मेरे बारे में कुछ जाने…आखिर हूँ कौन मैं 😉


This is a short Introduction of Me 



अभी 27-June-2010 को ये मेरा परिचय अपडेट हुआ..ये मेरा परिचय ब्लॉग पे पोस्ट हुआ था 28-May-2007 को

सबसे पहले मेरा परिचय इंटरविउ में दिए जवाब जैसा 😉  –  मैं अभिषेक कुमार, पटना का रहने वाला हूँ.पटना सेंट्रल स्कूल से मैंने शुरूआती पढाई की….एक कंप्यूटर इंजिनियर और अभी फ़िलहाल बैंगलोर में कार्यरत हूँ 😉

वैसे मैं बस नाम का ही कंप्यूटर इंजिनियर हूँ…काम काज किसी भी तरह से कंप्यूटर सम्बंधित या टेक्नोलोजी सम्बंधित नहीं है.मैं फोरेक्स मार्केट में काम करता हूँ,मार्केटिंग बेस पे…वैसे छोड़िये आपको क्या करना है मेरे काम काज से..मैं भी फ़ालतू में बता रहा हूँ आपको 🙂

 मैं कोई ज्यादा टैलेंटेड व्यक्ति नहीं हूँ न ही ये कहूँगा की मेरे अंदर कोई भी विशिष्ट खूबियां हैं.बस मैं एक बहुत ही साधारण सा आदमी हूँ..आधुनिकता से बिलकुल परे, मुझे आज कल के इस सो-कॉल्ड आधुनिक फैशन और आधुनिकता से चिढ़ है और नाराजगी भी..आधुनिकता जरूरी है लेकीन इसके नाम पे हम अपने सभ्यता और सामाजिक परिवेश को दाव पे नहीं लगा सकते..आधुनिक सोच होनी जरूरी है न की आधुनिक फैशन और तौर तरीके…अगर कुछ लोग आधुनिकता के नाम पे विदेशों की नक़ल ही कर रहे हैं तो वे लोग ये भी नक़ल क्यूँ न करते हैं की उन जैसे अनुशाशन आये..मेरे ख्याल से हर देश की हर समाज की अपनी एक सभ्यता है, संस्कृति है..जो की भिन्न जरूर हैं लेकीन हर समाज की सभ्यता हमें कितने नए चीज़ें सिखाती हैं..यहाँ लोग बस पशिमी कपड़े और खानों को मोडर्न होना बोलते हैं, अरे भाई इनके साथ उनके जो अनुशाशन हैं वो भी तो सीखो…आजकल के जेनरेसन के पैरों तले जब अपनी खुद की सभ्यता को कुच्लाते हुए देखता हूँ तो बेहद दुःख और अफ़सोस होता है..मुझे तब भी बहुत चिढ़ बढ़ती है जब कोई लोग हिंदी को दरकिनार करते इंग्लिश को अपनी भाषा बना लेते हैं..अंग्रेजी भाषा का मैं भी बहुत सम्मान करता हूँ…हर भाषा का सम्मान करना चाहिए..लेकीन इस चक्कर में हमें अपनी हिंदी नहीं भूलनी चाहिए जो की हमारी पहचान है..

खुद को देशभक्त तो नहीं कह पाउँगा, न ही मैंने देश के लिए वैसा कुछ किया है, और नाही कोई क़ुरबानी या फिर योगदान दिया है मैंने…लेकीन मेरा देश, मेरा भारत मुझे बहुत प्रिय है…बहुत से लोग हैं जो देश के बारे में नेगटिव राय रखते हैं..कोई मुद्दे पे बात करना या फिर कोई कमी को दर्शाना अलग बात है लेकीन किसी मुद्दे के आड़ में आप हरगिज देश को गाली नहीं दे सकते…यहाँ की व्यवस्था को भले बुरा भला कह लीजिये लेकिन देश को गाली देना उचित नहीं है……देश के ही जैसे मुझे मेरे शहर पटना से बेहद लगाव और प्यार है..पटना के अलावा दो शहर जो की मेरे अपने से हैं वो हैं बैंगलोर और हैदराबाद..जहाँ हैदराबाद वो पहला शहर था जहाँ मैंने खुल के मस्ती की, आवारागर्दी की..वहीँ बैंगलोर एक ऐसा शहर रहा है जो मेरे तन्हाइयों में, बुरे वक़्त में मेरे साथ हमेशा खड़ा रहा है..बहुत कुछ सीखाया है इस शहर ने मुझे.

मैं एक साधारण सा आदमी हूँ जिसकी आदतें भी कोई खास नहीं, बस दोस्तों से बातें करना, बहुत सी फ़िल्में देखना…हिन्दी,अंग्रेजी,कोरियाई,ईरानी, पुरानी हिन्दी फ़िल्में..मतलब हर भाषा की फ़िल्में देखता हूँ…रोमांटिक,एक्सन,आर्ट,ड्रामा..सभी तरह की फ़िल्में…पुराने गाने खास कर के तलत,मुकेश और रफ़ी के गाने सुनना,ग़ज़लें, कवितायेँ पढ़ना..बशीर बद्र, दुष्यंत कुमार, गुलज़ार और फराज़ साहब का बहुत बड़ा फैन हूँ.इसके अलावा अब ये एक शौक ब्लॉग्गिंग भी 😉 मेरी कारों के प्रति बहुत गहरी दीवानगी है..मुझे नए नए तेज खूबसूरत कारों के बारे में अधिक से अधिक जानने का बहुत शौक है..ये कार का शौक बचपन से ही मेरे को है..शुरुआत में मैं कारों के फोटोज जमा करता रहता है..वो सब फोटोज अब भी हैं…इसके अलावा मुझे किसी शांत जगह पे अपने कुछ करीबी मित्रों के साथ वक्त गुजरना बेहद अच्छा लगता है…मुझे बातें करना पसंद है, बहुत पसंद…कभी कभी रात रात भर बातें करता रहता हूँ….मैं ये मानता हूँ की आप किसी से जितनी ज्यादा बातें करेंगे आप उसे उतना ही अच्छे से जानेंगे..

मेरी एक और बीमारी है, बहुत बड़ी बीमारी…मैं बहुत जल्दी पुराने यादों के गलियारों में चला जाता हूँ, ऐसे ही घूमने को…बड़े देर तक गलियारों में उन यादों के साथ घूमते रहता हूँ…मैं अपने बचपन को बहुत मिस करता हूँ..मुझे बहुत याद आती है बचपन के दिनों के…उस समय हम कितने मासूम थे,ज़माने की आपाधापी से बहुत दूर..सुकून से जिंदगी गुजारते थे..फ़िक्र नाम की चीज़ों से हमें परिचय ही नहीं था…टेंशन बस ये रहती थी की अगला खेल कौन सा खेलना है, कल स्कूल जाना है या नहीं….वो दिन बेफिक्री के दिन थे जब हम छोटे थे..
मैं स्कूल में कोई बहुत तेज या अव्वल लड़का नहीं रहा लेकीन पता नहीं क्यूँ मेरे घर वालों को मेरे से बहुत उम्मीदें लगी रहती थी जिन्हें हमेशा मैंने बड़ी बेरहमी से कुचला भी है…पढ़ता था, लेकीन शायद धयान नहीं रहता या फिर किस्मत अच्छी नहीं रहती थी, मेहनत करने के बावजूद कम अंकों से हमेशा पाला पड़ते ही रहा मुझे..ऐसा भी लगने लगा की परीक्षा में कम अंक और मेरा तो चोली दामन का साथ है ..लेकीन फिर भी घर वालों का मेरे पे विश्वास रहा ही…शायद हर व्यक्ति के घर वाले ऐसे ही होते हैं…. 🙂
कुछ दिन मेरे जिंदगी के सबसे खराब दिन रहे हैं, उन्हें मैं यहाँ याद करना नहीं चाहूँगा….

मैं एक बहुत ही इन्ट्रोवर्ट रहा हूँ बचपन से, ये समझ गया हूँ की इन्ट्रोवर्ट रहना अच्छा नहीं…अब भी कोशिश है की अपने इस इन्ट्रोवर्ट छवि से बाहर निकलूं लेकीन अभी मेहनत और करनी होगी शायद इन्ट्रोवर्ट छवि को तोड़ने में 🙂 मुझे कुछ बेहद ही अच्छे दोस्त मिले हैं…जिनके नाम लिए बिना मैं रह नहीं सकता…. मती,प्रभात,मुराद,दिव्या,शिखा,रिया,सुदीप,निधि,अकरम,आशीष,आशीष भारती,समित,प्रशांत,निशांत,स्तुति … ये सब मेरे खास दोस्तों में से आते हैं.. खास कर के दिव्या और सेखर, जिन्होंने मुश्किल समय में मुझे काफी कुछ समझाया, सीखाया, हौसला बढ़ाया मेरा…मती और प्रभात मेरे लिए हमेशा सबसे खास रहेंगे…ये दोनों को मैं अपने जान से भी ज्यादा चाहता हूँ…शिखा मेरे लिए एक एंजेल है..सही मायने में,इसकी दोस्ती हर वक्त साथ रहती है…..इससे ज्यादा इस लड़की के बारे में क्या कहूँ…निशांत बिलकुल मेरे छोटे भाई जैसा है, और मेरे काफी मुश्किल और अकेलेपन के समय में मेरे साथ हमेशा रहा..प्रशान्त हिंदी ब्लोगिंग में मुझे ले के आया..वो ऐसे की पहले के मेरे ब्लोग्स में ज्यादातर गाने या फिर कुछ बातें इंग्लिश में लिखी होती थी…फिर जब एक बार प्रशान्त का ब्लॉग देखने का मौका मिला तो जाना की हिंदी ब्लोगिंग कितनी अच्छी है….वहीँ से मैंने हिंदी ब्लोगिंग शुरू की, शायद २००७ के शुरुआत में..फिर कुछ पुराने पोस्ट्स को डिलीट भी करना पड़ा…प्रिया और मेरे दोस्त शेखर की शादी होने वाली है कुछ महीनो में, लेकीन प्रिया से इन दिनों रिश्ता कुछ ऐसा बन गया है की वो भी मेरी अजीज दोस्तों में से आती है 🙂 स्तुति से भी कुछ इस तरह की दोस्ती है की मैं बस चाहूँगा की ये दोस्ती हमारी बनी रहे, हमेशा  :).इनके अलावा दोस्तों की एक और कैटेगरी है – वरुण,रुचिका,तान्या,प्रभा,मोना,अनिल और अती की.ये सभी दोस्त कम मेरे छोटे भाई-बहन ज्यादा हैं.मेरे लिए ये सब बेहद खास हैं.

पहले मैं भगवान और पूजा पाठ से थोड़ा दूर ही रहता था, लेकीन कहते हैं न जब आप घर से दूर रहेंगे तो दुनिया सब सिखा ही देती है, वैसे ही, पता नहीं कैसे मुझे भी धीरे धीरे पूजा पाठ में विश्वास हो गया..मैं कोई नियमित रूप से पूजा तो नहीं करता लेकीन हर दिन भगवान को याद करता जरूर हूँ और हर सुबह धुप अगरबत्ती भी दिखता हूँ…मंदिरों पे भी विश्वास तब हुआ जब मैंने अपने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, वहां के हनुमान मंदिर पे मुझे बहुत अटूट विश्वास है….वहीँ के जैसे मैंने बैंगलोर में भी एक मंदिर ढूंड ही लिया जहाँ जाना मुझे अच्छा लगता है…

मेरे जीवन के बहुत सारे सपने हैं, बहुत अरमान हैं…मैं सपने बहुत देखता हूँ…हम अगर आगे बढ़ना चाहते हैं तो सपने देखना ही चाहिए…मैं बस उन्ही कुछ सपनों के पीछे भागते फिरता हूँ..,कब पुरे होंगे ये सपने कह नहीं सकता लेकीन हाँ, अभी तक इस वक्त के पहिये ने मेरे बहुत से सपनों को बेदर्दी से कुचला है…एक दो और सपने अभी कुचलाने के कगार पे खड़े हैं…

और क्या कहूँ मैं, जैसे जैसे अपने बारे में कुछ और जानता जाऊँगा, वैसे वैसे आपको भी बताते जाऊँगा..:)  


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  1. आप एक अच्छे इंसान है… साधारण या असाधारण मेरे लिए मायने नहीं रखता…
    लोगों से मिलने बात करने से इंसान उनको तो जानता ही है, खुद को भी अच्छी तरह समझने लगता है… मेरा कोई परिवार नहीं, पर मेरे दोस्त मेरे लिए परिवार से कम नहीं और मुझे ऐसे ही लोग अच्छे भी लगते हैं जो अपने दोस्तों के लिए दिल में ढेर सारा प्यार रखते हैं.

  2. तुम ऐसी बातें लिख कर भावुक कर देते हो.. दोस्तों से सम्बंधित तुम्हारे हर पोस्ट में अपना नाम देख कर तुम्हे कुछ और करीब पाता हूँ..

    तुम जैसे भी हो, अच्छे हो.. मैं सिर्फ एक दफे मिला हूँ तुमसे, मगर लगता है कि बचपन से जानता हूँ.. हाँ, ये बात तो सच है कि तुम बहुत इंट्रोवर्ट हो(इस बात कि गवाही मैं देता हूँ ब्लॉग समाज को :P)..

    वैसे आज के जमाने में भी अभी तक साधारण ही हो, यही क्या कम असाधारण बात है? 🙂

    अराधना से भी सहमत.. 🙂

  3. मैं कल सुबह ये पोस्ट को फिर से एडिट किया था….और कल सुबह तुम्हारा नाम डालना भूल गया था, ३ घंटे रूम से बाहर रहा, हर मिनट यही सोचता रहा था की जल्दी से रूम जाकर सबसे पहला काम ये करना है की तुम्हारा,स्तुति,रौशनी,प्रिया का नाम पोस्ट में डालना है…बेचनी को नहीं कहूँगा लेकीन वैसी ही कुछ फिलिंग आई जब ये याद आया की तुम चारों का नाम डालना मैं भूल गया हूँ 🙂

    @आराधना जी,
    हम क्या कहें, आपने बहुत कुछ कह दिया 🙂

  4. abhishek mujhe mera naam dekh ke thoda acha b laga aur surprise bi..
    thanks so much. i dont know wat to say..m feeling so gud 🙂
    and tumhare baare mein bht kuch pta aur chala yeh padhnen ke baad

  5. मैं कोई ज्यादा टैलेंटेड व्यक्ति नहीं हूँ न ही ये कहूँगा की मेरे अंदर कोई भी विशिष्ट खूबियां हैं.बस मैं एक बहुत ही साधारण सा आदमी हूँ.

    aapki is baat se ..ik purani film sujata ka..shayad agar main thik hun..ka jisme Nootan ji hain..ka ik dialog yaad aa gya…"'tumhaari sabse bdii khoobi ye he ke tum me koi khoobi nhi"' aapki saadhrntaa hi aapki khaasiyat he…dialog to mujhe thik se yaad nhi..pr uska magtlab yahii thaa..:)
    hmmm.aapne bahut jayada likhaa he..pr jo bhi likhaa he..wo yun lg rhaa tha..ke aap saamne khade hain..aur bol rahen……

    jaisaa hain vaise hi rahen..
    there's a famous line
    Be the way you are because aal othrs are already taken…:)

    aapko bhi nye saal ki shubhkaamnaayen
    dua he..aapka nya saal khushiyon bhra ho
    take care

  6. आज तीसरी बार ये पढ़ रहा हूँ, सोचा इस बार कमेन्ट कर ही दूं… 😛

    मन करता है इस परिचय को बार बार पढता रहूँ…काफी कुछ मेरे जैसा ही है..(कारों को छोड़कर)… 😀

  7. अभी …बहुत साधारण शब्दों मैं..बहुत रोचक परिचय दिया आपने अपना…

    बहुत सालो से विदेश मैं हूँ….जब भी देश आती हूँ तो लगता हैं…की शायद हम अप्रवासी भारतीय ज्यादा ही देसी लगते हैं…विदेश तो आजकल भारत मैं हैं…नयी पीडी के रूप मैं…आपने जो लिखा हैं…बहुत सच लिखा हैं….विदेश मैं भी बहुत कुछ अच्छा हैं सीखने के लिए सिवाय फैशन के…और बहुत भ्रांतिया दूर हो गयी हैं मेरी….देश हो या विदेश अपनी संस्कृति न त्यागी जाए…और दूसरी अपनाई जाए…इससे बेहतर क्या होगा…

  8. हीरा अपनी कदर खुद नहीं जानता भाई…उसकी कीमत उसे परखने वालों से पूछो…| तुम क्या जानो, तुम क्या हो…:)

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