कुछ पुरानी यादों के नशे में – ६ : वो मौसम थे शादियों के

शादियों का मौसम भी बड़ा अजीब होता है ,घर में हर तरफ चहलपहल, सारे परिवाररिश्ते के लोग एक जगह मिल बैठ के बातें करते हैं..किसी की महफ़िल कहीं सजी है, तो कोई कहीं गप्पे मार रहे हैं, चाय समय समय पे चलते रहती है..घर की लड़कियों पे ये जिम्मेदारी रहती है की चाय बनते रहना चाहिए हर 1-2 घंटे पे 😉 बच्चे उधम मचाये रहते हैं पुरे घर में.पकवानों की सोंधी खुसबू आती रहती है रसोईघर सेसबसे ज्यादा मजे शादी में कोई लेता है तो वो हैं घर के बच्चे..दिन भर इधरउधर घर में भागतेदौड़ते रहना, स्कूल की फ़िक्र पढाई की टेंसन..शादी में जो घर के बाहर टेंट/तम्बू लगा रहता था, सारे बच्चे तो उसी टेंट को अपना प्लेग्राउन्ड बना देते थे 🙂 बच्चों से ज्यादा शादियों के मजे तो दुल्हे महराज को भी नसीब नहीं होते 😉

मेरी भी अपने घर की शादियों की अनमोल यादें हैं.जहाँ तक मुझे याद है सबसे पहली शादी जो मैंने इंजॉय की थी वो थी अपनी मौसी की शादी, 1996 में..मैं स्कूल में था उस वक्तमौसी की शादी अच्छी तरह से याद है मुझे..एकएक बात..वैसे तो पहले भी बहुत से शादियों में शामिल हुआ हूँगा लेकिन ये तो अपने घर की शादी थी, और कामकाज,सारे शादी की व्यवस्था में सरीक भी होना था, और इस वक्त तक हम कुछ बड़े भी हो गए थे 😉 तो इस शादी की बातें याद रहना लाजमी है..इस शादी में जो सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुझे सौपीं गयी थी वो थी फोटो खींचने की.. शादी में फोटोग्राफी का काम जो मैंने उस समय अपने जिम्मे लिया था, उसे अपने परिवार की हर शादी में बखूबी निभाता आया हूँ 😉 एक बार की बात है, जब मेरे छोटे मामा की शादी थी 2004 में, उस समय मैं इंजीनियरिंग की पढाई कर रहा था..सेमस्टर एक्जाम की वजह से तिलक में नहीं पहुच पाया , तिलक के दूसरे दिन पटना पंहुचा था..तो ये देखा की फोटोग्राफी का काम कोई और कर रहा था..मैं इस वक्त तक बड़ा हो गया था, और इंजीनियरिंग पढ़ रहा था, तो मेरे मामा और पापा ने मुझे कुछ अन्य जरूरी कामों में लगा दिया, ध्यान तो फिर भी हर वक्त कैमरे की तरफ ही रहता था..मेरे जिम्मे जो काम था, वो कोई और कर रहा था, मुझे तो ऐसा भी लग रहा था की मुझे अपने जिम्मेदारी से बर्खास्त कर दिया गया है….जिस दिन शादी थी, उस दिन सुबह कुछ खास काम नहीं था, तो मैंने मौका देख कैमरा अपने जिम्मे फिर से ले लिया, और तय कर लिया की अबकी बार तो ये कैमरा रिसेप्सन तक मेरे साथ रहेगा 😉 देखता हूँ मेरा काम कौन हथियाता है 😛

अपने घर की हर शादी मेरे लिए बहुत ही स्पेसल रही है.कितने अनमोल पल हैं उन शादियों के जो मेरी यादों में कहीं कैद होके रह गए हैं.एक अजीब सी मस्ती, अजीब सा उत्साह रहता था शादी के नाम से..घर में शादी के 6-7 दिन पहले से ही मेहमान,रिश्तेदार आना शुरू हो जाते थे..घर के पलंगटेबल हटा के नीचे ज़मीन पे दरी बिछती थी..सारे लोग एक साथ बैठ के गप्पे लड़ाते, कोई कुछ कहानी कह रहा है तो कोई कुछ बातों पे बहस.. हम तो छोटे थे, तो एक कोने में अपने ग्रुप में खेलते रहते थे..शुरू से मेरे ग्रुप में ज्यादातर मेरी बहनें ही शामिल रहती थी..हमें उस वक्त बड़े बुजुर्ग की बातों, बहस और किस्से सुनना भी बहुत अच्छा लगता था, चाहे बात समझ में आये उनकी या आये..जब भी वो लोग किसी मुद्दे पे बात करते, हम कान लगा के सुनते रहते 😛 कोई किसी की टांग खीच रहा है तो कोई और मजाक कर रहा है..सब लोग कुछ दिन के लिए सारा कुछ भूल के शादी के माहौल का आनंद लेते थे..शादी के दिन तो हर तरफ से सेंट की खुसबू आती रहती थी…औरत/मर्द सब लोग मेक-उप करने में बीजी दीखते थे 😉 कोई सेंट लगा रहा है तो कोई पावडर….और तैयार होने के बीच भी हलकी फुलकी मजाक चलते रहती थी 🙂

शादी  के २-३ दिन पहले से ही घर पे एक हलवाई आ जाता था, अपना सारा सामन/बर्तन ले के..कहीं एक कोई खली जगह देख या फिर गार्डन के पीछे ही हलवाई का चौकी,तम्बू लगवाया जाता था..और एक व्यक्ति नियुक्त होता था जो ये देख भाल करे की हलवाई सही से काम कर रहे हैं या नहीं…कहीं सामान की उलट-फेर तो नहीं कर रहे 😉 हलवाई का काम तो ज्यादातर खाना बनाने का ही रहता था या फिर सुबह सुबह जब सब के लिए चाय -नाश्ता बनाना होता था तब…अब घर में इतने लोग हो जाते हैं शादियों में तो अगर किसी को चाय की तलब हुई तो उस समय घर के रसोई में हमारी मौसी सब मिल के चाय बनाती थी…ये चाय का सिलसिला तो पुरे दिन चलता रहता था….सुबह का नाश्ता हो या फिर दिन का खाना, सब एक साथ इकट्ठे बैठ खाते थे..पत्तल बिछाये जाते थे..शादियों में पत्तल में खाने में क्या मजा आता था,खाने का वैसा स्वाद अब कहीं नहीं मिलता….सारे परिवार के साथ बैठ के सब एक साथ खाना खाते, वो पल कितने अनमोल थे……अब तो सब अपने अपने जिंदगी में इतने व्यस्त हो गए हैं की सीधा शादी के दिन पहुचते हैं, और उसी दिन रात में या अगले दिन सुबह वापस अपने अपने घर, अपने अपने कामों में फिर से व्यस्त हो जाते हैं….

कुछ दिनों के लिए ही सही, सभी नातेरिश्तेदार एक साथ वक्त तो बिताते थे..अब की तो शादियाँ भी जैसे मोडर्न हो गयी हों..सब काम फटाफट होता है, किसी के लिए किसी के पास वक्त है कहाँ आज..सब अपने अपने दुनिया में मस्त हैंपर कभी कभी सोचता हूँ, की पुराने ज़माने के दिन कितने मीठे, कितने अनमोल थे….अब तो बस उनकी यादें ही रह गयी हैं ज़हन में..

एक छोटी सी विडियो क्लिप है मेरे मामा की शादी की(साल १९९७), एक दोस्त को ये क्लिप मैंने कुछ साल पहलेमेल पे भेजी थी, अगर वक्त मिले आप लोग को तो देख लेंजब ये क्लिप मैंने बनाई थी उस वक्त मैं अपने इंजीनियरिंग के आखरी सेमेस्टर में था, इसलिए सही से कटएडिट नहीं हो पाया हैशादी की पूरी  रिकॉर्डिंग तो ४ घंटे की है लेकिन ये क्लिप शायद ३० मिनट की है  🙂 इसलिए पहले ही आगाह कर दिया की विडियो लंबा है, वक्त मिले तो देखें 😉

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  1. Shadi attend kiya…maza aa gaya…

    Mujhe har-ek ghante par chai banana achha lagta hai….

    Shadi ka mahol yaad kara diya aapne.

    sundar lekhan !

  2. क्या क्या याद दिला दिया तुमने abhi?? 😡 😀
    हद होती है बातों की !!!!
    अब मुझे उन शादी की याद आ रही है 🙁
    क्या करें बताओ अब 😛 😛

  3. बहुत कुछ याद दिला दिया…अब तो सबकुछ रेडीमेड है…..पहले पूरी रात जागकर घर के बच्चे ही मंडप सजाया करते थे..कितनी सारी अनमोल यादें हैं…जिन्हें नई पीढ़ी कभी अनुभव नहीं कर पायेगी

  4. आ गया है ब्लॉग संकलन का नया अवतार: हमारीवाणी.कॉम

    हिंदी ब्लॉग लिखने वाले लेखकों के लिए खुशखबरी!

    ब्लॉग जगत के लिए हमारीवाणी नाम से एकदम नया और अद्भुत ब्लॉग संकलक बनकर तैयार है। इस ब्लॉग संकलक के द्वारा हिंदी ब्लॉग लेखन को एक नई सोच के साथ प्रोत्साहित करने के योजना है। इसमें सबसे अहम् बात तो यह है की यह ब्लॉग लेखकों का अपना ब्लॉग संकलक होगा।

    अधिक पढने के लिए चटका लगाएँ:
    http://hamarivani.blogspot.com

  5. Yaad to bahut kuchh aa gaya..khaas kar apne mauseri bahan ki shadi..mai ke maah me Wadodrame hui,garmi yaad nahi,lekin poora din icecream banti rahti thi aur ham khate rahte the,yah yaad hai!

  6. aur post b mst tha.
    u know jb mere chote chacha ki shaadi hui thi na in 1998 us tym main 10th mein thi n we enjyd so much tht time.

    wo sab baatein ab yaad aa rahi hain

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