गालिब के ग़ज़ल

की मेरी जान को करार नहीं है


आ की मेरी जान को करार नहीं है
ताकत-ए-बेदाद-ए-इंतज़ार नहीं है !!

देते है जन्नत हयात-ए-दहर के बदले
नशा ब-अंदाजा-ए-खुमार नहीं है !!

गिरियाँ निकाले है तेरी बज्म से मुझको
हाए की रोने पर भी इख्तियार नहीं है !!

हमसे अबस है गुमान-ए-रंजिश-ए-खातिर
ख़ाक में उश्शाक की गुबार नहीं है !!

दिल से उठा लुत्फ़-ए-जलवा-ए-माअनी
गैर-ए-गुल आइना-ए-बहार नहीं है !!

कत्ल का मेरे किया है अहद तो बारे
वाये-अखर-अहद उस्त्वार नहीं है !!

तुने कसम मैकशी की खाई है "ग़ालिब"
तेरी कसम का कुछ ऐतबार नहीं है !!

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घर जब बना लिया

घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बगैर

जानेगा अब भी तू न मेरा घर कहे बगैर

कहते है जब रही न मुझे ताक़त-ए-सुखन
जानू किसी के दिल की मैं क्यूँ कर कहे बगैर

काम उस से पड़ा है की जिस का जहाँ में
लेवे न कोई नाम सितमगर कहे बगैर

जी में ही कुछ नहीं है हमारे वरनाह हम
सर जाए या रहे ना रहे पर कहे बगैर

छोडूंगा मैं न उस बुत-ए-काफिर का पुंजा
छोड़े ना खल्क गो मुझे काफिर कहे बगैर

मकसद है नाज़-ओ-गम्जः वले गुफ्तगू में काम
चलता नहीं दशनाह-ओ-खंज़र कहे बगैर

हर चन्द हो मुशाहदः-ए-हक की गुफ्तगू
बनती नहीं है बादाह-ओ-सागर कहे बगैर

बेहरा हूँ मैं तो चाहिए दूना हो इल्तिफात
सुनता नहीं हूँ बात मुक़र्रर कहे बगैर

ग़ालिब ना कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उनपर कहे बगैर

Comments

  1. हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। बढ़िया लिखें ..हजारों शुभकामनांए

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  2. आपका सुक्रिया सर...
    बहुत बहुत धन्यवाद की आपने मेरी लिखी हुई ये ब्लॉग पढ़ी

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  3. Ghalib Sahab ko hum tak pahunchane ka shukriya. Swagat blog parivar aur mere blog par bhi.

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया