस निहारते रहना.तेज भागती गाड़ियां मुझमे एक अजीब सा जोश भर देती हैं..चमकीली स्टाइलिश स्पोर्ट्स कार हो, खतरनाक डिजाईन वाली मसल कार  या फिर अल्ट्रा लक्जरी गाड़ियां..सब मेरे होश उड़ा देती हैं..तेज भागती दौड़ती गाड़ियों को ड्रिफ्ट करते देखना मुझे सबसे ज्यादा पसंद है..फुल स्पीड में गाड़ी हो और थोड़ा सा हैंड ब्रेक का कमाल, थोड़ी स्टिरिंग की ट्रिक और एक खतरनाक ड्रिफ्ट, बस और क्या चाहिए…हम जैसे कार-प्रेमी तो बस इसी में आहें भरने लगते हैं…

बचपन  में कोई भी गाड़ी की तस्वीर देखा पेपर या मैग्जीन में तो काट कर अपने कलेक्सन में जोड़ लेता था.गाड़ी चाहे मारुती ८०० हो या अम्बैसेडर या फिर कोई स्पोर्ट्स कार…सभी की तस्वीरों को जमा करता था मैं.बचपन में मैं तीन गाड़ियों का दीवाना था – Contessa, Daewoo Cielo, और Mitsubishi Lancer. ये तीन गाड़ियां मुझे अब भी पसंद है.उस समय मुझे बाकी के गाड़ियों के बारे में ज्यादा जानकारी नही थी.घर में इंडिया टुडे मैग्जीन  आती थी, तो उसमे जो भी गाड़ियों के विज्ञापन देखता था बस उन्ही के बारे में जानता था.इन तीनो के अलावा जिन गाड़ियों में मेरी दिलचस्पी थी उस समय वो थीं- Fiat Uno,Ford Escort,Daewoo Matiz, Peaugot 409 Estate, Chevrolet Impala..मर्सिडीज सी-क्लास के बारे में भी कुछ जानकारी थी.किसी मैग्जीन से ही पता चला था .. Chevrolet Impala हमारे हिंदी फिल्मों में बहुत इस्तेमाल में आती थी, ये भी बात कहीं किसी मैग्जीन में ही पढ़ी थी मैंने, तब ही इस गाड़ी के बारे में पता चला था….उसके पहले मैंने इस गाड़ी का नाम कभी सुना नही था.और मर्सिडीज का नाम तो शायद अधिकतर भारतीय को पता होगा ही, चाहे उसे कार की अच्छी जानकारी हो न हो, लेकिन मर्सिडीज गाड़ी के बारे में पता तो होगा ही. 🙂 

बचपन से मुझे रैली रेसिंग देखना का शौक था. मुझे सही से याद तो नही, लेकिन पहले दूरदर्शन पे हर रविवार को शाम ४ या ५ बजे रैली रेसिंग आता था.कह सकते हैं मेरा गाड़ियों का शौक उसी रेसिंग को देखते देखते बढ़ा .
जब  बारहवीं में गया और इंटरनेट जानने लगा, तो मेरी गाड़ियों के बारे में जानकारियां बढ़ने लगी..यही वो समय था जब मैंने फोर्मुला वन देखना शुरू किया.जब इंजीनियरिंग में दाखिला लिया तो वहां एक लड़के से दोस्ती हुई, मंगलम शर्मा.गोरखपुर का रहने वाला लड़का था, लेकिन पूरा परिवार हैदराबाद में बस गया था.नोर्थ के लड़कों में दोस्ती जल्दी होती है, तो अपनी भी दोस्ती हो गयी.जिस दिन दोस्ती हुई उसी दिन ये जाना मैंने की उसे भी गाड़ियों का खतरनाक शौक है,फिर क्या था हमारी बातचीत गाड़ियों के विषयों पे होने लगी.उस समय मैं फोर्मुला वन रेस का एक फैन बन चूका था. हम लोग रेस की बातों पे चर्चा करते, कौन से टीम ने कौन से ड्राईवर को चुना है..कैसा किस टीम का टेस्टिंग सेसन रहा, कौन सा ड्राईवर बाजी मारेगा रेस में..वैगरह वैगरह. मैं ठहरा माइकेल शुमाकर का जबरदस्त फैन, और मंगलम को उस समय मोंटोया पसंद था..हमारी कितनी बार बहस हो जाती थी इस बात को लेकर ..:) माइकल शुमाकर को मैं दुनिया का सबसे अच्छा रेसिंग ड्राईवर मानता हूँ..शुमाकर के इतने अच्छे अच्छे रेसेज हुए हैं की बस उन्हें देख दिल थम जाता है.फोर्मुला वन रेस देखना कितना रोमांचकारी होता है ये किसी फोर्मुला वन फैन से ही पूछिए आप 🙂 

इंजीनियरिंग के दिनों जब मैंने कंप्यूटर लिया और गाड़ियों की जानकारियां, वॉल्पैपर जब जमा करने लगा तो मेरी बाकी गाड़ियों के बारे में जानकारियां बढ़ने लगी…बी.एम.डब्लू, फोर्ड, कैडिलैक,टोयोटा, औडी, फेरारी, जैगुआर,पोर्स इत्यादी., इन गाड़ियों के बारे में ज्यादा सर्च करने लगा मैं…इंटरनेट पे, मैगजीन्स में…इंजीनियरिंग के तीसरे साल के शुरुआत में मंगलम ने कुछ व्यग्तिगत कारणों से कॉलेज छोर दिया,उसके कॉलेज से जाने के बाद मुझे वैसा कोई दोस्त नही मिला जिससे मैं गाड़ियों की बारीकियों के बारे में बात कर सकूँ..हाँ,एक मित्र अकरम को उस समय गाड़ियों में दिलचस्पी थी, पर बारीकियों से वो बहुत दूर था.फोर्मुला वन रेसिंग की जानकारी भी नही थी.ऐसे में मैंने इंटरनेट का सहारा लिया और जब भी खाली वक्त में बैठता था तो गूगल पे कारों के बारे में सर्च करता.इंटरनेट पे ही मैंने पहली बार फेरारी एन्जो के बारे में जाना.उस गाड़ी के बारे में जितना जानता गया उतनी ही मेरी दीवानगी भी उस गाड़ी के प्रति बढ़ती गयी.फेरारी एन्जो एक ब्रेक्थ्रू डिजाईन वाली गाड़ी है..जो आज से दस साल पहले भी सबकी पहली पसंद थी और आज के ज़माने में भी टॉप दस स्पोर्ट्स कार में जरूर आएगी.बस एक ही दिक्कत है की इस गाड़ी का उत्पादन ज्यादा नही है.बस ४०० गाड़ियां ही हैं बाजार में.इस कारण भी लोगों में आज भी इस फेरारी एन्जो के प्रति दीवानगी बरक़रार है.

शायद इंजीनियरिंग का तीसरे साल था.मैं पटना में था..मेरे दोस्त शेखर ने मुझे एक दिन पोर्श के बारे में बताया.मैंने कहा कौन सा गाड़ी है यार?पहली बार नाम सुन रहा हूँ..उसने ऐसे गुस्से से मुझे देखा की जैसे मैंने कोई बड़ा पाप कर दिया हो..असल में वो उस वक्त पोर्श का दीवाना था और उसे मालूम था की कारों की दीवानगी मेरी भी है, ऐसे में उसे ये बात हजम नही हो रही थी की मैं पोर्श के बारे में नही जानता.फिर उसने मुझे अपने डेस्कटॉप पे पोर्श के वॉल्पैपर्स दिखाए, बहुत सी बातें बताई की इसमें ये खूबी है, v8, v10, v12 इंजन और पता नही क्या क्या.उसी दिन शेखर ने मुझे कैडिलैक के बारे में भी बताया.उस गाड़ी को देख मेरे होश उड़ गए थे.पहले भी देखा था उसके वॉल्पैपर्स, पर शायद धयान से नही देखा था.एक दो झलक में ही मेरी दीवानगी फेरारी से खिसक के कैडिलैक के तरफ आ गयी..ये दीवानगी उस दिन के बाद और बढ़ती ही रही, और अब भी मेरी ये दीवानगी कायम है…कैडिलैक की तस्वीरें जमा करना, इसके बारे में और जानना मुझे अब भी पसंद है…

एक  हालीवुड की फिल्म आई थी..निकोलस केज की “गॉन इन सिक्सटी सेकंड”.वैसे तो इस फिल्म को मैंने पहले भी कई बार देखा था, लेकिन हर बार एज-ए फिल्म के तरह ही देखता था, कभी कुछ खोजने की या गौर करने की  कोशिश नही की मैंने.…लेकिन जब मैं अपने इंजीनियरिंग के आखरी साल में था, तो एक बार मैंने फिर से ये फिल्म देखी…इस समय तक गाड़ियों की अच्छी खासी जानकारियां हो गयी थी, तो फिल्म देखने में और भी मजा आ रहा था…जब भी फिल्म में कैडिलैक का नाम लिया जाता , पता नही क्यों मैं खुश हो जाता था..फिल्म का आखरी सीन जो है जिसमे निकोलस केज Shelby GT 500 ड्राइव करता है, वो सीन तो आज भी मेरे अंदर एक अलग रोमांच पैदा कर देते हैं..हम जैसे कार प्रेमी तो उस Shelby GT 500 को इलेनोर कहते हैं, अगर कोई व्यक्ति मिलता है और वो ये कहता है की भई, इलेनोर तो मस्त गाड़ी है..तो हम समझ जाते हैं की ये भी अपने जैसा ही कार प्रेमी है और अपने ही जमात में आता है .. 🙂 वैसे तो मैंने कई सारे फ़िल्में देखी हैं हालीवुड की लेकिन ये फिल्म पता नही किन कारणों से मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म है.

हालीवुड की एक और फिल्म की सीरीज है, फास्ट एंड फ्युरीअस. ये फिल्म के चारों पार्ट मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं..पता नही कितने बार ये फिल्म मैं देख चूका हूँ..शायद मसल कार के प्रति मेरी दीवानगी इसी फिल्म से बढ़ी..जब फिल्म के मुख्य अभिनेता विन डीजल को Camaro SS और Ford Gran Torino चलाते हुए देखा फिल्म में, तो अपने आप को इन कारों के तरफ आकर्षित होने से रोक नही पाया..अभी पिछले साल फास्ट एंड फ्युरीअस-४ रिलीज हुई थी…आपमें से तो बहुत से लोगों ने देखा होगा, जो देख नही पाये हैं और तेज मसल कारों का शौक रखते हैं वो जरूर देखें इस फिल्म को..मेरा मानना है की जिन्हें कार के विषय वाली फिल्मों में रूचि है उन्हें गॉन इन सिक्सटी सेकंड, फास्ट एंड फ्युरीअस सीरीज  और ट्रांसपोर्टर सीरीज जरूर देखनी चाहिए. 

बैंगलोर आने के बाद एक लड़के निशांत से दोस्ती हुई..वैसे तो वो मेरे से छोटा है, पर दोस्ती हो गयी..वो भी कारों का अजीब दीवाना है..शायद मुझसे बड़ा दीवाना..वो तो इस इलेनोर के लिए पागल है, इलेनोर के साथ साथ हम दोनों फोर्ड मस्तंग के भी दीवाने हैं..इलेनोर और मस्तंग दोनों के सिम्बल अलग हैं पर दोनों फोर्ड की ही गाड़ियां हैं.गाड़ियों के इंजन की तेज ध्वनि कितनी रोमांचक होती हैं ये हम जैसे कार-प्रेमियों से पूछिए… 🙂 निशांत और मैं कारों के बारे में लगभग हर बातें करते हैं..विंटेज कार, मसल कार, क्लास्सिक कारें मुझे भी सबसे ज्यादा आकर्षित करती हैं और निशांत को भी..हम जब भी कहीं बाहर जाते हैं घूमने और कभी कहीं कोई नयी कार दिख गयी सड़क पे, तो बस तुरंत एक दूसरे को मेसेज से खबर कर दिया…जैसे की कुछ दिनों पहले हुआ था..बैंगलोर में मुझे Caddy Eldorado(Caddy=Caddilac) दिख गयी..अब तो मेरी खुशी का ठिकाना नही, तुरंत मेसेज किया निशांत को और एक फेसबुक अपडेट भी लगा डाला 🙂

इस साल जनवरी में मेरा और मेरी बहन का दिल्ली जाना हुआ, टाइमिंग भी कुछ इस तरह बैठी की जिस दिन हम पहुचें दिल्ली, उसी दिन इन्टर्नैशनल ऑटो एक्सपो का सुभारम्भ हुआ…अब हम जैसे कार प्रेमी कहाँ बर्दास्त करने वाले थे..पहुँच गए उस कार एक्सपो में…विंटेज कार का भी प्रदर्शन एक तरफ था..हमने देखा की विंटेज कार को देखने वाले बहुत कम हैं..मुझे पहले तो काफी हैरानी हुई, फिर बाद में सोचा मैंने की सभी को थोड़े ही पसंद हैं विंटेज कार..विंटेज कारों के शौक़ीन भी तो गिने चुने लोग ही हैं..उस कार एक्सपो में हर तरह की कारें को देख दिल खुश हो गया.कितनी खूबसूरत खूबसूरत गाड़ियां थीं…औडी R8, बी.एम.डब्लू z1,z4, मस्तंग..इन सब के साथ साथ मेरी फेवरिट कैडिलैक भी थी, हालांकि कैडिलैक विंटेज कारों की श्रेणी में थी, लेकिन फिर भी कमसे कम ६-७ कैडिलैक तो थी ही ऑटो एक्सपो में.मुझे बिलकुल आशा नही थी की कैडिलैक भी रहेगी उस ऑटो एक्सपो में..उसे देखते ही दिल ऐसे धड़का जैसे किसी का दिल अपनी महबूबा को देखने के बाद धड़कता है 🙂 …वहां से आने का मन तो बिलकुल नही कर रहा था, फिर भी हम वापस आ गए .


इसी कार के शौक के चलते मैंने एक ब्लॉग भी बनाया कार की बात, हालांकि उस ब्लॉग में फ़िलहाल कोई पोस्ट नही हो पा रहे हैं, समय की व्यस्तता की वजह से, जल्द ही वो ब्लॉग भी फिर से अपडेट हो जाएगा..:) हम तो कारों के शौक़ीन हैं, तो कारों की बात करने वाला कोई भी मिल जाए तो हमारा दोस्त हो जाता है 🙂

कारों की दुनिया में मुझे सबसे अच्छी लगती है कैडिलैक..कुछ चुनिन्दा कैडिलैक गाड़ियां जो मुझे पसंद हैं वो हैं – 1987 Caddy Allante, 1992 Caddy DeVille, Caddy Esclade, Caddy Eldorado, Caddy CTS-V,Caddy XLR…
इन सब के अलावा मेरी अन्य पसंदीदा गाड़ियों में आती है Shelby GT 500(Eleanor)… Ford Mustang,Thunderbird,Gran Torino…. BMW Z4,M5,Z1..Audi R8…Dodge Viper…Mercedes SLR.. Ferrari F40…Nissan GTR…Porsche 911…Bugati Veyron…Masereti Quattro…Rolls Royce Phanthom… Saleen…


ऐसी बात नही है की मुझे केवल हाई-क्लास गाड़ियां ही पसंद आती हैं…सच्चाई तो ये है साहब की भले इन सब गाड़ियों को पसंद कर लें, अंत में हमें घूम फिर कर वही मारुती अल्टो, ८०० या फिर सैंट्रो ही लेनी परेगी :P.. अपनी औकात वाली गाड़ियों में मेरी पसंद की हैं Ford Fusion, Ford Fiesta, Honda City, Maruti Swift,Maruti Baleno, Nissan Micra…अभी तो फ़िलहाल अपने पास मारुती अल्टो है..अपने पास कहने का मतलब की घर पे है 🙂 हमें खुद के पैसों से गाड़ी खरीदनी है, अब ये पता नही कब खरीद पाते हैं…देखिये कब लेते हैं और कौन सी गाड़ी लेते हैं…


फ़िलहाल के तो इतना ही, बाकी कुछ लगा की गाड़ियों की बात कहनी रह गयी, तो एक और पोस्ट लिख दूँगा…इतना लंबा पोस्ट आपको पढवाने के लिए माफ़ी चाहूँगा 😛

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  1. Aur mai car me baithtehi driver se kahti hun,highway pe 70 se aage jane ki zaroorat nahi..slow tracks me chalo! Khud bhi chalati hun to bade aaraam se,har niyam ka tantotant palan karte hue!!

  2. जी, आपकी बात से सहमत हूँ..हमारे देश के हाइवे पे गाड़ियों का संभल के ही चलना अच्छा है… जर्मनी या इटली की सड़कें हों अगर तो और बात है…:) और मैं तो बस ये जानता हूँ की हमें गाड़ी उतने ही रफ़्तार से चलानी चाहिए जितना हम कंट्रोल कर सकें अच्छे से…बेवजह की स्पीड सही बात नही 🙂

  3. अच्छा लगा पढ़ के तुम्हारा Rommantic Affair with Carz 🙂
    मुझे तो ज्यादा कारों के बारे में पता नही लेकिन मुझे BMW बहुत पसंद है.कौन सी वाली ये नही कह सकती.याद नही है मोडल

  4. अरे वाह अभिषेक…..मस्त…
    अपना भी है इधर.
    मेरा फेवरिट तो mustang है और lamborghini gallardo…
    बहुत मस्त पोस्ट लगी…..
    shelby gt की फोटो अच्छी लग रही है….ओह सॉरी शेल्बी नही..elenor….elenor की फोटो अच्छी लग रही है 😛

  5. वाह वाह ..इसे कहते हैं, पैशन ….और 'कार प्रेम' पर एक जबरदस्त पोस्ट….पर संभल कर चलाना बाबा, ये पैशन बस तस्वीर, रेसिंग और फिल्मो तक ही सीमित रखो…
    एक पोस्ट लिखने का मन है..कार पर नहीं, अपनी शुरू शुरू की ड्राइविंग पर…लेकिन बहुत सारे राज़ खुल जाएंगे…जो घर वालों से छुपा कर रखे हैं…एक्सीडेंट तो खैर नहीं किया कोई…बस एक कार की साइड मिरर तोड़ी है…:)
    पर आप हमेशा संभल कर ही चलाना….याद रखना…ये अपने भारत की सड़के हैं.

  6. जी ये बात तो ध्यान में रहती ही है की ये भारत की सड़कें हैं…और उसपे भी हमारे पटना की सड़कें…..एक बात जो मैंने नही लिखी पोस्ट में, शायद भूल गया होगा…की मैंने तो अपनी मारुती अल्टो से भी ड्रिफ्ट करवाई है 🙂
    पर हम संभल के ही चलाते हैं…
    वैसे आप इतना सा ही बात बोलकर चुप हो गयीं????अच्छी बात नही है….पोस्ट लगाइए, हमें तो पूरी कहानी सुनना है….:)

  7. माफी ऊफी का कोनो जरूरत नहीं है..लगे रहो… हम त रफ्तार के पीछे भागबे नहीं किए… तुमरी चाची को एक बार नया नया स्विफ्ट आया था ओही पसंद आ गया… मैरेज डे पर गिफ्ट कर दिए.. हमरे कलेक्सन में त अभियो ओही ब्यूक, बेंटली, स्टुडी बेकर बसा हुआ है… भैया के पास मोरिस था, एक दरवाजा वाला गाड़ी… बस!
    अरे हाँ! ऐसे त हमरा पोस्टवा नहिंए पढने का टाइम मिलता होगा.. ई बार इस्तुति का चर्चा है. मौका लगे त रफ्तार कम करके तनी चचा के घरो चले जाना!

  8. चचा जी, बेंटली का नाम लिखना भूल गए…बेंटली हमको भी बहुत पसंद है और मोरिस तो विंटेज कारों में आती है,बड़ी प्यारी लगती है हमें…हमरे पास तो उसका फोटू भी है कंप्यूटर में 🙂 …हमको तो विंटेज कार के नाम से ही प्यार है….

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