सावन बरसे तरसे दिल...कुछ पुरानी यादों के नशे में - एक बार फिर[पार्ट ७] :)

"फिर शाम-ऐ-तन्हाई जागी,फिर याद तुम आ रहे हो...फिर जां निकलने लगी है,फिर मुझको तड़पा रहे हो...इस दिल में यादों के मेले हैं,तुम बिन बहुत हम अकेले हैं..,

शाम की हल्की बारिश,दिलकश मौसम, गर्मा-गर्म पकौड़े और ये गीत..इससे बेहतर क्या हो सकता है....


दफ्तर से निकला तो बस के इंतज़ार में खड़ा था..पास में ही एक छोटी सी दुकान थी, पकौड़े छन रहे और लोग पकौड़े खाने के लिए भीड़ लगाये हुए...घर के बाहर पकौड़े या कुछ तला हुआ खाने से मैं परहेज ही करता हूँ लेकिन आज रोक नहीं सका खुद को, दस रुपये प्लेट प्याज-पकौड़े ले ली लिए आखिर...बारिश के मौसम में गरमा-गरम पकौड़ों का स्वाद कैसा होता है ये तो आप सब को बताने की जरूरत नहीं :) उसी दुकान में एफ-एम पे तुम बिन फिल्म का ये गीत(तुम बिन जिया जाए कैसे) बज रहा था..दिल तो बिलकुल नॉस्टैल्जया गया.. :)

बैंगलोर के वोल्वो बस से आने जाने का एक फायदा ये है की उसकी बड़ी बड़ी शीशे वाली बंद खिड़कियाँ जो बारिश में बारिश की बूंदों से सजी हुई रहती हैं, उन खिड़कियों पे अपना चेहरा टिका मैं पता नहीं किन अनजाने ख्यालों में खो जाया करता हूँ...फिर कब शेशाद्रिपुरम पार हुआ.. कब मल्लेश्वरम, कब सदाशिव नगर...कुछ पता नहीं चलता मुझे..मेरा स्टॉप जब आया तो अचानक से नींद टूटी,ख्यालों की दुनिया से बाहर निकला और बस से नीचे उतरा...

बस से उतरा तो मेरे सीनिअर मिल गए चाय दुकान के सामने, शायद आज सबने जैसे मेरा दिल जितने की शर्त लगाई हुई हो जैसे...उन मसालेदार और लाजवाब पकौड़ों का स्वाद अभी मुंह से गया भी नहीं था की चाय भी लाजवाब बना दी इस कमबख्त राघवेन्द्र बेकरी ने....बोलना पड़ा राघवेन्द्र भैया से, की भैया आज की चाय मस्त पिलाई आपने..चार रुपये के बजाये पांच रुपये ले लीजिए...दिल खुश कर दिया आपने:) उसने भी चुटकी लेटे हुए मुझसे पूछा, "क्या बात है भैया..आज आप बड़े मूड में दिख रहे हैं " मैंने बस मुस्कुराते हुए जवाब दिया, हाँ बस ऐसे ही...वो मुस्कुराने लगा और मैं वापस अपने घर आ गया :) 

कल से मेरे दोस्त निशांत(वैसे तो मेरे से छोटा है, जूनियर है लेकिन दोस्त से कम नहीं) को थोड़ा सर्दी जुकाम हो गया है..तो शायद इस सर्दी जुकाम ने उसके दिमाग के पेंच भी कुछ ढीले कर दिए हैं या फिर कुछ और लोचा हो गया है उसके साथ.....मेरी तरह बातें करने लगा है आजकल, दो दिनों से देख रहा हूँ की वो मेरी तरह बहकी बहकी बातें करता है , जैसे मौसम की खूबसूरती की बात, बारिश की बातें...वैगरह 

आज जैसे ही इसके रूम गया तो देखा की बेचारा निशांत, बड़ा टोपी वाला टी-शर्ट पहने कम्बल में घुसा हुआ है और सर्दी से परेसान है.....मैंने सोचा चलो थोड़ी देर बैठ जाऊं इसी के कमरे में, बाद में फिर कुछ काम वाम किया जायेगा....लेकिन इस निशांत ने तो क्या क्या याद दिला दिया..बारिशों की बातें और पुराने दिनों की बातें.....पता नहीं कहाँ से खाने-पीने की बातें भी उठ गयी, फिर क्या था मैंने भी एक सुर में कह दिया..भाई मुझे तो कहीं भी नेनुआ की सब्जी+गरमा-गरम पराठे, या फिर बैगन-बड़ी-आलु की मिक्स सब्जी और गरमा गर्म पूरी मिल जाए तो इस डिश पे चिकन तो क्या, दुनिया का कोई भी मेनू मैं कुर्बान कर दूँ  :) 


नेनुआ की सब्जी मेरी सबसे पसंदीदा सब्जी में से आती है(पटना वाले तो जानते होंगे नेनुआ की सब्जी का नाम, बाकियों का पता नहीं)..मेरे पुरे परिवार में सब को पता है की मेरी फेवरिट सब्जी यही है...नेनुआ की सब्जी चने के साथ बनी हुई....उफ्फ! इससे बेहतर और क्या हो सकता है....बचपन में एक बार इक्स्पेरीमन्ट जैसा कुछ किया था मैंने...माँ ने दोपहर के खाने में नेनुआ की सब्जी बनाई थी, जो सब्जी बच गयी उसे माँ ने फ्रिज में रख दिया..शाम में ऐसे ही माँ ने कहा की नाश्ता कर लो, सब्जी थोड़ी बची हुई है..पराठे बना देती हूँ, तुम खा लेना....माँ ने कहा था की सब्जी को गर्म कर लेना फिर खाना, आलस से मैंने सोचा की अब गर्म क्या करना सब्जी, ऐसे ही खा लूँगा.....यकीन मानिए..फ्रिज में रखी हुई ठंडी नेनुआ की सब्जी और गरमा-गर्म पराठे का जो स्वाद आया, दिल अंदर तक झूम उठा था....अब भी जब मौका मिलता है तो ये काम्बीनैशन मैं ट्राई कर ही लेता हूँ, इस काम्बीनैशन में जो आनंद है वो दुनिया के किसी भी डिश में नहीं  .......आपको अगर यकीन न आये तो एक बार ये  काम्बीनैशन आप भी आजमा के देखिये फिर बात कीजिये :)  


डॉक्टर कहते होंगे की बासी खाना नहीं खाना चाहिए लेकिन मुझे तो जो स्वाद मिलता है इस खाने में वह कहीं भी किसी खाने में नहीं मिलता..आज भी जब घर जाता हूँ और रात के खाने में माँ नेनुआ की सब्जी या फिर चने की दाल बनाती है तो मैं उनसे ये कह देता हूँ, की देखो सब्जी बचा के फ्रिज में रख देना, मैं सुबह फिर से खाऊंगा :) :) जिलेबी तो सबको पसंद है...गरमा-गर्म जिलेबी किसे नहीं अच्छी लगती, आपके भी मुह में पानी आ गया होगा जिलेबी का नाम सुनते ही.मुझे भी जिलेबी बहुत पसंद है..गरमा गर्म जिलेबी भी और... बासी जिलेबी भी....चौक गए??? जी हाँ......जब जिलेबी आती है घर में , तो उस वक्त तो गरमा गर्म जिलेबी हम खाते ही हैं लेकिन उसके बाद बची हुई जिलेबी को फ्रिज में रख देने के बाद फिर से शाम में वही बची हुई बासी जिलेबी खाने का स्वाद भी मस्त होता है :) ये सब आजमाए हुए नुस्खे हैं जो कभी फेल नहीं होते :) :)

उफ्फ!!! क्या क्या याद आ रहा है...घर में बनी बैगन की पकौडियां,आलु,चने के पकोड़े...बेसन का हलवा, शाम को अक्सर हमारे घर में माँ हमें चुरा-बादाम-प्याज भूंज के देती थी, अब भी जब जाता हूँ तो आमतौर पे यही नाश्ता रहता है शाम का, सब याद आ रहे हैं आज...क्या क्या लिखूं....बहुत कुछ याद आ रहा है, बहुत कुछ लिखने को मन कर रहा है...मैं लिख तो दूँगा सब बातें लेकिन आप उतना पढ़ नहीं पायेंगे...इसलिए ये सब बातें किश्ते में ही करनी अच्छी बात है :) 

इस मुए निशांत ने भी आज कसम ले रखी है न की मुझे पुराने यादों में डूबा-भींगा के ही दम लेगा...गाने भी तो ऐसे ऐसे बजा रहा है ये तब से लैपटॉप पे..निशांत जिस कमरे में रहता है..बड़ा मस्त कमरा है.....बड़ी बड़ी खिड़कियों से हल्की ठंडी हवा आते रहती है..ऐसे दिलकश मौसम में कमरे की सब खिड़कियाँ खुली हो और हल्की हवा और बारिश में भींगी मिटटी की सौंधी महक आ रही हो तो बड़ा अच्छा लगता है..., बाहर बारिश हो रही है..बारिश में नाचने, भीगने का मन कर रहा है..लेकिन अभी तो बस इन पुराणी यादों को डायरी में लिखकर ही काम चला रहा हूँ... :)  

वैसे निशांत  भी आज शाम से जैसे कुछ रोमांटिक सा...कुछ अजीब सा हो गया है वो...इतने प्यारे प्यारे गाने बजा रहा है लैपटॉप पे की क्या कहूँ, कुछ देर पहले जब मैंने कहा इससे की चल आज तेरे रूम में ही बैठेंगे..बस अच्छे अच्छे गाने बजा..निशांत ने पुछा की कौन सा गाना सुनियेगा...मैंने कहा "तुम बिन" का गाना हो अगर लैपटॉप में तो बजा दो...वरना कोई भी अच्छे अच्छे हिन्दी फिल्मों के गाने बजाओ....फिर क्या था..एक के बाद एक गीतों का सिलसिला शुरू हो गया..."तू ही रे...", "कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना..", "करिये न करिये न..कोई वादा किसी से करिये न..." ऐसे ही कई खूबसूरत गीत....अभी पोस्ट लिखते लिखते, कुछ सोचते सोचते जैसे ही खिड़की के बाहर नज़र गयी, वैसे ही कानों में एक और गीत की आवाज़, जिसे निशांत ने लैपटॉप पर बजाय था...मेरा सबसे पसंदीदा गीत....इस पागल लड़के ने मेरे दिल को एकदम से धड़का दिया था....गाना था "सावन बरसे तरसे मन.,,.," मैंने लगभग चिल्लाते हुए कहा :"अबे कमीने आज जान लेकर रहोगे तुम..क्यों ऐसा जुल्म कर रहे हो मेरे पर...ऐसे ऐसे गाने आज सुना रहे हो तुम....कसम से आज तो तुम्हारा हम क़त्ल ही कर देंगे.."  

खैर, उसके ऊपर इस धमकी का कोई असर नहीं हुआ और वो ऐसे ही कई जानलेवा गीत लैपटॉप पर बजाते रहा और मुझे जलाते रहा...फ़िलहाल तो आप भी सुन लें ये गीत...बहुत प्यारा और खूबसूरत गीत है ये ,

 

Comments

  1. bahut badhiya .... dil se likhi post hmesha achi hoti hai ..> ! :)

    VARUN

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  2. बहुत बहुत प्यारी पोस्ट!

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  3. कम्बख्त पेट के कारन पटना छोड़ के हमरा बचवा अभियो पटना का पेट पूजा का पर्साद इयाद कर रहा है… तुमरी चचानी को बहुत पसंद है नेनुआ का तरकारी दाल डाल कर... दिन में बनाती हैं जब हम ऑफिस चले जाते हैं, अऊर साँझ को हमरे आवे के पहिले छट पोंछ कर साफ... हमको त ई जातिये से एलर्जी है... नेनुआ, भतुआ, कदुआ, कोंहड़ा... लेकिन खाए वाला आदमी बड़ी टेस्ट लेकर खाता है.. हम त बस आलू भरल पूड़ी अऊर पूआ बासी खा सकते हैं, अऊर कुछ नहीं..जिलेबी त एकदम पुलपुला जाता है… का मालूम कहिओ ट्राई नहींकिए हैं...
    बाकी आज त एकदमे नोस्टल्जिया दिए हो ई पोस्ट में.. गर्दा कर दिए.. आज त भाभी को बहुते सरक रहा होगा...

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  4. टिपण्णी में तो यही कहेंगे कि बहुत बढ़िया पोस्ट है!

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  5. अभिषेक ! मजा आया पढ़ के.
    लगता है कल बहुत nostalgic हो गए थे............... :P

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  6. ये गाना भी फिर से अभी सुन लिए हम.......मस्त एक दम मस्त :) !!

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  7. ललचा रहे हो..

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  8. वाह जी वाह मजा आ गया आज तो :-))

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  9. hmmmm apun ko bhi yahichh nenuaa ki sabzi khani hai ! apun jaldi hi aa rela hai wahich....apke pass....
    milke khane ka plann banane ka hai apun ko !

    post k baare mei bhi apun yahi peichhh comment karega.....bole toh tabadtod post thi.....akkhhaaa banglore k sare bloggers ki pungi baja dali apne.... apun fann ho gya apka :P

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  11. अरे वाह,
    पकौडी और जलेबी।

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  12. अरे जान ले लो बच्ची की ....पकोडे जलेबी और न जाने क्या क्या ..कभी सोचा है क्या गुजरती है इन बातों से परदेस में रहने वालों पर ? हुह.

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  13. जबरदस्त मसाले और चटखारेदार पोस्ट... बारिश का मज़ा इस गाने के साथ और भी बढ़ जाता है.. परसों ही मैंने लगाया था.. अभि, अच्छा लगा कि जानकर कि आपका भी फेवरिट है ये गाना.. :)

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  14. वैसे एक हकीकत ये भी है कि सब्जी कोई भी हो रात भर फ्रिज में रखने से उसका टेस्ट बढ़ ही जाता है... चाहे वो सब्जी हो या फ्राइड दाल... नेनुआ तो मुझे भी पसंद है बस ठंडा करके नहीं खाया कभी.. :)

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  15. बड़ी जायकेदार पोस्ट है भाई!

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  16. दीपक जी, आपने सही कहा...और फ्राइड दाल भी मुझे बहुत पसंद है...लिखना भूल गया था...चने वाली दाल जो होती है, उसे भी रात भर फ्रिज में रख देन तो सुबह स्वाद मस्त होता है उसका :)

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  17. बताना चाहिए था न कि इस पर कोई भी मेनू कुर्बान कर दोगे...अगली बार मिलो, एक मेनू तो कुर्बान तुम्हारा...पक्का :P
    बाकी जलेबी तो हमको भी फ्रिज वाली अच्छी लगती है न...और ऐसे एक्सपेरिमेंट आलस में ही होते हैं, काहे कि हम बहुत किए हैं ऐसा :D :)

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया