हम देशभक्ति गीत क्यों नहीं सुनते?

भी जब कल मैं काम से वापस आया तो सोचा की कोई एक फिल्म देखा जाये.परसों रात “आनंद” मूवी 15  वें बार देख के दिल खुश और आनंदित हो गया था. आज सोचा की फिल्म उपकार देखा जाये.मेरे पास एक 3  इन 1 डी.वी.डी है जिसमे उपकार,पूरब और पश्चिम और क्रांति फिल्म हैं. मैंने सबसे पहले उपकार देखने का मन बनाया…… मैं जहाँ पे रहता हूँ वहां(बंगलोर में जहाँ मेरा रूम है), आसपास कई लड़के और भी रहते हैं जो या तो पढाई कर रहे हैं या कोई जॉब कर रहे हैं..अधिकतर मेरे से जूनियर ही हैं. जैसे ही उपकार मूवी चली तो एक लड़का रूम पे आया और कहा की “:भैया आज 15 अगस्त या 26  जनवरी नहीं है, उपकार क्यों देख रहे हैं? “…मैंने कुछ कहा नहीं और फिल्म देखने पे ज्यादा धयान दिया..सोचा कुछ बोल दूंगा तो उसे तो तकलीफ होगी ही और मुझे बुरा लगेगा वो अलग.अभी थोड़ी देर बार जैसे ही ये गाना “मेरे देश की धरती सोना उगले,उगले हीरे-मोती..मेरे देश की धरती” बजना शुरू हुआ तो एक लड़के ने खिड़की से आवाज़ लगाई…भैया क्या बात है आज 15 अगस्त का माहौल बनाये हुए हैं.अब ये सुन के मुझसे रहा नहीं गया और कह दिया की “क्यों?, 15  अगस्त के अलावे अगर किसी दिन ये गाना सुनूंगा तो पुलिस मुझे जेल में डाल देगी क्या?” .. ये सुन के वो लड़का समझ गया की मैं गुस्से में हूँ और फिर मुझसे उसने कोई सवाल नहीं किया…उपकार के बाद सोचा की चलो जब पूरब और पश्चिम भी है इस डी.वी.डी में तो क्यों न उसका भी रिविजन कर लूँ एक बार..इस बार तो फिल्म के शुरू में ही एक गाना है “दुल्हन चली,पहन चली सात रंग का चोला”, ये गाना मुझे कुछ ज्यादा ही पसंद है और अगर कोई इस गाने पे ऐसी-वैसी टिपण्णी करता तो उसे कसम से उसी समय मैं जिंदगी से आज़ादी दिला देता 😛 … खैर सावधानी के तौर पे मैंने लैपटॉप का आवाज़ एक दम धीमा कर दिया और गाने का मजा लेने लगा….फिर ये गाना आया “है प्रीत जहाँ की रीत सदा..” इस बार भी मैंने आवाज़ एक दम धीमे कर दिया लैपटॉप का..

मेरे कहने का बस येही मतलब है की आजकल के कुछ युवा ये सोचते हैं की देशभक्ति गाने सुनने से वो cool  और modern  नहीं बल्कि old -tradition  के लगेंगे तो वो गलत सोचते हैं..कुछ लोगों का ये मानना भी है की 15 अगस्त और 26 जनवरी को छोर देशभक्ति गाने नहीं सुनने चाहिए, ये लोग उनका मजाक उड़ाते हैं या फिर टिप्पणियां करते हैं जो देशभक्ति गाने सुनने को कभी भी तैयार रहते हैं और कभी भी सुनते हैं…..ऐसे में हम लोग फंस जाते हैं, जो की हमेशा देशभक्ति गाने सुनने को तैयार रहते हैं, कैसे भी मूड में…..हमारे सामने दिक्कत ये आती है की अगर हम सार्वजनिक रूप से देशभक्ति गाने सुनेंगे तो  कुछ लोग मजाक उड़ाने से भी नहीं चुकेंगे, तुरंत कमेन्ट पास कर कहेंगे, लगता है इस के लिए 15 अगस्त और 26  जनवरी आज ही है.
हमें अपनी देश की बातें करने का और देश से प्रेम करने का कोई एक दिन निश्चित नहीं करना चाहिए…देशप्रेम तो ऐसा है की जितनी कर उतनी कम है…मुझे चिंता तब होती है जब कुछ so-called आधुनिक ख्याल रखने वाले लड़के देश के प्रति इस तरह का ख्याल रखते हैं….अरे यार, देशभक्ति गाना है कभी भी सुनो….15  अगस्त हो या 26  जनवरी या फिर कोई भी आम दिन….इसमें सही-गलत वाली बात ही नहीं बल्कि एक गर्व वाली बात होनी चाहिए की आपको देश से इतना लगाव है….

 मैं इसपे ये नहीं कहता की मैं कोई बहुत बड़ा देशभक्त हूँ.लेकीन मुझे अपने देश से प्यार जरूर है. ये बातें आपको फिलोस्फिकल लगे लेकीन मैं कहना चाहूँगा – मुझे अपने देश से उतना ही प्यार है जितना अपनी माँ से है..मेरे लिए देश और माँ में कोई फर्क नहीं.मैं इस बात को पूर्ण रूप से मानता हूँ.

ये सब कुछ गाने ऐसे हैं जिसे सुनने के बाद अजब सा आनंद मिलता है…..

भैया, मैं तो देशभक्ति गीत जब न तब अपने लैपटॉप पे बजा लेता हूँ और बजाता भी रहूँगा…..अब कोई कुछ भी कहे…

आपके लिए भी पेश है 3 विडियो इस दो मूवी के….
 दुल्हन चली…
 

है प्रीत जहाँ की रीत सदा..

मेरे देश की धरती


जय हिंद

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  1. वाह अभिषेक ! तुमने तो बहुत अच्छे से लिखा है. इसमें मुझे तो कोई शक नहीं की तुम्हें देश से कितना प्रेम है. और तीनो गीत सुन लिया मैंने भी.

  2. थोडी देर रुकिये, पहले दो गीत सुन लूं।
    मेरे देश की धरती और है रीत जहां की प्रीत सदा।
    ये दोनों मेरे पसन्दीदा गीतों में से एक हैं।

  3. ओहो, मैं तो धोखे में रह गया। दुल्हन चली गीत के ऊपर लिखे शीर्षक से सोचा कि यह रीत जहां की प्रीत है। खैर, यह भी सदाबहार गीत है।
    मेरे देश की धरती तो पूरा देखा। देखने में वो मजा नहीं आया जो आंख बन्द करके सुनने में आता है।

  4. अभिषेक भाई,माधुरी गुप्ता और रविंदर सिंह जैसे गद्दारों की फसल उसी सोच का और संस्कार का नतीजा है जो अपने आपको "आधुनिक" दिखलाने के लिए "देशप्रेम" को old fashion and not so cool कहती है. अगर ठीक से पड़ताल की जाय तो ऐसे हजारो-लाखों माधुरी और रविंदर निकलेंगे……..

  5. क्षमा कीजियेगा.. है प्रीत जहाँ की रीत सदा…वाले गाने का गलत लिंक डाल दिया था.. और आप सबने अपने विचार दिए यहाँ…अच्छा लगा…

  6. i like all d 3 songs..
    kabi kabi hm bhi ye soch ke regular day patriotic song nahi bajate kyu ki log kuch na kuch comment krenge 🙁

    but this shudnt happen.we sud b proud on playing patriotic songs 🙂

  7. kafi sahi likhe ho….ye chiz maine v kafi baar gaur keya hai…log generally desh ya deshbhakti ki baate karna nai chahte…unhe lagata hai ki shayad aise baatein karne se log unhe old fashioned samjhege ya waisa hi kuch…bangalore to lagta hai ki hindi bolna v paap hai…jahan dekhiye sub english hi boole me lage huea hai,chane unhe hindi aati hai tab v…..pata nai aasa kyun hai..laking itna zarur pata hai ki ye galat hai…aur isse badalna padhega…aur shuruaat v hame hi karni padehe…

  8. पोस्ट बहुत विचारपरक है…| इतनी अच्छी सोच वाली पोस्ट लिखने के लिए पहले शाबाशी लो…|
    अब आओ आनंद मूवी को १५वी बार देखने की बात पर…एक बार में फिल्लम समझ नहीं आती क्या…???
    😛

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