क्या आप भी इन्टरनेट एडिक्ट हैं..? तो इसे पढ़ें...


इन्टरनेट ने तो हमारे जिंदगी में कुछ इस तरह अपनी जगह बना ली है की आज हम बस वर्चूअल समाज में फंस के रह गए हैं. चाहे बातें करनी हो या फिर टाइम पास, कुछ भी हो जब न तब हम इस इन्टरनेट का सहारा ले लेते हैं.कुछ तो ऐसे भी लोग हैं जो दोस्तों से ऑनलाइन बातें करने में ज्यादा विश्वास रखते हैं.ये इन्टरनेट का कीड़ा हम सब को बस खाते जा रहा है.आज कल तो लोग चीज़ें भी इन्टरनेट के माध्यम से ही खरीदने लगे हैं.इ-शौपिंग तो सुना ही होगा आपने.कितने लोग तो खाने का आर्डर भी इन्टरनेट के जरिये देते हैं.हम लोग कुछ युं एडिक्ट हो गए हैं इन्टरनेट के, की यदि कुछ दिन इन्टरनेट के बिना रहने बोल दिया जाए तो हर पल ऐसा लगेगा की जिंदगी से साँसे कम होती जा रही हैं. हम ही लोग को देख लीजिये, अगर कहा जाए की ब्लॉग,ऑरकुट,फेसबुक,ट्विट्टर से 6  महीने दूर रहना है तो क्या होगा हमारा...सोच के ही डर लगता है न ;)

मैं अपनी ही बात बताता हूँ, मैंने सबसे पहले इन्टरनेट का नाम अपने छोटे मामा के मुह से सुना था..उस समय वो कुछ बता रहे थे की उनका कोई दोस्त है जिसने "हॉटमेल" में अपना एक इ-मेल अकाउंट बनाया है.मैं तो उस समय ये सोचने लगा की वाह कितनी बड़ी बाद है ये, ये बात थी साल 1998 की..फिर साल 2000 में मैं पहली बार एक साइबर कैफे गया था, अपने एक मित्र शशांक के साथ.और पहले दिन याहू पे एक नया अकाउंट बनाया, ये मेरा जो अभी का याहू अकाउंट है न, वो उसी समय बना था, साल 2000 में.तब से और आज तक ये मेरा इन्टरनेट प्रेम कायम है, हालाँकि अब ये बहुत कम हुआ है, नौकरी के टेंशन की वजह से शायद, लेकीन एक समय तो ऐसा था की मैं ऑरकुट,फेसबुक,विकिपीडिया,गूगल को छोरता नहीं था.कुछ भी जानना हो तो बस गूगल करो और जानकारी लो..


इन्टरनेट तो बहुत ही उपयोगी चीज़ है लेकीन इसका उपयोग बस एक हद तक ही किया जाना चाहिए.
आज कल के बच्चे बाहर खेल कूद कम करते हैं और इन्टरनेट पे ऑनलाइन गेम खेलने में ज्यादा विश्वास रखते हैं, इससे एक तो बच्चो की शारीरिक विकास पे असर पड़ता है, और दूसरी ये की वो वास्तविक समाज से कट के रह जाते हैं.
पहले  के ज़माने में जब इन्टरनेट नहीं था, तो बच्चे नाना,नानी,दादा,दादी के पास बैठके परियों की कहानी,रामायण-महाभारत की कथाएं सुनते थे, और आज कल तो बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग से फुरसत नहीं मिल पाती..इसमें गलती बच्चों से ज्यादा हम बड़े लोगों की है, घर में इन्टरनेट का कनेक्शन लगा डाला और बच्चों को दे डी छुट इन्टरनेट उपयोग करने की...मैं सब की बात नहीं कर रहा हूँ, ये पता है की बहुत से माता-पिता बच्चों को इन्टरनेट उपयोग करने की छुट नहीं देते लेकीन कुछ तो ऐसे हैं ही जो बच्चों को भी इन्टरनेट पे पूरी आज़ादी दिए हुए हैं...बच्चों के लिए इन्टरनेट जरूरी है लेकीन सिर्फ जानकारी की हद तक.

बच्चे  क्या, हम बड़े भी कुछ कम नहीं हैं..हम इस वर्चूअल समाज में ऐसे फंसे हुए हैं की वास्तविक समाज से कुछ कटे हुए से लगते हैं..पहले के ज़माने में, दफ्तर से लोग घर आते थे, उसके बाद दोस्तों के साथ बाहर जाना हुआ, चाय-पानी हुआ, घर वापस आके परिवार वालों के साथ बातें करना, दुःख-सुख बांटना, फिर सो जाना..फिर अगली सुबह ताज़ी हवा खाना, चाय-नास्ता करना, अखबार पढना...बड़े बुजुर्ग के साथ बैठ कुछ विचार-विमर्श करना...........और आज के ज़माने में क्या होता है?.. ऑफिस से घर आये, तुरंत लैपटॉप ओन किया, नेट लोगिन किया और बस लगे देखने की कौन ऑनलाइन हैं, किसने स्क्रैप किया, किसने फेसबुक पे रिप्लाई किया, कौन ब्लॉग के क्या कमेन्ट हैं, किस ब्लॉग को अपडेट किया गया है...बस इसी में रात हो गयी, खाना खा के सो गए...सुबह उठ के फिर से वही राम-कहानी...किसने क्या स्क्रैप किया?, कोई ऑनलाइन है क्या?, फेसबुक पे किसने क्या रिप्लाई किया, ब्लॉग पे किस किस के कमेन्ट आये....

सोचिये, ये है हमारी आधुनिकता के कारण बदलती जिंदगी.....क्या फायदा ऐसे बदलाव से? क्या फायदा ऐसे टेक्नालजी से.अगर हम फायदे के नज़र से देखेंगे तो अनगिनत फायदे हैं, लेकीन इसकी लत तो ऐसी है की जो एक बार लग जाए तो छुटने का नाम न लें..

कुछ  तस्वीर मैं पेश कर  रहा हूँ, ...कार्टून ही हैं लेकीन हंसी-हंसी में कितना कुछ सीखने को मिलेगा...

ऐसा  तो हममे से कितनो के साथ होता होगा ;)


 ये बात भी देखिये अब :) शायद ऐसा कहीं न हो जाए, अभी से बच के रहें :)


  
आप  तो खुद ही समझदार हैं :)




 


  
ग्रुप मीटिंग कभी ऐसे भी हो जाएगी , अगर इन्टरनेट का येही हाल रहा तो :)





 अभी भी चैन नहीं :)




आप क्या कहते हैं इस बारे में, बताइयेगा जरूर... :)

[अभी कुछ देर पहले मैं एक ब्लॉग पढ़ रहा था (वंदना जी का , मेरी मित्र स्नेहा की सहेली).. वहां उन्होंने बड़े ही अच्छे से ये बताया की वो कैसे इन्टरनेट एडिक्ट हैं, इन्टरनेट एडिक्ट तो हम भी कुछ कम नहीं...ये पोस्ट बस उन्ही के ब्लॉग से प्रेरित हो के लिखा है मैंने]


तो मैं तो एक सर्टफाइड इन्टरनेट एडिक्ट हूँ, और आप?
 

Comments

  1. sach kaha aapne ye machine hamare liye honi chahiye ham inke liye nahi...
    ati har cheez ki buri hoti hai.

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  2. Anonymous27 May, 2010

    आपने बिल्कुल् ठीक लिखा आजकल के बच्चे भी बिना नेट कोई काम ही नही करते आजकल स्कूल में अथ्यापक भी जो काम् देते है वो भी नेट से दूंदने को कहते है|

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  3. Internet na tha to TV tha...uske baad alag,alag channels aa gaye..aur vibhakt pariwaar..ek gharme 3 log net ke addict hon to 4tha kya kare?Ek duje se jude rahne ke bajaay ham pruthak hue chale jaa rahe hain..

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  4. कसम से दोस्त ....क्या बात कही है लगता है मेरे मुह से ही निकली है ,,,,,,,,चित्र तो सारे एक से बढ़कर एक है ,,,,बहुत ही लाजवाब पेशकश ,,,,,,,दीवाना कर दिया ,,,,,,खाए -पिए बिना रह सकते है //बिना इन्टरनेट नहीं ,,,,कभी कभी किसी कारण से दूर होना पड़ता है ...तो मन बड़ा दुखी सा ..हो जाता है जैसे किसी प्रियतमा से विरह का समय आ गया हो ,,,,,,बहुत खूब .,,,सार्थक प्रयास ...कामयाब कोशिश ,,,

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  5. मजेदार पोस्ट , पुरी पोस्ट ने बांधे रखा अंत तक पढ़ना पडा . सही कहा आपने इन्टरनेट ने आज लाइफ में एक जगह बना ली है .
    but it has make the life very easy. for a example ,earlier booking a ticket is a hard nut to crack , it was a ordeal, but now it was a very easy work. it was only becoz of internet

    there are other benefit as well

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  6. Anonymous28 May, 2010

    सही कहा आपने

    कार्टून सभी एक से बढ़ कर एक

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  7. हो सकता है कुछ समय के लिए तो वर्चुअल दुनिया के दोस्तों से नेट पे बातें करना ठीक लगता है .........मगर बिना मिले लम्बे समय तक उन दोस्तों से नेट पे बात नहीं हो पाती उनसे अपनी फिलिंग शेयर मैं नहीं कर पता....नेट एक हद तक ही दोस्ती का अहसास देता है हमेशा नहीं...एक टाइम के बाद लगता है बिना वर्चुअल के अपने दोस्तों से वर्चुअल दुनिया में मिले आगे बढ़ना संभव नहीं है...

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  8. sahi shabd hai ADDICT..cartoons bahut ache hai.. khaaskar remind me next year :)

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