बेस्ट फ्रेंड

आज एक अरसे के बाद मैं वापस अपने पुराने स्कूल के दिनों में चला गया था.काफी दिनों बाद मैं अपने बचपन के दोस्त, अपने बेस्ट फ्रेंड प्रभात के साथ था.करीब १९ महीने बाद हम मिल रहे थे.समय और काम की वजह से हम अक्सर मिल नहीं पाते.प्रभात रहता है पुणे में और मैं बंगलोर में.घर भी जब हमें आना होता है तो ऐसा संजोग कम ही बनता है की हम दोनों एक साथ पटना में रहे.इस बार लेकिन हमने पहले से ही निश्चित क्र लिया था की हम होली में पटना आयेंगे और कुछ दिन साथ बिताएंगे…मस्ती करेंगे..खूब बातें करेंगे….


हमने ये तय किया था की होली के दुसरे दिन हम कहीं मिलेंगे.कोई जगह निश्चित नहीं थी,फिर मैंने सोचा की प्रभात के ही घर जाना अच्छा रहेगा.इसी बहाने अंकल-आंटी(प्रभात के माँ-पापा) से भी मुलाकात हो जाएगी.कल करीब २ बजे मैं खाना खा के निकल गया प्रभात के घर.काफी दिनों बाद मैं उसके घर जा रहा था.दिल में एक अजीब सी खुशी थी.प्रभात के घर पंहुचा तो देखा वो घर के बाहर ही खड़ा दिख गया मुझे.वो बदला तो नहीं कुछ ख़ास लेकिन हाँ थोडा मोटा तो हो ही गया है वो.और अब पहले से अच्छा भी दिख रहा था, अब लग भी रहा था की हाँ कोई Software Engineer” है.थोडा सा serious type इंसान जो लगने लगा है अब. 🙂
प्रभात के घर जाते ही मुझे एक अलग सा अपनापन लगने लगता है.मुझे ऐसा लगा एक पल की जैसे मैं अपने उसी पुराने दिनों में वापस आ गया, जब मैं स्कूल में था और करीब हर दुसरे तीसरे दिन प्रभात के घर पहुच जाता था.उन दिनों की कहानियां सुनाने लगूंगा तो पोस्ट काफी ज्यादा लम्बा हो जायेगा.


पता नहीं क्यों जो सब बातें एक अरसे से मुझे परेशान कर रही थी, सारी बातें मैंने प्रभात से कह डाली.बहुत ही अच्छा महसूस कर था मैं.पता नहीं कैसे, मैं जो भी कहना चाहता हूँ प्रभात समझ लेता है और वो जो कहना चाहता है वो मैं समझ लेता हूँ.शायद ये एक अजीब सा रिश्ता है हम दोनों के बीच.बहुत ज्यादा बातें हुई हमारे बीच.उससे जब भी मिलता हूँ मैं,मुझे एक अलग ही inspiration मिलता है.बहुत अच्छी अच्छी सलाह भी देता है वो.जब भी मैं उसके साथ होता हूँ, मुझे ऐसा लगने लगता है की कुछ भी नामुमकिन नहीं, हर कुछ आसन है 🙂


प्रभात के लिए ये एक गीत जो मेरे दिल के काफी करीब है, पोस्ट कर रहा हूँ.
 तेरे जैसा यार कहाँ,कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया..तेरा मेरा अफसाना

मेरी ज़िंदगी सवारी,मुझको गले लगाके
बैठा दिया फलक पे  मुझे ख़ाक से उठाके 

यारा तेरी यारी को ..मैंने तो खुदा माना
याद करेगी दुनिया, तेरा मेरा अफसाना..

मेरे दिल की ये दुआ है ,कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना ,वह दिन कभी न आए 

तेरे संग जीना यहाँ ,तेरे संग मर जाना
याद करेगी दुनिया ,तेरा मेरा अफसाना…

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  1. अच्छी अच्छी बातां करने लगे हो भई, दिल ख़ुश और फेफड़ा उदास कर डाला तुमने. आँखों में आंसू आ गए मेरे तो. फिर कभी ऐसी बातें नक्को करना. वैसे पोस्ट काफी अच्छा लिखा है तुमने. पढ़ कर काफी मदद मिला भई. गुड गुड. हैदेराबदी स्टाइल ….. ही ही हा हा ………

  2. ऐसे ही मजे करो अभिषेक और ज्यादा मानसिक दबाव में मत रहो….हँसते खेलते रहो…अच्छे लगते हो….

  3. और खुशी हुई जानकार की तुमने अपना दिन अच्छा बिताया अपने दोस्त प्रभात के साथ

  4. greatt.
    mujhe bhi aane do patna fir hm bhi enjoy krenge tumhre saath.

    by d way@vishal
    अच्छी अच्छी बातां करने लगे हो भई…?
    abhishek always talks intelligently,and beautifully 🙂 😛

  5. आज बहुत दिनों बाद ब्लौग खोल कर देख रहा था, फिर तुम्हारी तीन-तीन पोस्ट दिख गई.. सबसे पहले तो यह शिकायत है कि फोन पर मुझे आप मत कहा करो भाई, दिलों की दूरियां कुछ अधिक लगती हैं.. 🙂

    शिखा जी पूछ रही हैं कि पार्टी-शार्टी हुई की नहीं प्रभात जी के साथ? मैं इसका मतलब सीधा-सीधा यह निकाल रहा हूं कि वह पूछना चाह रही है कि दारू-शारू पिये कि नहीं? 😛

    उम्मीद है कि कल तुमसे मिलते हैं.. अगर मेरे घर नहीं आ पाये तो मैं तुम्हारे घर आता हूं.. 🙂

  6. @प्रशांत भाई …अरे भाई मैं तो दारू-शारू पीता नहीं……अब प्रभात का भी,, जहाँ तक मेरी जानकारी है ..नहीं पीता.. 😛 😛 ऐसे में हम पेप्सी पी की ही काम चला लेते हैं 😀

    @प्रीती दी…हाँ दीदी जैसा आप कहें

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