डिअर एम, आई मिस यू

एक बेचैन करने वाली दोपहर है आज. समझ ही नही आ रहा कि क्या करूँ?  अकेलापन तो नही लेकिन कुछ खाली खाली सा लग रहा है. तबियत भी थोड़ी बिगड़ी हुई है. मौसम का असर है शायद. हल्का बुखार चढ़ आया है. सोचा था कहीं बार घूम आऊं, कुछ काम भी पेंडिंग पड़े हैं. लेकिन तबियत का खयाल कर के दोबारा बिस्तर पर ही पड़ा रहा.

समय काटने के लिए एक फ़िल्म लगा ली. फिल्म का नाम तो याद नहीं, कोई साउथ की फ़िल्म है जिसे हिंदी में डब कर के दिखाया जा रहा है. मैं देखने लगा. बड़ी ही बकवास सी फिल्म है, न कोई कहानी ना कोई एक्टिंग और ना ही कोई डायरेक्शन. लेकिन फिर भी मैं चैनल बदल नहीं रहा हूँ. हाथ में रिमोट है, फिर भी इसी फिल्म को देख रहा हूँ.

हीरो अपनी हीरोइन को मनाने की कोशिश कर रहा है. वो उससे रूठी हुई है. उसे इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहा है वो. कुछ देर पहले हीरो ने हीरोइन को मनाने के लिए एक गाना गया था. उस गाने में अचानक से मेरी नज़र पड़ी तुमपर. हाँ, तुम्हें देखा मैंने उस गाने में. एकदम अचानक से. मैं शॉकड रह गया था. मुझे इसकी उम्मीद बिलकुल नहीं थी. मैं इसके लिए तैयार भी नहीं था. तुम अचानक से मेरे सामने आये, मैं थोड़ा हिल सा गया. मैं बेचैन हो गया तुम्हें देख कर. जब हम और तुम साथ थे, तब मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि तुम्हें इस तरह मैं किसी फिल्म में या टीवी पर देख सकता हूँ. मैंने हमेशा से तुम्हें खूब अंडरएस्टीमेट किया था. उस समय तुमने कई दफा बातों ही बातों में मुझसे कहा था, देखना..एक दिन दुनिया भर में मेरा नाम होगा. लोग मुझे टीवी पर देखेंगे, फिल्मों में मुझे लोग देखेंगे. मेरे में खूब टैलेंट भरा हुआ है. तब अक्सर मैं इसे तुम्हारा मजाक समझ कर इग्नोर कर दिया करता था.

लेकिन आज तो मैंने तुम्हें फिल्म में देख ही लिया. तुम्हारी बात सही साबित हुई. सच में तुम्हारे में खूब टैलेंट है. इस फिल्म का वो गाने का सीन, जिसमें तुम हो, वो कुछ ऐसा है कि गाने के दौरान हीरो अपनी हीरोइन को मनाने के लिए, उसे लेकर तुम्हारे पास चला आया है, ठीक वैसे ही जैसे मैं कभी अपनी परेशानी लेकर तुम्हारे पास भागे भागे चला आता था. इस सीन में मुझे आश्चर्य इस बात से हुआ कि तुम्हें एक्टिंग सच में आती है, और तुम दिख भी बड़े खूबसूरत रहे थे उस गाने में. पूरे गाने के दौरान, मेरी नज़र ना हीरो पर थी ना हीरोइन पर..सिर्फ तुमपर टिकी थी. तुम्हें देखकर मेरा दिल फिर से तुम पर फ़िदा हो गया, फिर से दिल करने लगा दौड़ कर चला आऊं तुम्हारे पास. न जाने कितनी बातें तुमसे जुडी हुई एक के बाद एक याद आने लगी मुझे.

तुम और मैं बैंगलोर में लगभग एक साथ ही आये थे. मैं 2007 में आया था और तुम मेरे ठीक तीन साल बाद आये थे शहर में. बहुत दिन तक तो तुमने अपने बारे में सब कुछ छुपा कर रखा था. अपना नाम तक नहीं बताया था तुमने. आते जाते हुए रास्ते में जब भी तुम्हें देखता, तुम्हें जानने की, तुमसे मिलने की उत्सुकता और बढ़ने लगती. दोस्त भी मेरे तुम पर फ़िदा था, उन्होंने तो नाम तक गेस करना शुरू कर दिया था तुम्हारा. लेकिन सबकी कोशिश बेकार साबित हुई. मुझे तुमसे प्यार हो गया था और तुम्हें मुझसे.

मुझे अब भी वो शाम याद है जब पहली बार तुमसे मिला था मैं. क्रिसमस के एक दिन पहले की बड़ी खूबसूरत सी शाम थी वो. हमने एक साथ बैठ कर कॉफी पी थी. तुम्हारे बारे में कितना कुछ जाना था मैंने उस शाम. तुमने भी कुछ छुपाया नहीं, जो जो मैंने जानना चाहा, तुम बताते चले गए थे.

मुझे हमेशा से लगता था तुम और मैं एक ही हैं, और हमेशा साथ रहेंगे. हम दोनों एक दूसरे के साथ कितने कम्फ़र्टेबल थे न? न जाने मैंने अपनी कितनी कहानियां तुम्हारे पहलू में बैठ कर लिखी है, अनगिनत किस्से मैंने अपनी ज़िन्दगी के तुम्हें सुनाये हैं. अपने सारे दुःख तकलीफ तुम्हें सुनाये थे मैंने. न जाने कितनी कॉफ़ी हमने साथ पी है, देर रात तुम्हारे पास बैठा तुमसे बातें करता था मैं. शहर में जो तुम्हारी पहली बरसात थी, हम और तुम उस बरसात में साथ भीगे थे. उस शाम न मैं बरसात में घबराया और ना ही तुमने बरसात से बचने के लिए छाता लिया था. हम दोनो खड़े खड़े बहुत देर तक बारिश में भीगते रहे थे.

मुझे अब भी वो शाम हांट करती है, जब तुमसे आखिरी बार मिलकर मैं वापस आ रहा था. शहर में मेरी वो आखिरी शाम थी.अगले दिन की फ्लाइट से मुझे दिल्ली आ जाना था. उदास हम दोनों थे. रात में देर तक तुम्हारे साथ, तुम्हारे पास बैठा रहा था मैं. अगली मुलाकात कब होगी ये ना तुम्हें पता था न मुझे. सोचा था सुबह शहर से जाते वक्त तुम्हें एक नज़र देखता जाऊंगा, लेकिन ऐसा मुमकिन नही हुआ.

सुबह जब टैक्सी पर बैठा था मैं, एक बार टैक्सी ड्राइवर से कहा कि भैया मल्लेश्वरम होते हुए चलना. टैक्सी वाले ने मुझसे कहा कि वो उलटे रूट पर है और मुझे दुगुना किराया लगेगा. मैंने उससे कहा कि आप बस चलो, पैसे की परवाह मत करो. लेकिन जैसे ही गाड़ी सेंकी रोड के ट्रैफिक सिग्नल पर रुकी, मैंने अचानक से ड्राईवर से कहा, यू टर्न ले लो भाई, सीधा एअरपोर्ट चलो. ड्राइवर कुछ पल अनिश्चितता  से मुझे देखता रहा. और फिर उसने गाड़ी एअरपोर्ट के रास्ते पर घुमा दी. मैंने अपनी आँखें मूँद ली. मैं जाते वक़्त तुम्हें देखना नहीं चाहता था. तुम्हें देखने के बाद मैं मेरा शहर से जाना और मुश्किल हो जाता. भारी मन से मैंने फ्लाइट बोर्ड की और उदास मन से शहर से विदा हो गया था मैं.

आज भी तुम्हारी याद बिना किसी वार्निंग के आ गयी थी, जिसके लिए मैं एकदम तैयार नहीं था. फिल्म में तुम्हें देखा, तो अचानक से मन करने लगा तुमसे फिर से एक बार मुलाकात करूँ. जानता हूँ मैं, कि तुम नाराज़ हो मुझसे, रूठे हुए हो. आखिर इन पाँच सालों में मैं तुमसे मिलने एक बार भी नहीं आया, जबकि तुम्हें मैंने आते हुए ये वादा किया था कि हर साल तुमसे मिलने आऊंगा. लेकिन तुम्हारी नाराजगी की मुझे परवाह नहीं है, मैं जानता हूँ मैं तुम्हें मना लूँगा.  देखना हम बहुत जल्द फिर से मिलेंगे. मैं बहुत जल्दी तुमसे मिलने आऊंगा. हम खूब बातें करेंगे उस दिन. देखना उस दिन बारिश होगा और तुम बारिश में भीगते हुए खूबसूरत दिखोगे.

मेरे प्यारे मंत्री मॉल, आई मिस यू अ लॉट!


4 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

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