कुछ पुरानी यादों के नशे में ..१

ये पोस्ट मेरी उन यादों के लिए है जो मेरे लिए बहुत ही ख़ास हैं, पोस्ट पढने से पहले कृपया इन पंक्तियों पे एक नज़रडालें।

हम भी कभी आबाद थे,
वो दिन कुछ ख़ास थे
हर नज़र मेहरबान थी,
ऐसे कहाँ अनजान थी॥ “

बात ये पिछले साल आज के ही दिन की बात है…मैं अपने मामी के घर था, और अपनी बहन सोना से बातें कर रहा था, अपने पुराने स्कूल के दिनों की। सोना मेरे से छोटी है, तो मैं उसे अपने स्कूल की कहानियां सुना रहा था, कहानियां कुछ ख़ास तो नहीं बस कुछ अच्छे खूबसूरत पलों को याद कर रहा था और उन पलों की वो हसीन बातें अपनी बहन को सुना रहा था…उसे तो सुनने में मज़ा आ ही रहा था, मैं भी अपनी पुरानी बातों को यादकर खुश हो रहा था…..अपने पुराने दोस्तों की बातें,कुछ शरारत की बातें, पहले प्यार की बातें, किसी ख़ास की बातें…. बातों में हम इतना मशरूफ थे की कब रात के १ बज गए ये पता ही नहीं चला….मेरी बहन तो चली गयी सोने, मैं बहुत देर तक जागता रहा था….ज़हन में वही पुराने किस्से चल रहे थे…लगभग पूरी रात मैं जागा रहा उन पुराने दिनों की यादों में॥

वो दिन ही कुछ ऐसे थे, वो पल बहुत ख़ास थे…

हर कोई हमारे करीब था तब…दिल से बहुत नज़दीक, अब तो सब अपने अपने व्यस्त जिंदगी में इस तरह उलझ गए हैं की खुद के लिए भी वक़्त नहीं निकल पाते, हमारे लिए क्या वक़्त निकालेंगे।

उन्ही सुनहरी यादों के नाम मैंने एक छोटी सी कविता लिखी थी। मैं कोई कवि या शायर नहीं हूँ… तो कविता में हुई गलतियों को नज़रंदाज़ कर दीजियेगा॥

“वे दिन याद आते हैं,
जब हम हँसते थे, मुस्कुराते थे,
खेलते थे, गुनगुनाते थे..
परिंदों की तरह इधर उधर फिरते थे,
दुनियादारी की उलझनों से 

अनजान थे…



वो मेरे स्कूल के दिन,
और कोचिंग क्लासेज की अनगिनत यादें
अक्सर शाम में 

मुझसे मिलने आती हैं…
मुझे उनसे बातें करना अच्छा लगता है…
उन यादों के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता है


शाम की वो मस्ती,
चंदू के दूकान की चाय पकौड़ियाँ हो 
या गोविन्द भाई के दुकान की चाओमिन…
ब्लू मून के टिक्के कबाब हो या 
सैंडविच के पेस्ट्रीज 
पांच रुपये वाली वो फाउंटेन पेप्सी,
जिसे पी पी कर 
टल्ली होने की एक्टिंग करना हो 
या संतुष्टि में लौंगलते
खाने का चैलेन्ज जीतना…
हर शाम की एक अजब ही बात थी 


दोस्तों के संग भटकना हो 
या बस लक्ष्मी कॉम्प्लेक्स में 
चक्कर काटते रहना 
स्कुल जाने के बजाये 
फ़िल्में देखने जाना हो 
लड़कियों से बातें कर खुश होना हो 
या उन्हें पटाने के तरीके ढूँढ 
उनके पीछे पीछे घूमना 
हर पल में कितना कुछ था 
बेफिक्र थे हम, आज़ाद थे 
खुशहाल थे, आबाद थे…


एक लड़की से मुझे प्यार हुआ था,
नया नया अहसास हुआ था
उसकी यादों में दिन भर डूबे रहता था दिल 

अपने प्यार के इज़हार के लिए 
रोज़ नए तरीके ढूँढता था दिल 
और उसके सामने आते ही,
सब कुछ ही भूल जाना हो 
या नज़रें नीची कर के उलटे पांव लौट जाना 
रात रात भर उसके ख्यालों में जागना हो 
या पूरी शाम उसे याद कर
उलटे सीधे तुकबंदियों की कवितायें लिखना हो 
वो मीठी बेताबी,
पहले प्यार का वो प्यारा अहसास 
आज भी मेरे साथ है 
वो दिलनशीं, वो माहेरू,
आज मेरा सनम, मेरी जान है 

जाड़े का वो मौसम 
और मेरा वो पुराना क्वार्टर 
जहाँ धुप आता था बेशुमार 
घंटों बैठे रहना जाड़ों के उस धुप में 
कोर्स की किताबों में छुपा कर
कॉमिक्स, कहानियों और शायरी की किताबें पढना हो 
या कॉपी के आखिरी पन्ने पर 
किसी ख़ास के लिए खत लिखना हो 


घर से बड़े से लॉन में 
क्रिकेट-बैडमिन्टन खेलना हो 
या फिर वहीँ टेबल कुर्सी पर 
कैरमबोर्ड और लूडो खेलना 
मोहल्ले के लड़कों को चैलेन्ज दे देना..
“दम है तो आउट कर के दिखाओ”
या पूरी पूरी शाम बगीचे में बैठकर 
दोस्तों से दुनिया जहान की
गप्पे करना 


घर के बागीचे में 
सुबह शाम पेड़ों फूलों में पानी देना हो 
या कभी तन्हाई में ,
उन फूलों से कुछ बातें करना 
ज़िन्दगी जैसे फूलों सी ही रंगीन थी,
वो घर मेरा बड़ा मेहरबान 
खुशियों का बड़ा संसार जैसा था,
वो घर भी मुझे अक्सर याद आता है !

परीक्षाएं खत्म होने पर
नानी के घर जाना हो 

और वहां जाकर शाम में 
डी.के के दूकान की समोसे-जलेबियाँ खाना हो 
नानी से मजेदार कहानियां सुनना हो 
या फिर मोहल्ले के भैया-दीदियों के साथ 
पूरी पूरी शाम बातें करना हो 


वो घर से कभी कुछ पैसे मिलने पर,

भाग के दुकान जाना हो

और नए फिल्मों के कैसेट खरीद लाना
या फिर ब्लैंक कैसेट में गाने रिकॉर्ड करवाना हो 

और फिर घर आकर 
पुरे एक्स्साईटमेंट से उन्हें सुनना,
एक बार दो बार तीन बार…रिपीट मोड में,

वो मेरी एक साइकिल,
साइकिल से हर जगह जाना हो,

या फिर हर इतवार उसे 
नहला धुला कर दुल्हन की तरह सजाना 
और फिर शाम में, 
बड़े शान से उसे सड़कों पर चलाना
वैसी मस्ती थी वो जो अब 
गाड़ी में होती नहीं,
बैठे रहते हैं शीशे बंद कर के गाड़ियों में,
साईकिल में चलते थे जब 
हवाओं से बातें करते थे…
अपनी वो साईकिल, वो जानेमन 
मुझे अब तन्हाई में याद आती है 


मेरा वो एक पुराना कोडैक का कैमरा
जाने कितने लम्हे मैंने कैद किये होंगे,
उस कैमरे में

डिजिटल फोटो में अब 
मोबाइल के कैमरों में 
वो बात नहीं, 
जो रील वाले कैमरे में होती थी…
हर फोटो की अहमियत थी 
रील खत्म हो जाने पर उसे 
डेवलप कराने की बेचैनी 
अब के डिजिटल कैमरे में वो बात कहाँ


मेरी वो पहली जीत,

पुरूस्कार में मिला वो एक टेपरेकॉर्डर

जो जाने कब कैसे मेरा 
सबसे अच्छा दोस्त बन गया…
हर पल मेरे साथ रहा वो,
दुःख के, सुख के नगमे सुनाता हुआ
जान से भी ज्यादा प्यारा था मुझे वो…
वो टेप रेकॉर्डर,मेरा वो दोस्त 

बड़ा याद आता है मुझे…


ऐसी ही अनगिनत यादें ,
जाने कितनी तो बातें 
आज याद आ रही हैं मुझे….
यादों का गज़ब तूफ़ान 
दिल में उठा दे रहीं हैं ये 
वो  पल, मेरे वो सुनहरे दिन 
आ जाए फिर से लौटकर 
एक बार फिर से हम 
जी ले वो 
बेफिक्र, बिंदास और बेताक्लुफ सी ज़िन्दगी 
एक बार फिर हम चले जाए 
अपने बचपन के दिनों में 
जब हम हँसते थे, मुस्कुराते थे,
खेलते थे, गुनगुनाते थे..
सच 
हर पल में जैसे ज़िन्दगी थी समाई हुई सी 




अब ज़रा ये गाना आप सुन लें, मुझे तो काफी पसंद आई….कुछ हद तक मेरी भी कहानी कही गयी है इसमें….

आपको भी इस गाने में सायद कहीं आप नज़र आ जाये..







एक आखरी सलाम उन पुरानी सुनहरी यादों के नाम….

Recent Articles

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रुठै नहीं ठौर : शिक्षक दिवस पर खास

सुदर्शन पटनायक द्वारा बनाया गया, चित्र उनके ट्विटर से लिया गया आज शिक्षक दिवस है, यह दिन भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ....

तीज की कुछ यादें, कुछ अभी की बातें और एक आधुनिक समस्या

इस साल के तीज पर बने पेड़कियेबचपन से ही तीज का पर्व मेरे लिए एक ख़ास पर्व रहा है. सच कहूँ तो उन दिनों इस...

एक वो भी था ज़माना, एक ये भी है ज़माना..

बारिश हो रही हो, मौसम सुहाना हो गया हो और ऐसे में अगर कुछ पुराना याद आ जाए तो जाने क्या हो जाता है...

बंद हो गयी भारत की सबसे आइकोनिक कार, जानिये क्यों थी खास और क्या था इतिहास

Photo: CarToqपिछले सप्ताह, अचानक एक खबर आँखों के सामने आई, कि मारुती अपनी गाड़ी जिप्सी का प्रोडक्शन बंद कर रही है. एक लम्बे समय...

आईये, बंद दरवाजों का शहर से एक मुलाकात कीजिये

यूँ तो साल का सबसे खूबसूरत महिना होता है फरवरी, लेकिन जाने क्यों अजीब व्यस्तताओं और उलझनों में ये महिना बीता. पुस्तक मेला जो...

Related Stories

  1. i realy dont kno wot 2 write..!

    hadd se zyadaa achaa hai ye post.. n i realy mean it..!

    i wz cmpletly lost wen i wz reading it..!

    bhaiya.. may b it wz d bestest part of ur lyf.. but i feel.. ki u shud b happie.. coz u can create such moments again.. its not dat easy.. but its not impossible also..

    i wz feeling.. my days wud b lost someday…n i dont want dat..
    dats y i wz sad reading dis post..

    i guess.. it wz d best tym of ur lyf.. but not d only best tym.. smthings will b back again..! 🙂

  2. bht hi achha …. aur sampooran saaransh diya hai aapne apne bachpan ka … iss gadhyaansh k maadhyam se …. !

    main bhi kahin naa kahin apne bachpan ko isse juda hua mehsoos kar raha hun ….! 🙂

  3. Hmmm ! Really heart touching poem ! Kisi ko bhi apna bachpan yaad dila skti hai ! I must say dis is one of ur bestest evr creation ! Really kya bolu…..totally speechless … !

    Not an easy task to summarize such moments but itzz not so tough 4 u.. ! U really rox bro 🙂

    haan 1 thing 1 wanna say ki wo last mei video ni chali 😀 maine 4-5 baar try kiya….so plzz zara dekhna 😀 😀 hehee….baki in ol ye really apki lyf k sabse sunhare pal the….sabse sunhare…. 🙂

    waahhh main bhi bhari bhari wrdss likhne lag gya 😀 batao ab 😛

  4. asum kavita aur sach bataoun to mujhe apne school k din yaad aa gaye jab main tution padhne jata tha aur wahi sub karta tha jo aapne iss kavita me likha hai…sach me dil ko chu jati hai ye kavita …. likhte rahiye..hamri subhkamnaye hamesha aapke saath hai…..

  5. aapki jitni tareef karu kam hai 🙂 its really toooo toooo toooo good … awesome poem but mujhe poem se upar ka description jyaada acchha laga 🙂

    really mujhe words nahi mil rahe inki tareef karne ke liye …

    in all poem & detail both were awesome 🙂

  6. bhai …i m not on a place 2 comment on these thngs…but u kne bro u hv so much 2 give 2 others…hope ppl like me can tk point 1% also 4rm u….ds site is amazing…truly….

  7. कुछ कहें क्या…??? पर इतना अच्छा लिखा है कि शब्द नहीं मिल रहे तारीफ के लिए…|

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

नयी प्रकाशित पोस्ट और आलेखों को ईमेल के द्वारा प्राप्त करें