कुछ यादों की खुमारी

कमजोरी ये है मेरी की मैं बड़े ही आसानी से जब न तब पुरानी यादों के घरों में चला जाया करता हूँ.कल तो छुट्टी थी मेरी लेकिन फिर भी कुछ काम थे, वो सब करते करते शाम को 4  बजे वापस आया.आते ही जगजीत सिंह और चित्रा सिंह के सारे ड्यूएट ग़ज़ल प्लेलिस्ट पे लगा दिया.कमरे में थोडा अँधेरा कर दिया और आराम से ग़ज़लें सुनने लगा. “वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी”, “किया है प्यार जिसे हमने जिंदगी की तरह”, “बहुत पहले से उम कदमो की आहट जान लेते हैं” गाने बज रहे थे और मैं आँखें बंद कर के कुछ सोचने लगा.दिल पुरानी यादों में वापस चला गया.शाम को बारिश हुई बंगलोर में और वो भी बहुत मस्त और सुहानी..शाम को ही मेरे दोस्त मुराद का फ़ोन आया, बड़ी देर बात हुई उससे.. फिर रात में रूम पंहुचा तो मेरे दोस्त मनीष सर से ऐसे ही बातें हो रही थी, कुछ ख़ास नहीं..बातों बातों में ही पता चला की उन्होंने फिल्म “कच्चे धागे” अभी तक नहीं देखी..मैं तो उस फिल्म का बहुत ही बड़ा फैन हूँ..ये पता नहीं क्यों लेकीन मुझे वो फिल्म इतनी अच्छी लगती है की मत पूछिए..तो तय ये हुआ की वो फिल्म रात में देखेंगे.रात में ही एक दोस्त आशीष से बहुत देर बात हुई..बहुत सी बातें की हमने, पुराने दोस्तों की, और कुछ मजाकिया बातें भी..कुल मिलाके माहौल कुछ ऐसा हो गया था की पुरानी यादों का एक प्लेटफोर्म सा तैयार हो गया था. क्यूंकि ये सब बातें मेरे कुछ बीते दिनों की याद दिलाते हैं..

दिन भर के थकान के बाद रात में नींद तो बहुत भी भयानक रूप से आ रही थी लेकीन फिल्म चल रही थी लैपटॉप पे कच्चे धागे और इस फिल्म के बीच में मैं सो जाता, ऐसा गुनाह होता ये सोच के जगा रहा 😉 .. मनीष सर कोई उस तरह के गीत-प्रेमी नहीं हैं, तो वो फिल्म में सारे गानों को काट दे रहे थे.जैसे ही गाना आता वो गाना फॉर्वर्ड कर देते..अब इस फिल्म में ऐसे ऐसे गाने हैं की उन्हें फॉर्वर्ड करना भी तो एक अपराध है 😛 कल शाम उन यादों के नशे में ही डूबा रहा.सुबह भी उसी नशे का थोडा खुमार चढ़ा हुआ था.. सुबह सुबह आज 7 बजे ही नींद खुल गयी और फिर ऐसे ही बिस्तर पे लेटे लेटे कुछ सोचने लगा. अभी तक खुमारी गयी थी नहीं और उस मुए मुराद ने फिर से सुबह फ़ोन कर दिया..और हम फिर से पुराने दिनों की बातें निकालने लगे..इस मुए मुराद ने ऐसी ऐसी बातें याद दिलाई की लगने लगा वो सारे पुराने पल फिर से मेरे आँखों के सामने आ गए.मेरे और मुराद के बीच अक्सर बात चित में सरीफियत कम और गाली-गलौज ज्यादा चलता है..ये काम्पिटिशन रहती है की कौन किसको कितनी गालियाँ दे पता है… 😉 अभी शायद अगले सप्ताह वो बंगलोर आएगा, उसी का इंतज़ार कर रहा हूँ, और अगर आया बंगलोर तो उससे अच्छा ख़ासा खर्चा करवाए बिना तो उसे वापस हैदराबाद जाने तो नहीं ही दूंगा 😉

आज ब्लॉग लिखने का बड़ा मन कर रहा था इसलिए ये एक छोटा सा पोस्ट लिख कर ही छोर रहा हूँ..कुछ बातें और करूँगा, शायद शाम में…. 😛 

अभी तो प्लेलिस्ट पे ये गाना है, आप भी सुनिए…

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