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एक और वर्ष समाप्त होने को आया…

एक और वर्ष समाप्त होने को आया। क्या खोया क्या पाया ये याद तो नही, लेकिन कुछ ऐसे पल थे जिन्हें भुलाना भी मुमकिन नही, वे...

कुछ बातें दिल से…. बाद में फ़िर विष्तार से बातें...

तबियत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में ... हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं ....सोच में पर गया हूँ मैं...