क्लूनी,पिएर्स और अर्नोल्ड 😛

ये पोस्ट थोडा बिना सर-पैर वाला है इसलिए ये पता नहीं कितनो को पसंद आएगा…

बंगलोर में मेरे कई दोस्त हैं, लेकीन मूलतः जो करीबी मित्रों में से गिने जायेंगे वो हैं मनीष मलिक और राहुल उपाध्याय. मनीष मलिक मेरे सिनिअर हैं, लेकीन मेरे सबसे अच्छे मित्र में से भी हैं. हम तीनो या फिर कोई भी दो मित्र जब साथ रहते हैं तो माहौल अजब टाइप का रहता है.हमने एक दुसरे का नामकरण कर रखा..ये नामकरण हालीवुड के कुछ अभिनेताओं के नाम पे हैं.. 


इसकी शुरुआत कहाँ से हुई ये तो नहीं पता.. लेकीन जहाँ तक मुझे याद है, मेरा नामकरण ही सबसे पहले किया गया था…नाम इस प्रकार हैं मनीष सर का नाम है अर्नोल्ड  श्वाजेनेगर 😛 राहुल उपाध्याय हैं पिएर्स ब्रोसनन और मैं जॉर्ज क्लूनी 😀 😀 
अब जब इस प्रकार के नाम हैं तो हमारे बीच कैसी-कैसी बिना सर-पैर वाली बातें होंगी ये आप अंदाज़ा लगा ही सकते हैं..

अब तो ऐसा होता है हम आमतौर पे एक-दुसरे को इसी नाम से बुलाने लगे हैं…जैसे अगर राहुल को ये बोलना है की चलो चाय पीते हैं, तो वो कहते हैं “चलो क्लूनी चाय पीया जाए…” 😛  लेकीन जो भी हो ये नामकरण थोड़ी देर के लिए हमें एक मजाक वाला माहौल देता है….;) 


ऐसे ही छोटे से एक बातचीत का सैम्पल पेश कर रहा हूँ… 😉


राहुल(उर्फ़ पिएर्स) – क्या क्लूनी आज कल तुम बहुत फिल्म किये जा रहे हो..सुने हैं की पिछले साल तुम ऑस्कर में बेस्ट एक्टर के लिए नामिनेट हुए थे…आज कल लगता है फिलम का बिजनेसवा टाइट चल रहा है…अरे कुछ एक दो फिल्म हमको भी तो दो यार…साला बुढा गए हैं कोई फिल्म भी ऑफर नहीं करता…जेम्स बोंड भी ऊ डेनिअल क्रैग कर रहा है….तुम ही कुछ अब रेफरेंस दो..

मैं (उर्फ़ क्लूनी)– हाँ पिएर्स सही सुना तुमने..अब थोडा सा चुक गए हो..नहीं तो ऑस्कर मिलिए जाता..और सुनो सब तुम्हारा ही बेवकूफी है न रे बकलोल…..सुट पहिन के लड़ाई करोगे…हवा में उझलोगे तो इससे ऑस्कर थोड़े ही मिलेगा पागल…ऑस्कर के लिए एक्टिंग भी चाहिए…केवल बोंड गर्ल के बीच में रह जाते हो…हवा में लड़ते रहते हो…क्या मतलब है…जेम्स बोंड हो तो कुछ भी करोगे 

मनीष  सर(उर्फ़ अर्नोल्ड)– हाँ हाँ सही बोल रहा है क्लूनी…..

राहुल (उर्फ़ पिएर्स)– अब देखो इ अर्नोल्डवा भी बोले लगा…सुनो अर्नोल्ड तुम शांत रहो…फिलम लाइन छोर के मेअर बन गए हो……तुम काहे बीच में टांग अड़ाते हो…अब चुप छप मेअरगिरी करो और नोट कमाओ…और क्लूनी तुम तो कुछ बोलवे मत करो..एगो टाइम था जब हम तुमसे ज्यादा चलते थे..तुम्हारे फिल्म में आने के पहले ही हम स्टार बन गए थे..समझे…अभी टाइमवा ख़राब चल रहा है तो हर छोटका आदमी भी हमको कुछ न कुछ बोलिये देता है..तीन-चार गो  ऑस्कर अवार्ड में नामिनेट का हो गए तुम अपने आप को तो पता नहीं का समझने लगे हो…. 

मनीष सर(उर्फ़ अर्नोल्ड)- अभी हम रहते न फिल्म लाइन में तो देख लेते तुम सब को….तुम लोग का इ बोलने का हिम्मत कैसे हुआ..?(गुस्से में) 😀 

मैं (उर्फ़ क्लूनी)– क्या देख लेते रे अर्नोल्ड…जब देखो बन्दूक लेके खड़े रहते हो…केवल बॉडी बना लेने से कुछ नहीं होता…समझे….और सुनने में तो यहु आया है की तुम्हारा पहले हिलेरी क्लिंटन के साथ अफैएर रहा है यही लिए तुम मेयर भी आराम से बन गए… और पिएर्स तुम अब चुप चाप सन्यास ले लो…फिल्म वील्म तुमसे न होगा रे 😛 

मनीष सर(उर्फ़ अर्नोल्ड)- क्या बकवास कर रहे हो क्लूनी…तुम न एक दम असभ्य हो गए हो..बात करने का तो तरीके नहीं आता है तुमको…तुमसे कितना सिनिअर हैं हम जानते हो न….फिर भी तमीज नहीं है….इ पिएर्स भी तमीज भुल गया है..अभी सबको फिर से सीखाना पड़ेगा तमीज.

राहुल (उर्फ़ पिएर्स)- ऐ अर्नोल्ड..तुम केवल बोलते रहते हो कुछ करते तो हो नहीं….और इ क्लूनी तो बहुते बोल रहा है….सुनो क्लूनी तुम ज़रा सोच समझ के बोला करो….तुम क्लूनी हो तो इसका मतलब क्या किसी से कुछ भी कहोगे….देखो हम भी छोटा मोटा आदमी नहीं हैं…जेम्स बोंड हैं…एगो गैजटवा निकालेंगे न तो पूरा भस्मे कर देंगे तुमको….समझे…

 मैं (उर्फ़ क्लूनी)– सुनो पिएर्स तुम ज्यादा बोलो नहीं..हाले बेरी तुमको अभी तक खोज रही है…जब से तुम उसको छोर सलमा हायेक के पास गए हो न तब से ऊ पगला गयी है….अभी उसको तुम्हारा एड्रेस दे देंगे न तो फिर हमको कुछ मत कहना…एके मिनट में सब हेकरी निकाल जाएगी तुम्हारी….समझे…



राहुल (उर्फ़ पिएर्स)- अरे उसको तो हम संभल लेंगे…तुम अपना सोचो…पुलिसवा खोज रहा है तुमको….ओशन इलेवन में जो चोरी की थी ऊ केसवा फिर से खुल गया है….अब तो कोई खैर नहीं तुम्हारा…

मैं (उर्फ़ क्लूनी) – अरे ओ पिएर्स तुम शांत रहो…तुम भी तो चोरी किये थे “थोमस क्राउन..” फिलम में..और हमको बोल रहे हो…ऐ अर्नोल्ड सुनो इस पिएर्स को जंगल में छुपा दो कहीं.तुम तो जंगलवे में न रहते हो.तुमको तो टाइट आईडिया होगा जंगल का…कहीं छुपा दो नहीं तो हाले बेरी या उसका बापवा देख लेगा न तो जान से मारिये देगा…समझे..
 
मनीष सर(उर्फ़ अर्नोल्ड)– साला केवल चोर-डकैत के बीच हम फंस गए हैं…इ सब मिल के हमको भी बिगड़ देगा.अच्छा है हम फिल्म लाइन छोर दिए हैं..

ऐसे ही हमारी बातचीत बिना सर-पैर के चलते रहती है…और इस बातचीत के क्रम में हम अपने सारे तकलीफ भुल के बस एन्जॉय करते हैं…हाँ मनीष सर उर्फ़ अर्नोल्ड को समझ में ही नहीं आता क्या क्या जवाब दें इसलिए वो थोडा मात खा जाते हैं कभी कभी….कभी राहुल उर्फ़ पिएर्स और मनीष सर हमपे हावी रहते हैं तो कभी मैं उर्द क्लूनी और मनीष सर उर्फ़ अर्नोल्ड हावी रहते हैं राहुल पे…लेकीन ज्यादातर ये होता है की हम और राहुल, मनीष सर पे हावी रहते हैं 😀 

अगर कभी चाय पीनी की बात हुई और पहल मैंने की तो इस प्रकार राहुल का प्रतिक्रिया मिलता है

मैं  – राहुल बाबा चाय पीने चलियेगा? (इस समय मैं उन्हें उनके नाम से बुला रहा हूँ)

राहुल  – क्या पिएर्स तुम और चाय? कब से पीने लगे? तुम तो केवल वाइन,सोडा,जूस,मोक्टेल,कॉकटेल…यही सब पीते हो न..चाय कब से?? पइसवा कम मिले लगा है का अब फिल्म में…लगता है कंगाली का हालत है…

मैं – मेरे पास कुछ जवाब नहीं होता..तो बस ये कह के रह जाता हूँ -बाबा अच्छा बॉल था.हम तो एकदमे बोल्ड हो गए 😛  

शाम को जब राहुल और मैं काम से वापस आते हैं और फिर मिलते हैं चाय दुकान पे तो ऐसा कुछ होता है

मैं – क्या पिएर्स बड़ा थके थके लग रहे हो…लगता है आजकल फिल्म का शूटिंग टाइट चल रहा है..काहे इतना मेहनत कर रहे हो फिल्म में…अब आज कल तुम्हारा फिल्म कोई नहीं देखता है…सब जेम्स बोंड में डेनिअल क्रैग को ही देखता है….तुम्हारा मार्केट डाउन है…काहे नहीं समझ रहे…चुप चाप सोये रहो घर में, फिल्म करोगे तो फ्लॉप हो जायेगा…

राहुल (हल्का मुस्कुराते हुए, हँसते हुए कहते हैं) बाबा बॉलवा लास्ट मोमेंट पे स्पिन कर गया और विकेट में लग गया…बोल्ड हो गए हैं हम.. 😀  


यही  हमारी छोटी सी बिना सर-पैर की बात रहती है जो हर शाम चलते रहती है… 😉 

एक और किस्सा याद आ रहा है जो पता नहीं कौन  हमको सुनाया था….ये शायद राहुल जी ने ही सुनाया था…
एगो गाना है “दिल के टुकड़े टुकड़े कर के मुस्कुरा के चल दिए..” इस गाने को अगर भोजपुरी में गया जाए तो ऐसे बनेगा “करेजा के बुकनी बुकनी कर के अउर दांत चिआर के चल देलहि..” 

स्पेलींग मिस्टेक कहीं हो तो क्षमा कीजियेगा.. 🙂 

वैसे तो हम लोग तीन थोड़े गंभीर किस्म के व्यक्ति हैं लेकीन कुछ पल के लिए बिलकुल कार्टून जैसी हरकते करते रहते हैं…;)

अगर आप लोगों को ये पोस्ट अच्छा लगे तो और कुछ बातचीत ब्लॉग पे पेश करूँगा…. 😉 

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  1. हा हा हा मस्त! मजा आ गया पढ़ के.
    जॉर्ज क्लूनी…अच्छा लिखे हो तुम 🙂
    बातचीत तो एकदम फालतु थी लेकिन मस्त लगा.

    वैसे इस बार मेरा कमेन्ट ही सबसे पहले आया है 🙂

  2. "करेजा के बुकनी बुकनी कर के अउर दांत चिआर के चल देलहि.."
    गज़ब…|
    वैसे हँसते-हँसते करेजा फुंकनी हो गया…|
    (शब्दों पर न जाओ, भावनाओं को समझो…:P )

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