एक और वर्ष समाप्त होने को आया...

एक और वर्ष समाप्त होने को आया।
क्या खोया क्या पाया ये याद तो नही,
लेकिन कुछ ऐसे पल थे जिन्हें भुलाना भी मुमकिन नही, वे कुछ ख़ास पल थे।
ये बात कही जाती है अक्सर की जहाँ दिन का जिक्र हो वहां रात का जिक्र होना स्वाभाविक है,
ठीक वैसे ही जहाँ खुशी के कुछ पल थे, वहीँ अक्सर कुछ बातों का तनाव भी रहा।

हर बार ये सोचते हैं हम नए वर्ष पे की कुछ तो नया करेंगे, कुछ तो अच्छा करेंगे लेकिन अंत में बात वही हो जाती है, कुछ नया होता नही, बात वही पुराणी रह जाती है।

सबकी बात नही जानता मैं, लेकिन इस बार फ़िर मैंने निश्चय किया है की कुछ तो अच्छा करूँगा, कुछ ऐसा जो करने को न जाने कब से सोच रहा हूँ लेकिन अपने ढीलेपन की वजह से वो उद्देश्य पुरा न हो पा रहा है ।

ये बात बस मैं आप लोगों से बस इसलिए बाँट रहा हूँ की अगर आपका भी कोई ऐसा काम रह गया है जो आपने पुरा नही किया हो और काफ़ी दिनों से सोच रहे हैं की ये काम मैं आज पुरा करूँगा , तो जनाब अब और समय मत लीजिये और वो काम पुरा कर लें।
समय रहते सारे काम हो जाए पुरे तो दिल खुश रहता है और संतुष्टि भी होती है।

ये तो नही जानता मैं की जो सोचा है वो पुरा हो पायेगा या नही लेकिन कोशिश करने में कुछ खराबी नही ।


Comments

  1. बिलकुल सही लिखा आपने .... आशा है इस वर्ष हम सभी कुछ नया करने में सक्षम होंगे ... ! :)

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  2. naya maal bhai!! jaldi se kuchh likho.. :)

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  3. @प्रशांत,
    भाई बिलकुल नया लिखने की कोशिश करूँगा,
    आजकल थोडा कुछ और कामो में व्यस्त हो गया हूँ, इसलिए वक़्त नहीं निकाल पा रहा...

    @Ryder
    सुक्रिया... :)

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  4. कोशिश करने में कुछ खराबी नही...बिलकुल सही है...|
    वो कविता है न, जिसकी एक लाइन याद आ गई...कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...:)

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