हे बडी..हाउ आर यू……समित और मैं

(कुछ ऐसी बातें थी, जो मैं ब्लॉग पे लिख नहीं सकता हूँ, बहुत से कारण हैं उसके, वो बता तो नहीं सकता, जिन लोगों ने मेरा कल का फेसबुक स्टेट्स देखा, वो जान गए होंगे..खैर….)

(बड़े स्टाइल से आके,) “हे बडी..हाउ आर यू?, आई अम् समित…” मैंने भी धीरे से हाथ बढ़ा के कहा “मैं अभिषेक हूँ” चेहरे पे एक नकली मुस्कान से उससे हाथ मिलाया, पलट के पीछे बैठे अकरम को कहा मैंने, “साला कितना घमंडी इंसान है, देखो तो क्या ऐटिटूड है.साला फिरंगी अंदाज़ में हाथ मिलाता है..देखने से ही लगता है की कितना घमंडी टाइप इंसान होगा…उसे देख हर पांच मिनट पे अकरम मुझे कह रहा था की देखो यार, कैसे स्टाइल मार रहा है…बहुत फंदेबाज लईका दिख रहा है ई तो…मैं भी उसके हाँ में हाँ मिला रहा था…


 उस समय पता नहीं था, की वो छोटी सी मुलाकात एक जिंदगी भर का साथ बन जायेगी…लोग कहते हैं की “फर्स्ट इम्प्रेसन इज दी लास्ट इम्प्रेसन”, इस केस में ये बात बिलकुल गलत साबित हुई 🙂

मिलिए समित महाशय से, मेरा एक ऐसा प्यारा सा.. क्यूट सा.. मोटू सा.. गोलू-मोलू सा दोस्त, जो की एक बहुत बड़ा फ्लर्ट है.. नटखट है.. लड़कियों की बात अगर इससे करें तो आँखें ऐसे चमकती है इसकी जैसे की टोर्च मार दी हो किसी चमकीली चीज़ पे 😉 जो भी हो, पर ये एक बेहद संवेदनशील इंसान है, बहुत सारी खूबियों से भरा-पूरा इंसान..तर्क करने की अजीब सी शक्ति है इसमें..हालांकि कभी बकवास चीज़ों पे भी तर्क करता है लेकिन वो अलग बात है.इस लड़के के चेहरे पे हर समय ऐसी चमक बनी रहती जो दिल को बहुत सुकून देती है.बच्चों जैसी मुस्कराहट है अभी भी..हालांकि ये महाशय बच्चे तो है नहीं, उम्र तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ जनाब की मुस्कान में भी निखार आते जा रहा है(सॉरी समित:P) …समित जैसे दोस्त की तलाश शायद हर इंसान को रहती है 🙂

जब  कभी किसी दोस्त की बातों से तकलीफ पहुचती है, या फिर किसी दोस्त के किसी व्यवहार से मन उदास होता है, उस समय समित याद आता है, कुछ ज्यादा कभी कभी(जैसे कल शाम में बहुत याद आई मेरे इस दोस्त की मुझे)….शायद पुरे संसार में एक यही लड़का है जो मेरे चेहरे पे कभी भी किसी भी वक्त एक हंसी ला सकता है..ये मैं ऐसे ही समित की बड़ाई करने के लिए नहीं कह रहा, ऐसा बहुत दफे हो चूका है इसलिए कह रहा हूँ.ये बात समित को भी मैंने आजतक नहीं बताई..ऐसे ऐसे वक्त पे समित के कारण मेरे चेहरे पे एक मुस्कराहट सी आई है की क्या बताऊँ..उन समयों में मैं खुद से निराश,ज़माने से परेसान, हारा हुआ सा हुआ करता था..और मेरे इस दोस्त ने अपनी नौटंकी भरे स्टाइल और शैतानियत से परिपूर्ण अंदाज़ में हर समय मेरे चेहरे पे एक सुखद सी मुस्कान दी है…..वो सब बातें आखरी सांस तक नहीं भूल सकता..

कॉलेज के शुरूआती दिनों में मोबाइल उतना फेमस हुआ नहीं था, हमारे हॉस्टल में केवल समित के पास ही मोबाइल था..तो मेरे सारे कॉल समित के मोबाइल पे आते थे.पटना में कोचिंग और स्कूल में कुछ लड़कियों से बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी थी, उन्हें बोल तो नहीं सकता था की समित के मोबाइल पे कॉल करे, तो वो सब मुझे चिट्ठियां लिखा करती थी..मुझे अब भी याद है उन चिट्ठियों को पढ़ने के लिए समित कैसे हंगामा मचाये रहता था,एक बच्चे की तरह उछलते रहता था…अगर उसे पता चल जाता की मेरी किसी दोस्त ने मुझे चिट्ठी लिखी है तो वो बिना उस चिट्ठी को पढ़े नहीं रह सकता था 🙂 हमारी चिट्ठी आती थी कॉलेज के एड्रेस पे, और हम रहते थे कॉलेज  होस्टल में जो कॉलेज से थोड़ा दूर था..अगर किसी दिन मैं कॉलेज नहीं गया और इस समित को मेरी कोई चिट्ठी मिल जाती तो फिर बस शुरू ब्लैकमेल करना, ये खिलाओ तो देंगे चिट्ठी, कोल्ड ड्रिंक पिलाओ तो मिलेगा तुमको तुम्हारा लेटर 🙂 ऐसे ही कितनी बातें हैं इस पागल से बेवकूफ से लड़के की 🙂

ये देखिये इसका कातिलाना और स्टाइल भरा एक पोज(साल २००६) 😛

प्यार से हम इसको अंकल सैम बुलाते थे..:) या कभी कभी सेठ जी कह के भी इसे बुलाते थे हम 🙂 अब भी जब कभी फोन पे बात होती है इसे या तो मोटू, या अंकल सैम या सेठ जी कहके ही हम बुलाते हैं…अंकल सैम से आजतक हम कभी खफा नहीं हुए, हाँ इसकी कुछ हरकतों से चिढ़ जरूर हुई है और इरिटेट भी बहुत हुआ हूँ लेकिन कभी खफा हुआ नहीं किसी बात पे और ये यकीन भी है की कभी खफा हूँगा भी नहीं…

कॉलेज में अकरम, समित और मैं तीन ऐसे दोस्त थे जो हमेशा एक साथ रहें, चाहे कुछ भी होता रहा हो, कितने भी तूफ़ान आये लेकिन हमारी दोस्ती तोड़ न सकें, और नाही किसी में इतनी हिम्मत है या कहिये औकात है की हमारी दोस्ती तोड़ सके.हम तीनो एक दूसरे को इतनी ज्यादा अच्छे तरह समझते हैं की कभी कभी हमें भी आश्चर्य होता है की हम एक दूसरे को इतना जैसे जानते हैं 🙂  ऐसी दोस्ती पे फक्र होता है..

                                                                                                                         (साल २००८ का एक फोटो)

हम दोस्त थे..हम दोस्त हैं….और हमेशा रहेंगे 🙂

अभी  फ़िलहाल हमतीनो अलग अलग जगह पे हैं, लेकिन दिल के तार जो जुड़ें हैं एक दूसरे से वो तो अभी तक वैसे ही मजबूत हैं..कोई उन तारों को हिला भी नहीं सकता, तोड़ने की बात तो अलग है.
हम जब एक दूसरे से बिछड़ने वाले थे , तब हमने एक सपना देखा था, की हम सब साथ रहेंगे एक जगह, एक ही जगह काम करेंगे..और हमेशा एक साथ रहेंगे, ये सपना हमें हर कीमत पे पूरा करना है, और हम इसे पूरा कर के रहेंगे चाहे कुछ भी हो जाए… 🙂 एक और बच्चा टाइप सपना है हम तीनो का, या कहिये मुख्य रूप से मेरा और अकरम का, की हम तीनो गोवा जाएँ, ठीक वैसे ही जैसे फिल्म “दिल चाहता है” में तीन दोस्त गोवा जाते हैं…:P

आखिर में चलते चलते बस ये कहना चाहूँगा, की समित जैसा दोस्त किसी किसी को मिलता है, मैं खुशनसीब हूँ की मुझे समित जैसे दोस्त की दोस्ती नसीब हुई..चलते चलते मैं आपको एक ऐसी तस्वीर दिखाना चाहूँगा जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद है..

जब  समित बैंगलोर आया था, साल २००८ में ,



खुदा करे, हमारी दोस्ती ऐसे ही कायम रहे, आखरी सांस तक 🙂

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  1. सच्ची दोस्ती मिलना बहुत मुश्किल होता है… खुदा करे आपकी दोस्ती यूँ ही सलामत रहे

    – आमीन

  2. ऐसी दोस्ती हमेशा जिन्दा रहती है, मैं तो अपने कई दोस्तों से कई सालों से नहीं मिला परंतु आज भी बात वैसे ही होती है जैसे पहले कॉलेज के जमाने में होती थी।

    0 तिरुपति बालाजी के दर्शन और यात्रा के रोमांचक अनुभव – १० [श्रीकालाहस्ती शिवजी के दर्शन..] (Hilarious Moment.. इंडिब्लॉगर पर मेरी इस पोस्ट को प्रमोट कीजिये, वोट दीजिये

  3. बिलकुल सलामत रहेगी, ये दोस्ती,और क़यामत तक रहेगी….अच्छा लगता है ऐसी दोस्ती की बातें पढ़कर….:)

  4. समित का फोन से मिला जवाब ,

    – "मुझे तो मालूम ही नहीं था की मेरे अंदर इतनी खूबियां हैं, बहुत अच्छा लिखे हो…मैं भी सोचता हूँ की कुछ कुछ लिखा करें, एगो ब्लॉग हमु बनायेंगे, तब तुम उसमे कमेन्ट करना "

    हा हा 🙂

  5. बहुत बढ़िया…वैसे समित बाबू को अब फोन कर के बता देना…कि एक ठो अऊरो पोस्ट लिखे हैं, पहिले जा के उहो के पढ़ी आओ…तब बात करिहो…:) 😛
    वैसे ये दोस्ती सलामत रहे ताउम्र…यही दुआ है…आमीन…|

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