कुछ पुरानी यादों के नशे में – २ : कुछ ख़ास तस्वीरें

कल कुछ उदास सा बैठा था मैं, उदासी का क्या सबब था ये तो मुझे भी पता नहीं, शायद कुछ कारण थे या फिर दिल ऐसे ही किसी सोच में डूबा हुआ था.शाम को अपने एक दोस्त के साथ बैठ के बातें कर रहा था.अचानक कहाँ से ये बचपन वाले किस्से उठने लगे…फिर क्या था हम लग गए पुराने बचपन की कहानियों को उधेरने में.एक-दो फोटो एल्बम भी है मेरे पास जिसमे मेरे कुछ अनमोल पल कैद हैं.उन्हें जब भी देखता हूँ तो बड़ा सुकून मिलता है.शायद बचपन होता ही ऐसा है की हम न चाहते हुए भी उसकी तरफ खींचे चले जाते हैं.फिर बात चाहे बचपन की कहानियों की हो, बचपन की शरारतों की या फिर किसी छोटे बच्चे के साथ घंटो खेलना और वापस बचपन में चले जाना.

मैं आज अपने बचपन की कुछ तस्वीरें यहाँ लगा रहा हूँ..इन तस्वीरों से मेरी यादें हैं, खुद की…लेकिन इतना यकीन है की इन्हें देखने के बाद आपको भी कुछ न कुछ तो याद आएगा ही…कोई पुराना पल, कुछ लोग…कुछ बातें…ये तस्वीरें यहाँ खासकर के लगा रहा हूँ अपने कुछ दोस्तों के लिए…जिन्होंने रिक्वेस्ट की थी मेरे से……तस्वीरें थोड़ी धुंधली हैं, क्यूंकि मैंने अपने एल्बम के फोटो को मोबाइल के जरिये कंप्यूटर में डाला है. 

लोगों की जिंदगी हर पल तरक्की करते रहती है, लोग अक्सर नए सुख-सुविधा के खोज में रहते हैं. पुराने जगहों से नए और अच्छे जगहों पे चले आते हैं..मसलन आप मकानों को ही ले लीजिये….जब हम छोटे मकानों में रहते हैं तो अक्सर ये ख्वाहिश रहती है की बड़े और आलिशान मकानों में रहे..लेकिन क्या छोटे मकानों वाले सुख उन बड़े मकानों में नसीब होंगे?.. शायद नहीं….
मैं अपने बारे में ही बताता हूँ, पहले हम बड़े ही अच्छे और खुशनुमा माहौल वाले क्वार्टर , माकन संख्या 193 /400  में रहा करते थे .हालाँकि वो क्वार्टर थोडा छोटा था पर हमें कभी तकलीफ या शिकायत नहीं रही..सामने बाज़ार, दो कदम पे हर कुछ सामान मिल जाना.बड़ा ही अच्छा लगता था वहां रहना, कुछ दिक्कतें थी लेकिन हमने कभी शिकायत नहीं की..उन दिक्कतों पर कभी ध्यान ही नहीं गया.वक़्त तो इतना अच्छा बीतता था वहां की कहना ही क्या…फिर हम और बड़े और अपने खुद के फ्लैट में आ गए..लेकिन जो खुशियाँ वहां थी, वही खुशियाँ यहाँ नहीं मिल पाती थी..मैं अक्सर उन खुशियों को खोजते रहता था अपने इस नए फ्लैट में…मैं और माँ हमेशा कहा करते थे, जब नए फ़्लैट में शिफ्ट हुए थे की वापस वहीँ हमें चले जाना चाहिए…लेकिन ये मुमकिन नहीं था.वैसे तो खुशियाँ हमारे इस नए घर में भी बहुत सी हैं, और चाहूँगा की ये बरक़रार रहे युहीं उम्र भर…..लेकिन कभी हमें वैसा खुशनुमा अहसास फिर नहीं मिल पाया जो हमें पुराने वाले क्वार्टर में मिलता था..अब चाहे वो अपने दोस्त के साथ बैडमिनटन खेलना हो या फिर क्रिकेट या फिर शाम में अपने अहाते में बैठना…हर पल में ज़िन्दगी समाई हुई थी…इन बातों को और लम्बा खींचने में कोई मतलब नहीं इसलिए अपनी एक पहले की लिखी ‘सीली’ कविता की कुछ लाईनें यहाँ लगा रहा हूँ…

जाड़े का वो मौसम
और मेरा वो पुराना क्वार्टर
जहाँ धुप आता था बेशुमार
घंटों बैठे रहना जाड़ों के उस धुप में
कोर्स की किताबों में छुपा कर
कॉमिक्स, कहानियों और शायरी की किताबें पढना हो
या कॉपी के आखिरी पन्ने पर
किसी ख़ास के लिए खत लिखना हो

घर से बड़े से लॉन में
क्रिकेट-बैडमिन्टन खेलना हो
या फिर वहीँ टेबल कुर्सी पर
कैरमबोर्ड और लूडो खेलना
मोहल्ले के लड़कों को चैलेन्ज दे देना..
“दम है तो आउट कर के दिखाओ”
या पूरी पूरी शाम बगीचे में बैठकर
दोस्तों से दुनिया जहान की
गप्पे करना

घर के बागीचे में
सुबह शाम पेड़ों फूलों में पानी देना हो
या कभी तन्हाई में ,
उन फूलों से कुछ बातें करना
ज़िन्दगी जैसे फूलों सी ही रंगीन थी,
वो घर मेरा बड़ा मेहरबान
खुशियों का बड़ा संसार जैसा था,
वो घर भी मुझे अक्सर याद आता है !

ये पहली तस्वीर है, इसमें मैं और मेरी बहन राजदूत मोटरसाईकिल की सवारी करते हुए, जाहिर सी बात है चलाना नहीं आता था मुझे उस वक़्त 😀

दूसरी तस्वीर है मेरे जन्मदिन की..26  जुलाई .. मेरे नाना मुझे केक कटवाते हुए…हालांकि मुझे उस वक़्त का कुछ भी याद नहीं लेकिन ये मेरी पसंदीदा तस्वीरों में से एक है..

तीसरी तस्वीर भी मेरे जन्मदिन के दिन की ही है….गौर से देख लें, हाथ में बन्दूक भी है मेरे 😉

चौथी तस्वीर है मेरे बड़े मामा के शादी की.

क्रिकेट का भी देखिये बचपन से मुझे शौक रहा है…देखिये किस अंदाज़ से हाथ में बैट पकड़ रखा है मैंने 😉

छठी तस्वीर है मेरे पापा की..ये तस्वीर भी मुझे बहुत पसंद है…मेरी एक दोस्त ने ये तस्वीर को देख के कहा की “अंकल तो पुराने हिंदी फिल्मो के हीरो जैसे लग रहे हैं  😀  😉

अगर मेरे कुछ दोस्तों को ये शक है की मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूँ तो कृपया इस तस्वीर  को देख तसल्ली कर लें… 🙂 पापा हमें स्कूल ले जाते हुए.

ये तस्वीर मुझे किन कारणों से अच्छी लगती है ये तो मैं भी नहीं जानता लेकिन मुझे ये बेहद पसंद है..मैं अपनी बड़ी मामी के गोदी में बैठा हुआ..

अभी तक की जितनी तस्वीरें अपने देखी हैं, वो मेरे बचपन की थी..पहले जब हम लोग पटना के गर्दनीबाग इलाके में रहा करते थे तब की या फिर जब हम लोग पटेल नगर में आके बस गए तब की..गर्दनीबाग की तो मुझे बातें याद नहीं क्यूंकि मैं उस समय बहुत छोटा था लेकिन हाँ पटेल नगर अधिकतर बातें मुझे अच्छी खासी याद है..वहां रहने में एक अलग तरह का आनंद था..मेरे बचपन के शायद सारे किस्से वहीँ से जुड़े हुए हैं.फिर चाहे वो क्रिकेट खेलना हो(आपको बता दूँ की उस समय मैं बच्चो की टीम में क्रिकेट नहीं खेलता था 😉 मैं अपने मामा के टीम में क्रिकेट खेलता था और एक अच्छा खिलाडी भी था  😉 :-P)  और भी ढेर सारी बातें हैं जो अगर यहाँ कहना शुरू करूँगा तो अच्छा ख़ासा वक़्त लगेगा..

अब ये जो तस्वीर है, उसी साल मेरी दसवी की परीक्षा समाप्त हुई थी.आपको बता दूँ की इसमें जो स्वेअटर मैंने पहना हुआ है, वो मेरी माँ ने बनाया था, और ये मेरा फेवरिट स्वेअटर है… 😉

ये तस्वीर भी मुझे वैसी ही अच्छी लगती है..बात ये भी है की जो शर्ट मैंने पहन रखी है, वो मेरी फेवरिट थी..ये जो चस्मा आप देख रहे हैं, ये तो बस स्टाइल मारने के लिए उस वक़्त पहना था..मैं १२वीं में था उन दिनों और कुछ एक साल पहले ही मोहब्बतें फिल्म निकली थी, जिससे मैं और प्रभात(मेरा दोस्त) इतने प्रभावित थे की हमने कहा चलो वैसा ही एक चश्मा खरीदेंगे जो शाहरुख़ ने उस फिल्म में पहन रखा था…
अच्छा हाँ, और जहाँ तक मुझे याद आ रहा है, ये फोटो शायद टीचर्स डे के दिन का है..

अब बारी मेरे दोस्तों की, तीन ऐसे दोस्त जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है..मैं शायद बता भी नहीं सकता की मेरी जिंदगी में इनकी अहमियत कितनी ज्यादा है..प्रभात,मती और मुराद….तीन ऐसे दोस्त जिनपे किसी को भी नाज़ होगा…ये तस्वीर भी मेरे जन्मदिन के दिन की है..शायद साल 2001 की…सही से याद नहीं मुझे…

अब वो तस्वीर जो कुछ ख़ास तो नहीं लेकिन मेरे लिए काफी अहमियत रखती है, क्यूंकि ये स्टीरियो मेरा एक बहुत ही अच्छा दोस्त भी हुआ करता था..जाने कितने ऐसे पल थे जहाँ इसने मेरा भरपूर साथ दिया…और वो जो टेबल आप देख रहे हैं, उसपे रखी एक एक चीज़ मेरे लिए अहम् थी…वो बगल में दिख रही टोपी हो या वो टेडी-बेअर या पुरूस्कार में मिला ट्रोफी या वो टेबल-लैम्प या फिर वो गुलदस्ता…सब मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त थे..

अब शायद ऐसे पल फिर कभी नहीं मिले हमें, काम-काज से व्यस्त समाज में उस तरह की मस्ती और बेफिक्री की अब कोई जगह नहीं..हर कोई प्रैक्टिकल, प्रोफेसोनल होना चाहता है, ऐसे में शायद भावनाओं की जगह नहीं है आज के समाज में…


मेरे ये अनमोल पल हमेशा मेरे साथ रहते हैं, जब भी तकलीफ या फिर किसी भी कारणों से उदास रहता हूँ तो  इन पलों को याद कर लेता हूँ, मुझे काफी सुकून और राहत मिलता है.

Recent Articles

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर : शिक्षक दिवस पर खास

सुदर्शन पटनायक द्वारा बनाया गया, चित्र उनके ट्विटर से लिया गया आज शिक्षक दिवस है, यह दिन भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ....

तीज की कुछ यादें, कुछ अभी की बातें और एक आधुनिक समस्या

इस साल के तीज पर बने पेड़कियेबचपन से ही तीज का पर्व मेरे लिए एक ख़ास पर्व रहा है. सच कहूँ तो उन दिनों इस...

एक वो भी था ज़माना, एक ये भी है ज़माना..

बारिश हो रही हो, मौसम सुहाना हो गया हो और ऐसे में अगर कुछ पुराना याद आ जाए तो जाने क्या हो जाता है...

बंद हो गयी भारत की सबसे आइकोनिक कार, जानिये क्यों थी खास और क्या था इतिहास

Photo: CarToqपिछले सप्ताह, अचानक एक खबर आँखों के सामने आई, कि मारुती अपनी गाड़ी जिप्सी का प्रोडक्शन बंद कर रही है. एक लम्बे समय...

आईये, बंद दरवाजों का शहर से एक मुलाकात कीजिये

यूँ तो साल का सबसे खूबसूरत महिना होता है फरवरी, लेकिन जाने क्यों अजीब व्यस्तताओं और उलझनों में ये महिना बीता. पुस्तक मेला जो...

Related Stories

  1. i was just logged on to facebook and found your this blog post there…..

    the pics are awsum 🙂

    bht achha lagaa padh kei…..really enjoyed..and waise din fir kabhi wapas nahi aate….

    i remember ur last post…wo jo ek kavita thi shayad…tht was so good.. 🙂

    anywy kuch aur nahi likhungi …. mujhe utna dimag nahi ki comment kya karna chahiyeeee 🙂

  2. hii abhishek..

    i guess m visiting ur blog after a long time.waise to humare beech fight chalte rehhti h 😛 but on a serious note, ur blog is very good 🙂 especially this post.i guess i know the things u written here. coz main b to tumko thoda bahut janti hi hun na 🙂

    sabhi photos bht bht bht achhe hain 🙂

  3. Well harr baar same comment like bht bht acha hai 🙂 ap bhi ye sunke bore ho gye hoge bhaiyaa ! 😛 but kyaa karu apke blog ki baatein hti hi kuch aisi hai ki sabhi wrdss kamm hi lagte hai 😉

    But dis tym itzz sumthng different….aisaa laga jaise apne bachpan hi nikal k mere monitor mei rakh diya ho…..kinni easily sab likh diyaa….shayd main likhne baithu toh kachar pachar macha dunga 😀 😀 😀 hehehe

    bht acha blog tha….end tak chupka raha main…..main bhi sochta hu apki tarah kuch likhne ki bhaiyaa but ap toh jaante hi ho mjhe apna past rewind krna kinna zada bakwas n irritating lagta hai 😛 so apko dekh k hi khush ho jata hu 😉

    U rock bro….keep writing coz ap bhi ni jaante ap kinna zada acha likhne lage ho…..n wat d more imp. point is ki harr blog k saath kuch aditional quality badhti hi ja ri hai… 🙂

    U simplyy roxx bro…..Really Roxx n rulezz \nn// 🙂 🙂

  4. Bhaiyaaa….mein itni khush hui aaj aapki photos dekh ke ki kya btaun…..bahut badiya…bahut bahut badiyaa..:)

  5. i guess i knw everythng right..?
    but the pictures are awesome..hw cn i forget all our long long talks about this only..
    aur ek do photo tumne lagaya hi nahi hai..unhe b lagana tha na..
    koi nai orkut ye fb pe uplod kr dena 🙂

  6. बचपन होता ही ऐसा है मित्र!!एक एक क्षण याद आता है !फोटो बहुत ही अच्छी है..मेरी शुभकामनायें!!!

  7. @रजनीश सर,श्यामल सर, समीर सर…
    आप तीनो का शुक्रिया की आपने इस ब्लॉग पे टिपण्णी दी..
    हाँ, सही कहा बचपन होता ही ऐसा है 🙂

  8. बहुत ही सुन्दरता से तस्वीर क लगाया है तुमने अभिषेक
    कुछ कुछ बातें तो मुझे शिखा के द्वारा पता चल जाया करती थी,
    और मैं सोचती भी थी की तुम लोगों की दोस्ती कितनी अच्छी है,
    लेकिन हाँ शायद अब वैसे दिन नहीं आ पाए दुबारा.
    बचपन का हर एक पल अनमोल होता है 🙂

  9. ओह, तो तुम पढ़े लिखे भी हो!! 😛

    पुरानी तस्वीरें तो मैंने भी खूब संभल कर रखी हैं.. अभी जा रहा हूँ उन्हें एक बार फिर पलटने.. 🙂

  10. Bahut sundar tasvire aur yaadein hai! aur bada sanjokar rakha hai aapne.
    acha laga padhke! bore to bilkul nahi hui, par mere bachpan ki yaadein taaza ho gayi!

  11. hello…..pa wants to rite something………here it goes….

    aaj maine tumari lekhani ko padha hai aur main annandit hua sath hi sath mujhe gyat hua kee aap itni acchi hindi urdu sabdh kee sath apnee sabdo main bayan keye. eshwar aap ko tarakee dee. ahi mare subhkamna hai.best luck and go forward.well done .

Leave a Reply to Richa Cancel reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

नयी प्रकाशित पोस्ट और आलेखों को ईमेल के द्वारा प्राप्त करें