एक ऐसा मंदिर जिसपे मुझे आस्था है

वैसे तो हमारे देश में मंदिरों की कोई कमी नहीं.एक से एक सिद्ध मंदिर हैं जहाँ से कोई खली कभी लौटता नहीं.हर के मन की मुरादें जरूर पूरी होती हैं. अगर सच कहूँ तो पहले जब मैं स्कूल में था और जब 12  वी में था, तब तक मुझे भगवान् से कुछ ज्यादा लगाव नहीं था. हाँ ये अलग बात है की परीक्षा के समय भगवान् को खूब मस्का लगाता था, की किसी भी तरह परीक्षा में अच्छे अंक आ जाएँ..शायद मस्का लगाता था इसलिए भी परीक्षा में कभी ज्यादा अच्छे अंक नहीं आते थे.अगर दिल से विनती करता और मन से मेहनत तो अच्छे अंक जरूर आते…खैर, ये सब तो और बातें हैं..आज मैं आपको लेके चल रहा हूँ एक ऐसे जगह जो दुनिए से बिलकुल कटा हुआ है, जी हाँ वैसे ही जगह से मैंने अपने इंजीनीयरिंग की पढाई पूरी की थी.  

वो जगह है ब्सवकल्याण.आपने इस जगह के बारे में कभी सुना नहीं होगा, हाँ जो लोग इस जगह से वास्ता रखते हैं वो जरूर जानते होंगे.ब्सवकल्याण जाने के लिए आपको हैदराबाद जाना पड़ेगा, हैदराबाद से 4 घंटे का बस का सफ़र है. जब इंटर में कम अंक आने से किसी अच्छे इंजीनीयरिंग कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाया तो एक आशा की किरण बन के ये ब्सवकल्याण इंजीनीयरिंग कॉलेज(BKEC) ही मेरी जिंदगी में आया..वैसे इस कॉलेज को आप श्रेष्ठ इंजीनीयरिंग कॉलेज के श्रेणी में नहीं रख पायेंगे, बहुत ही औसत स्तर का कॉलेज है ये…लेकीन मेरे लिए और मेरे कुछ साथियों के लिए ये कॉलेज बहुत मायने रखता है.ब्सवकल्याण एक छोटा सा टाउन जैसा जगह है जहाँ अत्याधुनिक तो कुछ नहीं, नाही कोई मॉल या मल्टीप्लेक्स है लेकीन हाँ यहाँ आपको हर वो चीज़ मिल जाएगी जो आपको चाहिए. चाहे रेस्ट्रान्ट हो, साइबर कैफे, हास्पिटल, कपड़ों की शोरूम या फिर सिनेमा घर..सारी सुविधा की चीज़ मौजूद है.. हाँ सिमेना घर थोड़ी जर्जर हालत में जरूर है यहाँ की, लेकीन एक बार अगर छात्रों की भीड़ जमा हो गयी तो फिर जो मस्ती होती है, उसके सामने मल्टीप्लेक्स भी फ़ालतू लगेगी..इन सब के साथ साथ वहां के लोग भी काफी मिलनसार और अच्छे हैं. वैसे अब मैं अगर ये बातें और आगे ले गया तो मुझे भी पता नहीं की कब ख़त्म होंगी.तो चलिए अब आपको बताता हूँ उस मदिर के बारे में.

ब्सवकल्याण में ही एक होटल है राजकमल, उसी के बिलकुल पीछे है ये हनुमान जी का मंदिर.वैसे तो कुछ ख़ास नहीं है ये मंदिर लेकीन मेरे लिए ये बहुत मायने रखता है.शायद इस लिए भी की जब भी मैं इस मंदिर में जाता तो मुझे ऐसा सुकून मिलता, जो मुझे और कहीं पे भी नहीं मिल पता. मन काफी शांत और प्रसन्न रहता.मैं अपने दोस्त समित के साथ इस मंदिर के सीढ़ियों पे घंटों बैठा रहता और जो हलकी मंद मंद हवा चल रही होती उसका आनंद लेते रहता.शायद  इंजीनीयरिंग ख़त्म होने के बाद आज तक मुझे वैसा आनंद और सुकून कहीं नहीं मिल पाया.बंगलोर की भाग-दौर की जिंदगी में वैसा सुकून खोजना ही बेवकूफी है.इंजीनीयरिंग ख़त्म होने के बाद भी मैं 2-3 बार वहां जा चुका हूँ.और जब भी जाता हूँ तो बिना वो मंदिर के दर्शन किये वापस नहीं आता.

इस मंदिर पे आस्था रहने का एक येही कारण नहीं है.शायद आज तक जो जो मैंने इस मंदिर में दिल से माँगा है वो थोड़ी बहुत भी पूरी जरूर हुई है.जब कभी किसी बातों से मैं परेशान हो जाया करता था, इस मंदिर का सुखद और शांत वातावरण मुझे बहुत सुकून देता.कभी कभी समित के साथ साथ मेरे 3 -4 और करीबी मित्र आ जाया करते थे इस मंदिर में.जो दोस्त मेरे साथ अक्सर आया करते थे इस मंदिर में वो थे अकरम,समित,आशीष,सौरव और संकल्प.  इस बात के लिए मैं समित का बहुत शुक्रगुजार हूँ , उसी ने पहली बार मुझे इस मंदिर के दर्शन करवाए थे. जाने को तो पहले भी 1 -2 दफे जा चुका था मैं उस मंदिर में और मंदिर के आसपास से भी कई दफे गुजरा था लेकीन कभी सच्चे ह्रदय से मंदिर के दर्शन नहीं किये. 1  दिन शाम में युही हम बैठे गप्पे लड़ा रहे थे की समित ने कहा, “चल अभिषेक मंदिर हो के आते हैं..तो मैंने भी मजाक में कहा, अबे कहाँ जायेगा बैठ और गप्पे लड़ाते हैं..मेरी ये बात सुनते ही समित ने एक टफ लुक दिया मुझे और जबरदस्ती मुझे मंदिर चलने पे मजबूर कर दिया..उस दिन करीब हम 1  घंटे से भी ज्यादा बैठे उस मंदिर में..मुझे ऐसा लगा की जैसे एक पल के लिए सारी तकलीफें कहीं गायब हो गयी..और उस दिन से  लगभग हर रोज़ मैं वो मंदिर जरूर जाता था..” 

उस मंदिर पे मुझे इतना ज्यादा आस्था था की कोई भी नया काम हो या कुछ भी हो, बिना उस मंदिर में एक बार गए मैं वो काम शुरू नहीं करता था.. इंजीनीयरिंग की परीक्षायों में भी कभी बिना उस मंदिर में दर्शन किये मैं परीक्षा देने नहीं गया…और हाँ, कुछ परीक्षायों में भी हनुमान जी की कृपा से ऐसे परिणाम आये की मैं तो चकित ही रह गया..इंजीनीयरिंग के पेपर(4  पेपर ) ऐसे थे जिन्हें मैं बस भगवान्-भरोसे ही छोड़ दिया था…शायद इसी मंदिर में दिल से मांगी गयी दुआ होगी की उन विषयों में मुझे अच्छे नंबर आ गए.आप यकीन मानिये उन पपेरों में पास होने वाले मार्क्स बस हनुमान जी के ही बदौलत मुझे मिले थे :).

अब आप भी दर्शन कर लें उस हनुमान मंदिर की, जिसपे मुझे आस्था है….

                                                                                 ये मंदिर का गेट है…

                                                    ये वो पेड़ है मंदिर का जिसके छाँव में हम घंटों बैठा करते थे …

                                                                            मंदिर का एक दृश्य नज़दीक से 
 

                                                           मंदिर के अन्दर स्थापित हनुमान जी की एक प्रतिमा 

                                                                        पेड़ के पास बनी एक छोटी सी शिवलिंग 

                                                                                 मंदिर का दृश्य सामने से 

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  1. अभिषेक मंदिर की तस्वीरे काफी अच्छी हैं.और तुम्हारे कॉलेज के बारे में जान कर भी अच्छा लगा.वैसे तुमने जो आखीर में लिखा है उससे मैं सहमत नहीं हूँ.जिन लोगों को लगता है की तुम उनके सोच के मुताबिक नहीं लिखते उनकी फ़िक्र मत करो और ऐसे ही लिखते रहो.ये सब बातें जो तुम लिखते हो हमें काफी पसंद आती है.उन लोगों पे ज्यादा धयान मत दो.

  2. मौका मिला कभी तो ज़रूर जाना चाहूँगा.. वैसे तस्वीरे देखकर लग रहा है कि कितनी शान्ति मिलेगी यहाँ जाकर..

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  5. अतुल जी,
    मैं मानता हूँ की आप लोगों की दुखद कहानी है और ऐसे मेरे कई करीबी मित्र हैं जिनकी ऐसी कहानी है और मुझे भी बेहद ही अफ़सोस और दुःख है…. लेकीन फिर भी मैं ब्सवकल्याण को बहुत ज्यादा miss करता हूँ और मैं ये मानता हूँ की मेरे लिए में बिताये दिन अनमोल रहे….

    बंगलोर के जिंदगी से तो लाख गुना बेहतर वहां, ब्सवकल्याण की जिंदगी थी….कम से कम शान्ति थोड़ी बहुत मिलती थी जो अब कहीं खोजने से भी नहीं मिलती…

    आपने ब्लॉग पे टिपण्णी दी, बहुत अच्छा लगा..

  6. बासवकल्याण मैं एक बार गया हूँ और रास्ते में तो कई बार पड़ा होगा. मेरे बड़े भाई साहब बीदर में कार्यरत थे पिछले साल तक. पहली बार पुणे से बस से जा रहा था… सुबह-सुबह किसी ने आवाज लगाई 'बीदर आ गया' और मैं नींद में उतर गया. उतरा तो पता चला बासवकल्याण है ये तो ! कैसे भूल सकता हूँ 🙂
    अच्छा लगा बजरंग बली के मंदिर के बारे में जाकर श्रद्धा और सुकून की बात है.

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