शहीद भगत सिंह का अंतिम पत्र

आज 23 मार्च है.आज ही के दिन भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश सरकार ने फांसी कि सजा सुनाई थी.आज इन तीनो कि शहादत का दिन है.मुझे मालूम नहीं कितने लोगों को आज का ये दिन याद है.लेकिन हमें इस दिन को कभी भूलना नहीं चाहिए.

ये एक अजीब बात है कि हमारे देश के मीडिया/अखबार वाले भी भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु के बारे में कुछ भी बातें नहीं कर रहे…कोई विशेष समाचार नहीं दिखा रहे.ऐसे तो कई मसालेदार खबर मीडिया वाले हर रोज़ दिखाते रहते हैं.शायद हमारे मीडिया वाले लोगों को याद भी नहीं कि आज के दिन कि महत्वता क्या है. मैं मीडिया के खिलाफ नहीं हूँ लेकिन उन्हें आज के दिन भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु को याद करना चाहिए.शायद इन तीनो के बाद अभी तक हमारे देश को कोई और “हीरो” मिला नहीं है…मेरे लिए,और भी कई लोगों के लिए भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु हमेशा एक आदर्श रहे हैं और रहेंगे., 


भगत सिंह, ने अपने अंतिम पत्र में ये लिखा…

22 मार्च,1931 



साथियो,
स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता. लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूँ, कि मैं क़ैद होकर या पाबंद होकर जीना नहीं चाहता.

मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है और क्रांतिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊँचा उठा दिया है – इतना ऊँचा कि जीवित रहने की स्थिति में इससे ऊँचा मैं हर्गिज़ नहीं हो सकता.

आज मेरी कमज़ोरियाँ जनता के सामने नहीं हैं. अगर मैं फाँसी से बच गया तो वो ज़ाहिर हो जाएँगी और क्रांति का प्रतीक-चिन्ह मद्धिम पड़ जाएगा या संभवतः मिट ही जाए. लेकिन दिलेराना ढंग से हँसते-हँसते मेरे फाँसी चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएँ अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरज़ू किया करेंगी और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देनेवालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी.

हाँ, एक विचार आज भी मेरे मन में आता है कि देश और मानवता के लिए जो कुछ करने की हसरतें मेरे दिल में थी, उनका हजारवाँ भाग भी पूरा नहीं कर सका. अगर स्वतंत्र, ज़िंदा रह सकता तब शायद इन्हें पूरा करने का अवसर मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता.

इसके सिवाय मेरे मन में कभी कोई लालच फाँसी से बचे रहने का नहीं आया. मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कौन होगा? आजकल मुझे ख़ुद पर बहुत गर्व है. अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतज़ार है. कामना है कि यह और नज़दीक हो जाए.

आपका साथी,
भगत सिंह

(सारे चित्र गूगल से लिए गए हैं)

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  1. एक बात जो मुझे आज पता चली वो मैं आप लोगों के साथ बाँटना चाहूँगा…मेरे एक सिनिअर हैं "पंचम सर", आज मुझे पता चला कि वो हर 23 मार्च को उपवास रखते हैं और उनसे मुझे काफी प्रेरणा मिली…वैसे तो उनकी मैं हमेशा बहुत ही इज्जत करता हूँ लेकिन आज उनके लिए इज्जत और बढ़ गयी…वो मुझे आज कह रहे थे कि "मैं चाहता हूँ कि कोई और भी उन्हें इसी तरह याद करे…

  2. its true no one bother to talk about our real heros..
    here in london i saw yesterday some uncle talking about 23rd march.even i wasnt aware of this…but it pleases ourself when we remember such heroes of pur motherland..

    a salute to them !

    they were d real patriots and the letter was awesome.
    it was such inspiring one 🙂 🙂

  3. मैंने अपने कालेज के दोस्तों को आज एक मेल किया वही यहाँ भी चस्पा कर रहा हूँ..

    "आज सुबह से ही सोच रहा था कि वेलेंटाईन डे और न्यू ईयर मनाने वाले लोग आज कहां हैं? आज सुबह से एक मैसेज के इंतजार में था कि शायद कोई यही भेज दे "हैप्पी शहीद दिवश(अगर कोई यह भी भेजे तो मुझे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा)"..

    कुछ साधारण लोग असाधारण परिस्थितियों में अक्सर असाधारण हो जाते हैं, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सामने भगत सिंह हैं.. जो उम्र रूमानी होने का होता है उस उम्र में उन्होंने केवल एक पीढ़ी नहीं, बल्की आने वाले कई पुस्तों को नैतिकता और स्वाभिमान का पाठ पढ़ा गये.. अधिकतर भारतीय उन्हें एक शहीद के रूप में जानते हैं, मगर बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि वह मार्क्स के बहुत बड़े विद्वान भी थे और भारत में कम्यूनिज्म कि स्थापना करने में उनका बहुत बड़ा योगदान भी रहा.. मगर आज मुझे अफ़सोस के साथ कहना पर रहा है कि उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों को हमारा शासन "लाल किताब" या "नक्सल साहित्य" के रूप में देखता है..

    आज एक और क्रांतिकारी को मैं याद करना चाहूंगा जिनकी हत्या आज ही के दिन कर दी गई थी.. पंजाब के रहने वाले महान क्रांतिकारी कवि "पाश".. इनका पूरा नाम मुझे नहीं पता, मैं तो सिर्फ उन्हें पाश के नाम से जानता हूं.. इनकी हत्या खालिस्तान के आतंकवादियों ने सामाजिक चेतना जगाने के विरोध में कर दी थी.. "पाश" भगत सिंह के एक सच्चे अनुयायी भी थे, अब ऐसे में उसी दिन शहीद का दर्जा इन्हें भी मिला इससे बड़ी और क्या उपलब्धी इनकी हो सकती है..
    इनकी एक कविता मैं यहां अटैच कर रहा हूं, जिसे पहले भी कभी मैंने तुम सभी को भेजा था.. अगर कभी गौर से नहीं पढ़े हो तो इस बार गौर से पढ़ना जरूर.. मन की कई परतें उघार कर रख देती है यह कविता, और अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को प्रेरित भी करती है.."

    पाश कि सुविख्यात कविता पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाओ.. पाश कि कविता

    पाश के बारे अधिक जानना हो तो उसका लिंक ये रहा – http://paash.wordpress.com/2009/03/25/yeh-lal-salaam-paash-ke-naam/

    इन पर बहुत पहले मैंने भी एक पोस्ट लिखी थी उसका लिंक यह रहा http://prashant7aug.blogspot.com/2009/01/blog-post_30.html

  4. प्रशांत भाई, मैंने ये कविता तुम्हारे ब्लॉग पे पढ़ी थी…और हाँ मैंने इनका नाम भी सुना है लेकिन मुझे सही से इनके बारे में मालूम नहीं था…अभी तुमसे पता चला…

    और ये कविता तो मुझे इतनी ज्यादा पसंद आयीं…उस दिन ही करीब 3-4 बार पढ़ा इसे आपके ही ब्लॉग पे..

  5. मेरे ब्लॉग पर आधी कविता थी.. यहाँ जो पहला लिंक है उसमे पूरी कविता है.. 🙂

  6. आज मेरी कमज़ोरियाँ जनता के सामने नहीं हैं! अगर मैं फाँसी से बच गया तो वो ज़ाहिर हो जाएँगी और क्रांति का प्रतीक-चिन्ह मद्धिम पड़ जाएगा या संभवतः मिट ही जाए!

    ye sab nai pta tha mujhe..pehli baar padha.. thnx bhaiya.. n thanx 4 such posts here on ur blog..! i olwayz get 2 learn smthing new..! 🙂

  7. abhisek ji aadaab aapne to apne blog men gaagar men saagar bhr ke rkh diya he rishton jzbaaton ko jhkjhor diya he pdh kr mn achchaa ho gyaa. shukriya or bdhaai . akhtar khan akela kota rajastjhan

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