प्रशांत भाई के साथ एक मुलाकात…

वैसे तो शायद मैं प्रशांत भाई से मिलने को बहुत ही दिनों से उत्सुक था, लेकिन कभी वैसा मौका ही नहीं लग रहा था की प्रशांत भाई से मुलाकात हो सके.इस बार तो सोच ही लिया था की प्रशांत भाई से मिलना पक्कहै है…वो भी होली में घर आने वाले थे और मैं भी..३-४ दिनों के प्लानिंग के बाद कल दोपहर हमारी मुलाकात हुई.प्रशांत भाई तो काफी ज्यादा व्यस्त हो गए थे , कुछ कामो में..मुझे आशंका थी की उनसे मुलाकात हो पायेगी या नहीं.लेकिन कल दोपहर को उन्होंने समय निकला और मेरे घर आ गए मुझसे मिलने.


वैसे तो उन्होंने पहले भी मुझसे कहा था एक बार और मुझे भी ऐसा लगता था शायद की मेरे में और प्रशांत भाई में काफी ज्यादा समानताएं हैं..पहले हमारी बातें सही ठंग से हो नहीं पाती थी.इस बार अच्छे से बातें हुई हमारे बीच.सही मानिए हमारे बीच बहुत ही कुछ एक जैसा है..प्रशांत भाई की बातों को सुनकर अच्छा लगा…कहीं न कहीं मुझे भी येही लग रहा था की जैसे मेरी भी एक कहानी कहीं छुपी हुई है उनकी कहानी के पीछे..ख़ास कर के वो १२वीं की कहानी और उस जैसी ही कुछ और बातें..उस वक़्त तो मैंने कुछ कहा नहीं प्रशांत भाई से, लेकिन हाँ अब ब्लॉग के जरिये ये कहना जरूर चाहूँगा प्रशांत भाई से, की मेरी भी कुछ कुछ हालात वैसी ही थी जैसी उनकी..अब पूरी बात यहाँ ब्लॉग पे ऐसे खुल के नहीं कह सकता, काफी सारी व्यग्तिगत बातें हैं..हमारे सोचने का ढंग हो या जीने का, बहुत ही कुछ एक जैसा है, इस बात का मुझे अब अच्छा ख़ासा यकीन हो गया…


बस अब ये देखना है की हमारी अलगी मुलाकात कितनी जल्दी होती है, और मुझे बहुत इंतज़ार रहेगा अपनी अगली मुलाकात है….मुझे काफी अच्छा लगा और काफी खुशी हुई उनसे मिलके…

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  1. sounds good that u are reuniting with ur old frndz. !!

    i guess if we get time, we could also meet whnevr we are in patna…

    nywyz alwyz be happy..take care

  2. मैं बहुत दिनों से सोच रहा था कि ऐसे मित्र के लिखे पर सिर्फ एक थैंक्स लिखकर उसकी भावनाओं को कम नहीं किया जा सकता है.. सो लिखूं तो क्या लिखूं.. सोचा एक किस्सा ही सुनाता चलूं.. इनके घर मैं लगभग डेढ़ बजे पहूंचा.. मेरे पास पटना में जो बाईक है वह मेरे घर जाने पर ही चलनी शुरू होती है और मेरे वापस आने के बाद अपनी स्थिति पर शर्तिया रोती होगी.. सो जब भी जाता हूं और अगर सर्विसिंग नहीं कराता हूं तो बस समझ लो उसका बैंड बजना तय है.. कुछ इसी तर्ज पर जब मैंने सर्विसिंग नहीं कराई तो उसका बैंड बजा हुआ था.. अभिषेक भाई के घर को जाने वाली गली में सड़क बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा था.. मैंने उसी गली के बीच में अपनी गाड़ी रोकी और अभिषेक को फोन लगाना शुरू किया और उसका फोन नॉट रिचेबल बताता रहा.. फिर मैंने सोचा कि मैसेज करके १० मिनट इंतजार किया जाये और उसे मैसेज कर दिया.. जैसे ही मैसेज किया वैसे ही तुरत रिप्लाई आ गया कि अभी आता हूँ.. अब इन्हें आते देख मैंने किक मारनी शुरू की, मगर गाड़ी को स्टार्ट नहीं होना था सो नहीं हुआ.. जब यह पास आ गए फिर किसी तरह जाकर स्टार्ट हुआ.. अभिषेक भाई कुछ बोले नहीं, नहीं तो मुझे पूरा यकीन है कि हँसते हँसते इनका हालत जरूर खराब हो रहा होगा.. 🙂

  3. अरे भाई हँसते हँसते हालात ख़राब तो नहीं हुई हाँ लेकिन मन ही मन हंसा जरूर था मैं 😀 , और वैसे जाते समय भी आपके बाईक ने तमाशा किया था

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