समित और अकरम - दो ख़ास दोस्त

मेरे ख्याल में समित और अकरम से दोस्ती मेरी उपलब्धि में से एक रही है....
ये दोनों बहुत ही ख़ास हैं मेरे लिए....

हर मायने में एक अच्चे और सच्चे दोस्तों की परिभासा....
अपने दिल की लगभग सभी बातें मैंने इनसे कही और मेरे हर पलों में इन्होने मेरा साथ दिया...

दोनों में काफी असमानताएं थी....जहाँ समित एक मस्त,मजाकिया,शरारती और ड्रामेबाज़ था, वहीँ अकरम एक सुलझा हुआ इंसान था....

अक्सर हमलोग अपनी तुलना "दिल चाहता है " फिल्म के किरदारों से करते है...
उस फिल्म में हमने अपने किरदार भी बाँट लिए थे...जैसे "समीर" वाला किरदार बिलकुल समित पे सही लगता था, वैसे ही "सिद्धार्थ" वाला किरदार मेरे पे और "आकाश" वाला किरदार अकरम पे सही लगता है..
आप सायद मानेगे नहीं लेकिन हमारी दोस्ती बिलकुल वैसे ही थी जैसी की उस फिल्म में दर्शाई गयी थी..और जिनके किरदारों की मैंने तुलना की है वो बिलकुल वैसे ही हैं जैसे मैंने लिखा है...

दोनों ही लोग मेरे लिए ख़ास थे, ख़ास हैं और ख़ास रहेंगे और ..
हम लोग दोस्त थे, हैं, और हमेशा रहेंगे....
चाहे हम कुछ भी करे, कहीं भी रहें, कितने भी दूर रहे, हमेशा एक दूसरो के करीब रहेंगे यादों में...

मेरे चार साल अगर हसीं थे तो उसमे इन दो लोगों का साथ सबसे सुहाना था...
मैंने हर रास्ते , हर पल इनका साथ महसूस किया है और इनपे मुझे नाज़ है ...
समित और अकरम जैसे दोस्त सायद ही किसी को मिलते हैं..
मैं बहुत ही भ्ग्यसाली रहा की मुझे इन दो दोस्तों की साथ मिला

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