एक रात जो बहुत दिनों बाद आई..

कल शाम थोड़ा बहुत थका थका महसूस कर रहा था, शायद काम से सम्बंधित थकान थी या फिर मानसिक थकान.आजकल थोड़ा काम को लेकर भी कुछ परेसान हूँ, कुछ इन्टर्व्यू भी चल रहे हैं, और मैं जॉब चेंज करने के मुड में भी हूँ.शायद यही सब बातें चल रही थीं दिमाग में.दिल बहलाने के लिए एक मॉल गया, लेकिन वहां भी शाम में बस आधे घंटे ही बैठ पाया और वापस घर आ गया. कुछ अजीब चल रहा था दिमाग में, किसी किस्म की अस्थिरता.अपने बीते दिनों में कुछ गलतियाँ भी की, जिनपे कल बहुत अफ़सोस भी हो रहा था, ये भी लग रहा था की जब मैं कॉलेज के दिनों में था तब अपने कैरिएअर को लेके शायद उस तरह से मैंने गंभीरता नहीं दिखाई, क्यूंकि अगर दिखाई होती गंभीरता तो शायद अभी अच्छे स्थान पे रहता, लेकीन फिर सोचता हूँ की आखीर जो होना रहता है वो तो होता ही है, हम नियति बदल नहीं सकते..एक बार मेरे एक दोस्त ने कहा था, की जो होना है वो होके रहता है, उस वक़्त आपके दिमाग की दशा और आपका कर्म ऐसा हो जाता है की जो लिखा है बस उसी के तरफ आप चले जाते हैं,उसी के तरफ आपके कर्म मुड़ जाते हैं.शायद ये बात सच भी थी उसकी.उस दोस्त का नाम समित है, और मेरे विचार से वो एक बहुत अच्छा पामिस्ट है, क्यूंकि ऐसे ही हलके फुल्के बातों में उसने एक बार मेरा हाथ पढ़ा(जब मैं कॉलेज में था),और आप शायद यकीन नहीं करेंगे, उसने एं वे ही जो भी बातें कही वो कुछ कुछ सही साबित हुए दिख रही है, १-२ बात तो बिलकुल सही साबित हुई.


खैर, मैं कल शाम की बात कर रहा था, कल शाम वापस जब घर आया तो उस समय मौसम भी बड़ा सुहाना हो गया(बैंगलोरे में ऐसा मौसम होना आम है), थोडा फ्रेश हुआ, चाय पी, उसके बाद थोडा मन हल्का महसूस हुआ, फिर लग गया ब्लॉग्गिंग करने.अपने कुछ मित्रो के ब्लॉग पढ़ रहा था, उसके बाद अपने एक कार के ब्लॉग “कार की बात” में एक नया टेम्पलेट अपलोड किया,एक नया पोस्ट डाला,इतने में ही एक मित्र वरुण का फ़ोन आ गया, ज्यादा देर बातें तो हो नहीं पायी उससे,लेकीन मुझे अच्छा लगा की उसने कॉल किया.वैसे उसके कॉल करने की वजह भी एक अलग सी थी,वो कारण शायद ब्लॉग पे बताना नहीं चाहूँगा लेकीन आज से ठीक तीन साल पहले 29-may-2007 के रात बारह बजे हमारी कुछ यादगार बातें हुई थी.आप इससे ही अंदाज़ा लगा लीजिये की वो बातें कितनी ज्यादा ख़ास होंगी की मुझे तारीख और वो बातें भी याद हैं..वैसे इस दिन की एक खास बात और भी है, की आज हमारे(मेरे और वरुण के)एक मित्र का जन्मदिन भी है, उसका नाम है नीलोत्पल, वैसे तो ये बहुत ज्यादा मुझे परेशान करता है, लेकीन ये मेरा जिगरी दोस्त है.ऐसे बहुत कम दोस्त हैं जो मुझे गरिया देते हैं कभी भी..कहीं भी…, उनमे से ये भी एक आता है 🙂 अगर संभव हो तो आप सब भी उसे जन्मदिन की सुभकामनाएँ दें.


..फिर करीब 10  बजे रात के लगभग एक दोस्त रिया का फ़ोन आ गया, वैसे तो वो बहुत मुझसे लड़ाई करती है, लेकीन पता नहीं शायद उसे ये अहसास हो गया था की मैं थोडा उदास हूँ(उसे अक्सर ऐसा एहसास हो जाता है की मैं उदास हूँ या खुश हूँ), बहुत देर बात हुई उससे.. तकरीबन 1 घंटा, काफी ज्यादा अच्छा लगा, बहुत कुछ उसने समझाया भी(हाँ, कभी कभी वो अकल की भी बातें करती है 😛)..उससे बात करके एक नयी ताजगी सी आ गयी, अब दिमाग में ज्यादा कोई फ़िक्र चल नहीं रही थी.उससे बात करके फ़ोन रखा ही था की एक प्रीती दी ऑनलाइन दिखाई दी मुझे जीटॉक पे, उन्होंने बताया की वो भी एक ब्लॉग शुरू करने वाली हैं.उनका ब्लॉग नया है और खूबसूरत भी.उन्होंने अपने ब्लॉग का नाम “दिल की बात” दिया है.उनसे बातें कर के कुछ और अच्छा महसूस हुआ, लैपटॉप के प्लेलिस्ट पे भी ग़ुलाम अली के ग़ज़ल चल रहे थे.कुल मिलाकर मेरा मुड और अच्छा होते जा रहा था.अब मैंने तय ये किया की एक फिल्म, जो मैंने कल ही डाउनलोड की थी, उसे देख के ही सोऊंगा, फिल्म का नाम “परिचय”, जीतेंद्र और जया बच्चन, गुलज़ार द्वारा निर्देशित.


मैं  सोच ही रहा था की फिल्म देखूं, इतने में ही मेरे एक बेस्ट फ्रेंड और बहुत ही करीबी मित्र प्रशांत(जो की एक स्टार ब्लॉगर भी हैं और PD के नाम से चर्चित 😛 , आप सब उसे बखूबी जानते हैं) का फ़ोन आ गया, ये फ़ोन तो मैं एक्स्पेक्ट नहीं कर रहा था इसलिए और भी अच्छा लगा जब मोबाइल स्क्रीन पे देखा “prashant calling” इससे तो मेरी बात १ घंटे से भी ज्यादा हुई..ना जाने कितने बातों पे बात किया हमने, उसने कुछ बड़े ही मजेदार किस्से भी सुनाये और कुछ बातें भी.मैं और प्रशांत जब भी बातें करते हैं फ़ोन पे तो हमें फ़ोन मजबूरी में रखना पड़ता है , क्यूंकि हमारी बातें कभी ख़त्म नहीं होती..शायद अन्दर कहीं दिल में मुझे उससे और बातें करने का मन कर रहा था लेकीन बेचारे के फ़ोन बिल पे तरस आ गया और फ़ोन रख दिया मैंने 😀 , हम जब भी बात करते हैं तो 1 घंटे से ऊपर ही रहता है टाइम फ्रेम 😉 अगर प्रशांत मेरा ये पोस्ट पढ़े तो मैं कहना चाहूँगा प्रशांत से की ऐसी कई और बातें हैं जो मुझे उससे शेअर करना अच्छा लगता है..प्रशांत से बात करने के बाद मैं तो फिर से उत्साहित और तरो-तजा हो गया, जब फ़ोन रखा उस वक़्त रात के 1 बज रहे थे और उस समय तक नींद बिलकुल भाग गयी थी आँखों से..और अभी मुझे एक फिल्म भी तो पूरी करनी थी.प्रशांत से बात कर के मैंने फिल्म चालु कर दी,फिल्म पूरी होने पे सोच ही रहा था की अब क्या करूँ, की इतने में ही एक नया ब्लॉग पोस्ट पढ़ा प्रशांत का, और कुछ उसके ब्लॉग के पुराने पोस्ट जो मैं पहले पढ़ नहीं पाया, भाभी जी के लिए लिखी पोस्ट बड़ा प्यारा लगा.


अब सुबह के  3:30 हो रहे थे और नींद अब भी नहीं थी आँखों में, फिर यूटूएब पे पुराने हिंदी फिल्मो के विडियो देखने लगा, जब सुबह के 5 बज गए तो निकाल पड़ा चाय पीने., जहाँ मैं रहता हूँ, वहां एक पंजाब नेशनल बैंक है, उसके सामने एक चाय वाला सुबह 4 बजे से ही अपना स्टाल लगा देता है.बस वहीँ चाय पीया, और वापस घर आ गया, अब मैंने सोचा भी नहीं था की इतनी सुबह कोई मुझे फिर से कॉल कर सकता है..ठीक 5:40 में, मेरे दोस्त सुदीप का फ़ोन आया, वो अभी फ़िलहाल अमेरिका में रह रहा है.मैंने बिलकुल नहीं सोचा था की उसका कॉल आएगा, आप इसे “प्लेजेंट सर्प्राइज़” कह सकते हैं, उससे ज्यादा देर तो बात नहीं हुई क्यूंकि भाई, ISD बिल भी तो आता है उसका 😉 लेकीन फिर भी काफी देर बात हुई.


कुल  मिलाकर रात भर में इतनी सारी बात, ये शायद 4 साल बाद हुआ है, पहले जब मैं इंजीनियरिंग में था तो रात भर ऐसे जागना और ऐसी ऐसी बातें बड़ी आम बात थी लेकीन अब शायद ही कभी रात भर जाग पाता हूँ.नींद तो फ़िलहाल अभी भी नहीं लेकीन अब सोचता हूँ खाना खा के दिन भर आज सोने में बीता दूँ 😛 ऐसी सुखद अनुभूति मुझे बहुत कम ही हो पाती है आजकल.अभी तक रात के नशे में ही हूँ..ये वो नशा है जिसके लिए शराब की जरूरत नहीं 🙂


चलते चलते एक गाना पेश करना चाहूँगा, इस गाने से भी सम्बंधित रात की ही एक कहानी है, कुछ साल पुरानी बात, फिर कभी बताएँगे..

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  1. this is not fair..black mail 😛
    tmne abhi sms krke kaha mjhe ye blog dekhne ko :-))

    waise thanks for giving my name thr.. and main kabhi kabhi nahi, hamesha akal ki baatein karti hu ji 🙂

    and i m glad that you had a great time yesterday night. 🙂

    last but not d least..

    awesome song..love it ! love it ! love it !

    — RIYAA (the starr) 😛

  2. लगता है सारा जीवन दोस्तों और यादों के बीच ही बितातो हो …बहुत ही मित्रता पूर्ण और अपनेपन का एहसास दिलाती पोस्ट ….///अच्छा ये 'परिचय' फिल्म कैसी लगी ? बताना …जया जी की फिल्म्स हमें पसंद आती है

  3. ha ha … bada mast resun tha call karne ka ..!!! 😉
    n thanx bhaiya …. mujhe nahi pata tha k aapko itna acha laga …!!! 🙂
    i wish i could talk for longer .. !!

    im glad tht u enjoyed ur night … tht strted vid me 😉 .. n haan gaana bht acha hai ..> !!!

    — VARUN

  4. मुझे भी अच्छा लगा तुमसे उतनी देर बातें करना.
    और शायद तुम मुझे जोर नहीं देते तो मैं कल ब्लॉग पे पोस्ट नहीं करती !
    🙂

  5. @ अन्जुले – बेहतरीन सर, क्या बेहतरीन पैर नहीं? 😛

    आराम से कमेन्ट करता हूँ यहाँ, अभी इसी से कम चला लो दोस्त.. 🙂

  6. प्रीटी (सही पढ़ा:) को बताएं की दिल की बात नाम का ब्लॉग डॉ. अनुराग का पहले से है और वे कोई और नाम रख लें तो हमें कन्फ्यूजन नहीं होगी… शुक्रिया.

  7. Prashant Bhaiya se fone pe baat kiye zamaana ho gaya…unse pehli baat yaad aayi aaj…baat karne se pehle maine kaha tha "main bada sharmeela hoon aur pehli baar adhik baat nahi kar paaonga,isse ummeed hai aapko ajeeb nahi lagega"…

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